एकाग्र मन व संतुलित बुद्धि से बढ़ाएं निर्णय शक्ति – ब्रह्माकुमारी गायत्री…. टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर बहनों के कौषल विकास हेतु प्रषिक्षण जारी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
एकाग्र मन व संतुलित बुद्धि से बढ़ाएं निर्णय शक्ति – ब्रह्माकुमारी गायत्री
निर्णय का क्षण किसी के लिए चुनौती व किसी के लिए अवसर बनकर आती है
टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर बहनों के कौषल विकास हेतु प्रषिक्षण जारी
छोटी-छोटी ब्रह्माकुमारी बहनें सीख रहीं मंचीय संयोजन, संचालन, व्याख्यान व कार्यक्रम आयोजन के तरीके

बिलासपुर, टिकरापाराः- निर्णय शक्ति को विकसित करने के लिए मन की एकाग्रता व बुद्धि का संतुलन चाहिए। व्यक्ति का अहंकार ही उसे सही निर्णय लेने नहीं देता है। सही निर्णय लेने के लिए बुद्धि को शांत व विवेकयुक्त होना जरूरी है। हर व्यक्ति के जीवन में समय अनुसार निर्णय शक्ति की आवष्यकता होती है चाहे वह षिक्षणकाल में लक्ष्य चुनने का समय हो, नौकरी चुनना हो, चाहे जीवनसाथी चुनने की भी बात हो। यह व्यापारिक क्षेत्र में व्यापारी भाईयों को सीज़न अनुसार सामानों की आपूर्ति व संचय करने के लिए, खेती करने वालों के लिए कृषक भाई बहनों के लिए फसल लेने व बीज बोने के लिए भी जरूरी है। साथ ही आर्थिक, सामाजिक या राजनीतिक किसी भी क्षेत्र में भी बहुत बार निर्णय शक्ति की जरूरत पड़ती है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में मंचीय संयोजन, संचालन, व्याख्यान व कार्यक्रम आयोजन के तरीके सीखाने के उद्देष्य से आयोजित प्रषिक्षण कार्यक्रम में ‘संतुलित जीवन के लिए निर्णय शक्ति की आवष्यकता’ विषय पर मुख्य वक्ता की भूमिका अदा करते हुए सेवाकेन्द्र की राजयोग षिक्षिका ब्र.कु. गायत्री बहन ने कही। उन्होंने निर्णय के पल को चुनौती बताते हुए कहा कि यह चुनौती सभी के पास आती है लेकिन किसी के लिए अवसर के द्वार खोल देती है और किसी को पछाड़कर जीवन में अधोगति को प्राप्त कराती है। जब तराजू का कांटा बीच में हो तब संतुलन कहा जाता है। संतुलित बुद्धि व एकाग्र मन के लिए मेडिटेषन की आवष्यकता है। एक धनुर्धर का यदि तीर छोड़ते समय अंगूठा हिल जाए तो निषाना चूक जाता है ऐसे एकाग्रता में हलचल आने से हम लक्ष्य तब पहुंचने से रह जाते हैं।
वर्तमान व भविष्य के संगम पर स्थित होकर लें निर्णय – ब्र.कु. ईष्वरी
इस प्रषिक्षण कार्यक्रम में अध्यक्ष की भूमिका अदा कर रहीं ब्रह्माकुमारी ईष्वरी बहन ने कहा कि व्यक्ति को वर्तमान व भविष्य के संगम पर स्थित होकर निर्णय लेना चाहिए जो बाद में पश्चाताप् न हो। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी बहनें नैतिक मूल्यों व भारत के प्राचीन योग को लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इस संस्था ने भारतीय संस्कृति व आध्यात्मिकता को विष्व पटल पर पहुंचाया है इन प्रयासों से अवष्य ही भारत पुनः विष्व में जगत्गुरू का स्थान प्राप्त करेगा। हमारे प्रधानमंत्री जी व आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रयास से योग को पूरा विष्व समझ रहा है। यह कोरोना वायरस एक ओर संकट बना हुआ है तो दूसरी ओर लोगों को परिवार के साथ रहने का अवसर प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री जी के लॉकडाउन के निर्णय से व कोरोना योद्धाओं – हमारे पुलिस, डॉक्टर्स, नर्सेस तथा प्रषासन के सहयोग से कोरोना से तो हम उबर ही रहे हैं साथ ही हमें परिवार के नजदीक रहने का सुनहरा अवसर मिला है।
ब्रह्माकुमारी नीता बहन ने गाइडेड मेडिटेषन कॉमेन्ट्री के माध्यम से ध्यान की अनुभूति कराई। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी श्यामा बहन ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संचालन की भूमिका ब्रह्माकुमारी पूर्णिमा बहन ने अदा की।
दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम की विधिवत् शुरूआत हुई। ब्रह्माकुमारी हेमवती बहन ने सभी अतिथियों का फूल व बैज लगाकर स्वागत किया। लॉकडाउन के समय का सदुपयोग कर बहनों को हर तरह से विषेषज्ञ बनाने के लिए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी के निर्देषन व सानिध्य में यह प्रषिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम के पश्चात् मंजू दीदी ने त्रुटियों पर ध्यान दिलाकर उसे दूर करने की विधि बताई। दीदी ने जानकारी दी कि बहनों की भूमिका बदलते हुए यह प्रषिक्षण सप्ताह भर जारी रहेगा।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर हुई संगठन शक्ति के महत्व पर कार्यशाला

