अज्ञान नींद से जागने का संदेश देती है कोजागर पूर्णिमा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर-प्रकाशनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति 1
अज्ञान नींद से जागने का संदेश देती है कोजागर पूर्णिमा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
शरद पूर्णिमा का आध्यात्म, आयुर्वेद, विज्ञान व संस्कृति में भी महत्व है…

चांद की 16 कलाएं, पवित्रता की दुनिया लाने का देती है संदेश
टिकरापारा सेवाकेन्द्र में बहनों ने मनाया शरद पूर्णिमा का पर्व, खीर बनायी और रास किया
ब्रह्ममुहूर्त में खुले आसमान के नीचे सामूहिक योग साधना की

बिलासपुर टिकरापारा :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विश्व विद्यालय टिकरापारा सेवाकेन्द्र में बहनों ने बड़े उत्साह के साथ शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया। शुक्रवार की रात को खीर बनाकर परमात्मा को भोग लगाया गया। तथा श्रीकृष्ण व षिव के गीतों पर सभी बहनों ने गरबा रास किया। साथ ही आज ब्रह्ममुहूर्त में खुले आसमान के नीचे खीर रखकर योग साधना भी की। सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी ने रात्रि ऑनलाइन क्लास में पर्व का आध्यात्मिक रहस्य बताया।
दीदी ने बताया कि शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा भी कहा जाता है। कहते हैं कि इस रात को मां लक्ष्मी जी भ्रमण के लिए निकलती हैं लेकिन मां लक्ष्मी की कृपा उन्हीं पर होती है जो जागता है। किन्तु वास्तव में कृपा तो उन पर होती है जो अज्ञानता, आलस्य व अलबेलेपन की नींद से जाग गया हो क्योंकि जागरण तो चोर, गलत कर्म करने वाले भी करते हैं।
मिट्टी या चांदी के बर्तन में पकाएं खीर…
खीर पकाने से पहले हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि बर्तन मिट्टी या चांदी का होना चाहिए और खीर को चांद के प्रकाश में रखते समय उसकी स्वच्छता का भी ख्याल करें कि कहीं कीड़े-मकोड़े न लगे या बिल्ली आदि उसे झूठा न कर दे। मिट्टी या चांदी के बर्तन में रखने का आयुर्वेदिक महत्व है क्योंकि ये खीर खाने से श्वांस के रोगियों को लाभ मिलता है और तुतलाकर बोलने वाले बच्चों की वाणी में मिठास व प्रबलता आती है। साथ ही यह पित्त के प्रभाव को भी कम करता है।
इस दिन चंद्रमा अपने चरम सौन्दर्य में रहता है। इसलिए सुंदरता के लिए चांद की उपमा दी जाती है। चांद शीतलता का प्रतीक है। चांद की 16 कलाएं आत्मा की पवित्रता की बात है जब तक हम पवित्रता को प्राप्त नहीं करते तब तक हम अमृत तत्व को प्राप्त नहीं कर सकते और नई दुनिया का स्वागत भी नहीं कर सकते। चंद्रमा मन का स्वामी भी होता है यह हमें संसार में न अटकाए इसलिए सभी ईश्वर स्तुति, भजन आदि कर रात्रि जागरण करते हैं। सफेद वस्त्र पहनना पवित्रता, शीतलता व वैराग्य का प्रतीक है। भगवान शिव या श्रीकृष्ण को गुलाब का फूल भी अर्पित करते हैं क्योंकि गुलाब में रंग, रूप और खुशबू होती है जो हमें ज्ञान का रंग, योग की खुशबू और धारणाओं का रूप अपनाने को प्रेरित करती है।
प्रेस-विज्ञप्ति 2
‘बढ़ते कदम स्वास्थ्य की ओर’ निःषुल्क ऑनलाइन स्वास्थ्य षिविर का आयोजन 01 नवम्बर से

आसन-प्राणायाम के साथ ध्यान व सकारात्मक चिंतन की भी होगी क्लास
छ.ग.योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्र.कु. मंजू दीदी जी एवं अन्य अनुभवी प्रषिक्षक सिखायेंगे योग

बिलासपुर टिकरापारा :- कोरोना काल में लोगों के शारीरिक व मानसिक सषक्तिकरण तथा रोगप्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि करने के उद्देष्य से ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा द्वारा विभिन्न ऑनलाइन कार्यक्रम प्रसारित किये जा रहे हैं जो कि पूर्णतः निःषुल्क हैं। प्रतिदिन यूट्यूब व फ्रीकान्फ्रेन्सकॉल एप के माध्यम से प्रसारित कार्यक्रमों में दिनचर्या की शुरूआत प्रातःकालीन ब्रह्ममुहूर्त में मेडिटेषन अनुभूति सत्र, प्रातः 7 से 8 बजे सत्संग, शाम 6.30 से 7.30 योग-साधना व शाम 7.30 बजे सकारात्मक चिंतन की क्लास प्रसारित हो रही हैं। इसी क्रम में आज एक नवम्बर छ.ग. स्थापना दिवस के दिन से प्रतिदिन प्रातः पौने छः से पौने सात बजे आसन-प्राणायाम व ध्यान का सत्र ‘बढ़ते कदम स्वास्थ्य की ओर’ शिविर का शुभारम्भ होने जा रहा है। जिसकी लिंक ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा के यूट्यूब चैनल पर जाकर कोई भी प्राप्त कर सकता है।
दीदी ने तीन अंतर्राष्ट्रीय योग गुरूओं स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी, स्वामी रामदेव बाबा और महर्षि महेश योगी जी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है जिनसे सीखी हुई योग की बारीकियों और अपने जीवन के अनुभवों को वे शिविर के दौरान साझा करेंगी। नए साधकों के अनुसार योग के सभी पदों को विधिवत् क्रमबद्ध तरीके से बताया जायेगा। मास्टर योग प्रशिक्षकों के द्वारा यौगिक जॉगिंग एवं अन्य कठिन आसन सीखाये जायेंगे।
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

लिंक : शरद पुर्णिमा का आध्यात्मिक रहस्य
01 नवम्बर प्रातः 5.45 योग शिविर की आगामी लिंक