ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया विश्व शांति के लिए नुमाशाम योग

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
कार्यकुशलता व निर्णय शक्ति बढ़ाता है राजयोग – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया विश्व शांति के लिए नुमाशाम योग

बिलासपुर, टिकरापाराः- राजयोग को योगों का राजा कहा जाता है। इसमें सभी योगों का सार समाया हुआ है। यह योग हमारे मन से दूषित विचारों को दूर कर पावन बना देता है। वास्तव में राजयोग अंतर्जगत की एक यात्रा है। इसके माध्यम से हम अपने विचारों को एक सकारात्मक चिंतन की ओर ले जाते हैं और श्रेष्ठ दिशा देते हैं। जब हमारे विचार शुद्ध, पवित्र, दूसरों के लिए सुखदायी, शुभभावना-शुभकामना संपन्न होते हैं तो हमारी बुद्धि भी उसी अनुसार निर्णय देती है। बुद्धि द्वारा दिए गए निर्णय के आधार पर ही हमारी कर्मेन्द्रियां शरीर से कर्म करती हैं। राजयोग के माध्यम से हमें खुद की कमी-कमजोरियों को पहचानने व उन्हें दूर करने का मौका मिलता है। जब हम एकांत में बैठकर चिंतन करते हैं तो जीवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान मिलने लगता है। चिंतन श्रेष्ठ होने से मन की कार्यकुषलता बढ़ जाती है और कर्मों में प्रवीणता आने लगती है। जिससे तनाव, चिंता, दुख, हीनभावना, पश्चाताप और आत्मग्लानि कोसों दूर चली जाती है। राजयोग का अभ्यास किसी भी समय, किसी भी स्थान पर किया जा सकता है इसके लिए न उम्र का बंधन है और न जाति-पाति का। यह तो आत्म-दर्शन कराने वाला और राजायी पद दिलाने वाला सर्वश्रेष्ठ योग है।
ये बातें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित नुमाषाम योगसत्र में सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा कई वर्षों से हर माह के तीसरे रविवार को पूरे विश्व के 140 देशों में एक साथ और एक ही समय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता रहा है। इस दिन शाम 6.30 बजे सारे विष्व में सभी ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारियां मिलकर राजयोग मेडिटेशन के द्वारा सारे विश्व में पवित्रता और शान्ति के प्रकम्पन्न फैलाते हैं। रविवार शाम के सत्र में भी सभी बहनों ने व सभी साधकों ने अपने घर पर विश्व शान्ति के लिए राजयोग ध्यान का अभ्यास किया।

पांच दिवसीय योग-आसन-प्राणायाम ऑनलाइन वेबिनार का आज समापन हुआ।

18 जून से आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन योग शिविर का आज समापन हुआ। आज के सत्र में मंजू दीदी ने हाथ-पैर व गले के सूक्ष्म आसनों का भी अभ्यास कराया और कहा कि ये सूक्ष्म आसन शरीर के लचीलेपन को बनाए रखता है और कमर, पीठ, गर्दन, हाथ, पैर व घुटनों आदि के शुरूआती दर्द से तो मुक्ति दिला ही देता है। सही लाभ प्राप्त करने के लिए कपालभाति प्राणायाम को लगातार कम से कम 5 मिनट करना जरूरी है। यदि हम एक-एक, दो-दो मिनट में रूक-रूक कर अभ्यास करेंगे तो हमें लाभ नहीं मिलेगा। शुरूआती दौर में नए साधक भले ही एक-दो मिनट से आगे बढ़ें किन्तु लगातार 5 मिनट तक अवश्य पहुंचाएं।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..