सहन करने व समाने की शक्ति का दूसरा नाम है मां – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
प्यार के सागर परमात्मा है हम सभी आत्माओं के मात-पिता
सहन करने व समाने की शक्ति का दूसरा नाम है मां – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
मां का कड़ा स्वभाव भी बच्चों को शिक्षा देकर आगे बढ़ाता है
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में मातृ दिवस पर विशेष क्लास आयोजित

https://dharmadharm.in/mother-of-brahmakumari-manju-is-another-name-for-the-power-to-bear-and-assimilate/

बिलासपुर टिकरापाराः- जिस प्रकार सागर में सभी नदियों का जल समा जाता है उसी तरह मां भी अपने बच्चों के गुण-अवगुण, विशेषता-दोष सभी अपने अंदर समा लेती है। बच्चा सपूत हो या कपूत लेकिन मां का प्यार दोनों के लिए होता है। मां और मातृभूमि का कर्ज नहीं चुकाया जा सकता। मां व धरती मां के अतिरिक्त महात्मा भी महान होते हैं जो हमें परमात्मा से मिलाने का कार्य करते हैं और परमात्मा संपूर्ण प्राणीमात्र के मात-पिता हैं। जिन्हें प्यार का सागर भी कहते हैं वो सदा ही प्यार, ज्ञान, गुण और शक्तियां लुटाने को तैयार होते हैं उन्हें किसी भी चीज को पाने की हमसे आस नहीं होती वे सदा ही दाता हैं। वो हमें शिक्षाएं व सावधानियां दे हमारी सर्व कमियों को निकाल कर हमें विश्व का मालिक बनाने इस धरती पर आए हुए हैं।

उक्त बातें दीदी जी ने मातृ दिवस के अवसर पर आज प्रातः व सायं के सत्संग में ऑनलाइन संबोधित करते हुए कही। आपने बतलाया कि मां हमारे जीवन की प्रथम गुरू तो होती ही है किन्तु मां के अतिरिक्त अनेक अन्य हमारे बड़े भी होते हैं जो हमें बिना किसी स्वार्थ के हमारी कमियों पर ध्यान खिंचवाते हैं, हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देते हैं। उनका भी एहसान चुकाया नहीं जा सकता। मातृ दिवस, पितृ दिवस, शिक्षक दिवस आदि दिवस एक दिन के लिए नहीं होते बल्कि हमेशा के लिए अपनी स्मृति में उनके महत्व, त्याग, बलिदान व ऐहसानों ृको याद रखने के लिए एक प्रेरणा का दिवस होता है।

दीदी ने कहा हालांकि यह दिवस विदेशों में शुरू किया गया क्योंकि वहां अधिकतर परिवार में बच्चे जल्दी ही अपने मात-पिता से दूर रहने लग जाते हैं। भारत में संयुक्त परिवार की संस्कृति है लेकिन हम मातृ दिवस को मां के प्रति समर्पित करके एक अवसर के रूप में लेकर मनाते हैं।

हमारे देश में जितने भी महापुरूष हुए हैं उनकी माताएं मन से बहुत ही शक्तिशाली, निडर और महान थीं। महापुरूषों, वीर पुरूषों आदि की महानता में उनकी मां का ही महत्वपूर्ण योगदान रहा।
दीदी ने कहा कि इस कोरोना काल में अनेक लोगों ने अपनी मां को खोया होगा उन्हें हम ईश्वरीय परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और सारे विश्व की आत्माओं प्रति यही शुभभावना व शुभकामना रखते हैं कि सभी स्वस्थ रहें, निरोग रहें, किसी को कोई भी प्रकार का दुख न रहे और स्वयं भगवान सुख-शान्ति से भरपूर नई दुनिया की स्थापना का कार्य करा रहे हैं।

सकारात्मक विचारों का ओवरडोज़ वर्तमान समय की आवश्यकता :- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

कार्यक्रम की विडियो लिंक:
सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
सकारात्मक विचारों का ओवरडोज़ वर्तमान समय की आवश्यकता :- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
बिलासपुर लेडिज़ सर्कल एवं बिलासपुर राउण्ट टेबल का विशेष आयोजन
‘शान्ति की शक्ति से कोविड पर विजय’ विषय पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने दिए अनुभवयुक्त व्याख्यान व कराया मेडिटेशन का अभ्यास

