Bilaspur News_Bhaiji Punyatithi

पवित्रता, त्याग, ईमानदारी, समर्पणता के आदर्श व एक कुशल प्रशासक थे भाईजी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
पवित्रता, त्याग, ईमानदारी, समर्पणता के आदर्श व एक कुशल प्रशासक थे भाईजी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी


– छ.ग. व इंदौर जोन के पूर्व निदेशक, मीडिया प्रभाग के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश भाई जी की चौथी पुण्यतिथि मनाई गई…
– नवीनतम व रचनात्मक सेवाओं से लाखों लोगों को ईष्वरीय संदेष देने के निमित्त बने भाई जी ..
– उन्होंने अपने कुशल प्रशासन से छ.ग. सहित चार राज्यों में 600 से अधिक सेवाकेन्द्रों की स्थापना कर ईश्वरीय सेवाओं का विस्तार किया…

– अपनी स्नेहमयी परवरिश व प्रेरणा देकर 1000 से अधिक बहनों को ईश्वरीय सेवाओं के लिए समर्पित कराया…


बिलासपुर, टिकरापाराः- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाई जी की चौथी पुण्यतिथि उनकी विशेषताओं को धारण करने व उनकी प्रेरणाओं पर चलने का संकल्प लेते हुए मनायी गई। इस अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी, राजकिशोर नगर की ब्र.कु. रूपा बहन व शशी बहन, मस्तूरी की ब्र.कु. गायत्री व ब्र.कु. नीता बहन, नरियरा की ब्र.कु. ज्ञाना बहन, बलौदा की ब्र.कु. समीक्षा व श्यामा बहन, पूर्णिमा बहन व हेमवती बहन ने पुष्प अर्पित कर अपनी भावांजलि, पुष्पांजलि व स्नेहांजलि अर्पित की।
मंजू दीदी जी ने ब्र.कु. ओमप्रकाश भाई जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाई जी पवित्रता, त्याग, ईमानदारी, समर्पणता के आदर्श थे व एक कुशल प्रशासक थे। जिन्होंने लोगों के जीवन का नैतिक उत्थान करने व ईश्वरीय संदेश देने के लिए छ.ग. सहित मध्यप्रदेश, उड़ीसा व राजस्थान के अनेक शहरों व गांवों में 600 से अधिक सेवाकेन्द्रों, उपसेवाकेन्द्रों व हजारों ब्रह्माकुमारी पाठषालाओं की स्थापना की। उन्होंने मीडिया को सकारात्मक दिशा देने व मूल्यनिष्ठ बनाने के लिए आध्यात्म से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया। दीदी ने बताया कि सेवा के प्रति उनकी लगन इतनी थी कि मीडिया के अलावा अन्य लाखों लोगों को आध्यात्म को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी ओजस्वी वाणी व दिव्य उद्बोधन से प्रेरित होकर हजार से अधिक बहनों ने अपना जीवन ईश्वरीय सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया। परमात्मा के श्रीमत के अनुसार उन्होंने बहनों को आगे रखते हुए किसी भी सेवाकेन्द्र का पदभार नहीं लिया और पांच बहनों का ट्रस्ट बनाकर उन्हें पूरे ज़ोन का प्रभार सौंप दिया था। उनकी शिक्षाओं को जीवन में धारण करते हुए आध्यात्मिक मार्ग में आगे बढ़ते रहना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

क्लास के पश्चात् भाई जी के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराने के पश्चात् सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
दीदी ने नए वर्ष के लिए सभी को स्वयं में देवतायी गुण धारण करने के उद्देष्य से अपने-अपने लिए व्यक्तिगत रूप से योजना बनाने व संकल्प का चुनाव करने के लिए प्रेरित किया!प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

नारी शक्ति को आगे रखकर मान बढ़ाया ब्रह्माबाबा ने – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
नारी शक्ति को आगे रखकर मान बढ़ाया ब्रह्माबाबा ने – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ईश्वरीय पढ़ाई में सबसे आगे रहे पिताश्री ब्रह्माबाबा
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 143वीं जयंती मनाई गई
प्रतिदिन पांच मिनट विश्व शांति के लिए सकाश देने का लिया संकल्प

