अपोलो हाॅस्पीटल स्टाफ के लिए दो दिवसीय आध्यात्मिक सत्र का आयोजन, ब्रह्माकुमारीज़ को किया आमंत्रित…

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
दवा के साथ दया व दुआ से करें लोगों को स्वस्थ – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
मन की थकावट दूर करने का उपाय है मेडिटेशन
अपोलो हाॅस्पीटल स्टाफ के लिए दो दिवसीय आध्यात्मिक सत्र का आयोजन, ब्रह्माकुमारीज़ को किया आमंत्रित…
दीदी ने रिलैक्सेशन मेडिटेशन कराकर मन को शांत करने की विधि बताई
डाॅक्टर्स व हाॅस्पीटल स्टाफ की सेवाओं को प्रोत्साहन देकर बढ़ाया उत्साह

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बिलासपुर, टिकरापाराः- दिनभर के कार्य के तनाव से हम थक जाते हैं जिसके फलस्वरूप क्रोध, रोब व चिडचिड़ेपन के शिकार हो जाते हैं। हम गुस्सा आदि करना भी नहीं चाहते व ये सब करने के बाद हमें अच्छा भी नहीं लगता। इन्हें ठीक करने के लिए हमें स्वयं से व सबसे दिल से प्यार करना जरूरी है दिल का भाव हृदय नहीं है हृदय शरीर का एक अंग है, दिल का भाव तो आत्मिकता से है। मेडिटेशन सशक्त माध्यम है मन व तन की थकान दूर करने का, क्योंकि मेडिटेशन हमें ईश्वर से, स्वयं से व सबसे प्रेम करना सिखाता है। विज्ञान ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि पांच मिनट का बाॅइलिंग टेम्पर पर गुस्सा हमारी दो घण्टे कार्य करने की क्षमता को नष्ट कर देता है और 20 मिनट का पाॅवरफूल मेडिटेषन हमारी आठ घण्टे की थकान को दूर कर देती है।
उक्त बातें अपोलो हाॅस्पीटल प्रबंधन द्वारा हाॅस्पीटल स्टाफ के मन के सशक्तिकरण व तनाव प्रबंधन के लिए आयोजित दो दिवसीय मेडिटेशन सेशन को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि चिकित्सक को भगवान का दूसरा रूप कहते हैं। आपको दुआ कमाने के लिए कोई अलग कार्य नहीं करना पड़ता, आपका पेशा ही दुआ कमाने का साधन है, सेवा कार्य है और यह सेवा अद्वितीय है। जिस बीमारी में दवा काम नहीं करता उसके लिए दुआ करने कहा जाता है। अतः आप भी जब मरीजों को दवा दें तो मन में दया व दुआ की भावना भी रखें इससे रोग जल्दी ठीक होगा और रिटर्न में आपके खाते में भी दुआ जमा होगी।
दीदी ने सभी को थकावट मिटाने के लिए रिलैक्सेशन मेडिटेशन का प्रैक्टिकल अभ्यास कराकर मन की शांति की अनुभूति कराई और प्रतिदिन कम से कम पांच मिनट मेडिटेशन करने की हिदायत दी।
कार्डियोथोरेसिक एण्ड वस्कुलर सर्जन भ्राता डाॅ. अनुज कुमार डाॅ. अनुज कुमार ने कहा कि अपोलो संस्थान एक परिवार की तरह है जहां एक हाउसकीपिंग की भी उतनी ही अहमियत है जितनी एक डाॅक्टर की। हम सभी दिनभर अपने कार्यों में इतने व्यस्त होते हैं कि स्टेªस लेवल हाई होता है। इसी उद्देश्य से स्ट्रेस मैनेजमेन्ट को लेकर आज के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था वूमेन एम्पावरमेन्ट का साक्षात् उदाहरण है। यह संस्था केवल स्प्रिचुअल नहीं है बल्कि समाजसेवा एवं अन्य कार्यों में भी इनका योगदान रहता है। आध्यात्म के माध्यम से अपने परिवार, कार्य या कार्पोरेट स्तर पर भी हम अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभा सकते हैं। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन एवं अपोलो हाॅस्पीटल के सभी विभागों के तीन-तीन सदस्य उपस्थित थे। हाॅस्पीटल के असिस्टेंट मैनेजर भ्राता अजय जाडे जी ने कार्यक्रम का संचालन किया। दीदी ने संस्था की ओर से डाॅ. अनुज कुमार व अजय जाडे जी को ईष्वरीय सौगात दी।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

भगवान शिव का प्रिय महीना है श्रावण – ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
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भगवान शिव का प्रिय महीना है श्रावण – ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ राजकिशोर नगर सेवाकेन्द्र में श्रावण सोमवार मनाया गया…
शिव-अनुराग भवन में की गई शिव की आराधना

