योग से आती है नियंत्रण शक्ति- ब्र.कु. मंजू दीदी

योग से आती है नियंत्रण शक्ति- ब्र.कु. मंजू दीदी 
अच्छा बनने का संकल्प ही अच्छा बना देगा।
रेल्वे प्रार्मरी हिन्दी मीडियम स्कूल में अंर्तराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बच्चों को योग करने की प्रेरणा देने के लिए ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा की बहनो को आमंत्रित किया गया।
DSCN0443
DSCN0487DSCN0603
‘‘हमें अपने जीवन में दिव्य गुणों की खुषबू को भरना है। हम फूल तभी बन पाऐंगे जब स्वयं को ज्ञान, गुण, और षक्तियों से भरपूर करेंगे। इसलिए हमें प्रतिदिन योगाभ्यास करना चाहिए, स्कूल एक विद्या का मंदिर है जहॉ ज्ञान के आधार पर स्वर्णिम भविष्य की नींव आप जैसे विद्यार्थियों को तैयार किया जाता है। यदि कभी हमारे माता, पिता, षिक्षक हमें कोई कार्य करने से मना करते या रोकते हैं तो हमें उनसे नाराज नहीं होना है क्योंकि यदि वो ऐसा करेंगे तो उसमें भी हमारी भलाई ही होगी। हमें कभी भी क्रोध नहीं करना चाहिए। क्योंकि 5 मिनट क्रोध करने से हमारे 2 धण्टे की कार्य करने की क्षमता समाप्त हो जाती है और 20 मिनट का पावरफुल राजयोग मेडिटेषन हमारे 8 घण्टों की थकान को दूर कर देता है।
उक्त बातें रेल्वे प्राइमरी हिन्दी मीडियम स्कूल में विद्यार्थियों और षिक्षकों को योग की प्रेरणा देते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु मंजू दीदीजी ने कही। आपने बताया कि, आज के समय में योगाभ्यास करना सभी के लिए जरूरी हो गया हैं क्योंकि अपने हर कार्य को सुचारू रूप से करने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक रूप से भी सषक्त रहना आवष्यक है और मन से स्वस्थ रहने के लिए आपने बताया कि हमें टी.वी नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे हमारी ऑंखों के साथ-साथ मन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि हम जो भी देखेंगे या सुनेंगें वही हमारे अवचेतन मन में चला जायेगा। हम जैसा सोचेंगें वैसे ही बनते जायेंगे और जैसे हमारे कर्म होंगे वैसा ही हम फल पायेंगे इसलिए हमें हमेंषा अच्छे काम ही करना चाहिए क्योकि अच्छा बनने का संकल्प ही हमें अच्छा बना देगा।
सेवाकेन्द्र की बहने, ब्र.कु शषि और संगीता बहन ने भी बच्चो को प्रेरणा देते हुए जीवन मे योग का महत्व बताया और गौरी बहन एवं संगीता बहन ने योग व आसनो के अभ्यास करवाए। इस अवसर पर स्कूल के विद्यार्थियों के साथ षिक्षकगण, प्राचार्य एवं योगा प्रषिक्षक उपस्थित थे।
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

 

नारी शक्ति की साक्षात् मिसाल ब्रह्माकुमारीज़- भवानीष्ांकर नाथ मातेष्वरी जी की 52वीं पुण्यतिथि पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा के सदस्यों ने दी श्रद्धांजलि

