सर्वकलाओं से संपन्न थे श्रीकृष्ण – ब्र.कु. मंजू दीदी

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सर्वकलाओं से संपन्न थे श्रीकृष्ण – ब्र.कु. मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में धूमधाम से मनाया गया जन्माष्टमी का पर्व

‘‘यह उल्लेख है कि सृष्टि के आदिकाल में श्रीकृष्ण को पीपल के पत्ते पर देखा गया। इसका भाव यही है कि श्रीकृष्ण आनेवाली नई स्वर्णिम दुनिया के प्रथम राजकुमार थे जो सर्वगुणों में संपन्न, 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी थे। इस संसार रूपी सागर अर्थात् असीम लोक में मनुष्य सृष्टि मानों पीपल का एक वृक्ष है, ब्रम्हा और सरस्वती उसके मूल हैं और श्रीकृष्ण उसके पत्ते पर तैर रहे हैं इससे अलिप्त और न्यारे होकर उन्होंने इसमें जीवन व्यतीत किया। वे इस सृष्टि के सबसे पहले पत्ते हैं जो प्रेम से परिपूर्ण हैं।’’
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में जन्माष्टमी के अवसर पर लाॅयन्स क्लब के साथ संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित भक्तजनों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आपने आगे कहा कि कौन कहता है भगवान आते नहीं, जरूर आते हैं बुलाने वाले को प्यार से, दिल से पुकारने की जरूरत है। दिल की भावना वाले को ही भगवान नजर आते हैं। आपने कहा कि वर्तमान समय परमात्मा अपने किये हुए वायदे के अनुसार स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर हमें ज्ञान और योग की धारणा द्वारा योगेश्वर देव-देवियों का पद प्राप्त करा रहे हैं……
इस अवसर पर अनेक मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गये। नीलम डांस गु्रप ने राधा कैसे न जले…., कु. प्राप्ति ने वो किस्ना है…., कु. संध्या ने कान्हा रे थोड़ा-सा प्यार दे….., कु. गौरी ने देखो कान्हा नहीं मानत बतियां……, कु. राधिका ने राधे-कृष्ण की ज्योत अलौकिक…. एवं कु. वर्षा ने मोहे रंग दो लाल…. गीत पर मनभावन प्रस्तुतियां दी। साथ ही मातृत्व की भूमिका विषय पर ड्रामा भी प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में लाॅयन्स क्लब के अध्यक्ष लाॅयन ज्योत्सना स्वर्णकार, सचिव लाॅयन काजल गुप्ता, कोषाध्यक्ष लाॅयन शशि बरेट एवं शहर के गणमान्य नागरिक एवं अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।

ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 9वीं पुण्यतिथि & जन्माष्टमी पर राधे-कृष्ण बनो प्रतियोगिता का आयोजन

निर्माणचित्त एवं सत्यता की देवी थीं दादी प्रकाशमणि – ब्र.कु. मंजू दीदी

25 अगस्त को ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका की 9वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम

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‘‘विश्व स्तरीय संस्था प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका आदरणीया दादी प्रकाशमणि जी की आज 9वीं पुण्यतिथि पर विश्व के 140 देशों के सभी 9000 सेवाकेन्द्रों में लाखों साधकों के द्वारा श्रद्धांजलि दी जायेगी। पिताश्री ब्रह्माबाबा के अव्यक्त होने के पश्चात् दादी प्रकाशमणी जी ने 38 वर्षाें तक संस्था का कार्यभार संभाला। वे कहती थीं कि ये संस्था नहीं है ये तो मेरा परिवार है। और दादी जी से सभी अपनेपन की अनुभूति करते थे।’’
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी कही। आपने दादीजी की विशेषता बताते हुए कहा कि गुणों और विशेषताओं की खान थीं। उनके अंदर निरहंकारिता, सबके साथ समान व्यवहार, शान्ति की प्रतिमूर्ति, मैंपन से मुक्त, नियमों का सम्मान करना, एकनामी अर्थात एक भगवान पर भरोसा और इकाॅनामी, रमणीक और विशाल दिल, सदा उमंग-उत्साह से भरपूर, मां के समान पालना का गुण, किसी की बात चित्त पर न रखना आदि का गुण था। दादीजी शुद्ध आत्मिक प्यार की एवं निर्माणचित्त व सत्यता की देवी थी। जब साधु-संतो का सम्मेलन होता था तब सभी बड़े-बड़े सन्यासी-महामण्डलेश्वर आदि दादीजी की निर्माणता के आगे झुक जाते थे। सत्यता की देवी दादीजी न्यायविदों के सम्मेलन में देशभर से आये हुए न्यायधीशों के समक्ष कहती थीं कि उन्होंने बचपन से आज तक कभी भी झूठ नहीं बोला व चोरी नहीं की। दादी कहती कि कख का चोर सो लख का चोर, ये सत्गुरू की दरबार है।
टिकरापारा सेवाकेन्द्र में प्रातः 6 से 8 बजे श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा गया है।