बिलासपुर टिकरापारा :- हमारे निकट के संबंधों में विपत्ति आना, स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में भावनात्मक होने के कारण भय, घबराहट, आंसू, दर्द का आना आज के समय में स्वाभाविक हो गया है। ऐसे समय में सकारात्मक विचारों ओवरडोज़़ लेना जरूरी है क्योंकि भय, घबराहट आदि एक तरह से नकारात्मक भावनाएं हैं जिसका असर स्वयं पर व अपने परिजनों पर बहुत बुरा पड़ता है। मन को सकारात्मक व शक्तिशाली विचारों में इतना व्यस्त रखें कि किसी भी प्रकार के नुकसान पहुंचाने वाले विचारों के लिए स्थान न रहे। इसके लिए सुबह-सुबह न्यूज़ चैनल, अखबार, सोशल मीडिया से न जुड़कर अपना समय आसन-प्राणायाम, सत्संग, अच्छे चिंतन वाले पुस्तक व मेडिटेशन करने में दें। जैसे घर में सामग्रियों का स्टॉक भरपूर रखने का ख्याल रहता ऐसे ही मन में अच्छे विचारों का स्टॉक भी भरपूर रखना जरूरी है।
उक्त बातें बिलासपुर लेडिज़ सर्कल व बिलासपुर राउण्ड टेबल द्वारा ज़ूम मीटिंग पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
मन को शांत रखें व भगवान को अपना साथी बनाएं…
कार्यक्रम के विषय – ‘‘उम्मीद : शान्ति की शक्ति से कोविड पर विजय’’ पर सभी से बात करते हुए मंजू दीदी जी ने कहा कि मन की शान्ति; सकारात्मक सोच का ही परिणाम है और यही आध्यात्मिकता है। पवित्र ग्रंथ गीता में भी भगवान ने सबसे पहले अर्जुन का विषाद दूर किया। विषाद को आज की भाषा में हम तनाव या अवसाद कह रहे हैं। उसके पश्चात् ही अर्जुन के अंदर युद्ध करने की शक्ति आई। आज के समय में भी हमारा युद्ध व चुनौती यही है कि हम हर हालत में मन को शांत, एकाग्र, शक्तिशाली व सकारात्मक रखें और भगवान को अपना साथी बनाएं क्योंकि जिसका साथी है भगवान, उसे क्या रोकेगा आंधी और तूफान।
भय है 11वां विकार…
काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, आलस्य और अलबेलापन – ये दस विकार हैं। ग्यारहवें विकार के रूप में भय आज हमारे सामने इतनी बड़ी समस्या बनकर खड़ा है। यदि हम कोविड के सकारात्मक पहलू पर नजर डालें तो इसने हमें स्वच्छता का पाठ पढ़ा दिया। हम हाथ धोते समय कोरोना के बारे में न सोचकर यह सोचें कि – ‘मैं स्वस्थ आत्मा हूं’। कोरोना-कोरोना कहकर अपने को व वातावरण को पैनिक न करें बल्कि कोरोना की जगह करूणा का भाव मन में जागृत करें अर्थात् सबके प्रति प्यार, मधुरता, रहम व तकलीफमंद के प्रति कुछ करने का भाव हो। सोशल डिस्टेन्सिंग जरूरी है किन्तु घर के सदस्यों की देखभाल के लिए स्पर्श जरूरी है क्योंकि यह बहुत बड़ी चिकित्सा का कार्य करता है क्योंकि हमारी हथेलियों में ऊर्जा के द्वार होते हैं।
लेडिज़ सर्कल की सभी गृहस्थ में रहने वाली महिलाओं का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि कन्या वह जो 21 कुलों का उद्धार करे लेकिन माताएं-बहनें तो अपने दोनों पक्षों- ससुराल व मायके के 21 कुलों का उद्धार करती हैं। वर्तमान स्थिति में यदि घर से बाहर नहीं जा सकते तो कम से कम अपने संपर्क वालों से फोन करके यह कहकर उनका मनोबल व उत्साह तो बढ़ा ही सकते हैं कि हम आपके साथ हैं, ईश्वर आपके साथ है। हमारे हर विचार व वाणी में आशीर्वाद होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय सिंधु सभा की सचिव ब्रह्माकुमारीज़ की नियमित सदस्य बहन श्रीमति विनीता भावनानी जी ने सभी को आध्यात्म की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि मुझे ब्रह्माकुमारीज़ से बहुत सी चीजें सीखने को मिली, मन का सशक्तिकरण हुआ और राजयोग मेडिटेशन से जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन व सफलता मिली। यहां मुझे ईश्वर की समीपता का गहराई से अनुभव हुआ कि स्वयं भगवान आकर दैवीय गुणों को अपनाने की पढ़ाई पढ़ाते हैं। उन्होंने इस आयोजन की बहुत सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन बिलासपुर लेडिज़ क्लब की चेयरपर्सन बहन साइना उभरानी जी ने बहुत कुशलता पूर्वक किया। शहर के सौ से अधिक गणमान्य नागरिकों ने इस सत्र का लाभ लिया। सभी पार्टिसिपेन्ट्स ने चैट के माध्यम से कार्यक्रम की प्रशंसा की व आभार प्रकट किया।

BK MANJU DIDI INVITED AS SPEAKER IN PROG. – UMEED – Calm To Conquer COVID

Ramandeep Kaur is inviting you to a scheduled Zoom meeting.