बिलासपुर, टिकरापाराः- महिलाओं को समाज में उचित मान दिये जाने, उचित अधिकार मिलने और उनकी जागृति के लिए संगठन बनाने की ओर बाबा ने जो कदम बढ़ाये, वे अनूठे कदम थे। पिताश्री को कन्याओं-माताओं का अपमान सहन नहीं होता था। बाबा ने जब 8 माताओं का ट्रस्ट बनाकर अपना पूरा धन उनके नाम किया, उसमें अपने परिवार के किसी भी सदस्य का नाम नहीं रखा। ये उनके त्याग का दूसरा सबसे बड़ा कदम था। इससे पूर्व उन्हें संस्था की स्थापना के समय माताओं को सहारा देने के कारण लोगों की आलोचनाओं, विरोधों को बहुत सहन करना पड़ा। जबकि परमात्मा की प्रवेषता से पूर्व वे समाज में बहुत ही सम्मानित व्यक्तित्व – एक जौहरी थे, देष-विदेष के राजा-महाराजाओं से उनके सम्मानजनक व्यापारिक संबंध रहे।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने पिताश्री ब्रह्माबाबा की 143वीं जयन्ति – आध्यात्मिक सषक्तिकरण दिवस के अवसर पर हार्मनी हॉल में आयोजित कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर आपने सभी को नारी शक्ति का सम्मान करने, प्रतिदिन ईष्वरीय ज्ञान मुरली का श्रवण करने व कम से कम पांच मिनट प्रतिदिन विष्व शांति के लिए अपनी शुभकामनाओं के प्रकम्पन्न फैलाने के लिए संकल्प कराया व बताया कि इस ईष्वरीय विष्व विद्यालय में प्रतिदिन आध्यात्मिक पढ़ाई पढ़ी जाती है जिसमें परमात्मा सभी के लिए चाहे वह नए हों या पुराने, पूरे 9000 सेवाकेन्द्रों में एक ही पढ़ाई पढ़ायी जाती है। जिसे कोई केवल ज्ञान की पॉइन्ट्स के रूप में बुद्धि में रखते हैं, कोई धारणा की शक्ति के रूप में अपनाते हैं। पिताश्री ने परमात्मा द्वारा दी गई षिक्षाओं को पूरा पूरा अपने जीवन में धारण किया और सबसे आगे बढ़कर सम्पूर्णता को प्राप्त हुए।
कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माबाबा के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया व दीप जगाकर सभी बहनों के द्वारा केक काटा गया व सभी को भोग वितरित किया गया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

आध्यात्मिक सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाई जा रही है पिताश्री ब्रह्माबाबा की जयंती

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आध्यात्मिक सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाई जा रही है पिताश्री ब्रह्माबाबा की जयंती
प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 143वीं जयंती

बिलासपुर, टिकरापाराः- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 143वां जन्म दिन ’आध्यात्मिक सशक्तिकरण दिवस’ (Spiritual Empowerment Day) के रूप में मनाया जायेगा। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का जन्म 15 दिसम्बर 1876 को हैदराबाद सिंध में हुआ था। इसके लिए संस्था के अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन (माउंट आबू) सहित विश्व के 140 देशों में हजारों कार्यक्रम आयोजित कर ‘हम सब एक पिता परमात्मा’ की संतान है का संदेश दिया जायेगा।  इस अवसर पर देश विदेश के सभी सेवाकेन्द्रों पर अनेकों कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। जिसमें राजयोग, ध्यान और आध्यात्मिक कार्यक्रम शामिल होंगे। इस अवसर पर टिकरापारा में भी रविवार प्रातः 7 बजे कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
गौरतलब है कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान में जुडऩे वाले प्रत्येक भाई को ब्रह्माकुमार तथा बहनों को ब्रह्माकुमारी कहा जाता है। पूरे विश्व में करीब बीस लाख लोग ब्रह्मा बाबा के पदचिन्हों पर चलकर अपना जीवन श्रेष्ठ बना रहे हैं। ब्रह्मा बाबा ने माताओं बहनों को आगे करते हुए संस्था को आगे बढ़ाया।
प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के बचपन का नाम दादा लेखराज था। वे बचपन से ही बहुत धर्म परायण तथा भक्ति भाव में लीन रहते थे। 60 वर्ष की आयु में उनके तन में परमात्मा शिव की प्रवेशता हुई और परमात्मा षिव ने नयी दुनिया की स्थापना का रहस्य समझाया। नयी दुनिया की स्थापना अर्थ परमात्मा शिव ने इनका नाम प्रजापिता ब्रह्मा रखा। सन् 1937 में परमपिता परमात्मा ने प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के द्वारा इस संस्थान की स्थापना की। ब्रह्मा बाबा ने नारी शक्ति के संकल्पों को साकार करते हुए माताओं बहनों के सिर पर ज्ञान का कलश रखा और इस संस्थान का नाम ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय पड़ा। आज पूरे विश्व के 140 देशों में आठ हजार सेवाकेन्द्रों का संचालन बहनों और माताओं द्वारा ही होता है।