‘‘आज के समय में समाज में महिला सषक्तिकरण के लिए होने वाले प्रयास बहुत तीव्र हो गए है। महिलाओ को सम्मान दिलाने हेतु बहुत से नियम कानून बन गए है। लेकिन सन् 1937 में ही परमात्मा ने ब्रह्माकुमारीज संस्थान में बहनों को संस्था की बागडोर सौंप कर समाज में नारी सषक्तिकरण का सुंदर मिसाल प्रस्तुत किया अर्थात् नारी शक्ति को प्रत्यक्ष किया जिसकी प्रथम प्रषासिका जगदम्बा सरस्वती ‘‘ओम राधे’’ रहीं। इनके सकारात्मक परिवर्तनों को देख मन में इस संस्था के कार्यो के प्रति बहुत सम्मान जागृत हुआ है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की 52वीं पुण्यतिथि के अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र के हार्मनी हॉल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल्वे पुलिस फोर्स के सीनियर डिवीज़नल सिक्यूरिटी कमिष्नर भ्राता भवानी शंकर नाथ जी ने कही। आपने इस संस्था के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा के विषय में कहा कि महिलाओं को इस आध्यात्म क्रांति का आधार बनाकर सषक्त करना, ऐसे दिव्य संकल्प परमात्मबुद्धि से युक्त व्यक्ति में ही आ सकते हैं। महिला सषक्तिकरण के कार्य को इतनी कुषलता से किए जाने के प्रयास को देख गर्व की अनुभूति होती है।
पवित्रता, गम्भीरता, त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति थीं मम्मा – ब्र.कु. मंजू दीदी
इस अवसर पर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने मातेष्वरी जी ;मम्माद्ध की विषेषताओं पर प्रकाष डालते हुए कहा कि मम्मा शीतल स्वभाव, गम्भीरता, मीठे बोल, शांति की अवतार थीं, प्रेममूर्त थीं। उनके संबंध में इतनी स्वच्छता, पवित्रता की शक्ति थी जो जगदम्बा बन गई। वे एकांत का अभ्यास करने के लिए रोज सवेरे 2 बजे उठकर परमात्मा की याद में रहने की तपस्या करतीं थीं। उन्हें परमात्म महावाक्यों पर जरा भी संषय नहीं था, वे पूर्ण निष्चयबुद्धि होकर हर श्रीमत का पालन करती थीं। उनके जीवन के दो महामंत्र रहे कि ‘‘हर घड़ी हमारी अंतिम घड़ी है’’ और 2. ‘‘ हुक्मी हुक्म चला रहा है’’ वे इसे सदा याद रखतीं और सबको याद दिलाती रहीं और इन्हीं मंत्रों के आधार पर नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप बन गईं।
अंत में सभी ने मातेष्वरी जी को श्रद्धांजलि दी और उनके निमित्त भोग लगाकर सभी ने संकल्पित होकर भोग स्वीकार किया। मंजू दीदी ने सभी को आज के विषेष संकल्प को एक कागज पर लिखकर आइने के पास लगाकर रोज उसे स्मृति में लाने को कहा इससे स्वयं पर अटेन्षन रहेगा और जीवन में परिवर्तन सहज हो जायेगा।
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

 

आत्मा, परमात्मा व प्रकृति के साथ जुड़ाव है योग – ब्रह्माकुमारी मन्जू दीदी -महाराजा रणजीत सिंह सभागार में आयोजित 21 जून अंतराष्ट्रीय योग षिविर की धूम

