टिकरापारा(छत्तीसगढ़) : निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन

बिलासपुर टिकरापारा – एक हार्ट सर्जन होने के नाते हमें यह पता है कि आज के सोसाइटी में हार्ट की समस्याएं कितनी तेजी से बढ़ रही हैं। बहुत बार तो यह अननोटिस्ड रह जाता है। बहुतायत डर या संकोच की वजह से हम लोग डॉक्टर के पास नहीं जाते लेकिन जब तक हम रूटिन चेकअप नहीं कराते, हमें हमारे अंदर के रोगों का पता नहीं चल पाता। मेट्रो सिटीज़ के नए गाइडलाइन्स के अनुसार 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद वार्षिक हेल्थ चेकअप कराना जरूरी है जैसे – ब्लडप्रेशर, शुगर, ईसीजी, इको, रूटिन ब्लडटेस्ट ये सब साल में एक बार होना ही चाहिए। ये जरूरी नहीं कि आपको कोई समस्या होगी तब ही आप डॉक्टर के पास जाएं। हम उसी दिन का इंतजार करते रहते हैं और अचानक कभी कोई बड़ी समस्या सामने आ जाती है। कई बार सुनने या देखने में आता है कि अच्छा स्वस्थ दिखने वाले नवयुवक व्यक्ति को हार्टअटैक आ गया। ऐसा अचानक नहीं होता, हम सोचते हैं कि 40-50 वर्षों से हमने कोई दवा नहीं ली है तो हमें चिकित्सक के सलाह की जरूरत नहीं। लेकिन यह एक तरह का ओवर कॉन्फिडेन्स है जो हमें समस्या में डाल सकता है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को भी वार्षिक हेल्थ चेकअप जरूरी है।
उक्त विचार ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए अपोलो हॉस्पीटल के कॉर्डियोलॉजिस्ट व कार्डियो थोरेसिक एवं वस्कुलर सर्जन भ्राता डॉक्टर अनुज कुमार ने दिए।
90 प्रतिशत रोगों का कारण गलत खानपान व अनियमित दिनचर्या है – डॉ. प्रवीण गोयनका
इस अवसर पर एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जन व उदररोग विशषज्ञ भ्राता डॉ. प्रवीण गोयनका ने कहा कि आज की हमारी लाइफस्टाइल ऐसी है कि हर किसी को पेट से संबंधित कोई न कोई समस्या है और 90 प्रतिशत केसेस में समस्या का कारण हमारा खानपान या अनियमित दिनचर्या अर्थात् लाइफस्टाइल से संबंधित होती है। इसके निदान के लिए हम जैसी भी मदद हो सके करने को तैयार हैं, कभी-भी कोई समस्या हो तो निःसंकोच होकर हमसे संपर्क कर सकते हैं।
सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने सेवाकेन्द्र में आने पर डॉ. अनुज, डॉ. गोयनका, डॉ. सौव्हिक कुमार व उनके सहयोगियों का स्वागत व सम्मान किया।

कथनी व करनी में एकता सिखायी पिताश्री ब्रह्माबाबा ने – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
कथनी व करनी में एकता सिखायी पिताश्री ब्रह्माबाबा ने – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
नारी शक्ति के प्रणेता रहे पिताश्री
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में पिताश्री ब्रह्माबाबा की 51वीं पुण्यतिथि मनाई गई…
पूरे विष्वभर के सेवाकेन्द्रों में विष्व शान्ति दिवस के रूप में मनाया गया यह दिन
पिताश्री के कर्म रूपी 18 कदम सुनाकर सभी को दी गई प्रेरणाएं…