सादर प्रकाषनार्थ

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संगठन के लिए आपसी प्रेम जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर हुई संगठन शक्ति के महत्व पर कार्यशाला
ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपने अनुभवों के आधार पर दिए विचार

बिलासपुर, टिकरापाराः- हर शक्ति को धारण करने के लिए किसी न किसी गुण को धारण करना जरूरी है। जैसे समाने की शक्ति के लिए गंभीरता का गुण जरूरी है। संगठन में रहने के लिए सहनषक्ति व समाने की शक्ति की आवष्यकता होती है और इसके लिए हमारे अंदर प्रेम के गुण का रहना बहुत जरूरी है। जिससे प्रेम होता है उसकी बड़े से बड़ी बात भी सहन कर लेते हैं और जिससे प्रेम नहीं उसकी छोटी गलती भी सहन नहीं कर सकते। बड़े संगठन या आध्यात्मिक संगठनों में पवित्रता का बहुत महत्व है। पवित्रता हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। दुष्मन भी अकेला देखकर ही वार करता है संगठन पर वार करने की कोई भी हिम्मत नहीं करता। कोरोना संकट से उबरने के लिए भी पूरा भारत देष संगठित व एकजुट हो गया है जिससे इस संकट पर भी हमारे देष ने काफी हद तक विजय प्राप्त कर ली है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में स्वउन्नति के लिए ‘‘संगठन शक्ति का महत्व’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में बहनों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी बहनों से उक्त विषय को लेकर अनुभव साझा करने को कहा जिस पर अन्य सभी बहनों ने अपने विचार दिए।
छोटी-छोटी बातों को दिल पर न लें – ब्र.कु. हेमवती
ब्र.कु. हेमवती बहन ने कहा कि संगठन में बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो एड्जस्ट करके आपस में ही सुलझाया जा सकता है। अपने बड़ों को शिकायत कर उनका समय नष्ट न करें। गरबा नृत्य संस्कार मिलन का एक अच्छा उदाहरण है जिसमें एक-दूसरे के साथ ताल मिलाया जाता है कोई गलत भी कर रहा हो तब भी उसे एड्जस्ट करके सही कर लिया जाता है।
संगठन में छोटों का कर्तव्य है अपने बड़ों को निष्चिंत व हल्के रखना – ब्र.कु. गायत्री
ब्र.कु. गायत्री बहन ने कहा कि संगठन में बड़ों की छत्रछाया में हम सुरक्षित तो रहते ही हैं लेकिन हम छोटों का भी कर्तव्य बनता है कि बड़े हमारी ओर से निश्चिंत रहें बोझिल नहीं। संगठन एक वैरायटी फूलों का गुलदस्ते की तरह है जिस प्रकार विभिन्न प्रकार के फूलों के गुलदस्तों से बना गुलदस्ता बहुत अच्छा लगता है उसी प्रकार अलग-अलग संस्कार होते हुए भी साथ रहना एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
