माउंट आबू में शिक्षकों के महासम्मेलन को सम्बोधित करते हुए ब्र.कु. मंजू दीदी

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शिक्षकों में स्प्रिचुअल कोशेन्ट बढ़ना जरूरी – ब्र.कु. मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय माउण्ट आबू में आयोजित शिक्षकों के सम्मेलन को मंजू दीदी ने किया संबोधित

‘‘इसमें कोई दो मत नहीं है कि बच्चों के विकास के लिये आई.क्यू. आवश्यक है लेकिन इसके साथ-साथ ई.क्यू. व एम.क्यू. अर्थात् ईमोशनल एवं मोरल कोशेन्ट भी जरूरी है क्योंकि आज बौद्धिक शक्ति के आधार पर हमारी धन की शक्ति तो बढ़ गयी है किन्तु भावना व नैतिकता की कमी के कारण रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं और मनोबल कमजोर होता जा रहा है। स्प्रिचुअल कोशेन्ट वह आध्यात्मिक शक्ति है जो बौद्धिक, भावनात्मक एवं नैतिक शक्तियों को स्थिरता प्रदान करती है। जो बच्चों में लाने से पहले शिक्षकों को स्वयं मंे आत्मसात करना जरूरी है क्योंकि जैसा कर्म हम करते हैं हमें देखकर बच्चे भी वैसा ही सीखते हैं।’’
उक्त बातें माउण्ट आबू में आयोजित शिक्षकों के महासम्मेलन के उद्घाटन सत्र में देशभर से आये हुए 8000 शिक्षकों को संबोधित करते हुए बिलासपुर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल पूर्व लेफ्टिनेन्ट जनरल भ्राता निर्भय शर्मा जी एवं संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका दादी रत्नमोहिनी जी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया तत्पश्चात् मुख्यालय का अवलोकन किया।
मंजू दीदी ने शिक्षकों के राजयोग मेडिटेशन सत्र के अंतर्गत कालचक्र का गुह्य रहस्य विषय पर भी संबोधित किया।

रविवार स्पेशल क्लास

शांति की शक्ति से सर्व समस्यों का समाधान संभव 
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में रविवार विशेष सत्संग क्लास
‘‘वैज्ञानिकों का अनुभव होता है कि किसी भी अनुसंधान या खोज का आधार साइलेन्स पाॅवर होता है। साइलेन्स पाॅवर अर्थात् शांत मन बहुत शक्तिशाली होता है। शांत मन से एकाग्रता आती है और एकाग्रता से दो मुख्य शक्तियां प्राप्त होती हैं एक- परखने की शक्ति और दूसरी निर्णय करने की शक्ति। और यही दो शक्तियां हैं जिनसे व्यवहार और परमार्थ दोनों में आने वाली समस्याओं का समाधान सरलता से किया जा सकता है। परमार्थ मार्ग में नकारात्मक एवं व्यर्थ की बातों से बचने के लिये परख शक्ति आवश्यक है। परख शक्ति की कमी से निर्णय भी गलत हो जाता है और जो परिणाम चाहते हैं वह नहीं मिल पाता।’’
उपरोक्त बातें ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र में रविवार विशेष परमात्म महावाक्य सुनाते हुए ब्रह्माकुमारी बहनों ने कही। उन्होंने साधकों से कहा कि इसी परख शक्ति से हम कहां रांग है, कहां स्व-परिवर्तन करना है, इसका पता चलता है। जिस प्रकार गाड़ी दो तरीके से स्टार्ट किया जा सकता है एक सेल्फ स्टार्ट से और दूसरा धक्का देकर। उसी प्रकार परिवर्तन भी दो प्रकार से किया जाता है एक स्वयं के दृढ़ संकल्प से और दूसरा समय आने पर। यदि समय आने पर परिवर्तन किया तो पुण्य का खाता हमारा नहीं समय का जमा हो जायेगा। साथ ही बहनों ने शांति की शक्ति के फायदे बताते हुए कहा कि यह क्रोध अग्नि को शीतल कर देती है, परिवर्तन तीव्र गति से होता है, व्यर्थ विचारों की हलचल को समाप्त कर सकती है, कैसे भी पुराने बुरे संस्कारों को समाप्त कर देती है, अनेक प्रकार के मानसिक रोगों को समाप्त कर सकती है, इससे शांति के सागर परमात्मा से संबंध जोड़ सकते हैं, यह कम समय में अधिक प्राप्ति करा सकती है, अर्थात् इससे अधिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वाणी से तीर चलाना तो आ गया है लेकिन अब शांति का तीर चलाओ। शांति की शक्ति प्रैक्टिकल में लाओ। अपने घर का वातावरण ऐसा शांतमय बनाओ जो उस वातावरण में आने वाले लोगों के तनाव व अवसाद स्वतः समाप्त हो जाये, हर घर आश्रम बन जाये। वर्तमान समय और स्वयं की शक्ति का पहचान हो जाये तो समर्थ बन जायेंगे क्योंकि यह परमात्मा और आत्माओं के संगम का समय है।
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