DSCN0250 DSCN0336 DSCN0339 DSCN0344
‘‘दुनिया मे कई प्रकार के योग प्रचलित है लेकिन राजयोग मेंडिटेषन में विकारों का सन्यास करने, बुराईयों से हठपूर्वक दूर रहने, ज्ञानयुक्त भक्ति करने, कर्म करते योगयुक्त स्थिति, बुद्धि उस परमात्मा से जोड़े रखने एवं कर्म व योग के संतुलन के कारण सभी योग जैसे सन्यास योग, हठयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग, बुद्धियोग, समत्वयोग षामिल हैं इसलिए राजयोग को सभी योगो का राजा कहा गया है। योग अर्थात् तन और मन का जुड़ाव। जब हम योग की गहराई में जायेंगे तब उस परमसत्ता का अनुभव कर पायेंगे। षरीर के माध्यम से आत्मा कर्म करती है परन्तु पूरा जीवन निकल जाता है और हम स्वयं की सत्ता का अनुभव नहीं कर पाते हैं। किसी ने बहुत अच्छा कहा कि ’’रूह और जिस्म का अजीब इत्तेफाक है, उम्र भर साथ रहे पर रू-ब-रू न हो सके।‘‘ इसी प्रकार आत्मा और षरीर दोनों का घनिष्ठ संबंध है परन्तु जीवन पर्यंत आत्मा षरीर का और षरीर आत्मा का अनुभव नहीं कर पाती है। तो इसकी अनुभूति के लिए उस परमषक्ति परमात्मा में स्वयं के मन को एकाग्र कीजिए। कभी किसी से दूर हो जाते हैं तो कहते हैं कि उसका वियोग हो गया है ऐसे ही परमात्मा के साथ योग, आत्मा, षरीर और प्रकृति के साथ जुड़ाव की महसूसता ही योग है।‘‘
उक्त बातें महाराजा रणजीत सिंह सभागार में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित निःषुल्क सात दिवसीय योग षिविर में आईएएस/पीएससी, कैरियर पॉइण्ट, गुरूनानक स्कूल, खालसा स्कूल, नेषनल स्कूल के स्टूडेण्ट्स, ब्रह्माकुमारीज़ के सदस्य एवं शहर के नागरिकगणों संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही।
योग की धारणा से मन को अपना साथी बना लें-किरण चावला
कैरियर प्वाइंट के संचालक भ्राता किरण चावला जी ने कहा कि जीवन में ज्ञान तो बहुत जरूरी है और जब वो ज्ञान अनुभव के रूप में हम प्राप्त हो तभी वो ज्ञान काम का है नहीं तो वो सिर्फ सूचना है। जिस प्रकार शरीर के सभी अंग मिलकर शरीर की रचना करते हैं उसी प्रकार योग को समझने के लिए उसके आठ अंगों को हमें समझना होगा जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं। वास्तव में सिर्फ आसन, प्राणायाम ही योग नहीं है, ये जीवन जीने की कला है। योग भारत की देन है भारत को पूरा विष्व आध्यात्मिक गुरू के रूप मे देख रहा है। आप किसी भी महान व्यक्ति के बारे में देखेंगे तो पायेंगे कि उन्होने ने भी अपने जीवन में योग साधना को विषेष महत्व दिया है। और अगर मन हमारा साथ दे तो वो हमारा सबसे बड़ा दोस्त है और साथ ना दे तो सबसे बड़ा शत्रु है इसलिए योग की धारणा अपने जीवन में अवष्य अपनाए। भ्राता सुनील टूटेजा जी ने भी योग को जीवन का अंग बनाने की बात कही एवं सभी को अपनी शुभकामनायें दी।
साधकों ने साझा किये अपने अनुभवः
इस अवसर पर स्टूडेट्स ने योग षिविर के दौरान हुए अपने अनुभवों को साझा किया और कहा कि इन सात दिनों में लगातार योग करने से पूर्व योग-आसन करने में हमें रूचि नहीं होती थी लेकिन यहां आने के बाद स्लिप डिस्क में आराम मिला है व मेडिटेषन करने से नींद अच्छी आने लगी है और पढ़ाई में भी मन लगता है। साथ ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन को महसूस किया तथा जीवन में इस दिनचर्या को अपनाने का संकल्प लिया है। आध्यात्म से निकटता के साथ खुद से भी निकटता का अनुभव हुआ है। पहले अपने आप को निग्लेक्ट करते थे लेकिन यहां की प्रेरणाभरी बातों से स्वयं का सम्मान करना व परमात्मा से प्रेम करना सीखा।
योगा इन्सट्रक्षनल मैन्यूअल का हुआ विमोचन :
इस अवसर पर अपोलो हॉस्पीटल के असिस्टेंट मैनेजर एवं योगा इन्सट्रक्टर डॉ. अजय जाडे जी के द्वारा लिखित योगा इन्सट्रक्षनल मैन्यूअल का आज विमोचन हुआ।
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

