मानसिक विकलांगता दूर करने के लिये राजयोग की भूमिका अहम- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

मानसिक विकलांगता दूर करने के लिये राजयोग की भूमिका अहम- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ तालापारा एवं अखिल भारतीय विकलंाग परिषद का संयुक्त आयोजन

‘‘इस संसार में चार प्रकार की अपंगता दिखाई दे रही है तन, मन, धन और संबंध की। तन की अपंगता को दूर करने में चिकित्सा जगत ने काफी हद तक सफलता पायी है लेकिन जीवन में संपन्नता तो तभी है जब तन के साथ-साथ मन, धन और संबंध की विकलांगता हमारे जीवन से दूर हों। इसके लियें आध्यात्मिकता ही एकमात्र उपाय है और इसमें भी मन का आध्यात्मिक सशक्तिकरण मुख्य रूप से आवश्यक है जिससे अन्य पहलू स्वतः ही ठीक किये जा सकते हैं।
उपरोक्त बातें ब्रह्माकुमारीज के शाखा तालापारा सेवाकेन्द्र के सभागृह में आयोजित अखिल भारतीय विकलांग परिषद के संगोष्ठी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कही। आपने संबंधों को सबल और सरल बनाने के लिये सहनशीलता का गुण धारण करने एवं बोल में मधुरता लाने पर जोर दिया और बताया कि इसके लिये राजयोग मेडिटेशन का नियमित अभ्यास महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
उन्हांेेने जानकारी दी कि संस्था द्वारा विगत कई वर्षाे से लोगों में सकारात्मक परिवर्तन का कार्य किया जा रहा है।
इसके पूर्व कार्यक्रम के शुरूआत में बहन विनीता भावनानी ने मंजू दीदी का जीवन परिचय दिया। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी राखी बहन ने प्रशंसा व्यक्त की तथा तालापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी रमा दीदी ने उपस्थित लोंगों को राजयोग का अनुभव कराया। प्रदीप मेडिकल एजेंसी संस्थान के प्रमुख भ्राता राजेन्द्र के. अग्रवाल ने सभी को सभी की ओर से धन्यवाद प्रेषित किया। अंत में सभी को राजयोगी भाई बहनोें द्वारा परमात्म याद में बनाया गया प्रसाद वितरित किया गया।‘‘इस संसार में चार प्रकार की अपंगता दिखाई दे रही है तन, मन, धन और संबंध की। तन की अपंगता को दूर करने में चिकित्सा जगत ने काफी हद तक सफलता पायी है लेकिन जीवन में संपन्नता तो तभी है जब तन के साथ-साथ मन, धन और संबंध की विकलांगता हमारे जीवन से दूर हों। इसके लियें आध्यात्मिकता ही एकमात्र उपाय है और इसमें भी मन का आध्यात्मिक सशक्तिकरण मुख्य रूप से आवश्यक है जिससे अन्य पहलू स्वतः ही ठीक किये जा सकते हैं।
उपरोक्त बातें ब्रह्माकुमारीज के शाखा तालापारा सेवाकेन्द्र के सभागृह में आयोजित अखिल भारतीय विकलांग परिषद के संगोष्ठी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कही। आपने संबंधों को सबल और सरल बनाने के लिये सहनशीलता का गुण धारण करने एवं बोल में मधुरता लाने पर जोर दिया और बताया कि इसके लिये राजयोग मेडिटेशन का नियमित अभ्यास महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
उन्हांेेने जानकारी दी कि संस्था द्वारा विगत कई वर्षाे से लोगों में सकारात्मक परिवर्तन का कार्य किया जा रहा है।
इसके पूर्व कार्यक्रम के शुरूआत में बहन विनीता भावनानी ने मंजू दीदी का जीवन परिचय दिया एवम् अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के संदर्भ में माननीय डा ़ डी ़ पी ़ अग्रवाल जी ने उपस्थित सभागण को संबोधित किया व आगामी कार्यक्रम की जानकारी भी दी। सभा में मुख्य रुप से अनुराधा बुधिया , शारदा बुधिया व अन्य सदस्य उस्थित थे।
कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी राखी बहन ने प्रशंसा व्यक्त की तथा तालापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी रमा दीदी ने उपस्थित लोंगों को राजयोग का अनुभव कराया। प्रदीप मेडिकल एजेंसी संस्थान के प्रमुख भ्राता राजेन्द्र के. अग्रवाल ने सभी को सभी की ओर से धन्यवाद प्रेषित किया। अंत में सभी को राजयोगी भाई बहनोें द्वारा परमात्म याद में बनाया गया प्रसाद वितरित किया गया।

