ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘‘जीवन का आधार – गीता सार’’ श्रृंखला प्रारंभ

सादर प्रकाषनार्थ
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गीता ज्ञान का मुख्य उद्देश्य दैवीय गुणों व संस्कारों की पुनर्स्थापना
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘‘जीवन का आधार – गीता सार’’ श्रृंखला प्रारंभ 

बिलासपुर, टिकरापाराः- श्रीमद्भगवद् गीता सर्वशास्त्रमयी शिरोमणि है क्योंकि केवल एक यही शास्त्र है जिसमें भगवानुवाच लिखा है या यह भी कह सकते हैं कि गीता स्वयं भगवान के द्वारा गाया हुआ गीत है जो सारे संसार की आत्माओं के प्रति है क्योंकि वर्तमान समय अनिश्चितता का है और चुनौतियों से भरा है। आज व्यक्ति को हर समय किसी न किसी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों को पार करने के लिए कोई न कोई विधि ढ़ूंढ़ने की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य को लेकर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में सोमवार से ‘‘जीवन का आधार – गीता सार’’ श्रृंखला का आयोजन किया गया है। सेवाकेन्द्र प्रभारी मंजू दीदी जी एवं अन्य बहनों ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस श्रृंखला का विधिवत शुभारम्भ किया। दीदी ने कहा कि हमारा जीवन कैसा होना चाहिए, यह कला हमें श्रीमद्भगवद्गीता सिखाती है। अनेक उलझनों से भरे मनुष्य के मन को सही रास्ता मिल जाता है। यह गीताज्ञान मन को शक्ति देने वाला शक्तिशाली टाॅनिक है, जिससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ जाता है। गीता ज्ञान में सभी वेदों एवं उपनिषदों का सार समाया हुआ है। इसकी विषेषता है कि यह पवित्र धर्मशास्त्र किसी सम्प्रदाय विशेष के लिए न होकर सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए है। यही कारण है कि सारे संसार के लोगों ने गीता को समझने की कोशिश की है। जितनी भाषाओं में गीता का अनुवाद हुआ है उतना किसी भी पुस्तक का नहीं हुआ है।
दीदी ने बताया कि गीता ज्ञान की इस श्रृंखला के माध्यम से स्वयं की उलझन, परेशानियां सुलझेंगी, आध्यात्मिक उन्नति होगी जिससे हम दूसरों को प्रेरित भी कर सकते हैं व उनकी समस्याओं का समाधान भी कर सकेंगे।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) की 55वीं पुण्यतिथि मनाई गई…