जो स्वयं की मदद करते हैं भगवान उन्हीं की मदद करते हैं – डॉ. फरिहा आलम सिद्दिकी

प्रेस-विज्ञप्ति
जो स्वयं की मदद करते हैं भगवान उन्हीं की मदद करते हैं – डॉ. फरिहा आलम सिद्दिकी
महाराजा रणजीत सिंह सभागार में योग षिविर का तीसरा दिन
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत ने किया स्टूडेण्ट्स का उत्साह वर्धन
‘‘विघ्न तो बहुत आते हैं किन्तु यदि हम ठान लें तो दुनिया की कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती, अगर हम अपने अंदर कोई दृढ़ संकल्प कर लें तो हमें कोई भी रोक नहीं सकता है। सारी दुनिया एक तरफ हो और हमारा दृढ़ संकल्प एक तरफ हो तो हमारी सफलता तो तय ही है। जो भी कार्य आपके सामने आये यदि हम उसे चैलेंज समझ कर करें, उसकी प्लानिंग करें और पूरी ताकत के साथ लग जायें क्योंकि भगवान भी उन्हें ही मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं और जब हम टीम के साथ कार्य करते हैं तो ‘मैं’ से कार्य सफल नहीं होगा इसमें आपको पूरी टीम को साथ लेकर चलना होगा।’’
उक्त बातें महाराजा रणजीत सिंह सभागार में आयोजित निःषुल्क सात दिवसीय योग षिविर के तीसरे दिन आईएएस/पीएससी स्टूडेण्ट्स को अपने अनुभवों से लाभान्वित करते एवं उनका मार्गदर्षन करते हुए बहन श्रीमति फरिहा आलम सिद्दिकी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत ने कही। आपने कहा कि हम सभी अलग-अलग बैकग्राउण्ड से आते हैं और जब हम सभी को देखते हैं तो हमें डर लगता है कि कितने लोग तो कई वर्षों से तैयारी कर रहे हैं। हमें क्या पढ़ना है इससे ज्यादा ध्यान हमें क्या नहीं पढ़ना है इसका ध्यान रखें। हमारे अंदर घबराहट का आना एक अच्छा लक्षण है क्योंकि ये दर्षाता है कि हम पढ़ रहे हैं। जब आप पढ़ाई करेंगे तब ही तो आपको घबराहट होगी। आप कितने घण्टे पढ़ते हैं ये इम्पॉर्टेन्ट नहीं है किंतु आप कितने दिल से तैयारी कर रहे हैं यह मायने रखता है। किसी चीज की तैयारी के लिए आप अपना 110 प्रतिषत दीजिये, पूरा प्लान बनायें और उसकी एक डेडलाइन फिक्स कर लें। फिर उस डेडलाइन के पूर्व कार्य पूरा करने में कोई बहाना न हो। लिखकर अभ्यास करना लक्ष्य प्राप्ति में सहायक है और यदि हम पढ़ाई लगातार करते रहे तो हमें पढ़ने में आसानी होती है।
जो मिला है उसके लिए ईष्वर का शुक्रिया करें
भगवान से कभी ये न कहें कि हमें यह-यह नहीं दिया, बल्कि जो भी आपको मिला उसके लिए सदा ईष्वर का धन्यवाद करते रहें क्योंकि दुनिया में अनेक लोग ऐसे हैं जिनके पास कुछ नहीं है, हम उनकी अपेक्षा तो बहुत ही भाग्यषाली हैं।
अपने पैरेन्ट्स को कभी नकारें नहीं
सभी की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं किन्तु हमें अगर सफल होना है तो कभी-भी अपने मां-बाप को निग्लेक्ट नहीं करना है क्योंकि हमारे पैरेन्ट्स को हमारी छोटी-सी भी सफलता से कितनी खुषी मिलती है जबकि हमारी सफलता से उन्हें कुछ लाभ नहीं मिलता। अपना अनुभव साझा करते हुए आपने कहा कि जब भी मैं कार्य करके थक जाती हूं तो अपने माता-पिता से बात करके रिचार्ज हो जाती हूं। अपने माता-पिता से सदा कनेक्ट रहिये तो आप कभी-भी टेन्षन में नहीं आयेंगे क्योंकि हमें पूरी ताकत वहीं से मिलती है। उन्होंने अपनी शुभकामनायें दी और कहा कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत, अपना पूरा एफर्ट लगायें और सफलता प्राप्त करें।
षिविर में सभी ने कमर दर्द के लिए किया मर्कटासन के साथ अन्य आसनों का अभ्यास
लगातार पढ़ते रहने से या अन्य कारणों से होने वाले कमर दर्द को ठीक करने के लिए आज के षिविर में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने सभी को मर्कटासन के तीन प्रकारों का अभ्यास सिखाया, साथ ही भुजंगासन के चार प्रकार व पढ़ने के लिए अच्छी स्थिति मकरासन करने के तरीके सिखाये। एकाग्रता की वृद्धि के लिए व तनाव, अवसाद को कम करने के लिए योगनिद्रा का भी अभ्यास कराया गया।
मंजू दीदी ने जानकारी दी कि कल के सत्र में कैरियर पॉइन्ट के विद्यार्थी भी सम्मिलित होंगे एवं आरपीएफ के सीनियर डिवीजनल सेक्षन कमिष्नर भ्राता भवानी शंकर नाथ जी भी शामिल होंगे और विद्यार्थियों को मोटिवेट करेंगे।
विवेकानंद उद्यान में आज शाम सामूहिक योग का आयोजन
दीदी ने जानकारी दी कि रविवार शाम 5.30 से 7.30 बजे सामूहिक योग का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्देश्य है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व योग का अलख पूरे शहर में जागृत किये जायें। इसमें सभी को खुला निमंत्रण है शहर के सभी नागरिक इसमें सम्मिलित हो सकते हैं।
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

