अनुशासन, दूरदर्शिता व नवीनतम सेवाओं के प्रणेता थे भाईजी – ब्र.कु. मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
अनुशासन, दूरदर्शिता व नवीनतम सेवाओं के प्रणेता थे भाईजी – ब्र.कु. मंजू दीदी
बहुमुखी प्रतिभा के धनी भाईजी के जीवन में बौद्धिकता व आध्यात्मिकता का संगम रहा…
ब्रह्माकुमारीज़ के छ.ग. के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाई जी की 5वीं पुण्यतिथि मनाई गई…
भाईजी ने छ.ग. सहित चार राज्यों में 600 सेवाकेन्द्रों की स्थापना कर लाखों लोगों का नैतिक व चारित्रिक उत्थान किया….

बिलासपुर टिकरापारा :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के इंदौर जोन के संस्थापक व निदेशक राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाईजी की 5वीं पुण्यतिथि मनाई गई। सभी उन्हें प्यार से ‘भाईजी’ कहकर पुकारा करते थे। संस्था के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा ने 1969 में पत्र के माध्यम से भाईजी को इंदौर में सेवा शुरू करने की आज्ञा दी। पत्र प्राप्त होते ही भाई जी पंजाब से इंदौर आ गए और पूरे छ.ग. में व म.प्र., राजस्थान व उड़ीसा के अनेक स्थानों पर सेवाएं की। आपका पूरा जीवन आध्यात्म एवं समाजसेवा के लिए समर्पित था। अपने जीवनकाल में उन्होंने मानवता को देवत्व की ओर ले जाने की सेवा करते हुए 600 सेवाकेन्द्रों, उपसेवाकेन्द्रों व रिट्रीट सेन्टर्स की स्थापना की। जहां पर निरंतर आध्यात्म की ज्योत जल रही है। लोग यहां आकर शांति अनुभूति करते हैं और अपने को गुणवान बनाने की शिक्षा प्राप्त करते हैं।
व्यर्थमुक्त रखने हमें सदा व्यस्त रखते थे भाईजी…
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने बताया कि भाईजी ने न केवल सेवास्थानों की स्थापना की बल्कि अनेक बहनों व भाईयों को नेतृत्व करने की कला सिखाई, मानव कल्याण की सेवा के लिए प्रशिक्षित भी किया। वे समय प्रति समय सेवाकेन्द्र का संचालन करने वाली ब्रह्माकुमारी बहनों व भाई-बहनों के लिए स्वउन्नति व योग-साधना के कार्यक्रम आयोजित करते थे ताकि सभी सकारात्मकता में व्यस्त रहें, व्यर्थ के लिए मार्जिन ही न मिले।
मीडियाकर्मियों से विशेष स्नेह था भाईजी को…
दीदी ने बतलाया कि भाईजी संस्था के मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष होने के कारण मीडिया से जुड़े लोगों से विशेष स्नेह था। पत्रकार भाई-बहनों को तनाव से मुक्त रखने, मूल्यानुगत बनाने व उनके नैतिक उत्थान के सतत प्रयासरत रहते व उनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कार्यक्रम व शिविर का कराया जिसमें देश-विदेश के विभिन्न मीडिया से जुड़े लोग शामिल होते।
अनुशासन उनके जीवन का अभिन्न अंग था…
संस्था के नियम व मर्यादाओं में स्वयं भी चलना व सबको उन्हीं अनुशासन में रखना भाईजी को पसंद था। नियमों के विपरीत जाना उन्हें स्वीकार नहीं था। ईश्वरीय ज्ञान को सामाजिक अर्थां में व्यक्त करना व उस ज्ञान के प्रति निष्ठा आपकी अलग पहचान थी। आप छोटी-छोटी बातें भी भाई-बहनों को सिखाते थे। उन्होंने पूरी एक पीढ़ी को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जो आज पूरे जोन के सेवाकेन्द्रों का कुशलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। वे त्याग, तपस्या के मूरत व सेवा में नवीनता के प्रणेता रहे।
विशेषताओं को पहचानने वाले सच्चे जौहरी थे…
भाईजी सभी की विशेषताओं को पहचान कर उन्हें ईश्वरीय कार्य में लगाने का अवसर प्रदान करते थे। जिससे वे उस विशेषता में पारंगत हो जाते थे। इस तरह वे एक सच्चे जौहरी थे। दीदी ने बतलाया कि भाईजी की प्रेरणात्मक शिक्षाओं व उनके साथ की अनुभवगाथा पर आधारित 13 दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम प्रेमांजलि का कल अंतिम भाग ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा के यूट्यूब चैनल पर शाम 7.30 बजे देखा जा सकता है।
इस अवसर पर परमपिता परमात्मा शिव व भाईजी के निमित्त भोग लगाया गया। सभी साधकों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनकी शिक्षाओं व प्रेरणाओं को धारण करने का संकल्प लेते हुए भोग स्वीकार किया।