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प्रेम व शान्ति की अवतार थीं मम्मा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) की 55वीं पुण्यतिथि मनाई गई…
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बिलासपुर, टिकरापाराः- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी (मम्मा) की 55वीं पुण्यतिथि मनाई गई। टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी व राजकिशोर नगर, मस्तूरी, नरियरा व बलौदा की बहनों ने मम्मा के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मंजू दीदी ने मम्मा के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला एवं उनकी विषेषताएं सुनाई। जिसमें सेवाकेन्द्र के भाई-बहनें ऑनलाइन जुड़े रहे व घर से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। सेवाकेन्द्र के बाबा की कुटिया प्रांगण में लगाए गए अंगूर की बेल पर लगे हुए अंगूर का आज मम्मा के निमित्म भोग लगाया गया।
कमजोरियों को महसूस कर परिवर्तन करें – मम्मा
मातेश्वरी जी कहते थे इस ज्ञान मार्ग में चलना अर्थात् पुराने बुरे संस्कारों का त्याग जरूरी है। यदि परिवर्तन नहीं तो अपनी कमजोरियों को महसूस कर परिवर्तन जरूर करें। दीदी ने बताया कि मम्मा ने कभी भी यज्ञवत्सों की गलतियों या कमियों को फैलाया नहीं। गलतियों को दूर करने के लिए शिक्षा जरूर दी, लेकिन मन पर कभी न रखा। मम्मा के जीवन में गंभीरता व हर्षितमुखता का गुण एक साथ देखने को मिलता था। गंभीरता के कारण समाने, समेटने और सहनशीलता के गुण के कारण मम्मा प्रेम व शांति की अवतार थीं तथा क्रोध व आवेश से बिल्कुल मुक्त थीं।
स्व के प्रति अटेंशन होगा तो शिक्षाएं धारण भी होंगी – मंजू दीदी
रोज के सत्संग अर्थात् ज्ञानमुरली में दिए गए परमात्मा की श्रीमत पर मम्मा एक्यूरेट चलती थीं। इसलिए बहुत जल्द ही उन्होंने सम्पूर्णता को प्राप्त किया। मम्मा की शिक्षाएं व विशेषताएं हम सभी सुनते भी हैं वर्णन भी करते हैं और धारण भी करना चाहते हैं लेकिन कर्मक्षेत्र में हमारा अटेंशन कम हो जाता है।  मम्मा ने जैसे स्वमान में रहते हुए ज्ञान को जीवन में धारण किया ऐसे यदि हम भी जब शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारेंगे तब ही जीवन की सार्थकता होगी।
दीदी ने बताया कि बाबा ने मम्मा को किसी सेवाकेन्द्र संभालने नहीं भेजा बल्कि मुख्यालय में बड़े संगठन में रखा। वहीं से मम्मा देश के अनेक स्थानों पर ईश्वरीय सेवार्थ गईं। देखा जाए तो त्याग, तपस्या व सेवा जो पिताश्री ब्रह्माबाबा की विशेषता थी वही विशेषता मम्मा की भी थी। मम्मा का लौकिक नाम ओमराधे था उन्होंने 24 जून 1965 को सम्पूर्णता को प्राप्त कर अपने पार्थिव शरीर का त्याग किया।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया विश्व शांति के लिए नुमाशाम योग

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कार्यकुशलता व निर्णय शक्ति बढ़ाता है राजयोग – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया विश्व शांति के लिए नुमाशाम योग

बिलासपुर, टिकरापाराः- राजयोग को योगों का राजा कहा जाता है। इसमें सभी योगों का सार समाया हुआ है। यह योग हमारे मन से दूषित विचारों को दूर कर पावन बना देता है। वास्तव में राजयोग अंतर्जगत की एक यात्रा है। इसके माध्यम से हम अपने विचारों को एक सकारात्मक चिंतन की ओर ले जाते हैं और श्रेष्ठ दिशा देते हैं। जब हमारे विचार शुद्ध, पवित्र, दूसरों के लिए सुखदायी, शुभभावना-शुभकामना संपन्न होते हैं तो हमारी बुद्धि भी उसी अनुसार निर्णय देती है। बुद्धि द्वारा दिए गए निर्णय के आधार पर ही हमारी कर्मेन्द्रियां शरीर से कर्म करती हैं। राजयोग के माध्यम से हमें खुद की कमी-कमजोरियों को पहचानने व उन्हें दूर करने का मौका मिलता है। जब हम एकांत में बैठकर चिंतन करते हैं तो जीवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान मिलने लगता है। चिंतन श्रेष्ठ होने से मन की कार्यकुषलता बढ़ जाती है और कर्मों में प्रवीणता आने लगती है। जिससे तनाव, चिंता, दुख, हीनभावना, पश्चाताप और आत्मग्लानि कोसों दूर चली जाती है। राजयोग का अभ्यास किसी भी समय, किसी भी स्थान पर किया जा सकता है इसके लिए न उम्र का बंधन है और न जाति-पाति का। यह तो आत्म-दर्शन कराने वाला और राजायी पद दिलाने वाला सर्वश्रेष्ठ योग है।
ये बातें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित नुमाषाम योगसत्र में सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा कई वर्षों से हर माह के तीसरे रविवार को पूरे विश्व के 140 देशों में एक साथ और एक ही समय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता रहा है। इस दिन शाम 6.30 बजे सारे विष्व में सभी ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारियां मिलकर राजयोग मेडिटेशन के द्वारा सारे विश्व में पवित्रता और शान्ति के प्रकम्पन्न फैलाते हैं। रविवार शाम के सत्र में भी सभी बहनों ने व सभी साधकों ने अपने घर पर विश्व शान्ति के लिए राजयोग ध्यान का अभ्यास किया।