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जन्माष्टमी पर राधे-कृष्ण बनो प्रतियोगिता का आयोजन

टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ब्रह्माकुमारीज़ एवं लाॅयन्स क्लब का संयुक्त आयोजन

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ब्रह्माकुमारीज़ एवं लाॅयन्स क्लब के संयुक्त तत्वाधान में आज शाम 6 से 8 बजे कृष्ण बनो, राधा बनो प्रतियोगिता का निःशुल्क आयोजन किया जा रहा है। सभी इच्छुक अभिभावक संपर्क कर सकते हैं।
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रविवार विशेष सकारात्मक चिंतन की क्लास

विशेषता देखने का चश्मा पहनें तो कमजोरियां दिखाई नहीं देंगी – ब्र.कु. मंजू दीदी
रविवार विशेष सकारात्मक चिंतन की क्लास

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‘‘हम जिस रंग का चश्मा पहनते हैं हर चीज हमें उसी रंग की दिखने लगती है उसी प्रकार जब हम अपने दृष्टिकोण में विशेषता रूपी चश्मा धारण करेंगे तो हर एक की विशेषता ही दिखाई देगी। और जब हम विशेषताओं को कार्य में लगायेंगे तो वह वैसे ही वृद्धि को प्राप्त करेगा जैसे एक बीज से अनेक फल निकलते हैं। हम कमजोरी देखने का नजरिया बदल दें। कहते हैं किसी ने देखा कीचड़ में कमल, तो किसी ने चांद में भी दाग देखा। जब हम किसी की कमजोरी देखते हैं, उसका चिंतन करते हैं तो वह कमजोरी अपने ही भीतर प्रवेश कर जाती है।’’
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आयोजित रविवारीय स्पेशल क्लास में सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने सकारात्मक समूह के साधकों को संबोधित करते हुए कही। आपने आगे कहा कि वर्तमान समय विशेष पुरूषोत्तम संगमयुग का समय चल रहा है, इसे व्यर्थ न गंवायंे। इस समय में ऐसा श्रेष्ठ कार्य कर लेना चाहिये क्योंकि परचिंतन-परदर्शन का कार्य तो हमने जन्म-जन्मांतर किया है। कमजोरियों का चिंतन करने व ईष्र्या आदि के कारण मंथरा की व शकुनी की कथा बन जाती है और परिणामस्वरूप महाभारत युद्ध का रूप बन जाता है। दुनिया में सबसे प्रिय और सबसे शक्तिशाली चीज शान्ति है। जैसे भगवान को शान्ति का सागर कहा जाता है और हम उनकी संतान हैं तो हमारा कर्म, बोल और व्यवहार भी ऐसा हो कि हमसे भी सभी को शान्ति की अनुभूति हो। ऐसी सेवा करने से स्वयं को भी खुशी होगी। और सच्ची सेवा भी वह है जिसमें सर्व की दुआओं के साथ खुशी की अनुभूति हो।
हर बार की तरह आज भी माह के तृतीय रविवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया और सायं 6.30 से 7.30 बजे विश्व शांति के लिये सामूहिक योग अभ्यास भी किया गया।

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सच्ची आजादी

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????सच्ची आजादी????

पांच विकारों से जब तक नहीं पाएंगे आजादी      रुक नहीं सकती है तब तक भारत की बर्बादी

जब से हम सब हुए हैं माया रावण के गुलाम      तब से हमारी दैवी संस्कृति हो रही है बदनाम

छल कपट को बनाया हमने उन्नति का आधार      कर्ज में डूब गया है भारत धन ले लेकर उधार

मन बुद्धि की स्वच्छता कितनी हो गई मलीन      स्वार्थ फैला नस नस में जैसे मिट्टी कण महीन

लोभ लालच का कीड़ा फैला रहा है भ्रष्टाचार      इक दूजे से करते हैं सब स्वार्थ युक्त व्यवहार

अपने लालच के वश भूल गए देश का विकास      करनी मुश्किल हो रही भारत माँ की पूरी आस

देखो हमारे मन के विचार हो गए इतने संकीर्ण     अपने स्वार्थ वश करते अपनों का हृदय विदीर्ण

दुःख देकर किसी को मन कभी नहीं पछताता      दिल हुए पत्थर के इसलिए रोना भी नहीं आता

धोखा देकर अपनों को ख़ुशी का अनुभव करते      पाप करते समय हम भगवान से भी नहीं डरते