संगठन में रहना कुछ न कुछ सीखने की प्रेरणा देता है – ब्र.कु. पूर्णिमा
ब्र.कु. पूर्णिमा बहन ने कहा कि सभी में कोई न कोई विशेषता अवश्य होती है जब हम संगठन में रहते हैं तो एक-दूसरे की विशेषता को देख उनसे उस गुण को सीखने का प्रयत्न अवश्य करते हैं और इसका लाभ सभी को मिलता है। संगठन में रहने से यह भी फायदा है कि किसी बात को लेकर किन्हीं दो में यदि मनमुटाव हो भी जाए तो वह जल्द ही मिट जाता है अकेले-अकेले रहने से बहुत समय तक कड़वाहट बनी रहती है। जिस प्रकार मात-पिता के सानिध्य में बच्चे सुरक्षित रहते हैं उसी प्रकार संगठन में बड़ों की छत्रछाया में सभी सुरक्षित रहते हैं।
संगठन की शक्ति से बड़े से बड़ा कार्य भी हो जाता है आसान – ब्र.कु. श्यामा
ब्र.कु. श्यामा बहन ने कहा कि संगठन आत्मबल भी बढ़ाता है और हमारी सेफ्टी का साधन भी है। शिवरात्रि और नवरात्रि झांकी का उदाहरण देते हुए आपने बताया कि संगठन की शक्ति से बड़े से बड़ा असंभव जैसा कार्य भी संभव हो जाता है जिसे अकेले करने की सोचना स्वप्न की तरह है। संगठन से पहाड़ जैसी बड़ी समस्या भी राई के सामान छोटी हो जाती है।
स्वभाव-संस्कार को जानते भी सभी का करें सम्मान – ब्र.कु. ईष्वरी
ब्र.कु. ईश्वरी बहन ने कहा कि जिस प्रकार झाड़ू को बिखेर देने से हम घर की सफाई नहीं कर सकते लेकिन जब उसे एक साथ बांध लेते हैं तो हम आसानी से सफाई कर लेते हैं। उसी प्रकार संगठन में एकता होने से कार्य में सफलता मिलती है। संगठन में रहने से ही हमें एक-दूसरे के स्वभाव-संस्कार का पता चलता है लेकिन जब हम आपस में सभी को सम्मान देकर चलते हैं तो संगठन में मजबूती आती है।
कार्य को अच्छे से व शीघ्रता से सम्पन्न करने के लिए आपसी सहयोग जरूरी – ब्र.कु. नीता
जिस प्रकार एक अकेली उंगली से लड्डू नहीं बनाया जा सकता उसके लिए पांचों उंगलियों व हथेली का सहयोग लगता है ऐसे ही कई कार्य ऐसे होते हैं जो आपसी सहयोग के बिना संपन्न नहीं होते। किसी भी कार्य को अच्छे से व शीघ्रता से पूरा करने के लिए हमें सहयोग की जरूरत पड़ती ही है।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन क्लास के माध्यम से युवाओं व अन्य लोगों को किया प्रेरित

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मनोबल बढ़ाने स्वयं के प्रति जागरूकता जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन क्लास के माध्यम से युवाओं व अन्य लोगों को किया प्रेरित
प्रथम क्लास में पांच सूत्रों के माध्यम से बताया गया मनोबल बढ़ाने का तरीका

