Respected Bro. B.K. Ramesh Shah Ji passed away

Ramesh Bhaiओम शान्ति            28-1-17         मधुबन
 
प्राण प्यारे अव्यक्त बापदादा के अति लाडली सदा अपनी मंसा शक्ति द्वारा श्रेष्ठ वायुमण्डल बनाने वाली देश विदेश की सभी निमित्त टीचर्स बहनें तथा ब्राह्मण कुल भूषण भाई-बहनें

ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद स्वीकार करना जी

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बाद समाचार, साकार मात-पिता की गोद में पले हुए यज्ञ के आधार स्तम्भ, विश्व सेवा की अनेक नयी-नयी योजनाओं को सदा कार्यान्वित करने वाले, वर्ल्ड रिन्यूवल स्प्रिचुअल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी, बह्माकुमारीज़ के अतिरिक्त महासचिव, हम सबके अति स्नेही वरिष्ठ भ्राता रमेश

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शाह जी जो कि यज्ञ के एकाउन्ट डिपार्टमेन्ट को व्यवस्थित रूप से चलाने के निमित्त चार्टेड एकाउन्टेन्ट के रूप में सदा अथक बन अपनी सेवायें देते रहें। कुछ समय से आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, अहमदाबाद, बॉम्बे में इलाज कराने के बाद ट्रामा सेन्टर शान्तिवन में कुछ दिनों से इलाज चल रहा था। आज 28 जनवरी 2017 को सवेरे 7.23 पर आप अपना पुराना शरीर छोड़ बापदादा की गोदी में चले गये। अपने दैवी परिवार की हर आत्मा के दिल में उनके प्रति सदा आदर सत्कार की भावना रही। क्योंकि वे अपने कुशल मार्गदर्शन द्वारा सबको आगे बढ़ाते रहे। 


आज उनके पार्थिव शरीर को अन्तिम दर्शन के लिए पाण्डव भवन के हिस्ट्री हॉल में रखा जायेगा। कल मधुबन, ज्ञानसरोवर, आध्यात्मिक संग्रहालय, ग्लोबल हास्पिटल आदि स्थानों की परिक्रमा कराते हुए शान्तिवन के समीप मुक्तिधाम में उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शाम 4 बजे किया जायेगा।
ऐसी महान अथक सेवाधारी यज्ञ रक्षक आत्मा को हर ब्राह्मण आत्मा दिल की दुआओं के साथ अपनी स्नेह

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श्रृद्धांजलि अर्पित कर रही है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


Rajyogi Ramesh bhai Shah Ji.Ramesh shah ji final mix

?HAPPY REPUBLIC DAY?

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?HAPPY REPUBLIC DAY?
☺☺☺ओमशान्ति!☺☺☺
कल गुरुवार सुबह प्यारे पिता शिव परमात्मा को भोग लगाने के पश्चात गणतंत्र दिवस विशेष पर प्यारे शिवबाबा के द्वारा दी गई आध्यात्मिक शिक्षाओं को सुनेंगे
एवं ततपश्चात पवित्र तिरंगा झण्डा फहराया जायेगा
इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर देश की गरिमा बढ़ाएं व् अपने पुण्य का खाता भरपूर करें….
धन्यवाद!?
?ओमशान्ति!

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ईश्वरीय सेवा में,
ब्रह्माकुमारी मंजू बहन
बिलासपुर टिकरापारा

टिकरापारा सेवाकेन्द्र मंे माउण्ट आबू से पधारे संजय भाई ने दिये प्रवचन

पे्रस-विज्ञप्ति

जीवन में खुशियों का आधार अच्छे विचार हैं – ब्रह्माकुमार संजय भाई

टिकरापारा सेवाकेन्द्र मंे माउण्ट आबू से पधारे संजय भाई ने दिये प्रवचन

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‘‘आज का वातावरण ऐसा है कि ज्यादातर लोग एक-दूसरे से मिलते वक्त उनकी बुराईयां दिमाग में रखते हैं यदि उनमें अनेक अच्छाइयां भी हों परन्तु हमारे साथ उनके बुरे अनुभव ही याद आते हैं जिससे वे और बुरे बनते हैं और हम फिर दुखी होते हैं। इसके लिये ध्यान में रहे कि हमारे विचारों की महानता या नकारात्मकता ही जीवन में खुशी मिलने या दुख मिलने के आधार होते हैं। हमारे पास किसी घटना या परिस्थिति के बारे में सोचने के लिये एक ही समान समय होता है चाहें तो हम साधारण या छोटी सोच अपने मन में ला सकते हैं या चाहे तो एक सकारात्मक या श्रेष्ठ विचार अपने मन में ला सकते हैं। ’’

उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में माउण्ट आबू से पधारे ब्रह्माकुमार संजय भाई ने सेवाकेन्द्र में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए कही। आपने सुबह उठते ही शुरू के दस मिनट में पांच श्रेष्ठ विचारों को दोहराने के लिये कहा। वे हैं- 1 मैं सदा खुश हूं, 2. भाग्यविधाता भगवान मेरे पिता हैं अतः मैं तो सबसे भाग्यवान आत्मा हूं, 3. मेरे पास श्रेष्ठ विचारों का खजाना है इसलिये मैं बहुत धनवान हूं, 4. मैं बुद्धिवान हूं और 5. मेरे साथ अच्छा ही होगा। इन श्रेष्ठ विचारों से दिनचर्या की शुरूआत करने से हमारे संपर्क में खुशी देने वाले लोग आने लगेंगे, भाग्य भी साथ देता रहेगा, श्रेष्ठ विचारों के साथ-साथ स्थूल धन भी बढ़ जायेगा, बुद्धि भी बढ़ती जायेगी और हमारे साथ कुछ बुरा भी होने वाला होगा वो बदलकर अच्छा होने लगेगा। आपने साधकों को आध्यात्म के मार्ग में उन्नति करने व योग अभ्यास के सहज तरीके बतलाये और काॅमेन्ट्री के माध्यम से अनुभव भी कराया।

टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने जानकारी दी कि बिलासपुर में जन्में संजय भाई पिछले 20 वर्षों से राजयोग का अभ्यास कर रहे हैं और माउण्ट आबू में समर्पित रूप से रहकर साउण्ड विभाग में अपनी सेवायें दे रहे हैं। 

प्रति,

भ्राता सम्पादक महोदय,

दैनिक………………………..

बिलासपुर (छ.ग.)

आओ मनाएं मकर सक्रांति

आओ मनाएं मकर सक्रांति

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☆~☆~☆ मकर सक्रांति का सन्देश☆~☆~☆

नव वर्ष 2017 के भव्य स्वागत के पश्चात,
अब समय है लाएं तरावट, मधुरता के साथ।
ऋतू परिवर्तन और फसलों का सुखद आगमन,
सांस्कृतिक उमंग-उत्साह से खिल उठा मन-चमन।

फिर आया मकर सक्रांति का पावन त्यौहार,
उड़ती पतंगों समान बनें स्वतंत्र सदाबहार।
सब पर चढ़ा है पतंगी करामात का जूनून,
विकारों से मुक्त बनकर पाएं स्वतंत्रता व सुकून।

पाप से मुक्ति के लिए करते गंगा स्नान, भक्ति भाव सहित,
सच्चा ज्ञान सागर हैं सत्यम-शिवम्-सुंदरम जो है परम मित्र।
संगम पर ज्ञान सागर – ज्ञान नदियों का लगा है सच्चा रूहानी मेला,
ब्रह्मा के तन द्वारा शिव रचते इसे अभी जो है बेहद का अमृतवेला।

इस मेले से होता आत्मा-परमात्मा का सच्चा-२ मिलन,
ज्ञान मानसरोवर में लगाकर डुबकी आत्मा बन जाती सुमन।
भक्ति के मेलों से होता धन, शक्ति आदि का व्यय,
सच्चे मेले से स्वराज्य अधिकारी बनकर आ जाता समन्वय।

पतित सृष्टि व आत्माओं को पावन बनाना ही इसका उद्देश्य,
ज्ञान सागर के ज्ञान रत्नों से बनना देवी-देवता यही है लक्ष्य।
आओ, शिव के ज्ञान-योग पंख लगाकर उड़ें बनकर पतंग,
ज्ञान सागर में ज्ञान स्नान कर जगाएं स्व में नव तरंग।

एक दिन का ये नहीं त्योंहार
मनाते रहें इसे हम बारम्बार
ॐ शांति के मंत्र के बल पर
जग में फैलाएं सच्ची शांति

आओ मनाएं मकर सक्रांति

स्नेह बढ़ाएं आपस में हम
अब ना संशय का नाम रहे
करें वैर विरोध को अलविदा
मिटाकर अपने मन की भ्रान्ति

आओ मनाएं मकर सक्रांति

मेलजोल हो आपस का इतना
बनें तिल और गुड़ के समान
ईश्वरीय श्रीमत के आधार पर
शुद्ध विचारों की लाएं क्रांति

आओ मनाएं मकर सक्रांति