ब्रह्माकुमारी पाठशाला, मस्तूरी में किया गया परमात्मा शिव का ध्वजारोहण सत्संग की नियमितता पर दिया गया जोर

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
कलियुगी अज्ञान की रात्रि मिटाने ज्ञान का प्रकाश जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारी पाठशाला, मस्तूरी में किया गया परमात्मा शिव का ध्वजारोहण
सत्संग की नियमितता पर दिया गया जोर
मस्तूरी, लटियापार :- कलियुग दुख-अशांति रूपी अंधकार अर्थात् रात्रि का प्रतीक है। इसे मिटाने अर्थात् दुख दूर कर सुख-शांति स्थापित करने के लिए ज्ञान का प्रकाश अत्यंत आवश्यक है। इसी रात्रि को समाप्त कर सतयुगी स्वर्ग की स्थापना करने के लिए परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होते हैं और ज्ञान व राजयोग सीखाकर हमें पावन बनाते हैं। ज्ञान मिलता है सत्संग से। इसलिए प्रतिदिन सुबह, दोपहर या शाम किसी भी एक समय सत्संग करना जरूरी है। ईश्वर के प्रति लगन हो तो बारिश, सर्दी, गर्मी हमें रोक नहीं सकती। ये जरूरी नहीं है कि मौसम या परिस्थितियां सदैव हमारे अनुकूल हो। ये तो हमारा ही आलस्य या अलबेलापन होता है। इसी अज्ञान निद्रा से हमें जागना होगा। सत्संग से मिला ज्ञान हमें शक्ति प्रदान करता है। दिनभर के कार्य-व्यवहार में हमारा मार्गदर्शन करता है।
उक्त बातें लटियापार, मस्तूरी स्थित ब्रह्माकुमारी पाठशाला में आयोजित शिव-ध्वजारोहण कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामवासियों को सत्संग के लिए प्रेरणा देते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आपने आगे कहा कि गांव-गांव में पाठशाला खोलने का उद्देश्य ही यही है कि इसका लाभ सभी को मिले और सेवाएं भी निःशुल्क दी जाती है। सुबह 6 से 7, 9 से 11 व शाम 5 से 7 बजे के मध्य मस्तूरी के भाई-बहनें पाठशाला में आकर मेडिटेशन व सत्संग का लाभ ले सकते हैं। कभी-भी बारिश आदि के प्रति नाराजगी व्यक्त न करें, ये तो हमारे सहयोगी हैं, जल के बिना जीवन संभव नहीं है। प्रकृति के सभी पांच तत्वों को भी अपनी शुभकामनाओं के अच्छे प्रकम्पन्न दें ताकि सभी का सहयोग मिलता रहे।
कार्यक्रम के अंत में परमात्मा  शिव का ध्वजारोहरण किया गया एवं अंत में सभी को भोग वितरित किया गया। गांव के बच्चों ने सभी के समक्ष नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर ब्र.कु. शशी, गायत्री, पूर्णिमा बहन एवं गांव के भाई-बहनें उपस्थित थे।प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)