ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में मनाया गया भारतीय नववर्ष

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
स्वर्णिम भारत की याद दिलाता है यह पर्व – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी है गुड़ी पाड़वा की चटनी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में मनाया गया भारतीय नववर्ष
गुड़ी सजाई गई और सभी को कड़वे नीम की चटनी व मेवे का भोग दिया गया…
अनेक साधकों ने ऑनलाइन लाभ लिया।

बिलासपुर टिकरापारा :- हमारी प्राचीन संस्कृति अति प्राचीन एवं महान है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा सृष्टि की रचना का दिवस, स्वर्ण काल अर्थात् काल गणना का प्रारंभ है। वर्तमान संगमयुग में स्वयं परमपिता परमात्मा शिव सृष्टि परिवर्तन का मंगलमय कार्य कर रहे हैं। यह दिन हिन्दूओं का नहीं अपितु आदि सनातन देवी-देवता धर्म का नया वर्ष है। चूंकि मनुष्यों के अंदर देवत्व के गुण धीरे-धीरे कम होते गए इसलिए अपने को देवी-देवता धर्म की बजाय हम हिन्दू धर्म कहने लग गए।
उक्त बातें भारतीय नववर्ष – गुड़ी पाड़वा पर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बतलाया कि आज का दिन सनातन धर्म की अनेक कहानियों से जुड़ा है। ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि निर्माण का दिन, धर्मराज युधिष्ठिर व श्रीराम के राज्याभिषेक का दिन, नवरात्र की शुरूआत, राजा विक्रमादित्य का सिंहासन आरोहण व विक्रम संवत् का प्रारंभ, श्री झूलेलाल का जन्मदिवस आदि।
कड़वे नीम-इमली इत्यादि की चटनी बढ़ाती है रोग-प्रतिरोधक क्षमता
दीदी ने बतलाया कि इस दिन कड़वे नीम के पत्ते, इमली, आम, गुड़, हिंग, काला नमक इत्यादि के मिश्रण से बनी हुई चटनी खाते हैं। यह हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करती है। कड़वा नीम कलियुग अंत की परिस्थितियों का, आम खट्टे संस्कारों का संदेश देता है जबकि गुड़ हमें अपने मीठे संस्कारों से सभी परिस्थितियों को जीतने का संदेश देता है। अंत में सभी को तिलक लगाकर मेवे व विभिन्न चीजों से बनी चटनी का भोग दिया गया। इस कार्यक्रम का अनेक साधकों ने ऑनलाइन लाभ लिया।