संस्था की चीफ 103 वर्षीय दादी जानकी जी के आगमन पर आध्यात्मिक महाकुम्भ 20 को

मंजू दीदी जी ने जानकारी दी कि संस्था के छ.ग. व इंदौर जोन के गोल्डन जुबिली के अवसर पर संस्था की मुख्य प्रषासिका दादी जानकी जी का रायपुर में 19 दिसम्बर को आगमन हो रहा है। 103 वर्षीय दादी जानकी विष्व के 10 बुद्धिजीवियों में से एक हैं छ.ग. से उनका पुराना रिष्ता रहा है। भारत सरकार ने उन्हें स्वच्छ भारत अभियान का ब्राण्ड एम्बेसडर बनाया है। अमेरिका के कैलिफोर्निया विवि द्वारा संसारभर के योगियों पर परीक्षणोपरांत उन्हें ‘मोस्ट स्टेबल माइण्ड इन द वर्ल्ड’ घोषित किया गया है। दादी जी के आगमन पर 20 दिसम्बर को राजधानी के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में शाम 5 बजे आध्यात्मिक महाकुंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। दादीजी का सानिध्य प्राप्त करने के लिए बिलासपुर के सेवाकेन्द्रों से जुड़े अनेक भाई-बहनें राजधानी पहुंचेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके के द्वारा किया जायेगा। साथ ही इस आध्यात्मिक महाकुंभ के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेष बघेल, छ.ग. विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत सम्मिलित रहेंगे। संस्थान की इलाहाबाद शाखा की संचालिका ब्र.कु. मनोरमा दीदी, मुख्यालय से संस्था के अतिरिक्त महासचिव ब्रह्माकुमार मृत्युंजय भाई एवं ज्ञानामृत पत्रिका के प्रधान संपादक ब्रह्माकुमार आत्मप्रकाष भाई के दिव्य उद्बोधन भी होंगे।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में विशेष सत्संग का आयोजन