बिलासपुर टिकरापारा, 18 जनवरी- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा की 51वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि पिताश्री त्याग और तपस्या के मूरत थे। परमात्मा के श्रीमत के अनुसार नारी शक्ति को आगे करते हुए संस्था की बागडोर बहनों व माताओं का ट्रस्ट बनाकर उन्हें सौंप दिया और 18 जनवरी 1969 को 93 वर्ष की उम्र में अपना साकार देह का त्याग कर सम्पूर्णता को प्राप्त हुए। उनकी पुण्यतिथि को पूरे विष्वभर के सेवाकेन्द्रों में विष्व शान्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। पिताश्री जी की पुण्यतिथि पर अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए शहर के साथ-साथ आसपास के गांव से भी साधक गण टिकरापारा सेवाकेन्द्र पहुंचे और उनकी याद में बनाए गए स्मृति चिन्ह ‘षान्ति स्तम्भ’ के प्रतिरूप के समक्ष उनके नक्षेकदम पर चलने का संकल्प लेते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी। जनवरी महीने को तपस्या का माह मानते हुए टिकरापारा के आसपास के साधक सेवाकेन्द्र में प्रातः 4 से 5 बजे तक योग साधना के लिए पहुंचते हैं। इस योगाभ्यास में 20 मिनट साइलेंस में भगवान की याद, 5 मिनट विष्वषांति के लिए योग दान, 10 मिनट अपने पांच स्वरूप – आत्मिकस्वरूप, दैवीय स्वरूप, पूज्यस्वरूप, भगवान के बच्चे और प्रकाष के फरिष्ते स्वरूप का अभ्यास, 10 मिनट चार धाम की यात्रा, 10 मिनट भगवान के द्वारा अपने शहर व परिवार के सदस्यों को शक्ति दिलाना व 5 मिनट प्रतिदिन सत्संग पर आधारित स्वमानों का अभ्यास शामिल किया जाता है।
सभी उपस्थित सभा को पिताश्री जी की प्रेरणादायी जीवन कहानी उनकी विषेषताओं व कर्म रूपी 18 कदमों के रूप में सुनाते हुए दीदी ने कहा कि सबको प्यार तथा सम्मान देकर आगे बढ़ाना, हर ईष्वरीय कार्य पर चलना और चलाना, हर एक के गुण व विषेषताओं को देख उन्हें सेवाओं में लगाना, स्वयं मेहनत करके दिखाना, हर एक को खुषी में लाना और हल्का करना, आलस्य-अलबेलेपन से अतीत व निद्राजीत, मैं-पन का सम्पूर्ण त्याग, सर्वश्रेष्ठ योगी, सदा निष्चिंत और अचल स्थिति, सदा आनंदित रहना, सागर समान गंभीर विचार, सादगीपूर्ण जीवन और सद्व्यवहार, स्नेह, संरक्षण और सहायता देने में निपुण, सभी में योग्यता भरने की कला, देहातीत बनाने वाली शक्तिषाली दृष्टि, ज्ञान और प्रेम का अद्भूत संतुलन, सुख-दुख हर परिस्थिति में परमात्मा की याद, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना आदि उनके जीवन की विषेषताएं रहीं।
दीदी ने बताया कि स्वयं निराकार परमपिता परमात्मा षिव अपने साकार माध्यम प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की षिक्षा देकर नई सतोप्रधान दुनिया की पुनर्स्थापना करा रहे हैं। परमात्मा द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर पिताश्री ने समाज को नई दिषा दी है। दीदी ने सभी उपस्थित नियमित साधकों को संस्था के नियम व मर्यादाएं दोहराकर धारणाओं की ओर ध्यान खींचवाया। सभी को ब्लेसिंग कार्ड दिया गया।
इस अवसर पर मकर संक्रांति व पिताश्री जी की पुण्यतिथि का संयुक्त भोग लगाया गया व सभी को तिल का लड्डू, केला व गाजर-दूध व वितरित किया गया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

 