पांच दिवसीय योग-आसन-प्राणायाम ऑनलाइन वेबिनार का आज समापन हुआ।

18 जून से आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन योग शिविर का आज समापन हुआ। आज के सत्र में मंजू दीदी ने हाथ-पैर व गले के सूक्ष्म आसनों का भी अभ्यास कराया और कहा कि ये सूक्ष्म आसन शरीर के लचीलेपन को बनाए रखता है और कमर, पीठ, गर्दन, हाथ, पैर व घुटनों आदि के शुरूआती दर्द से तो मुक्ति दिला ही देता है। सही लाभ प्राप्त करने के लिए कपालभाति प्राणायाम को लगातार कम से कम 5 मिनट करना जरूरी है। यदि हम एक-एक, दो-दो मिनट में रूक-रूक कर अभ्यास करेंगे तो हमें लाभ नहीं मिलेगा। शुरूआती दौर में नए साधक भले ही एक-दो मिनट से आगे बढ़ें किन्तु लगातार 5 मिनट तक अवश्य पहुंचाएं।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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योग हमारी प्राचीन संस्कृति – ब्रह्मा कुमारी मंजू दीदी

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योग हमारी प्राचीन संस्कृति – ब्रह्मा कुमारी मंजू दीदी
योग भारत की धरोहर
त्योहार की तरह मनाया योग दिवस
ईश्वरीय परिवार के साथ डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर कराया गया योगाभ्यास

बिलासपुर, टिकरापाराः- छठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर प्रोटोकाॅल के अनुसार बहनों ने योगाभ्यास किया, साथ ही सेवा केन्द्र के नियमित साधक व नए साधकों ने भी आॅनलाइन वेबिनार के माध्यम से जुड़कर योगाभ्यास किया। इसमें आसन, प्राणायाम के अतिरिक्त मन के सषक्तिकरण के लिए सकारात्मक संकल्पों के आधार पर राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया। पूरे योग शिविर का संचालन सेवाकेन्द्र प्रभारी व छ.ग. योग आयोग की पूर्व सदस्य ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने किया। इस अवसर पर ब्र.कु. हेमवती, ब्र.कु. गायत्री, ब्र.कु. पूर्णिमा, ब्र.कु. ईश्वरी, ब्र.कु. श्यामा, ब्र.कु. नीता, योग प्रदर्शक गौरी बहन, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ एवं सक्रिय सदस्य शरद बल्हाल जी, सरिता बल्हाल, संदीप भाई व बंटी भाई उपस्थित थे। साथ ही आॅनलाइन जुड़े अनेक साधकों ने भी इसका लाभ लिया।
दीदी ने कहा कि तन से हम स्वस्थ रहें इसके लिए आसन, प्राणायाम और योग के प्रति जागरूकता जरूरी है साथ ही शरीर को हैल्दी डाइट भी चाहिए। उसी प्रकार मन के स्वास्थ्य के लिए हैल्दी डाइट है सकारात्मक विचार और एक्सरसाइज है मेडिटेशन। यदि एक ही दिन हम पाॅज़िटिव थिंकिंग, आसन, प्राणायाम, मेडिटेशन में कुछ समय बिताते हैं तो मन आनंदित हो जाता है यदि रोज की दिनचर्या में हम इसे अपना लेंगे तो हमारा मनोबल भी बढ़ेगा और तनाव, चिंता, अवसाद जैसी बीमारियां हमसे कोसों दूर रहेंगी। क्योंकि इन बीमारियों का कारण है किसी एक बात या बीती बात या भविष्य को लेकर बार-बार सोचना और जब हम सत्संग करते हैं तो हमें अच्छी-अच्छी बातें सुनने को मिलती हैं जिससे हम स्वतः ही पुरानी बातों से मुक्त हो जाते हैं।
दीदी ने जानकारी दी कि 18 जून से ही ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘योग एट होम एण्ड योग विद् फैमिली’ थीम के तहत आॅनलाइन योग शिविर का आयोजन किया गया है जो कल सोमवार 22 जून तक चलेगा।
उल्लेखनीय है कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा कई वर्षों से हर माह के तीसरे रविवार को पूरे विश्व के 140 देशों में एक साथ और एक ही समय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। इस दिन शाम 6.30 बजे सारे विश्व में सभी ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारियां मिलकर राजयोग मेडिटेशन के द्वारा सारे विश्व में पवित्रता और शान्ति के प्रकम्पन्न फैलाते हैं। आज शाम के सत्र में भी सभी बहनें विश्व शान्ति के लिए राजयोग ध्यान का अभ्यास करेंगी।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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योग अभ्यास का आरंभ शुद्ध संकल्पों व ईश्वर की याद से करें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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योग अभ्यास का आरंभ शुद्ध संकल्पों व ईश्वर की याद से करें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
आॅनलाईन क्लास के माध्यम से योग अभ्यास क्रम (प्रोटोकाॅल) के अनुसार कराया जा रहा योगाभ्यास

