तम्बाकू या किसी भी बुराई को समाप्त करने का सशक्त माध्यम है योग व आध्यात्म – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
तम्बाकू या किसी भी बुराई को समाप्त करने का सशक्त माध्यम है योग व आध्यात्म – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
नशा छोड़ने के लिए राजयोग, दृढ़ इच्छाशक्ति व 72 घण्टे का संयम प्रभावकारी विधि…
अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस पर विषेष क्लास

बिलासपुर टिकरापाराः- कोई भी नशा हमारे शरीर को नुकसान तो पहुंचाता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति में गिरावट लाता है, समाज में हमारी छवि खराब करता है, हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है व नैतिक पहलुओं को कमजोर करता है। सिवाय नशे के तम्बाकू सेवन का कोई उद्देश्य नहीं होता। यदि इस नशे की दिशा को हम सकारात्मक कर दें अर्थात् स्वचिंतन, सकारात्मक चिंतन, आसन-प्राणायाम, मेडिटेशन, परोपकार, स्व-उपकार का नशा यदि हम अपनी आदत में ले आएं तो हमें फायदा ही फायदा होगा और उस नशे की ओर न ही ध्यान जाएगा और न ही नुकसान होगा। ब्रह्माकुमारीज़ के मेडिकल विंग द्वारा समय प्रति समय नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं और अनेक युवा, वृद्ध, बच्चे व महिलाओं को राजयोग के अभ्यास से आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हुए नशामुक्त बनाया जाता है।
उक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर ऑनलाइन संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
नशा छोड़ने के लिए केवल 72 घण्टे का धैर्य जरूरी…
आपने बतलाया कि किसी भी नशे को छोड़ने में 72 घण्टे तक उस नशे के प्रति खिंचाव महसूस होता है लेकिन ईश्वरीय शक्ति, धैर्य व दृढ़ इच्छाशक्ति से हम नशे पर जीत प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि जहां चाह होती है वहां राह निकल ही जाता है। नशा छोड़ने के लिए नशे से होने वाले नुकसान व साथ ही नशा छोड़ने से मिलने वाले लाभ की जानकारी भी मदद करती है।
धुम्रपान हमारे नजदीकियों को भी पहुंचाता है नुकसान…
तम्बाकू सेवन या धूम्रपान के सेवन से शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होते हैं। जिसमें गले की खांसी, आंखों का ग्लूकोमा, कानों का बहरापन, फेफड़ों का रोग या विभिन्न प्रकार के कैन्सर जैसे रोग शामिल हैं।
दीदी ने बतलाया कि स्वयं परमात्मा द्वारा सिखाया गया राजयोग भारत का प्राचीन योग है, जिसमें श्रेष्ठ विचारों के आधार पर ध्यान का अभ्यास किया जाता है। ये विचार ही मनोबल बढ़ाने के लिए हैल्दी डाइट की तरह है क्योंकि ज्ञान में शक्ति होती है, ज्ञान ही रोशनी है, ज्ञान संजीवनी बूटी है और ज्ञान ही शस्त्र है। अच्छे विचार, ज्ञान श्रवण से ही मिलते हैं। वहीं ध्यान-योग का अभ्यास मन व बुद्धि की एक्सरसाइज की तरह है।