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आत्मा की ऊर्जा के लिए प्रतिदिन सत्संग जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में विशे
ष सत्संग का आयोजन
बिलासपुर, टिकरापाराः- शरीर की ऊर्जा बनी रहे, कार्य करने की शक्ति बनी रहे तथा हम स्वस्थ व निरोग रहें इसके लिए हम दिन भर में कम से कम तीन बार, एक बार नाष्ता व दो बार भोजन तो करते ही हैं, कभी-कभी तो चार या पांच बार भी कुछ न कुछ खा लेते हैं। लेकिन यह बात विचार में आना चाहिए कि क्या हमने अपनी आत्मा को एक बार भी भोजन दिया….? यही कारण है कि हमारे जीवन में मूल्यों की कमी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नफरत, ईर्ष्या, आलस्य जैसे विकारों ने प्रवेष कर लिया है। और सोचने वाली बात यह भी है कि ये हमें अच्छा लगता भी नहीं है फिर भी हम इनके वषीभूत हो जाते हैं। इन सभी विकारों का आना आत्मा की ऊर्जा क्षीण होने के लक्षण हैं। आत्मा के अंदर मन, बुद्धि व संस्कार हैं जिनका मुख्य भोजन अच्छे विचार हैं और अच्छे विचारों का स्रोत सत्संग ही है। प्रतिदिन सत्संग से आत्मा की बैट्री चार्ज हो जाती है। इसका लक्षण है कि वे मूल्य व गुण जो हमारे जीवन से दूर हो गए थे वे वापिस हममें धारण होने लगते हैं। और सत्संग के द्वारा ही हम सत्य के संग अर्थात् परमात्मा के संग में आते हैं। परमात्मा आंखों से दिखाई देने वाले नहीं लेकिन अनुभव करने वाली सत्ता हैं।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आयोजित विशेष सत्संग कार्यक्रम में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। उन्होंने बतलाया कि ब्रह्माकुमारीज़ का मुख्य थीम ही है प्रतिदिन सकारात्मक चिंतन, रविवार को भी छुट्टी नहीं क्योंकि हम खाना भी तो रोज ही खाते हैं वैसे ही यह आत्मा का भोजन है। इसमें ही हर समस्या का समाधान मिल जाता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे विकारों के वषीभूत होने के कारण आज यह दुनिया कलियुग बन गई है अर्थात् कलियुग लाने में हमारी ही भूमिका है। अब समय है कि अपने मीठे व्यवहार व दैवीय गुणों को धारण कर दुनिया को पुनः हमें ही सतयुग बनाना होगा।
रविवार, 15 दिसम्बर को मनायी जाएगी पिताश्री ब्रह्माबाबा की 143वीं जयन्ती
इसके साथ ही दीदी ने जानकारी दी कि परमात्मा षिव के साकार माध्यम प्रजापिता ब्रह्मा (दादा लेखराज), जिनके द्वारा परमात्मा नई सृष्टि की स्थापना का कार्य कर रहे हैं तथा जिनसे प्रेरणा लेकर लाखों लोग इस मार्ग पर चल रहे हैं,  ऐसे पिताश्री ब्रह्माबाबा की 143वीं जयंती रविवार 15 दिसम्बर को समस्त ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के द्वारा मनायी जा रही है। साथ ही रविवार को ही माउण्ट आबू से प्रभु मिलन महोत्सव का सीधा प्रसारण शाम 5 बजे से सेवाकेन्द्रों पर देखा जायेगा।
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भ्राता सम्पादक महोदय,
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शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मस्तूरी के नन्हें बच्चों ने सीखा नैतिकता का पाठ

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आज्ञाकारी बच्चे बढ़ते हैं आगे और मिलता है सभी का प्यार – ब्रह्माकुमारी गायत्री
शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मस्तूरी के नन्हें बच्चों ने सीखा नैतिकता का पाठ
कहानी व खेल-खेल के माध्यम से दी गई सीख

मस्तूरी :- हम सभी बच्चों के अंदर तीन गुड़िया छिपी हुई होती हैं। एक ऐसी गुड़िया है जो षिक्षकों या बड़ों द्वारा सुनाई गई बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं। दूसरे प्रकार के वे हैं जो सुनकर दूसरों को सुनाते तो जरूर हैं लेकिन खुद पालन नहीं करते और तीसरे प्रकार के वे होते हैं जो सुनकर अपने जीवन में उसे अपनाते भी हैं। ऐसी गुड़ियों अर्थात् बात मानने वाले बच्चे अमूल्य होते हैं और वह सबके चहेते बन जाते हैं, उन्हें सबका प्यार भी मिलता है और आगे भी बढ़ते हैं। माता-पिता व गुरूजनों को प्रणाम करने व उनका सम्मान करने से हमें आषीर्वाद मिलती है जो हमारी सुरक्षा कवच की तरह हमारे साथ होती हैं।
उक्त बातें मस्तूरी के शासकीय प्राथमिक शाला के नन्हें बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए मस्तूरी, लटियापारा स्थित ब्रह्माकुमारी पाठषाला की बहन ब्रह्माकुमारी गायत्री ने कही। साथ बच्चों को चार स – सुनना, समझना, समाना, सुनाना के बारे में विस्तार से समझाया जिससे पांचवा स – सफलता प्राप्त की जा सकती है।
शरीर व मन की सफाई का रखें ध्यान – ब्रह्माकुमारी श्यामा
ब्रह्माकुमारी श्यामा बहन ने बच्चों को बताया कि जहां स्वच्छता होती है वहां ईष्वर का निवास होता है। हमें प्रतिदिन सुबह नहाकर ही स्कूल जाना चाहिए क्योंकि विद्यालय भी एक मंदिर है। साथ ही कपड़े व बालों की सफाई हुई हों, नाखून बढ़े हुए न हों।यह तो शरीर की सफाई है। लेकिन लड़ना-झगड़ना, किसी की चीज चोरी करना या बिना पूछे उठा लेना, समय पर स्कूल न आना – यह मन की स्वच्छता नहीं है। जब हम सभी से प्यार से रहते हैं, अनुषासन पर चलते हैं, सत्य बोलते हैं, समय पर स्कूल जाते हैं – यही है मन की सफाई जिसका हमें बहुत ध्यान रखना चाहिए। शरीर व मन की सफाई न होने से अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
रोज पांच मिनट की ताली हमें स्वस्थ रहने में मदद करती है – होरीलाल निर्णेजक
योग प्रषिक्षक होरीलाल निर्णेजक ने बच्चों को संगीत के माध्यम से एक्यूप्रेषर ताली बजवाई और बच्चों को कहा कि रोज सुबह व शाम किसी भी भक्ति, देषभक्ति या खुषी के गीत बजाकर ताली बजाने से हमारे हाथों में स्थित एक्यूप्रेषर पॉइन्ट्स दबते हैं जो हमारे शरीर के बाहरी व आंतरिक अंगों को स्वस्थ रखते हैं जिससे हम बीमार होने से बच जाते हैं। साथ ही रात को सोते समय भ्रामरी व ओमध्वनि प्राणायाम करने से मन शांत रहता है और एकाग्रता की शक्ति बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के साथ विद्यालय की प्रधानपाठिका पुष्पकली तिवारी, षिक्षिका तरूणा यादव एवं अन्य षिक्षकगण उपस्थित रहे।
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भ्राता सम्पादक महोदय,
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आगे बढ़ने के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें- ब्रह्माकुमारी गायत्री