प्रेस विज्ञप्ति – नए संस्कारों की क्रांति है मकर संक्राति – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
नए संस्कारों की क्रांति है मकर संक्राति – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
टिकरापारा में साधकोंको मकर संक्रान्ति का आध्यात्मिक महत्व बताकर त्यौहार मनाने के लिए किया प्रेरित
बिलासपुर,टिकरापाराः- जिस प्रकार भक्ति में पुरूषोत्तम महीने में दान-पुण्य कामहत्व होता है उसी प्रकार कलियुग अंत और सतयुग के प्रारंभ के समय पुरूषोत्तमसंगमयुग में ज्ञान-स्नान करके बुराईयों का दान व पुण्य कर्मों का खाता जमा करकेहर व्यक्ति उत्तम पुरूष बन सकता है। कहते हैं जब सूर्य का मकर राषि में प्रवेषहोता है तब मकर संक्रान्ति का पर्व मनाया जाता है। यह परिवर्तन का क्षण होता है। इसीप्रकार जीवन में भी परिवर्तन का समय आता है। ऋतुओं के परिवर्तन के अनुसार हमारे जीवनमें भी शारीरिक व मानसिक परिवर्तन आते हैं। मकर संक्रान्ति के दिन विषेषकरतिल का दान किया जाता है। तिल सफेद व काले रंग का होता है जो हमारे जीवन मेंआने वाले सकारात्मक व नकारात्मक परिस्थितियों को दर्षाता है। तिल को अलग से खाओतो कड़वा लगता है लेकिन जब उसमें गुड़ मिलाकर लड्डू बनाया जाता है तब वह स्वादिष्टहो जाता है अर्थात् जब हमारे व्यवहार में मिठास आ जाती है तब संबंधों कीकड़वाहट, गुण-अवगुण सब अच्छाई में परिवर्तित हो जाते हैं। मकर संक्रांति को संक्रमणकाल भी कहते हैं। इस काल में ज्ञानसूर्य परमात्मा भी राषि बदलते हैं। वे ब्रह्मलोकको छोड़कर इस धरती पर अवतरित होते हैं और नवयुग स्थापना के लिए संस्कारपरिवर्तन का अद्भूत कार्य करते हैं। हर क्रांति के पीछे बदलाव का ही उद्देष्य होताहै। संस्कारों की इस क्रांति से आनेवाली स्वर्णिम दुनिया में सुख-शांति-समृद्धिकी कोई कमी नहीं होगी।
उक्त बातें मकर संक्रान्ति पर्व के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में प्रतिदिन के सत्संग को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदीजी ने कही। आपने इस त्योहार के रीति रस्मों का आध्यात्मिक विवेचन करते हुए कहा किस्नान-ब्रह्ममुहूर्त के स्नान व प्रतिदिन के ज्ञानस्नान, तिल खाना – आत्मा की सूक्ष्मता व आत्मस्वरूप की साधना का यादगार है। पतंग आत्मा के गुणों को धारण करहल्का हो उड़ने का, लड्डू- एकता व मिठास का, तिलदान- अपनी छोटी से छोटी कमजोरी भी परमात्मा को दान देने का, अग्नि जलाना- ज्वालामुखी योग से विकर्मों के विनाष का प्रतीक है।
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

प्रेस विज्ञप्ति – मस्तूरी, किरारी मेले में श्रद्धालु कर सकेंगे द्वादष ज्योतिर्लिंग दर्षन

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प्रेस विज्ञप्ति
मस्तूरी, किरारी मेले में श्रद्धालु कर सकेंगे द्वादष ज्योतिर्लिंग दर्षन
22 जनवरी से लटेष्वरनाथ षिव मंदिर में आयोजित मेले के लिए तैयारियां शुरू
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा की बहनें जन-जन को देंगी षिव संदेष