किए जा रहे पापकर्म जैसे हो अपना अधिकार     भ्रष्ट हो गए हैं इतने कि भूल गए सब शिष्टाचार

कैसे पाएंगे अपनी संस्कृति की खोई हुई प्रतिष्ठा     कैसे जागे हमारे मन में इक दूजे के प्रति निष्ठा

नहीं रहेंगे सुख कभी जो पाए हों छल कपट से     गुम होंगे वो ऐसे जैसे दृश्य हटता है चित्रपट से

एक ही बात पते की है समझो इसे गहराई से     सच्चा सुख मिलेगा अपने दिल की सच्चाई से

सप्त गुणों से सजी हुई हम आत्माएं सतोप्रधान    b यह स्मृति जगाकर हो जाएं विकारों से अनजान

विकारमुक्त जीवन बनाता हमें सुख शांति संपन्न    दुःख सारे मिट जाते खुशियां होती रहती उत्पन्न

ना सताए जब विकारी दुनिया का कोई संस्कार     सबका हितकारी हो जब अपना हर एक विचार

विकारी जीवन से जब पूरी मुक्ति मिल जाएगी     सच्चे अर्थों में वही हमारी आजादी कहलाएगी

?????ॐ शांति?????

 

 

स्वराज्य से ही रामराज्य संभव – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

स्वराज्य से ही रामराज्य संभव – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में रविवार को स्वतंत्रता दिवस पूर्व विशेष क्लास का आयोजन

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‘‘कहा गया है- ‘‘पराधीन सुख सपनेहु नाहि’’ अर्थात् पराधीन व्यक्ति को सुख स्वप्न में भी नहीं मिलता। अधीनता चाहे व्यक्ति की हो, व्यक्ति, वस्तु की हो या फिर अपने ही बुरे स्वभाव, संस्कार या आदतों की, वह दुखदायी ही होती है। हमारा देश भारत भी लंबे समय तक अंग्रेजोें का गुलाम रहा। अंग्रेजों के शोषण से भारतीय की हालत दयनीय हो गई। हमारे देशभक्त भाई-बहनों ने अपने अनमोल जीवन की कुर्बानी देकर हमें अंग्रेजों के शोषण और गुलामी भरे जीवन से मुक्त कराया। ऐसे देशभक्तों को आजादी के 69 वर्ष पूरे होने में शत्-शत् नमन।
उपरोक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने रविवार विशेष क्लास में उपस्थित ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के सदस्यों को संबोधित करते हुए कही। आपने आगे कहा कि विविध क्षेत्रों में भारत स्वनिर्भर तो हुआ है, अनेक क्षेत्रों में उन्नति भी की है। लेकिन इन सब प्राप्तियों के बावजूद मन में प्रश्न उठता है कि क्या वास्तविक रूप से आज हम स्वतंत्र हैं? आज हम पूरी तरह पांच विकारों- काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के गुलाम हो चुके हैं।
अधिकतर लोग लोभ के बंधन में बंधकर सामान्य जनता का खून चूस रहे हैं। काम के अधीन होकर आज भाई-बहन, शिक्षक-विद्यार्थी, पिता-बेटी का पवित्र रिश्ता भी अपवित्र होता जा रहा है। आज स्त्री बाहर तो क्या, अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है। मोह रूपी मकड़ी के जाल में फंसे मात-पिता, गांधारी और धृतराष्ट्र की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर अपने बच्चों के गलत कार्यों को भी आश्रय देते हैं। क्रोध के अधीन होकर भाई, भाई को, पति, पत्नि को तथा पुत्र, पिता को भी मारने से नहीं चूकते। छः फुट का इंसान छोटी सी दो इंच की बीड़ी, 15 इंच की शराब की बोतल के अधीन है। छोटे से लेकर बड़े तक हर व्यक्ति इन पांच विकारों में से किसी न किसी के अधीन है।
बापू गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर भारत को रामराज्य बनाने का सपना देखा था। परन्तु आज चारों तरफ तो रावणराज्य ही दिखाई देता है। जिसने आत्मा की सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति रूपी मूल संपत्तियों को छीन लिया है। इस रावण की पराधीनता से छुड़ाने के लिये सभी आत्माओं के बापू, स्वयं निराकार परमपिता परमात्मा शिवबाबा इस धरती पर अवतरित हो चुके हैं और दिव्य ज्ञान और योग की शक्ति से हमें सच्ची स्वतंत्रता दिला रहे हैं। और भारत को पुनः जगतगुरू का स्थान प्राप्त कराने के लिये राजयोग की शिक्षा दे रहे हैं।

अलौकिक चैतन्य फूलों का बगीचा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