ब्रह्माकुमारीज़ राजकिशोरनगरः- श्रावण महीना भगवान शिव का अतिप्रिय महीना है। भगवान शिव स्वयं अपने कण्ठ पर विष धारण कर हमें सोमरस अर्थात् ज्ञान रूपी अमृत का पान कराते हैं इसलिए भक्तजन श्रावण माह के हर सोमवार को शिव जी की विशेष पूजा करते हैं। परमपिता परमात्मा शिव के साथ आत्मिक संबंध जोड़कर जब हम अपने को पवित्र बंधन में बांधते हैं तब सर्वशक्तिवान शिव पिता हमारे लिए शत् प्रतिशत सुख-शान्ति, समृद्धि संपन्न सतयुगी संसार की रचना करते हैं। पवित्रता का प्रतीक रक्षाबंधन, समर्पण का प्रतीक नारियल पूर्णिमा, सतयुग के आगमन का प्रतीक जन्माष्टमी आदि महत्वपूर्ण त्यौहार इसी महीने में मनाए जाते हैं। वास्तव में वर्तमान समय सारी सृष्टि का श्रावण माह ही है इसलिए इस पावन महीने में परमप्रिय शिव परमात्मा का सत्य परिचय जान उनसे अपना संबंध और बुद्धियोग जोड़ें।
उक्त बातें श्रावण सोमवार के अवसर पर स्मृति-वन के निकट, राजकिशोरनगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़, शिव-अनुराग भवन में सजाए गए शिव-नंदी व शंकर जी की मूर्ति की आराधना करते हुए राजकिशोर नगर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी ने कही। आपने बतलाया कि राजकिशोर नगर के शिव अनुराग भवन व टिकरापारा के आनंद वाटिका में सभी साधकों और शिवभक्तों के लिए सावन के हर सोमवार को प्रातः 7 से 12 व शाम 4 से 8 बजे तक शिव आराधना के लिए सेवाकेन्द्र खुला रहेगा।
इस अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी, राजकिशोर नगर की अन्य बहनें व अन्य माताएं उपस्थित रहीं। दिन भी शिव पूजन के लिए लोग आते रहे।

सत्गुरू के संग से छूट जाती हैं बुराईयां – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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सत्गुरू के संग से छूट जाती हैं बुराईयां – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
सत्संग करना ही सत्गुरू का संग है
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में गुरू पूर्णिमा का पर्व मनाया गया…

बिलासपुर, टिकरापाराः- गुरू एक तेज हैं, जिनके आते ही अज्ञान के अंधकार समाप्त हो जाते हैं, गुरू वो मृदंग हैं जिनके बजते ही अनहद नाद सुनने शुरू हो जाते हैं, गुरू वो ज्ञान हैं जिनके मिलते ही भय समाप्त हो जाता है, गुरू वो दीक्षा है, जो यदि सही मायने में मिल जाए तो भवसागर पार हो जाते हैं, गुरू वो सत् चित् आनंद है जो हमें हमारी पहचान देते है। गुरू वो बांसुरी है जिसके बजते ही मन और शरीर आनंद अनुभव करता है, गुरू वो अमृत है जिसे पीकर कोई कभी प्यासा नहीं रहता है, गुरू वो कृपा है जो सिर्फ अच्छे शिष्यों को विशेष रूप से मिलती हैं और कुछ उन्हें पाकर भी समझ नहीं पाते हैं। गुरू अनमोल खजाना हैं। आज गुरूओं, सन्यासियों व महापुरूषों की पवित्रता के बल पर ही यह धरती थमी हुई है। यदि ऐसे पावन व्यक्ति संसार में न होते तो अपवित्र कर्म अपने चरम पर पहुंच जाता और सारी दुनिया विकारों की आग में कब की जल चुकी होती। जिस प्रकार सुर के बिना तान नहीं मिल सकती उसी प्रकार गुरू के बिना ज्ञान नहीं मिल सकता। गुरूओं द्वारा प्राप्त ज्ञान जीवन के किसी न किसी मोड़ पर काम जरूर आता है। यदि मन में तीव्र इच्छा हो तो गुरूओं की आज्ञा का पालन करते-करते  एक समय भक्ति की पूर्णता का समय आता है और परमसत्गुरू परमात्मा की पहचान मिलती है और उनसे सत्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। वर्तमान समय संगमयुग पर अवतरित परमपिता, परमशिक्षक, परमसत्गुरू परमात्मा शिव के संग से हमारी सभी बुराईयां धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं और हमें मुक्ति व जीवनमुक्ति की प्राप्ति होती है।
उक्त बातें गुरू पूर्णिमा के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित सत्संग में साधकों को आॅनलाइन सम्बोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
जिनसे भी सीखने को मिले वे गुरू की तरह…
दीदी ने कहा कि हम जिनसे भी कुछ सीखते हैं वे भी हमारे गुरू की तरह हैं। 5 वर्ष की आयु तक हम सबसे ज्यादा तो अपनी मां से ही सीख लेते हैं इसलिए मां को प्रथम गुरू भी कहते हैं। दत्तात्रेय के भी 24 गुरू थे क्योंकि वे भी जिनसे कुछ सीखते उन्हें अपना गुरू मानते थे। दीदी ने बतलाया कि ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने भी परमात्मा की प्राप्ति के लिए 12 गुरूओं का सानिध्य प्राप्त किया। दीदी ने स्वयं के जीवन का तीन गुरूओं व परमसत्गुरू प्राप्ति का अनुभव भी साझा किया। अंत में बहनों ने सत्गुरू परमात्मा शिव को भोग स्वीकार कराया।