सर्वआत्माओं के परमपिता परमात्मा शिव का प्रिय महीना है श्रावण

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सर्वआत्माओं के परमपिता परमात्मा शिव का प्रिय महीना है श्रावण
सावन मास में शिव-आराधना के लिए ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेन्द्र में आने लगे श्रद्धालु
टिकरापारा के आनंद वाटिका व राजकिशोर नगर के शिव-अनुराग भवन में दूध, मधु व जल से किया गया शिव जी का अभिषेक

बिलासपुर टिकरापारा/राजकिशोरनगर :- भगवान शिव देवों के देव व हम सभी आत्माओं के परमपिता हैं। वे स्वयं हमारी बुराईयों रूपी विष को धारण हमें सोमरस अर्थात् ज्ञान रूपी अमृत का पान कराते हैं इसलिए सभी भक्त श्रावण मास के हर सोमवार को शिव जी की विशेष पूजा करते हैं। हम भी उनसे आत्मिक संबंध जोड़कर उनके बंधन में बंध जाते हैं तब वे भी हमारे लिए संसार को सुख-शान्ति-समृद्धि से संपन्न बनाते हैं। सावन का महीना कल्प के संगमयुग के समान है जहां आत्माओं का मिलन अपने पिता परमात्मा शिव से होता है। इसलिए भक्त और भगवान का मिलन इस समय ही होता है और इसी कारण भगवान शिव का यह प्रिय महीना है।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा के आनंद वाटिका व राजकिशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में स्थित शिव जी के मंदिर में सेवाकेन्द्र की बहनों व श्रद्धालुओं के द्वारा भोलेनाथ की पूजा की गई व दूध, मधु व जल से अभिषेक किया गया। टिकरापारा में शशी बहन, गायत्री बहन, पूर्णिमा बहन, श्यामा बहन व राजकिशोर नगर में रूपा बहन व समीक्षा बहन सहित साधक गण उपस्थित रहे। बहनों ने बताया कि सेवाकेन्द्र में शिव की वाणी ज्ञान मुरली सुबह व शाम को प्रतिदिन सुनाई जाती है व इस श्रावण मास में हर सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए श्रद्धालुजन आ सकते हैं।

खुले विचारों से हम सत्गुरू परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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खुले विचारों से हम सत्गुरू परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में तीन दिन तक मनाया जा रहा गुरू पूर्णिमा का पर्व
आज गुरूवार को परमसत्गुरू परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया…
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बिलासपुर, टिकरापाराः- भगवान कहते हैं कि संसार में पवित्रता का महत्व गुरूओं, सन्यासियों व महात्माओं ने बनाए रखा है और कलियुग का पतन होने से बचाया है। गुरू के अंदर गुरूर नहीं होता और वे हमारे अंदर के गुरूर को भी समाप्त करते हैं और हमें अज्ञान अंधियारे से ज्ञान प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
उक्त बातें गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। सभी गुरूओं के प्रति सम्मान व आभार व्यक्त किया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि हम अपने मन को खुले विचारों वाला रखेंगे तो गुरूओं से ज्ञान प्राप्त करते-करते परम सत्गुरू ईश्वर तक पहुंच सकते हैं। हमें हर प्रकार का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए चाहे वह राजयोग की शिक्षा हो, आसन-प्राणायाम की शिक्षा हो या किसी बच्चे से किसी बात की शिक्षा हो।
दीदी ने कहा कि गुरू से ज्ञान लेने के लिए किसी को छोड़ने और छूटने की बात नहीं होती। ये तो हमारी बुद्धि की विशालता की बात होती है। सत्गुरू ईश्वर तक पहुंचने के लिए हमें सभी गुरूओं का, सभी आध्यात्मिक संस्थाओं का सम्मान करना ही चाहिए। इसी उद्देश्य से मुख्यालय माउण्ट आबू में हर वर्ष संत सम्मेलन आयोजित करके दादीजी सभी संत, महात्माओं को उनकी पवित्रता, त्याग व तपस्या के लिए आदर, सत्कार व सम्मान करते हैं।
सत्संग के पूर्व परमसत्गुरू परमात्मा व सभी गुरूओं को भोग स्वीकार कराया गया इसके बाद सभी ने परमात्मा की वाणी ‘ज्ञान मुरली’ सुनी। इस आध्यात्मिक मार्ग में सदा ईश्वर के बने रहने, मानव को देवतुल्य बनाने की सेवा में व्यस्त रखने व अपने विचार व व्यवहार को शुद्ध व प्रेमपूर्ण बनाए रखने की सतत प्रेरणा देने वाली मंजू दीदी जी को सभी साधकों की ओर से बहनों ने तिलक लगाकर व पुष्पगुच्छ भेंट कर गुरू पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी।