बिलासपुर, टिकरापाराः- योग का आरंभ शुद्ध संकल्पो से ईश्वर की प्रार्थना से करना चाहिए क्योंकि इससे मन की शांति के लिए सहायक वातावरण बनता है। हमें अपने मन को हमेशा संतुलित रखना है, इसमे ही हमारा आत्मविकास समाया हुआ है, इसके साथ ही सभी का एक ही भाव हो, कि हम स्वयं के प्रति, कुटुम्ब, कार्य, समाज, एवं विश्व के प्रति शांति, आनंद एवं स्वास्थ्य के प्रति भी सभी को जागरूक करें। योगाभ्यास शांति और आनंद के वातावरण में शान्त शरीर और मस्तिष्क के साथ खाली पेट या हल्के पेट करना चाहिए। यदि कमजोरी महसूस हो तो गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पी लें। शारीरिक गतिविधियों की सहजता के लिए हल्के और आरामदायक सूती कपड़ों को प्राथमिकता दें। कोई पुरानी बीमारी, दर्द या हृदय संबंधी समस्या होने पर योगाभ्यास करने से पूर्व किसी चिकित्सक या योग चिकित्सक से परामर्ष अवश्य करें। योग अभ्यास धीरे-धीरे, तनावमुक्त स्थिति में, शरीर और श्वांस की जागरूकता के साथ किया जाना चाहिये। सांस को तब तक न रोकें जब तक ऐसा करने के लिए न कहा जाये। शरीर को कसा हुआ न रखें व किसी अभ्यास को झटके के साथ न करें। अभ्यासों को अपनी क्षमताओं के अनुसार करें। सत्र का अंत गहन मौन या शांति पाठ से करें। अभ्यास सत्र के बीस-तीस मिनटों के उपरान्त ही भोजन या स्नान करना उचित होगा।
ये बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘योग एट होम एण्ड योग विद् फैमिली’ थीम के तहत आयोजित  आॅनलाइन योग शिविर का संचालन करते हुए छ.ग. योग आयोग की पूर्व सदस्य एवं सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। दीदी ने बताया कि यदि हम तीन चार दिनों तक सामान्य योग अभ्यास क्रम (प्रोटोकाॅल) के अनुसार योगाभ्यास करेंगे तो हम सही तरह से सीख जायेंगे व 21 जून को पूरे विश्व के साथ योग करने में हमें कोई असहजता नहीं होगी।
बहनों व साधकों ने किया आठ पदों पर योगाभ्यास
दीदी ने प्रोटोकाॅल के अनुसार सेवाकेन्द्र की बहनों व आॅनलाइन जुड़े साधकों को योग अभ्यास कराया जिसमें प्रार्थना, षिथिलिकरण अभ्यास, खड़े होकर, बैठकर, पेट के बल लेटकर, पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले योगासन, कपालभाति, अन्य प्राणायाम, ध्यान, संकल्प एवं शांतिपाठ शामिल थे।
दीदी ने बताया कि यूं तो प्रोटोकाॅल की विधि इन्टरनेट पर उपलब्ध है लेकिन फिर भी किसी को पुस्तिका निःषुल्क चाहिए तो वे टिकरापारा स्थित सेवाकेन्द्र में सम्पर्क कर सकते हैं।