अलौकिक चैतन्य फूलों का बगीचा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
श्रावण मास के दूसरे सोमवार के दिन टिकरापारा सेवाकेन्द्र में स्थापित शिव मंदिर में विधिवत् 108 परिक्रमा लगाया गया

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‘‘पर्यावरण के ऊपर बहुत ही अलौकिक रुप से कार्य किये जा रहें हैं। लगभग-लगभग 150 से भी अधिक पौधे टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रांगण में लगाये गये हैं और इससे आसपास का वातावरण भी बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली हो गया है। मेडिटशन अर्थात् ध्यान जिसे राजयोग भी कहा जाता है इसका प्रभाव इतना अधिक पड़ता है कि जिस प्रकार ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय में कई लोग आकर के अपने को पल्लवित व प्रफुल्लित कर रहे हैं उसी प्रकार पेड़-पौधों को भी उतना ही प्यार दिया जा रहा है ’’
उक्त बातें टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आगे उन्होने कहा कि ध्यान व सकारात्मक चिंन्तन की क्लास हमेें ऐसा लगता है कि ये पेड़ – पौधे क्या सुन रहे होंगे, लेकिन इसका प्रेक्टिकल प्रभाव ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र में देखा गया कि पेड़-पौधे भी जब ये सकारात्मक चिंतन व ध्यान के वातावरण के बीच में रहते हैं तो ये पौधे अलग प्रकार की खुशी का अनुभव करते हैं। दीदीजी अपना अनुभव सुनाते हुये कहती हैं कि मुझे पौधों के बीच में ऐसा महसूस होता है कि पाधें मुझसे घर की सदस्यों की तरह बातें करती हैं कि कैसी हो! कैसी हो! और मैं जब बाहर जाती हॅंू तो लगता है िकवे मुझे बहुत प्यार से विदाई दे रही हैं और कहती- जल्दी आना! जल्दी आना! ये बातचीत पेड़-पौधों से उनको अनुभव होता है और उनको बहुत प्यार करती हैंैै।
ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र मे नारियल, अमरुद, आॅंवला, आम, अंगूर, पान, छुईमुई, पारिजात, शहतूत, मेेंहदी, मोंगरा, कनेर, अशोक, पपीता, गुलाब के कई किस्म, केला, ऐलोवेरा, मंदार, नींबू, पुदीना, चीकू, जमीेंकंद, बरगद, पीपल, तुलसी, सदासुहागन आदि अनेक प्रकार के पेड़-पौधें लगे हुए हैं। ये सब इस भाव से लगाया गया है कि यहां जो आने वाले भाई-बहनें हैं , उनको यदि ऐसी कोई शारिरीक तकलीफ होती है तो तुरंत उसका प्रयोग किया जा सके। जैसे पारिजात जिसे हारश्रृंगार भी कहा जाता है गठिया रोग में प्रभावशाली है। इसकी पांॅच पत्तियां गरम पानी में उबाल कर 15 दिनों तक पीने से पैरों की जकड़न दूर होती है। ऐसे ही अमरुद का पौधे की 5 पत्ती को पानी में उबाल कर गरारा करने से गले संबंधित रोग जैसे खांॅसी , पायरिया रोग में इसके पत्तियों को चबाने से लाभ होता है।
इसप्रकार हरे-भरे पेड़-पौधों के बीच सेवाकेन्द्र में आने वाले भाई-बहनों को बहुत ही शुुकुन व शांति, आनंद की अनुभूति होती है क्योेकि हरा रंग हमारे मन को बहुत आनंदित कर देता है। इसप्रकार सेवाकेन्द्र में चैतन्य व प्राकृतिक फूलों का बगीचा, दोनों का संगम दिखाई देता है और दीदीजी का लक्ष्य है कि आगे चलकर लोगों का प्राकृतिक चिकित्सा करके उनके उत्तम स्वास्थ्य की ओर ध्यान आकर्षित कर सकें। इस बगीचे को बनाने में चैतन्य बगीचे का बड़ा योगदान रहा है। पूर्वी बहन ने मोंगरे लगाये हैं, पाइकजी ने गुलाब का पैाधा, सुखराम भाई ने चीकू, राकेश भाई ने नारियल और संदीप भाई ने शहतूत। तो इसप्रकार सारा बगीचा चैतन्य बगीचे द्वारा लगाया गया।
दीदीजी ने पूरे बिलासपुर वासियों से अनुरोध किया है कि पर्यावरण को श्रेष्ठ बनाने के लिये ये अभियान बहुत समय से चलाया जा रहा है। जिसमें आप सभी प्रकृति को संरक्षित करने पेड़-पौधे लगायें व सहभागी बनें