भगवान हैं सुप्रीम चिकित्सक जो श्रेष्ठ कर्म व दुआओं से ही करते हैं सभी को स्वस्थ

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त्याग, सेवा व बलिदान की प्रतिमूर्ति हैं चिकित्सक – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
डॉक्टर की मुस्कान से बढ़ जाता है पेशेन्ट का मनोबल
भगवान हैं सुप्रीम चिकित्सक जो श्रेष्ठ कर्म व दुआओं से ही करते हैं सभी को स्वस्थ… आत्माओं को पांच विकारों की बीमारी से मुक्त कर बनाते हैं पवित्र
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर सभी चिकित्सकों को दी शुभकामनाएं

 

 

देवांगन मोहल्ला, बलौदाः- पेशेन्ट को संभालने के लिए बहुत पेशेन्स की आवश्यकता होती है। उनकी सेवा करने वाले डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ के अंदर बहुत धैर्य होता है। जो व्यक्ति किसी पर विश्वास नहीं करता वह डॉक्टर के कहने पर दवाओं को मन से स्वीकार कर विश्वास के साथ खाकर ठीक हो जाता है। भगवान के बाद का स्थान एक चिकित्सक का माना जाता है क्योंकि वे हमारे जीवन की रक्षा करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
ये बातें राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर देवांगन मोहल्ला, बलौदा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ पाठशाला में ऑनलाइन क्लास में शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ बिलासपुर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही।
ईश्वर हैं परमचिकित्सक….
दीदी ने कहा जब दवा काम नहीं करती तब चिकित्सक कहते हैं कि दुआ करो क्योंकि सुप्रीम चिकित्सक परमात्मा दुआओं से हमें ठीक कर देते हैं। दुआ का खाता जमा करने का साधन हैं श्रेष्ठ कर्म। हम धन कमाने पर जोर देते हैं लेकिन दुआ कमाने पर नहीं इसलिए ऐसी कमाई करें जिसमें धन के साथ दुआएं भी मिले। सूक्ष्मता में जाएं तो ईश्वर सुप्रीम सर्जन भी हैं जो वर्तमान समय हम आत्माओं को पांच विकारों की बीमारी से छुड़ाकर पवित्र बनाते हैं। जैसे किसी अच्छे डॉक्टर की पहचान तब होती है जब हम उनसे इलाज कराकर ठीक होते हैं। उसी प्रकार परमात्मा का अनुभव करने के लिए हमें उनके सानिध्य में जाना होगा अर्थात् सत्संग व ध्यान में कुछ समय देना होगा तब ही हम उनसे खुशी, शांन्त, आनन्द आदि सर्व प्राप्तियों का अनुभव कर सकेंगे।
चिकित्सक तन के साथ मन को भी मजबूत बनाएं यह समय की मांग है…
दीदी जी ने सभी चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वे रोगी के तन के साथ मन को भी मजबूत बनाएं क्योंकि आज व्यक्ति शारीरिक से ज्यादा मानसिक रोग से पीड़ित है। भय, चिंता, तनाव आदि मन की कमजोरियों से आत्मा की शक्ति क्षीण हो गई है अतः आज चिकित्सकों को डबल डॉक्टर की भूमिका अदा करने की जरूरत है।
डॉक्टर की मुस्कान व व्यवहार से ही बढ़ जाता है पेशेन्ट का मनोबल ….
चिन्तित पेशेन्ट को पेशेन्स देने का कार्य एक डॉक्टर से बढ़कर कोई नहीं कर सकता। उनके मुस्कुराहट व मनोबल बढ़ाने वाले व्यवहार से ही पेशेन्ट की आधी बीमारी खत्म हो जाती है। कई बार मरीज के संबंधी बार-बार प्रश्न पूछते, चिंतित होते इसमें डॉक्टर को बहुत धैर्य के साथ जवाब देकर सबको संतुष्ट करना पड़ता है।
स्वयं की बैट्री चार्ज करने अर्थात् अपनी आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए दीदी ने कहा कि सभी डॉक्टर्स को अपना ख्याल रखना चाहिए और ख्याल रखते भी हैं लेकिन कई बार व्यस्तता अधिक होने के कारण अपना ख्याल नहीं रख पाते। इसलिए सभी को मेडिटेशन व पॉजिटिव थिंकिंग क्लास के लिए कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए।
दीदी ने जानकारी दी कि कोरोना काल के पश्चात् पुनः बलौदा में क्लासेस शुरू कर दी गई हैं।