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योग एट होम एण्ड योग विद् फैमिली थीम के तहत योग अभ्यास जारी

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शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आसन प्राणायाम व मानसिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक चिंतन व मेडिटेषन जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
योग एट होम एण्ड योग विद् फैमिली थीम के तहत योग अभ्यास जारी
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र की बहनें कर रहीं योगाभ्यास

बिलासपुर, टिकरापाराः- 21 जून का दिन हमारे लिए बहुत विषेष दिन है जब भारत के योग को पूरे विष्वभर में स्वीकार किया गया। इसमें शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सामान्य योग अभ्यास क्रम तक ही सीमित न रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान, सत्संग एवं सात्विक आहार को भी शामिल किया गया है।
सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने बताया कि हर वर्ष सार्वजनिक रूप से योग षिविर आयोजित किये जाते रहे हैं किन्तु इस वर्ष ‘‘योग एट होम एण्ड योग विद् फैमिली’’ के तहत सेवाकेन्द्र पर बहनों के साथ योग अभ्यास किया जा रहा है। ध्यान, सत्संग एवं सात्विक आहार तो जीवनभर के लिए दिनचर्या में शामिल हैं ही।
कल गुरूवार से आॅनलाइन योग षिविर का आयोजन किया जा रहा है….
दीदी ने जानकारी दी कि कल गुरूवार से योग के नए साधकों के लिए आॅनलाइन योग षिविर का आयोजन किया जा रहा है। षिविर का मुख्य उद्देष्य है कि 21 जून को योग अभ्यास के लिए हम पूर्ण रूपेण तैयार हो जाएं। यह योग दिवस एक दिन के लिए नहीं है बल्कि उस दिन जीवनभर योग को अपने जीवन में शामिल करने के लिए संकल्पित होने का दिन है।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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विष्व पर्यावरण दिवस पर टिकरापारा में रंगोली सजाकर व वटसावित्री व प्रकृति की वंदना की गई।

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मानसिक प्रदूषण ही पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य व मूल कारण है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
विष्व पर्यावरण दिवस पर टिकरापारा में रंगोली सजाकर व वटसावित्री व प्रकृति की वंदना की गई।
‘‘कोविड-19 की पुकार : प्रकृति से सद्व्यवहार’’ विषय पर हुई कार्यषाला
ऑनलाइन सत्संग में दिया गया मन की स्वच्छता व पृथ्वी को हरा भरा बनाने पर जोर
सेवाकेन्द्र के आनंद वाटिका प्रांगण में लगे 150 से अधिक पौधों का किया जा रहा पोषण
अंगूर की बेलों में लगे अंगूर के गुच्छे कर रहे आनंदित
वाटिका में औषधीय, फूल व फलदार, सजावटी पौधे शामिल