किरारी, मस्तूरीः- किरारी, मस्तूरी के लटेष्वरनाथ षिव मंदिर में माघी तेरस मेला बुधवार, 22 जनवरी से शुरू होगा। इस मेले में ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा द्वारा द्वादष ज्योतिर्लिंग की झांकी के आयोजन के साथ आध्यात्मिक चित्र प्रदर्षनी भी लगायी जायेगी। जिसमें आत्म-दर्षन, परमात्म-अनुभूति, कर्म-दर्षन एवं राजयोग मेडिटेषन से प्राप्त अष्टषक्तियों की जानकारी दी जायेगी। साथ ही लोगों को व्यसन से मुक्त कराने के लिए संकल्प-पत्र भराया जायेगा व व्यसनमुक्ति संकल्प पेटी भी रखी जायेगी। आत्मिक शांति की अनुभूति के लिए सभी को दो मिनट के लिए राजयोग मेडिटेषन का अभ्यास कराया जायेगा। लटियापारा, मस्तूरी स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के स्थानीय पाठषाला में पांच दिवसीय निःशुल्क राजयोग षिविर का भी श्रद्धालुजन लाभ ले सकेंगे।
आयोजन के लिए ब्रह्माकुमारी बहनों ने की जनपद सदस्य नितेष सिंह की मुलाकात
मेले में 12 ज्योतिर्लिंग दर्षन व आध्यात्मिक चित्र प्रदर्षनी लगाने के लिए स्थान सुनिष्चित करने हेतु मस्तूरी के नवनिर्वाचित जनपद सदस्य भ्राता नितेष सिंह से ब्रह्माकुमारी गायत्री व ब्रह्माकुमारी ईष्वरी ने मुलाकात की व उन्हें संस्था द्वारा मेले में होने वाले आयोजन की विस्तृत जानकारी दी।
साथ ही सात गांवों- वेद परसदा, इटवा, पाली, आकडीह, लावर, कोनी व भोथीडीह गांवों से निर्विरोध चुने गए जनपद सदस्य के रूप में नवनिर्वाचित प्रतिनिधि नितेष ठाकुर जी को बहनों ने बधाई भी दी व संस्था की ओर से उन्हें ईष्वरीय सौगात भी दी।
उक्त जानकारी सेवाकेन्द्र के सदस्य होरीलाल भाई ने दी।
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

Bilaspur Tikrapara_Sunday Class News

ईर्ष्या, घृणा से मुक्त बनें- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

 

प्रेस विज्ञप्ति – अपने गुण से बनाएं दूसरों को गुणवान – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
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अपने गुण से बनाएं दूसरों को गुणवान – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
उद्धार करने के लिए उदारदिल बनने की जरूरत…
उदारदिल बनने के लिए ईर्ष्या, घृणा व आलोचना करने से मुक्त बनें…
संगठन की मजबूती के लिए एकता व एकाग्रता आवष्यक
रविवार स्पेषल क्लास में सुनाए गए परमात्म महावाक्य
युवाओं के लिए विषेष संदेष – ‘न किसी के लिए समस्या बनें, न किसी समस्या में कदम रूकें…’’