पवित्रता, गंभीरता, वात्सल्य, ममता की मूर्ति और गुणों की खान थीं मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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पवित्रता, गंभीरता, वात्सल्य, ममता की मूर्ति और गुणों की खान थीं मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की 56वीं पुण्यतिथि मनाई गई
सभी बहनों व साधकों ने मातेश्वरी जी को अपनी प्रेमांजलि अर्पित की।
 
क्लास लिंक- https://youtu.be/Ud2Rp5zLkiY
बिलासपुर टिकरापाराः- ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आज संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की 56वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर मातेश्वरी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि मातेश्वरी जी को सभी ब्रह्मावत्स प्यार से मम्मा कहते हैं। मम्मा का बड़ों के प्रति हांजी का पाठ पक्का था, वे रेग्युलर व पंक्चुअल थी। परमात्म श्रीमत पर बिना किसी संशय या किसी प्रश्न के एक्यूरेट चलती थीं जरा भी संशय नहीं रहता। इससे हर सेवा में सफलता मिलती। मम्मा अहंकार व मैंपन से मुक्त थीं वे किसी भी सफलता, विशेषता व गुणों को प्रभु प्रसाद मानती थीं।
मम्मा के अन्य गुणों का वर्णन करते हुए दीदी ने कहा कि मम्मा मर्यादाओं में सदा एक्यूरेट रहीं, देह-अभिमान को समाप्त करने के लिए रूहानियत, स्वमान और ईश्वर से सर्व संबंधों का स्नेह जैसी विशेषताओं को उन्होंने धारण किया। उनकी वाणी में नम्रता, मधुरता व सच्चाई झलकती थी। उनका चित बिलकुल साफ था। कोई भी बात दिल में ऐसे समा लेती थीं जैसे वह बात हुई ही नहीं। स्नेह की शक्ति से दूसरों को परिवर्तित कर देना- ये बहुत बड़ी विशेषता रही। उनकी संकल्प शक्ति पॉवरफूल होने से उनकी वाणी भी बहुत प्रभावशाली थी। उनके चेहरे पर दिव्यता व सत्यता की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। उनके सामने आते ही उनकी पवित्रता की दृष्टि से कोई भी क्रोध करने वाली आत्मा शीतल हो जाती है।
मम्मा सदा अथक रहती। ब्रह्ममुहूर्त से पूर्व 2 बजे से उठकर तपस्या में मग्न रहती थीं। सबकी मातृवत पालना करते हुए भी थकती नहीं थी। सबके प्रति इतनी शुभभावना थी कि उनके अवगुणों को जानते भी उनके प्रति नफरत या घृणा न रखते हुए सदा कल्याण की ही भावना रहती थी। उनके पुरूषार्थ का मुख्य बिन्दु यही था कि एक बार की हुई गलती कभी दोहराती नहीं थी। शान्त स्वधर्म में रहते हुए वे दो स्लोगन सदा याद रखती थीं कि हर घड़ी अंतिम घड़ी और हुकुमी हुकूम चला रहा हम निमित्त बन कर रहे हैं।
इससे पूर्व आज प्रातः काल से ही बाबा की कुटिया व ज्ञानगंगा हॉल में योग साधना कार्यक्रम चलता रहा। महावाक्य श्रवण के पश्चात् मातेश्वरी जी के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया। तत्पश्चात् सभी ने परमात्मा की याद में भोग ग्रहण किया। सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखने के लिए प्रातः 6 से 8, 10.30 से 12 व शाम 6.30 से 8.30 बजे तक तीन पालियों में कार्यक्रम रखा गया।
दीदी ने जानकारी दी कि शांति अनुभूति, तनावमुक्ति, मन को एकाग्र करने, निःशुल्क राजयोग मेडिटेशन सीखने के लिए उत्सुक भाई-बहनें दीदीयों से समय लेकर सेवाकेन्द्र आ सकते हैं ताकि भीड़ एकत्रित न हो।