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आगे बढ़ने के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें- ब्रह्माकुमारी गायत्री
मस्तूरी के गुरूकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को बताई गई प्रेरणादायी बातें 
माता-पिता व गुरूजनों का आदर करने व उनकी बात मानने की सलाह दी…
मेडिटेषन से बढ़ती है एकाग्रता व समझने की शक्ति, तब मिलती है सफलता

मस्तूरी :- हमारे माता-पिता की स्थिति कितनी भी कमजोर हो लेकिन वे इच्छाओं का त्याग कर व अपनी जरूरतों को घटाकर बच्चों की हर आवष्यकता पूरी करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक प्रयासरत रहते हैं। हमें उनका अनादर करना तो दूर उन्हें किसी चीज के लिए जिद्द भी नहीं करना चाहिए। अपनी दिनचर्या में पढ़ाई व खेलकूद के अतिरिक्त अपने माता-पिता के कार्यों में सहयोग देना भी शामिल करें। इसके लिए यदि मोबाइल व टीवी का समय घटाना भी पड़े तो वह भी दोगुना लाभप्रद है। एक तो हमें मात-पिता की सेवा का पुण्य भी मिलेगा व दूसरा कि हम मोबाइल व टीवी के दुष्प्रभाव से बच भी जायेंगे।
उक्त बातें मस्तूरी, लटियापारा के गायत्री मंदिर के निकट स्थित ब्रह्माकुमारी पाठषाला की बहन ब्रह्माकुमारी गायत्री ने गुरूकुल उच्चतर माध्यमिक शाला, मस्तूरी के छात्र-छात्राओं को प्रेरणात्मक उद्बोधन देते हुए कही। आपने बच्चों को तितली व कोकून की कहानी बताते हुए बच्चों को सीख दी कि अपनी उन्नति के लिए कभी दूसरों से सहयोग की अपेक्षा न रखें। आगे बढ़ने के लिए आत्मनिर्भर होना जरूरी है। बार-बार दूसरों का सहयोग लेने से हम उन्हीं पर निर्भर रह जायेंगे और कमजोर बन जायेंगे।
गायत्री दीदी ने एकाग्रता के लिए मेडिटेषन का महत्व बताया और मेडिटषन की प्रेक्टिस भी कराई और कहा कि एकाग्रता से हमारी सुनने व समझने की शक्ति बढ़ती है। जब हम किसी बात को सुनकर अच्छी तरह समझ जाते हैं तब ही उसे समा सकते हैं अर्थात् धारण कर सकते हैं तब ही हमें सफलता प्राप्त होती है। मेडिटेषन व सकारात्मक विचारों से हममें अपनी कमजारियों को शक्ति बनाने की कला आ जाती है।
मास्टर योग प्रषिक्षक होरीलाल निर्णेजक ने बच्चों को योग आसन का परिचय देते हुए खेल-खेल में योग के कुछ अभ्यास कराए। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य भ्राता प्रमोद शर्मा जी, ब्रह्माकुमारी श्यामा बहन, समस्त षिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में स्कूल के छात्र व छात्राएं उपस्थित रहे।