बिलासपुर, टिकरापाराः- किसी की प्रगति, उन्नति या उद्धार करने के लिए केवल अच्छी वाणी बोल देना बड़ी बात नहीं है। सबके प्रति शुभभावना रखते हुए अपने गुणों से दूसरों को गुणवान बनाना और आगे बढ़ाना यह है फिराकदिल या उदारदिल बनना। ईर्ष्या, घृणा, क्रिटिसाइज, आलोचना करने या ताने मारने वाला उदारदिल नहीं बन सकता। कई बार अपने साथ वाले किसी की प्रषंसा होने पर या किसी जूनियर के सीनियर से आगे निकल जाने पर ईर्ष्या की भावना उत्पन्न हो जाती है जो स्वयं को और दूसरों को भी परेषान करती है। क्रोध व ईर्ष्या दोनों अग्नि की तरह हैं, क्रोध महाअग्नि है लेकिन ईर्ष्या ऐसी ज्वाला है जो मन ही मन उत्पन्न होती है इसमें न दवा काम करती, न  आग बुझती, बाहर धुंआ भी नहीं निकलता लेकिन अंदर ही अंदर मनुष्य झुलसता जाता है। घृणा ऐसी विकृति है जो शुभचिंतन करने नहीं देती, न ही शुभचिंतक बनने देती और इस तरह भी है जैसे खुद भी किसी गड्ढे़ में गिरना व दूसरों को भी गिराना। क्रिटिसाइज या आलोचना करना एक प्रकार से चोट पहुंचाने की तरह है यह दूसरों को तब तक याद रहती है जब तक चोट ठीक न हो। कई बार चोट ठीक होने के बाद भी दाग बना रहता है।
ये बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित रविवार स्पेषल क्लास में साधकों को परमात्म महावाक्य सुनाते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने आगे कहा कि संगठन में किसी बात को कह देना सरल होता है लेकिन भुलाना मुष्किल होता है इसलिए अपने मुख से ज्ञान रत्न ही निकालने हैं, तोल-तोल कर बोलना है। संगठन या परिवार की मजबूती के लिए एकता व एकाग्रता आवष्यक है। एकता से ही हर कार्य में सफलता मिलती है।
राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं के लिए संदेष सुनाते हुए दीदी ने कहा कि आप जो भी कार्य करते हो उसमें उमंग-उत्साह का समावेष हो। इसलिए किसी भी कार्य की शुरूआत जब होती है तब दृढ़-संकल्प का धागा या कंगन बांधते हैं जो कि अटल प्रतिज्ञा का प्रतीक होता है। साथ ही यह स्लोगन भी याद रखें कि न किसी के लिए समस्या बनेंगे न किसी समस्या को देख डगमग होंगे। स्वयं भी समाधान स्वरूप बनेंगे और दूसरों को भी समाधान स्वरूप बनाएंगे।
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भ्राता सम्पादक महोदय,
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प्रेस विज्ञप्ति – पवित्र कन्या करती है 21 कुल का उद्धार – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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पवित्र कन्या करती है 21 कुल का उद्धार – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

मानवता की सेवा के लिए ब्रह्माकुमारी पूर्णिमा बहन ने किया जीवन समर्पित
षिव संग जोड़ी प्रीत, षिवलिंग को वरमाला पहनाकर भगवान षिव को बनाया जीवनसाथी
ईष्वरीय सेवाओं हेतु कन्यादान के लिए समर्पित ब्रह्माकुमारी बहनों के माता-पिता का किया गया सम्मान
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व मंजू दीदी के करूण उद्बोधन से सभी की आंखें हुई नम
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र की स्थापना के 40वें वर्ष में प्रवेष पर मनाया गया उत्सव
ग्रामवासियों के साथ मनाया गया नववर्ष स्नेह मिलन, ब्रह्माभोजन का भी किया गया आयोजन
नववर्ष पर लिए गए संकल्पों की पुनरावृत्ति कराते हुए उस पर अमल करने किया प्रेरित
सेवाकेन्द्र के हार्मनी हॉल में हुआ भव्य कार्यक्रम का आयोजन