महाराजा रणजीत सिंह सभागार में योग षिविर का पहला दिन

मुश्किलों से कह दें, मेरा प्रभु बड़ा है – ब्र.कु. मंजू दीदी
महाराजा रणजीत सिंह सभागार में योग षिविर का पहला दिन
DSCN0608 DSCN0633 DSCN0667
‘‘ मुस्कुराना हमारे जीवन का अंग बन जाए, सिर्फ अपने लिए हम जीवन जी रहे हैं तो क्या बड़ी बात है, कभी हम औरों के लिए भी जीयें और इससे प्राप्त आनंद का अनुभव करें। ‘‘संकल्प से कभी हारना नहीं ‘‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत‘‘- इस गीता श्लोक के माघ्यम से आपने ये समझाया कि जिसने अपने मन को अपने मन को जीत लिया वह अपने हर लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने पर हमारा एक और लक्ष्य होना चाहिए कि हमे जीवन मे कभी किसी की आलोचना नहीं करनी है, हममे जो योग्यता है उसके साथ हमें आगे बढ़ना है। हमसे हमारी योग्यता को कोई छीन नहीं सकता तो क्यों किसी की ग्लानि करें, हर इंसान को परमात्मा ने दिव्य गुणों की खुषबू देकर भेजा है। जैसेः चुम्बक की ओर लौह कण स्वतः आकर्षित होते हैं उसी तरह अपना भी व्यक्तित्व प्रभावषाली बनायें।’’
उक्त बातें महाराजा रणजीत सिंह सभागार में आयोजित निःषुल्क सात दिवसीय योग षिविर के पहले दिन आईएएस/पीएससी स्टूडेण्ट्स को लक्ष्य के प्रति प्रेरित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने कहा कि योगनिद्रा हमारे जीवन को स्वस्थ बनाती है और हम इन सात दिनों में अपने आत्म बल को इतना बढा लें कि जीवन मे कोई परिस्थिति आए भी तो उसका सामना हम कुषलता पूर्वक कर सकें। मुष्किले तो हमारे जीवन में आती ही हैं। हम रेज कुछ अलग-अलग प्रकार की परिस्थिति से गुजरते हैं वास्तव में ये परिस्थिति हमारे मनोबल की परीक्षा होती है। हम सभी के जीवन मे परिस्थिति आती हैं कभी ऑंखे नम भी होती है। तो कभी परिस्थिति को संभालने में मुष्किलात आयेंगी, परंतु इस समय उस अदृष्य शक्ति की आवाज आंयेगी कि बच्चे तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारे साथ हूं, जब भी तुम मुझे दिल से पुकारोगे मैं तुरंत हाजिर हो जाउंगा और किसी न किसी रूप में तुम्हें मदद करूंगा।
षिविर में सात प्राणायामों के अलावा पैरों के लिए सूक्ष्म आसन, नौका संचालन, चक्की चलाना एवं सम्पूर्ण आसन-सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया गया। दीदी ने योगनिद्रा के माध्यम से सभी के अवचेतन मन को सकारात्मक दिषा प्रदान करते हुए सभी को अपना लक्ष्य निर्धारित कराया एवं उसकी प्राप्ति के लिए सुझाव दिये कि मोबाईल का प्रयोग कम करें, रात सोते समय अपने से दूर रखें विषेषकर सिराहने के नजदीक तो बिलकुल भी न रखें, व्यर्थ की बातों से दूर रहें। साथ ही विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने के लिए मोटिवेषनल सांग- ये मत कहो खुदा से, मेरी मुष्किलें बड़ी हैं, ये मुष्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है….गीत पर कु. गौरी बहन ने बहुत सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी एवं युवाषक्ति पर आधारित गीत- देखना जो चाहते हो इनकी उड़ान को करना पड़ेगा ऊंचा और आसमान को…..पर यौगिक जॉगिंग का अभ्यास कराया गया।
इस अवसर पर टूटेजा ट्यूटोरियल्स के डायरेक्टर एवं पूर्व डिप्टी कलेक्टर भ्राता सुनील टूटेजा जी ने कार्यक्रम के प्रति अपनी शुभकामना व्यक्त की एवं स्टूडेण्ट्स के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
टिकरापारा सेवाकेन्द्र में युवा षिविर का एडवांस कोर्स शुरूः
मंजू दीदी जी ने जानकारी दी कि ऊंची सोच, युवा की खोज षिविर की सम्पन्नता के बाद टिकरापारा में आज से प्रतिदिन शाम 7 से 8.30 बजे युवाओं का एडवांस कोर्स आरंभ हो चुका है जिसमें सभी शामिल हो सकते हैं।
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)