गुरू में होती है कमजोरी को विषेषता में बदल देने की ताकत – ब्र.कु शषि

प्रेस-विज्ञप्ति
गुरू में होती है कमजोरी को विषेषता में बदल देने की ताकत – ब्र.कु शषि
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में मना गुरूपूर्णिमा का पर्व

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‘‘जीवन में हमारे बहुत से गुरू आते हैं। जब हम नौ माह मां के गर्भ में रहने के बाद इस धरा पर जन्म लेते हैं तब हमें तो कुछ पता ही नहीं होता, लेकिन जब हम पढ़ाई लिखाई करके बहुत आगे बढ़ जाते हैं तो हम सोचते हैं कि हम बहुत इंटेलीजेन्ट हैं, समझदार हैं, हमें बहुत कुछ आता है जबकि हमारी मां हमें बचपन से ही छोटी से छोटी ट्रेनिंग देती ही रहती हैं, हमें पता भी नहीं चलता और हम खेल-खेल में उनकी गोद में ही कई बातें सीखकर आगे बढ़ जाते हैं तो मां ही हमारी प्रथम गुरू हैं जिनका कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता। इसी प्रकार जब हम आगे बढ़ते जाते हैं तब दूसरे गुरू के रूप में हमारे षिक्षक होते हैं जो हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में हमारा मार्गदर्षन करते हैं फिर हमारे गुरू हमें परमसद्गुरू परमात्मा तक पहुंचाते हैं और जब हम परमात्मा को पहचान जाते हैं तब वे हमारी कमजोरियों, बुराईयों, विकारों को दूर करने के लिए हमें ज्ञान रूपी प्रकाष देते हैं और जब हम उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हैं और उनकी याद में रहते हैं तब हमारी कमजोरियां समाप्त होती हैं व गुणों से श्रृंगार होने लगता है और हमें जीवन में सद्गति की प्राप्ति होती है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा में गुरूपूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए ब्र.कु शशिप्रभा बहन ने कही। आपने कहानी के माध्यम से बताया कि सच्चा गुरू हमारी सबसे बड़ी कमजोरी को सबसे बड़ी विषेषता में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रकार रूपांतरण की शक्ति गुरू में होती है। और गुरू किसी भी तुच्छ को कितना महान बना सकते हैं इसलिए संसार में जिनसे भी षिक्षा मिले, उनके सानिध्य को, उनके उपकार को, उनके प्यार को कभी भी जीवन में नहीं भूलना है क्योंकि उनकी तुलना भी किसी से की नहीं जा सकती और उनका उपकार भी चुकाया नहीं जा सकता। वो गुरू कोई भी हो सकते हैं, उम्र में छोटे भी हो सकते हैं जिनसे भी हमें षिक्षा मिलती है वो हमारे गुरू होते हैं। बिना गुरू से ज्ञान लिए बिना, उनके सानिध्य बिना, उनके आदेष के बिना कोई साधक अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता।
इस अवसर पर ब्र.कु. हेमवती बहन, ब्र.कु. पूर्णिमा बहन, ब्र.कु. ईष्वरी बहन, ब्र.कु. गौरी बहन सहित अन्य साधक उपस्थित थे। सभी ने परमसद्गुरू परमात्मा को याद किया एवं उन्हें गुरू पूर्णिमा का भोग स्वीकार कराया।

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