योग, ध्यान के साथ देशभक्ति की भावना व नैतिक मूल्य अपनाकर योग दिवस को करें सार्थक

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योग, ध्यान के साथ देशभक्ति की भावना व नैतिक मूल्य अपनाकर योग दिवस को करें सार्थक
टिकरापारा में ‘‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’’ विषय पर वेबिनार का आयोजन
विभिन्न संस्थाओं के प्रमुख हुए शामिल, रखे विचार व दी शुभकामनाएं
लाइव कार्यक्रम की लिंक –  https://youtu.be/s5vJLY2Dchc

बिलासपुर टिकरापाराः- 7वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर ‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया गया। साथ ही शहर के गायत्री परिवार, पतंजलि, आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख व समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने योग के विषय में अपनी प्रेरणाएं व शुभकामनाएं प्रेषित की। ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कार्यक्रम का संचालन किया व योग प्रशिक्षण प्राप्त बहनों ने योगाभ्यास किया। ऑनलाइन जुड़े लगभग 200 लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
दीदी ने कहा कि प्रधानमंत्री भ्राता मोदी जी ने विश्व में योग को प्रत्यक्ष किया। जिसमें तन के लिए आसन प्राणायाम के साथ मन के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया है और ध्यान व सत्संग को भी इसमें महत्वपूर्ण रूप से शामिल किया। इसी उद्देश्य को लेकर इस वेबिनार का विषय चुना गया। आसन, प्राणायाम, नैतिक मूल्य, देशभक्ति की भावना, सकारात्मक चिंतन व ध्यान को अपनाकर हम विश्व योग दिवस सार्थक कर सकते हैं।
पूरे विश्व को आरोग्य प्रदान कराना हम सबका लक्ष्य…संजय अग्रवाल
छ.ग. योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष व पतंजलि के केन्द्रीय प्रभारी भ्राता संजय अग्रवाल ने कहा कि योग दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाएं और यह संकल्प लें कि प्रतिदिन हम आधे से एक घण्टा योग जरूर करेंगे। क्योंकि जब योग करेंगे-रोज करेंगे तब ही स्वस्थ रहेंगे और मस्त रहेंगे और चेहरे की मुस्कुराहट बनी रहेगी। योग के विभिन्न आयामों को प्रशिक्षकों से जरूर सीखें और अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। इससे मन की परेशानियां और तन के रोग ठीक हो जाते हैं। सभी संस्थाओं का एक ही उद्देश्य सारे विश्व को स्वास्थ्य एवं आरोग्य प्रदान करना।
संतुलित जीवन के लिए तन व मन का स्वास्थ्य जरूरी…सी.पी.सिंह
गायत्री परिवार के प्रमुख भ्राता सी.पी. सिंह जी
 ने कहा कि मानवीय काया में दो तत्व मुख्य हैं तन व मन। इन दोनों तत्वों के द्वारा शरीर की सारी क्रियाएं संचालित होती हैं अतः इन्हें स्वस्थ रखकर ही संतुलित जीवन जीया जा सकता है। इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी खयाल रखना होगा। अपने को जानने का प्रयास ही आध्यात्मिकता है। साथ ही हमें सामाजिक उत्तरदायित्वों को भी निभाना है।
सबसे बड़ा धन निरोगी काया- किरणपाल चावला
आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख प्रशिक्षक भ्राता किरणपाल चावला जी
 ने कहा कि मजबूत मन कमजोर शरीर को चला सकता है लेकिन यदि मन कमजोर है तो युवा शरीर भी कमजोर व रोगी बन जाता है। सबसे बड़ा धन निरोगी काया को माना जाता है क्योंकि स्वस्थ शरीर से ही हम सेवा, साधना, सत्संग कर सकते हैं व किसी के लिए उपयोगी बन सकते हैं और यही मानव जीवन का उद्देश्य है। योग के आठ अंग हैं इसमें सबसे पहले यम और नियम आते हैं जो हमें सीखाते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। कहते हैं ‘‘योग से ही होगा’’ हर समस्या का समाधान।
समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर के संयुक्त संचालक भ्राता एच. खलखो जी ने कहा कि जब से छ.ग. में योग आयोग की स्थापना हुई है तब से योग के सभी कार्यक्रमों में हमें ब्रह्माकुमारीज़ परिवार का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ इसके लिए हम संस्था के आभारी है।
विभाग से ही भ्राता प्रशांत मुकासे जी ने स्वस्थ सदा हमें रहना है…गीत के लाइनों के माध्यम से योग का संदेश दिया। साथ ही लेखा अधिकारी भ्राता जी.आर. चंद्रा जी ने भी शुभकामनाएं दी व कार्यक्रम के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। गायत्री परिवार के आचार्य भ्राता द्वारिका पटेल जी ने गीता में दिए योग व कर्मयोग की विवेचना की।