बिलासपुर, टिकरापाराः- कहते हैं श्रेष्ठ कन्या वह, जो 21 कुल का उद्धार करे। जब कुमारी बहनें अपना जीवन भगवान को समर्पित करती हैं तो वह अपने 21 कुल को श्रेष्ठ तो बनाती ही हैं साथ ही अनेक मनुष्य आत्माओं को ईष्वरीय ज्ञान दे उनके जीवन को संवार कर उनके भी 21 जन्मों को श्रेष्ठ बना देती हैं।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित बहुआयामी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। लोगों को सत्य मार्ग दिखाने व परमात्म अवतरण के संदेष को जन-जन तक पहुंचाने के नेक उद्देष्य को लेकर ब्रह्माकुमारी पूर्णिमा बहन ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया। पूर्णिमा बहन ने 13 वर्ष पूर्व ईष्वरीय ज्ञान लिया और पिछले आठ वर्षों से सेवाकेन्द्र पर रहकर अपनी विषेषताओं को ईष्वरीय कार्यों में लगाकर अपना जीवन सफल कर रही हैं।
रीति रस्म को निभाते हुए रचाया अनोखा विवाह
जिस समय ब्रह्माकुमारी पूर्णिमा बहन ने भगवान षिव की यादगार प्रतिमा षिवलिंग पर वरमाला डालकर उन्हें जीवनभर के लिए अपने हमसफर के रूप में स्वीकार किया तब पूरी सभा में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। इस अवसर पर पूर्णिमा बहन के माता-पिता का प्रतिनिधित्व करने दुर्ग से पधारे लक्ष्मीनारायण भाई व हीरो माता ने उनका हाथ मंजू दीदी के हाथ में देते हुए कन्यादान किया।
सेवाकेन्द्र के 40वें वर्ष में प्रवेष पर मनाया गया उत्सव
टिकरापारा में शरद बल्हाल जी के मकान में आज से 39 वर्ष पूर्व एक छोटे से कमरे में ब्रह्माकुमारी पाठषाला की शुरूआत हुई थी जिसका संचालन शुरूआत में मंजू दीदी जी की माता जी सरिता बल्हाल जी करती रहीं। निरंतर मेहनत, त्याग व तपस्या से कारवां बढ़ता गया और यह पाठषाला आज 11 ब्रह्माकुमारी बहनों के माध्यम से एक सेवाकेन्द्र के रूप में सेवाएं दे रहा है। पाठषाला के शुरूआत के साधक धना माता, सरिता बल्हाल, शरद बल्हाल को शॉल व श्रीफल भेंट कर बहनों ने सम्मानित किया और उनके द्वारा दीप प्रज्वलन कर 40वें वर्ष में प्रवेष की खुषियां मनाई। सभी समर्पित ब्रह्माकुमारी बहनों के माता-पिता का भी सम्मान किया गया।
साथ ही रोहिणी विहार, जरहाभाटा निवासी जनकराम क्षत्री जी व देवन्ता भाई के ईष्वरीय ज्ञान में चलने के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती का भी यह अवसर था। दीदी ने बताया कि इन 25 वर्षों में जनक भाई ने पीडल्यूडी की शासकीय सेवाओं व घर-परिवार को जिम्मेदारीपूर्वक निभाते हुए जन-जन को भगवान का संदेष सुनाने के उद्देष्य से अथक होकर ईष्वरीय सेवाओं में अपने को व्यस्त रखा। इन 25 वर्षों के दौरान गांव व शहर के लोगों के नैतिक व चारित्रिक उत्थान के लिए 27 गांवों में ब्रह्माकुमारी पाठषाला की स्थापना के वे निमित्त बने।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ायी कार्यक्रम की शोभा…

इस बहुआयामी कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं जिसमें ब्र.कु. शषी बहन, होरी भाई व अमर भाई ने गीत गाया। कु. गौरी व ब्र.कु. ईष्वरी, श्यामा व नीता बहन ने लाली-लाली फूलवा मंदार…गीत पर, बंटी भाई ने समर्पण समारोह पर आधारित गीत…तारों सा चमकता गहना हो…पर नृत्य प्रस्तुत किया। कु. तनु, कु. दिव्या, कु. षिखा व कु. गौरी  द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण नृत्य-नाटिका ‘समर्पण-समारोह को देखकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए।
ग्रामीण भाई-बहनों के साथ मनाया नववर्ष स्नेह मिलन कार्यक्रम
बिलासपुर शहर व आसपास के गांव से पधारे ग्रामीण भाई-बहनों के साथ नववर्ष स्नेह मिलन मनाते हुए मंजू दीदी ने उन्हें सत्संग कराया। टिकरापारा के साधकों के लिए 21 संकल्पों के साथ मनाए जा रहे नववर्ष से गांव के भाई-बहनों को भी अवगत कराया गया और सभी को इन संकल्पों को दृढ़ता से अमल में लाने के लिए प्रेरित भी किया गया। कार्यक्रम के पश्चात् सभी को ब्लेसिंग कार्ड देते हुए ब्रह्माभोजन कराया गया। इस ब्रह्माभोजन को मंजू दीदी के द्वारा सेवाकेन्द्र की मीडिया प्रभारी उषा साहू की 6 महीने की पोती कु. अर्णा को खिलाकर अन्न प्राषन संस्कार किया।
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भ्राता सम्पादक महोदय,
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