 

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देवो के देव है महादेव – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

देवो के देव है महादेव – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवा केन्द्र में बताया गया श्रावण सोमवार का आध्यात्मिक रहस्य

हिन्दू धर्म का पवित्र मास माना जाने वाला श्रावण का महीना इस सोमवार से शुरू हुआ, सावन में पड़ने वाले सोमवार का खास महत्व होता है सावन के महिने में भगवान शिव अपने भक्तोे की मनोकामना पूरी करते है सावन का महिना सर्वोतम योग लेकर आया है।
उक्त कथन टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने टिकरापारा ब्रह्माकुमारीज सेवाकेन्द्र मे स्थापित शिव जी मंदिर मंे आयोजीत श्रावण सोमवार के कार्यक्रम में कही, कि शिव बाबा के साथ ज्योर्तिलिंग की भी पूजा होती है, शालीग्राम के रूप में वास्तव में शालीग्राम आत्माए अपने जीवन के अंदर श्रेष्ठ दैवी गुणो को धारण करने वाली क्षेष्ठ आत्माए हैं शिव बाबा के साथ-साथ नंदी की भी पूजा होती है, शिव बाबा का रथ है नंदी कलयुग के घोर अंधकार में परमात्मा का अवतरण होता है, एक साधरण मानव तन में । भगवान कितना मीठा है, भोला नाथ भी है आज मंदिरो में आकर के अक का, धतूरे का फूल चढाते है अक या धतूरा माना की बुराई काम, क्रोध,लोभ,मोह और अहंकार ये पांच बुराईयों का समर्पण हमको भोले नाथ के आगे कर देना है।

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संस्कार परिवर्तन के लिये स्वयं पर दया जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

संस्कार परिवर्तन के लिये स्वयं पर दया जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में योग-साधना कार्यक्रम का आयोजन

‘‘सभी धर्मों की मान्यतायें भिन्न-भिन्न हो सकती हैं किन्तु सभी धर्मों की एक बात समान है वो है दया। दूसरों पर दया और कृपा की भावना रखना तो अच्छी बात है ही किन्तु स्वयं पर दया करना उससे भी बड़ी और अच्छी बात है। स्वयं पर दया करने का अर्थ भी समझना होगा। दया का अर्थ ये नहीं कि आज कार्य करने का मन नहीं है तो सो जायें या किसी कार्य को पोस्टपोन कर दें। वास्तविक दया तो वह है जिसमें किसी भी कार्य की नियमितता भी हो और उसमें दृढ़ता भी हो। अच्छे कार्य के लिये बुरे कार्यों को समर्पित कर देना, और आलस्य व अलबेलेपन का त्याग कर देना, वास्तव में यही अपने पर सच्ची-सच्ची दया करना है।’’
उक्त बातें टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने रविवार को सेवाकेन्द्र में आयोजित सामूहिक योग साधना कार्यक्रम के दौरान कहीं। आपने परमात्म महावाक्य सुनाते हुए कहा कि चाहे सामने वाला व्यक्ति कैसा भी संस्कार वाला हो, कितना भी विरोधी हो यदि हम उन पर रहम, दया व कृपा की भावना रखेंगे तो वह गले मिल जायेगा। हम सभी आत्माएं वास्तव में आदि सनातन देवी देवता धर्म की आत्मायें हैं यह स्मृति में रखने से देवतायी संस्कार आने लगेंगे, किसी से लेने की भावना नहीं रखें।
अंत में सभी साधकों ने इस जन्म में बचपन से आज तक जो भी पाप हुए हैं उन्हें सार रूप में लिखा और उसे परमात्मा को समर्पित कर वो कर्म दोबारा न करने का संकल्प लिया।