लाइव कार्यक्रम की लिंक –  https://youtu.be/s5vJLY2Dchc
कार्यक्रम विवरण (टाइमलाइन)
1. परमात्म स्मृति से कार्यक्रम की शुरूआत – 00ः04ः35
2. भ्राता सी.पी.सिंह जी, जिला प्रमुख, गायत्री परिवार, बिलासपुर – 00ः13ः05
3. भ्राता एच.खलखो जी, संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर – 00ः18ः40
4. भ्राता द्वारिका प्रसाद पटेल जी, आचार्य, गायत्री परिवार, बिलासपुर – 00ः20ः22
5. भ्राता प्रशांत मुकासे जी, समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर – 00ः25ः41
6. भ्राता जी.आर. चंद्रा जी, समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर – 00ः27ः12
7. भ्राता किरणपाल चावला जी, प्रमुख प्रशिक्षक, आर्ट ऑफ लिविंग, बिलासपुर – 00ः28ः34
8. भ्राता संजय अग्रवाल जी, पूर्व अध्यक्ष, छ.ग. योग आयोग व केन्द्रीय प्रभारी पतंजलि – 00ः32ः39
9. योग दिवस पूर्वाभ्यास स्लाइड शो – 00ः37ः00
10. सामान्य योग अभ्यासक्रम (प्रोटोकॉल) के अनुसार बहनों के द्वारा योगाभ्यास (45मि.) – 00ः40ः30
11. श्रद्धेय ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी, दिव्य उद्बोधन – 01ः38ः25

‘‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’’ विषय पर वेबिनार व योगाभ्यास का आयोजन 21 को