बिलासपुर, टिकरापाराः- आज विश्व पर्यावरण दिवस एवं वट सावित्री पूर्णिमा व्रत के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में कार्यषाला का आयोजन किया गया। जिसमें ‘‘कोविड-19 की पुकार : प्रकृति से सद्व्यवहार’’ विषय पर विचार मंथन हुआ व सेवाकेन्द्र के आनंद वाटिका प्रांगण में रंगोली सजाकर बरगद के पौधों व प्रकृति की वंदना की गई।
सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि पर्यावरण के सभी तत्वों के प्रदूषण का मुख्य व मूल कारण मन का प्रदूषण है। हमारे मन के विचारों व ईर्ष्या, घृणा, वैर, विरोध, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे विकारों का पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसलिए हमें अपने मन की भावनाओं व विचारों को शुद्ध, शांत व विकारमुक्त बनाना जरूरी है। इसके लिए स्वयं को समय देना, सकारात्मक चिंतन करना, प्रकृति के सानिध्य में मेडिटेषन से उन्हें अच्छे प्रकम्पन्न देने की आवष्यकता है। इसके लिए संस्था के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग व सोषल एक्टिविटी ग्रुप के माध्यम से विष्वभर के सेवाकेन्द्रों में समय प्रति समय विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
पर्यावरण की शुद्धता के लिए कोई न कोई विधि जरूर अपनाएं
दीदी ने आगे कहा कि आज सभी को पता है कि प्रकृति का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। भक्ति में वट सावित्री की पूजा का एक यह भी महत्व है कि एक वट का वृक्ष लगभग हजार लोगों के लिए प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदान करता है। इसलिए प्रकृति की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। एक वृक्ष चार व्यक्तियों को जीवन भर के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है। अतः यदि हम एक वृक्ष काटते हैं तो हम चार व्यक्ति को मार देते हैं इसके विपरीत यदि हम एक वृक्ष लगाते और उसकी रक्षा करते हैं तो चार व्यक्ति को जीवनदान देते हैं। हम कई विधि अपनाकर पर्यावरण के लिए योगदान दे सकते हैं। जैसे कोई त्योहार, सालगिरह, व्रत, पूजा इत्यादि अवसर पर किसी को कोई गिफ्ट देना हो, वो जरूर दें लेकिन साथ ही एक पौधा भी उपहार में जरूर दें ऐसे ही स्वयं के सालगिरह के मौके पर भी एक वृक्ष लगाकर उसे जीवित रखने, देख-रेख करने के लिए संकल्पित जरूर हों।
प्राकृतिक संतुलन को न बिगाड़ें – शरद बल्हाल
इस अवसर पर उपस्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय सदस्य शरद बल्हाल जी ने कहा कि प्रकृति के दोहन से पृथ्वी का गुरूत्वाकर्षण बल कम होता जा रहा है। आज मनुष्य प्रकृति का दोहन इस प्रकार कर रहा है जिसके लिए उसके जीवन में पश्चाताप के अलावा और कुछ नहीं बचेगा, जिस प्रकार मुर्गी और सोने के अण्डे की कहानी में मुर्गी के मालिक को पश्चाताप् के अतिरिक्त कुछ नहीं बचा। चूंकि प्राकृतिक संतुलन को हमने ही बिगाड़ा है इसलिए सुधारना भी हमारा ही कर्तव्य है। प्रकृति को बिगाड़ने व फिर से उसे बनाने में समय, ऊर्जा व धन सभी का व्यय हो रहा है। अतः अब से हमें ध्यान रखना है कि प्रकृति को हानि न पहुंचाये।
प्रतिदिन सायं आयोजित ऑनलाइन सत्संग में जुड़े अनेक लोगों को भी मंजू दीदी जी ने ‘पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं-आओ पेंड़-पौधे लगाएं’ का नारा लगाते हुए संदेश दिया कि उक्त उपायों को अपनाकर सभी भाई-बहनें  पर्यावरण का मित्र जरूर बनें और किसी न किसी प्रकार से पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचायें।
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