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संस्कारों की क्रांति से बनेगा भारत जगत्गुरू – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

संस्कारों की क्रांति से बनेगा भारत जगत्गुरू – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
छ.ग. स्कूल में आजाद और तिलक की जयंती पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन

‘‘भारत महान भूमि है। यह देशभक्त आत्माओं की जन्मभूमि है। जहां बाल गंगाधर तिलक एवं चंद्रशेखर आजाद जैसे अनेक महान हस्तियों ने जन्म लिया। इनकी प्रेरणादायी जीवन गाथा हम सबके सामने एक उदाहरण के रूप में मौजूद है। जिनसे हमें अन्याय के खिलाफ लड़कर स्वराज्य प्राप्त करने एवं देश की रक्षा के लिये जान भी न्योछावर कर देने की प्रेरणा मिलती है। आज जब हमारे सामने उनके समान परिस्थिति तो नहीं है किन्तु यदि हम अपने संस्कारों को श्रेष्ठ बनाकर एक ऐसी संस्कारों की क्रांति लायेंगे जो भारत पुनः जगत्गुरू बन जाये तब उनकी जयंती मनाना सार्थक होगा।’’
उक्त बातें टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने छ.ग. स्कूल में मनाये जा रहे क्रांतिकारी देशभक्त बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर बच्चों को संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर छ.ग. स्कूल के प्राचार्य सुशील कुमार तिवारी, प्रभारी सविता प्रथमेश मिश्रा, शिक्षकगण एवं स्कूली छात्र उपस्थित थे।

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परम सतगुरू का सम्मान ही सबसे बड़ा सम्मान- ब्र.कु. मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में मनाया गया गुरू पूर्णिमा का पर्व

‘‘आज कितना भी बड़े से बड़ा प्राइम मिनीस्टर हो, राष्ट्रपति हो गुरू के आगे नमन करंेगे तो वह नमन व्यक्ति को नही कर रहे हैं वे पोस्ट पोजिषन में बड़े हैं लेकिन गुरूओं की पवित्रता को नमन हो रहा हैं। आत्माओं की पवित्रता तो सतयुग से चली आ रही है। देव आत्माओं की पवित्रता सबसे बड़ी पवित्रता है और जब देवताएं वाम मार्ग में गिरे तो सन्यासियो की पवित्रता सबसे बड़ी पवित्रता हो गयी। हम आत्माओ के अंदर द्वापर युग से ही गुरूओं के प्रति सम्मान चला आ रहा है। दुनिया में श्ी गुरूओं का बहुत सम्मान है इसलिए कहते हैं ’’गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः। गुरूःसाक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरूवे नमः।।
उक्त कथन गुरूपूर्णिमा के पावन पर्व पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा की प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने रविवार के दिन सेवाकेन्द्र पर कहे। परमसत्गुरू परमपिता परमात्मा जो पिताओं के पिता, शिक्षकों के शिक्षक और गुरूआंे के गुरू हैं वे इस धरा पर अवतरित होकर ज्ञान और योग से आत्माओं का श्रृंगार कर रहे हैं। आपने अपने जीवन में गुरूओं के सानिध्य के अनुभव सबके समक्ष बांटते हुए कहा कि मां तो प्रथम गुरू हैं ही जिनके माध्यम से स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी मिले जिनसे अनेक यौगिक क्रियाओं व आसनों की शिक्षा मिली, महर्षि महेश योगी जी से भावातीत ध्यान सीखा एवं पूरे छ.ग. में ध्यान का डंका बजाने का वरदान प्राप्त हुआ, फिर योगऋषि स्वामी रामदेव जी से प्राणायाम की शिक्षा ग्रहण की एवं ब्रह्माकुमारीज़ में परमसत्गुरू स्वयं परमपिता परमात्मा मिले जिनसे रोज सवेरे वरदानों की प्राप्ति होती है। आपने विशेष बात कही कि यह निश्चय रखें कि सद्गुरू परमात्मा तो एक ही हैं लेकिन खुले विचार रखकर जिनसे भी अच्छी बातें सीखने को मिले, सीख लेना चाहिये।
टिकरापारा सेवाकेन्दª में पिछले 15 वर्षो से गुरू पूर्णिमा का उत्सव मनाया जा रहा है। इसके पीछे रहस्य यह है कि सतगुरू परमात्मा का दिव्य-संदेश जन-जन तक पहुंचा सकें। साथ ही दीदीजी ने प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में बताते हुए कहा कि खान-पान, रहन-सहन, दिनचर्या एवं रात्रिचर्या को प्रकृति के अनुकूल करने मात्र से ही शारीरिक स्वास्थ्य सहज रूप से प्राप्त किया जा सकता है। प्रकृति के द्वारा शारीरिक चिकित्सा जिसमे आसन प्राणायाम करने उपवास करने एवं फलाहार को भी दैनिक जीवन में अपनाने से भीे फायदे होते हैं। व अधिक नमक, मसाला, तेल, कृत्रिम फूड, पाॅलिस्ड चावल लेने से एवं सामान्यतः बार-बार भोजन करने से शरीर में बीमारियाॅं घर कर लेती हैं एवं अधिक नमक खानें की आदत को अन्य व्यसनों के समान ही हानिकर बताते हुए कहा कि यह मोटापा, ब्लड-प्रेशर एवं मधुमेह जैसे रोगों के मुख्य कारणों में से एक है।
सभा में उपस्थित बड़ी संख्या में साधकगण एवं अन्य गणमान्य नागरिक भी उक्त विचारों से प्रेरित एवं लाभान्वित हुए। अंत में सभी को गुरू पूर्णिमा का भोग वितरित किया गया।