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नए साधक योगाभ्यास से पूर्व सामान्य दिशा-निर्देश अवश्य जानें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने किया पूर्वाभ्यास
‘‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’’ विषय पर वेबिनार व योगाभ्यास का आयोजन 21 को
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बिलासपुर टिकरापाराः- योग दिवस के अवसर पर टिकरापारा में 01 जून से चल रहे ऑनलाइन योग शिविर में आज 21 जून के सामान्य योग अभ्यासक्रम के अनुसार मंजू दीदी के संचालन में पूर्वाभ्यास किया गया। सभी मास्टर योग प्रशिक्षक बहनों ने प्रार्थना, संकल्प व शान्तिपाठ के साथ 45 मिनट के सभी अभ्यास किए। सोमवार 21 जून प्रातः 6.30 बजे से 8 बजे तक ‘‘तन व मन के सशक्तिकरण के लिए योग’’ विषय पर यूट्यूब पर वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है जिसमें योगाभ्यास के साथ अन्य सामाजिक संस्थाओं के महानुभावों के प्रेरणादायी उद्बोधन व शुभकामनाएं भी शामिल होंगी जो हमें योगी जीवन के लिए प्रेरित करेंगी।
नए साधक योग अभ्यास से पूर्व दिशा निर्देश अवश्य पढ़ें…
आज मंजू दीदी ने नए साधकों को योग से पूर्व तैयारी की बातें बताते हुए कही कि योग अभ्यास खाली पेट, ढ़ीले सूती वस्त्र पहनकर, खुले व शांत वातावरण में करना चाहिए। यदि अभ्यास के समय कमजोरी महसूस हो तो गुनगुने पानी में थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेना चाहिए। सीधे जमीन पर योगाभ्यास न कर चटाई, दरी, कम्बल अथवा योग मैट का प्रयोग करना चाहिए। थकावट, बीमारी, बढ़ी हुई श्वांसों की गति, जल्दबाजी एवं तनाव की स्थिति में योग न करें। जब तक आपको कहा न जाए श्वांस-प्रश्वांस की गति नहीं रोकनी चाहिए।
सेवाकेन्द्र से सामान्य दिशा-निर्देश व अभ्यासक्रम की पुस्तिका निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं…
दीदी ने बतलाया कि अभ्यास से पूर्व, अभ्यास के समय व अभ्यास के बाद की ऐसी बहुत-सी बातें हैं जिसे नए साधकों को जानना जरूरी है। इसकी जानकारी के लिए शासन की ओर से दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। यह इन्टरनेट पर भी उपलब्ध है और पुस्तिका के रूप में टिकरापारा सेवाकेन्द्र से निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।

 
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पिता को अकेलेपन की महसूसता न होने देना बच्चों का परम कर्तव्य – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
मां का प्यार प्रत्यक्ष लेकिन पिता की मेहनत होती है गुप्त
पितृ दिवस पर ऑनलाइन क्लास में सभी को अपने पिता के सहयोगी बनने व उनकी सेवा के लिए प्रेरित किया गया…
 
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पितृ दिवस मनाने का उद्देश्य है कि इस दिन हम प्रेरणा लेकर पिता के कार्यों में सहयोगी बनने व उनकी सेवा करने का संकल्प लें। मां का त्याग और प्यार तो सभी के सामने प्रत्यक्ष होता है लेकिन पिता की मेहनत, उनकी भावनाएं, समर्पणता, त्याग व प्यार गुप्त रहता हैं। हम वर्तमान में जितनी भी ऊंची स्थिति में पहुंचे हैं, जो भी आनंद ले रहे हैं, सुखपूर्वक जी रहे हैं वह माता-पिता की दुआओं का ही परिणाम है।

           आज के बच्चों को अनुरोध करते हुए दीदी ने कहा कि पिता को अकेले न छोड़ें, ज्यादा से ज्यादा उनके मददगार बनने की कोशिश करें, उन्हें अकेलेपन की महसूसता न होने दें। नैतिक मूल्य, समाज सेवा व देश सेवा की भावना वे बच्चे के अंदर भरते हैं। यदि आप अपने पिता से दूर रहते हैं तो कुछ पल ही सही पर उनसे रोज बात कर लिया करें। इतने से ही उन्हें खुशी मिल जाएगी। वर्तमान संगमयुग में सर्व आत्माओं के परमपिता परमात्मा शिव स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर अपने सभी बच्चों को विकारों के बंधन से छुड़ाकर सुख-शान्ति-समृद्धि प्रदान करते हैं। जो बच्चे उनकी श्रीमत पर चलते हैं उनका जीवन श्रेष्ठ बन जाता है।

केवल जीने से स्वस्थ जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण – ‘दीर्घ जीवन के लिए योग’ विषय पर वेबिनार पर मंजू दीदी जी ने कहा…

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केवल जीने से स्वस्थ जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण
‘दीर्घ जीवन के लिए योग’ विषय पर वेबिनार पर मंजू दीदी जी ने कहा…
7वें विश्व योग दिवस के अवसर पर रानी दुल्लैया आयुर्वेदिक महाविद्यालय द्वारा विशेष आयोजन


