ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘‘जीवन का आधार – गीता सार’’ श्रृंखला प्रारंभ

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
गीता ज्ञान का मुख्य उद्देश्य दैवीय गुणों व संस्कारों की पुनर्स्थापना
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘‘जीवन का आधार – गीता सार’’ श्रृंखला प्रारंभ 

बिलासपुर, टिकरापाराः- श्रीमद्भगवद् गीता सर्वशास्त्रमयी शिरोमणि है क्योंकि केवल एक यही शास्त्र है जिसमें भगवानुवाच लिखा है या यह भी कह सकते हैं कि गीता स्वयं भगवान के द्वारा गाया हुआ गीत है जो सारे संसार की आत्माओं के प्रति है क्योंकि वर्तमान समय अनिश्चितता का है और चुनौतियों से भरा है। आज व्यक्ति को हर समय किसी न किसी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों को पार करने के लिए कोई न कोई विधि ढ़ूंढ़ने की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य को लेकर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में सोमवार से ‘‘जीवन का आधार – गीता सार’’ श्रृंखला का आयोजन किया गया है। सेवाकेन्द्र प्रभारी मंजू दीदी जी एवं अन्य बहनों ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस श्रृंखला का विधिवत शुभारम्भ किया। दीदी ने कहा कि हमारा जीवन कैसा होना चाहिए, यह कला हमें श्रीमद्भगवद्गीता सिखाती है। अनेक उलझनों से भरे मनुष्य के मन को सही रास्ता मिल जाता है। यह गीताज्ञान मन को शक्ति देने वाला शक्तिशाली टाॅनिक है, जिससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ जाता है। गीता ज्ञान में सभी वेदों एवं उपनिषदों का सार समाया हुआ है। इसकी विषेषता है कि यह पवित्र धर्मशास्त्र किसी सम्प्रदाय विशेष के लिए न होकर सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए है। यही कारण है कि सारे संसार के लोगों ने गीता को समझने की कोशिश की है। जितनी भाषाओं में गीता का अनुवाद हुआ है उतना किसी भी पुस्तक का नहीं हुआ है।
दीदी ने बताया कि गीता ज्ञान की इस श्रृंखला के माध्यम से स्वयं की उलझन, परेशानियां सुलझेंगी, आध्यात्मिक उन्नति होगी जिससे हम दूसरों को प्रेरित भी कर सकते हैं व उनकी समस्याओं का समाधान भी कर सकेंगे।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)