रविवार विशेष सकारात्मक चिंतन की क्लास

ज्ञानसूर्य परमात्मा के संग से बढ़ती है आध्यात्मिक चमक – ब्र.कु. मंजू दीदी
रविवार विशेष सकारात्मक चिंतन की क्लास
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‘‘यह संसार एक रंगमंच है जिसमें ज्ञान सूर्य परमात्मा का प्रकाश फैला हुआ है और यहां का हर एक सकारात्मक व्यक्ति चमकता हुआ सितारा है। जिनका कर्तव्य है स्वयं आगे बढ़ना व दूसरों को आगे बढ़ाना। क्योंकि कहते भी हैं ना कि चढ़ती कला तेरे भाने सर्व का भला। ऐसे ही जब हम दूसरों को आगे बढ़ाते हैं तो स्वयं भी स्वतः आगे बढ़ जाते हैं। यदि हम व्यर्थ बातों में समय गंवाते हैं तो हम समर्थ नहीं बन सकते क्योंकि व्यर्थ एक लीकेज की तरह है जो हमें भरपूर बनने नहीं देगा। ऐसा कीर्तन न करें कि मेरे अंदर अवगुण ही अवगुण है। ऐसा करना परमात्मा की इन्सल्ट है क्योंकि परमात्मा गुणों के सागर हैं हैं और हम उनकी संतान हैं। गुणों के सागर के बच्चों को अवगुणी कहना तो पाप के समान है ना। और ऐसा भी न हो कि हममें जो विशेषताएं व गुण हैं उसका अभिमान आ जाये। विशेषताएं व गुण तो प्रभु प्रसाद हैं, उन्हें मेरा मानना ही अभिमान है।’’
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने सकारात्मक समूह के साधकों के आयोजित रविवारीय स्पेशल क्लास में कही। आपने आगे कहा कि तकदीर बनाने का आधार हमारे श्रेष्ठ कर्म हैं और श्रेष्ठ कर्म वह हैं जो परमात्मा की याद में किये जायें। क्योंकि परमात्मा की याद जहां है वहां गलत कर्म हो ही नहीं सकते। कहते भी हैं हथ कारडे और दिल यार डे अर्थात् हाथों से कर्म करते करते रहो और दिल में परमात्मा की याद बनी रहे।
पिछले 34 वर्षों से राजयोग का अभ्यास कर रही बहन ममता सगदेव ने एवं ब्रह्माकुमार अमर भाई ने स्वयं व दूसरों की विशेषताओं को देखने से हुए फायदों के सुखद अनुभव साझा किये।