बिलासपुर टिकरापाराः- लम्बे समय जीवन जीने से अधिक महत्वपूर्ण है स्वस्थ व सुखमय जीवन जीना। हम कितना जीते हैं उसकी अपेक्षा हम कैसा जीवन जीते हैं, देश, समाज व परिवार के लिए क्या कर पा रहे हैं, इस पर हमारा ध्यान होना चाहिए। जब हमारा मन शक्तिशाली होता है तो उसका प्रभाव हमारे तन पर भी पड़ता है। योगी बनने के साथ हमें उपयोगी बनना बहुत जरूरी है। परमात्मा के साथ हमारा जुड़ाव अर्थात् याद ही योग है और यही भारत का प्राचीन योग है इसे राजयोग कहा जाता है राजयोग सर्व योगों का राजा है इसमें ज्ञानयोग, कर्मयोग, भक्तियोग, समत्वयोग, सन्यासयोग सभी शामिल हैं। इसमें आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। परमात्मा से सर्व संबंध जोड़कर दिल से याद करना व उसकी रचना से प्रेम करना ही मेडिटेशन है।
उक्त बातें 7वें विश्व योग दिवस पर रानी दुल्लैया आयुर्वेदिक महाविद्यालय, भोपाल द्वारा दीर्घ जीवन के लिए योग’ विषय पर आयोजित वेबिनार को सम्बोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने अपने निजी जीवन में योग, आयुर्वेद और सकारात्मक सोच के प्रभाव का अनुभव साझा किया और एक अनुक्रम बताते हुए कहा कि क्रमशः हमें सकारात्मक चिंतन, ध्यान, प्राणायाम, आसन, एक्यूप्रेशर, घरेलु चिकित्सा व प्राकृतिक चिकित्सा का प्रयोग पहले करना चाहिए क्योंकि ये प्रभावशाली, हानिरहित व निःशुल्क हैं इसके पश्चात ही हमें आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, एलोपैथी आदि चिकित्सा की ओर रूख करना चाहिए। पर इन सभी पद्धतियों में सकारात्मक सोच, श्रद्धा व विश्वास का भाव होना बहुत जरूरी है।
दीदी ने बतलाया कि जिस प्रकार जंगल बनाने में मेहनत नहीं लगती बल्कि बगीचा तैयार करने में मेहनत है उसी प्रकार सकारात्मक सोच कोई ओवरनाइट प्रोसेस नहीं है जो एक दिन के सत्संग या चिंतन से हमारा संस्कार बन जाए बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, रोजाना शरीर के भोजन की तरह मन को भी सकारात्मक विचारों का भोजन देना जरूरी है। दीदी ने इस योगसत्र को संगीतमय बनाते हुए आज से पहले, आज से ज्यादा खुशी आज तक नहीं मिली गीत पर सभी को एक्सरसाइज का अभ्यास भी कराया।
ज्योति विद्यापीठ जयपुर के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर कमलेश शर्मा जी ने कहा कि योग भाषण का विषय नहीं योग अभ्यास है। और दीर्घ आयु के लिए योग के अभ्यासों को नित्य जीवन में अपनाना होगा। इस कोरोना काल में बहुत लोग प्रभावित हुए उसमें योग करने वाले भी शामिल थे किन्तु सामान्य और योग अभ्यासी में यही अंतर रहा कि योग अभ्यासी को सामान्य की तुलना में कम कष्ट झेलना पड़ा और वे जल्दी रिकवर हो गए। जितना हमारा योग का इनपुट होगा उतना ही आउटपुट मिलेगा। संजीवनी बटी ज्ञान है जबकि पैरासिटामॉल विज्ञान है। हम योग को जितना फैलायेंगे सभी के जीवन की आयु दीर्घ होगी।
सम्पूर्णन्द आयुर्वेद कॉलेज, वाराणसी के प्रोफेसर डॉ. के.के. द्विवेदी जी ने योग की परिभाषा, आठ अंग व प्रकारों का वर्णन किया। रानी दुल्लैया कॉलेज की डॉ. रचना जैन व डॉ. कृष्णा तिवारी ने मंच संचालन किया।

Newspaper Clips_Geeta Gyan for Patanjali Yoga Trainees

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