ब्रह्माकुमारी बहनों ने इटवा ग्राम के हाईस्कूल के बच्चों का बढ़ाया उमंग उत्साह

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लक्ष्य प्राप्ति के लिए नकारात्मक बातें न सुनें- ब्रह्माकुमारी गायत्री
ब्रह्माकुमारी बहनों ने इटवा ग्राम के हाईस्कूल के बच्चों का बढ़ाया उमंग उत्साह
विद्यार्थी जीवन का बताया महत्व

ग्राम इटवा :- लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते पर कई लोग ऐसे मिलते हैं जो हमें नकारात्मक बातें सुनाकर हतोत्साहित कर देते हैं। इसलिए जो भी बातें आपको ऐसी लगें जो आपको मार्ग से भटका रहे हैं उन बातों के लिए बहरे बन जाएं या सुनते हुए भी न सुनें और जो हमारे षिक्षक व माता-पिता कहते हैं उनकी ही बात मानें क्योंकि वे कभी भी हमारा बुरा नहीं चाहते। जैसे एक सफल वक्ता बनने के लिए एक अच्छा श्रोता बनना जरूरी होता है उसी प्रकार जीवन में भी सफलता प्राप्त करने के लिए श्रवण शक्ति व बातों को सही तरह समझने की शक्ति होनी चाहिए।
उक्त बातें मस्तूरी, लटियापारा स्थित ब्रह्माकुमारी पाठषाला की बहन ब्रह्माकुमारी गायत्री ने ग्राम इटवा के हाई स्कूल के बच्चों का उमंग-उत्साह बढ़ाते हुए कही। आपने कहानी के माध्यम से बच्चों को छोटी-छोटी बातें समझाई व कार्यक्रम के प्रारंभ व अंत में ध्यान के माध्यम से मन को शांत करने के तरीके बताते हुए ध्यान का अभ्यास कराया।
विद्यार्थी जीवन में अनुषासन को अपनाकर पूरा जीवन सुखमय बना सकते हैं – ब्रह्माकुमारी श्यामा
बच्चों को विद्यार्थी जीवन का महत्व बताते हुए ब्रह्माकुमारी पाठषाला की बहन ब्र.कु. श्यामा ने कहा कि विद्यार्थी जीवन हमारे पूरे जीवन का स्वर्णिम काल है, नींव है। इस समय में अनुषासन को अपनाकर सफल व मजबूत बनेंगे तो हमारा भविष्य भी मजबूत और सुख-षांति से संपन्न बनेगा। किसी भी प्रकार के नषे या व्यसन से दूर रहें और भविष्य में भी अपने दृढ़संकल्प के आधार पर इन्हें अपने जीवन में आने नहीं देना। आपने बच्चों से प्रतिदिन प्रातः उठते ही परमात्मा को गुड मॉर्निंग करने व अपने माता-पिता व षिक्षक को मन ही मन प्रणाम करने तथा रात्रि में सोने से पूर्व अपने अच्छे जीवन के परमात्मा का शुक्रिया करने की प्रेरणा दी।
छ.ग. योग आयोग द्वारा प्रषिक्षित मास्टर योग प्रषिक्षक होरीलाल निर्णेजक जी ने बच्चों को सहज विधि द्वारा योग से प्राप्त होने वाली शक्तियों से परिचित कराया व बुरा न सुनने, देखने, बोलने, सोचने व बुरा न करने की प्रेरणा दी।
अंत में ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन ने स्कूल के प्रांगण में पौधारोपण के लिए पौधे सौगात दिए। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति रेणु वड़ेरा व विद्यालय के षिक्षकगण पूर्णिमा गोस्वामी, जयलता बरगाह, रूखमणी राठौर, विनीता कुर्रे, विनीता कुजूर व सुषमा लकड़ा सहित विद्यालय के अन्य स्टाफ उपस्थित रहे।