बिलासपुर, टिकरापाराः- लॉकडाउन के दौरान मन को स्थिर व मजबूत बनाने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ‘समय की पुकार – मनोबल कैसे बढ़े..?’ विषय पर ऑनलाइन क्लास कराई गई। जिसमें युवाओं सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।
ऑनलाइन मीटिंग एप के माध्यम से सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने सभी का मोटिवेषन बढ़ाते हुए कहा कि इस लॉकडाउन के समय में तनाव व अवसाद से बचने के लिए सकारात्मकता, मेडिटेषन व अपने मनोबल को बढ़ाये रखना जरूरी है तब ही हममें परिवर्तन को स्वीकार करने की शक्ति आयेगी क्योंकि परिवर्तन ही जीवन है और परिवर्तन निष्चित भी है। परिवर्तन को खुषी-खुषी स्वीकार करें। मनोबल को कमजोर करने में हमारा सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है।
रहमदिल बन दूसरों की भी करें मदद…
दीदी ने ‘किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार…’ गीत याद दिलाकर सभी के दिल में करूणा का भाव जागृत कराते हुए कहा कि इस परिवर्तन को गरीब, जरूरतमंद व रोज कमाकर खाने वाले लोग भी खुषी-खुषी स्वीकार कर सकें इसके लिए हम सबको रहमदिल बनना होगा क्योंकि किसी इंसान की प्रथम आवष्यकता रोटी, कपड़ा और मकान होती है। शासन तो यह सुविधा देने का कार्य कर ही रहा है लेकिन यदि कोई छूट जाता है और वो आपके आसपास ही रहता है और भगवान ने आपको ऐसी क्षमता दी है तो जरूर उनकी मदद करें। सेवाकेन्द्र का उदाहरण देते हुए दीदी ने बताया कि सेवाकेन्द्र के द्वारा भी कुछ स्थानों पर ऐसे प्रयास किए गए व सेवाकेन्द्र से जिन्होंने संपर्क किया उन्हें भी अन्न का सहयोग दिया गया।
जागरूकता, संतुलन, रचनात्मकता, साक्षी दृष्टा व उमंग-उत्साह से बढ़ायें मनोबल
लॉकडाउन का अर्थ ये नहीं कि हम निद्रा में, मोबाइल या टीवी देखने में अपना समय बिताएं। जागरूकता, संतुलन, रचनात्मकता, साक्षी दृष्टा व उमंग-उत्साह के आधार पर अपने मन को ऊर्जावान बनाएं। जागरूकता अर्थात् क्या करना है व क्या नहीं करना है इसकी समझ हो। मन के लिए ज्ञान व ध्यान तथा तन के लिए शु़़द्ध भोजन व आसन-प्राणायाम जरूर करें। संतुलन की आवष्यकता हर तरह से होती है जैसे भावना व विवेक की, रमणीकता व गंभीरता की, होष व जोष क आदि। प्रतिदिन की दिनचर्या में रचनात्मकता जरूरी है क्योंकि रोज वही कार्य करने से ऊब सकते हैं। साक्षीपन जरूरी इसलिए है क्योंकि जब किसी बात का यथार्थ निर्णय लेना होता है तो साक्षीदृष्टा की स्थिति हमें बहुत मदद करती है। नहीं तो किसी निर्णय में हमें बहुत वक्त लग जाता है। और उमंग-उत्साह से बड़े से बड़ा कार्य सरलता से संपन्न हो जाता है और मेहनत का पता भी नहीं लगता।
विल पॉवर बढ़ाने के लिए केवल क्लास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, जो हम बातें सुनते हैं उसकी गहराई में जाकर उसे जीवन में लागू भी करना होगा और स्वयं की शक्ति को पहचानना भी जरूरी है। पाणिनी का उदाहरण देते हुए दीदी ने बताया कि उन्हें बचपन में किसी हस्तरेखा शास्त्री ने कहा था कि उनके हाथों में विद्या की रेखा नहीं है लेकिन उन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर दृढ़ संकल्प की शक्ति से मेहनत की और संस्कृत व्याकरण के रचयिता बने जिनका संस्कृत व्याकरण हम आज तक पढ़ते हैं।
रोज रात को विटामिन-टी अर्थात् थैंक्स की गोली लें मतलब कि रात्रि में सोने से पूर्व परमात्मा का धन्यवाद जरूर करें क्योंकि परमात्मा ने हमें बहुत कुछ दिया है जो बहुतों को प्राप्त नहीं है। परमात्म प्रेम में स्वयं को चिंता व व्यर्थ चिंतन से आइसोलेट करके बोझमुक्त होकर उस ईष्वर की गोद में सो जाएं। व्यर्थ व नकारात्मक चिंतन से निर्णय शक्ति में कमी आती है जो हमारी एकाग्रता को कमजोर करती है। एकाग्रता न होने से हमें सफलता नहीं मिलती।
शुरूआत व अंत में सभी को मेडिटेषन का अभ्यास कराया गया। लगभग 40 लोगों ने इस क्लास का लाभ लिया। दीदी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान समय प्रति समय विभिन्न विषयों पर ऐसी क्लासेस का आयोजन किया जायेगा।

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