Topic: *UMEED, Calm to Conquer Covid*
Time: May 5, 2021 04:30 PM Mumbai, Kolkata, New Delhi

Join Zoom Meeting
https://us02web.zoom.us/j/82332431909?pwd=dHdiMjIxZ1ZZS1pCamlBbDV6Qmcrdz09

Meeting ID: 823 3243 1909
Passcode: 054527

*इस विशेष क्लास के लिए आप सभी Zoom app डाऊनलोड कर लीजियेगा… हम लोग यूट्यूब पर भी लाइव करने की कोशिश करेंगे…*

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में मनाया गया भारतीय नववर्ष

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
स्वर्णिम भारत की याद दिलाता है यह पर्व – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी है गुड़ी पाड़वा की चटनी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में मनाया गया भारतीय नववर्ष
गुड़ी सजाई गई और सभी को कड़वे नीम की चटनी व मेवे का भोग दिया गया…
अनेक साधकों ने ऑनलाइन लाभ लिया।

बिलासपुर टिकरापारा :- हमारी प्राचीन संस्कृति अति प्राचीन एवं महान है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा सृष्टि की रचना का दिवस, स्वर्ण काल अर्थात् काल गणना का प्रारंभ है। वर्तमान संगमयुग में स्वयं परमपिता परमात्मा शिव सृष्टि परिवर्तन का मंगलमय कार्य कर रहे हैं। यह दिन हिन्दूओं का नहीं अपितु आदि सनातन देवी-देवता धर्म का नया वर्ष है। चूंकि मनुष्यों के अंदर देवत्व के गुण धीरे-धीरे कम होते गए इसलिए अपने को देवी-देवता धर्म की बजाय हम हिन्दू धर्म कहने लग गए।
उक्त बातें भारतीय नववर्ष – गुड़ी पाड़वा पर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बतलाया कि आज का दिन सनातन धर्म की अनेक कहानियों से जुड़ा है। ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि निर्माण का दिन, धर्मराज युधिष्ठिर व श्रीराम के राज्याभिषेक का दिन, नवरात्र की शुरूआत, राजा विक्रमादित्य का सिंहासन आरोहण व विक्रम संवत् का प्रारंभ, श्री झूलेलाल का जन्मदिवस आदि।
कड़वे नीम-इमली इत्यादि की चटनी बढ़ाती है रोग-प्रतिरोधक क्षमता
दीदी ने बतलाया कि इस दिन कड़वे नीम के पत्ते, इमली, आम, गुड़, हिंग, काला नमक इत्यादि के मिश्रण से बनी हुई चटनी खाते हैं। यह हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करती है। कड़वा नीम कलियुग अंत की परिस्थितियों का, आम खट्टे संस्कारों का संदेश देता है जबकि गुड़ हमें अपने मीठे संस्कारों से सभी परिस्थितियों को जीतने का संदेश देता है। अंत में सभी को तिलक लगाकर मेवे व विभिन्न चीजों से बनी चटनी का भोग दिया गया। इस कार्यक्रम का अनेक साधकों ने ऑनलाइन लाभ लिया।

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में शांति व सद्भाव के साथ मनायी गई आध्यात्मिक होली

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
होली में सदा उत्साहित रहने का संकल्प करें – ब्रह्माकुमारी मंजू
आलस्य, क्रोध, केयरलेसनेस जैसे बुरे संस्कारों की होलिका दहन कर दें..
परमात्म संग का रंग सदाकाल का है, स्थूल रंग अल्पकाल का….
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में शांति व सद्भाव के साथ मनायी गई आध्यात्मिक होली
अधिकतम साधकों ने ऑनलाइन मनायी होली…

टिकरापारा, बिलासपुर : ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में होली का पर्व बहुत ही शांति व सद्भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी साधकों को आत्मिक स्मृति का तिलक लगाया गया व मुख भी मीठा कराया गया। इससे पूर्व भगवान को भोग स्वीकार कराया गया व सत्संग में होली के अवसर पर उच्चारे गए परमात्म महावाक्य सुनाए गए। सेवाकेन्द्र के अतिरिक्त साधकों ने ऑनलाइन भी कार्यक्रम का लाभ लिया।

सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने परमात्म महावाक्य सुनाते हुए कहा कि होली का उत्सव उमंग उत्साह में रहने का यादगार है। यदि हम प्रतिदिन सत्संग करते हैं तो हम सभी के लिए रोज ही होली है क्योंकि सत्संग का अर्थ ही है भगवान का सच्चा-सच्चा संग। इस संग से मन में उमंग व उत्साह बना रहता है। मन को ऐसे ही सदा उमंग-उत्साह में रखना ही होली का वास्तविक उद्देश्य है। शिवबाबा ज्ञान मुरली में कहते हैं कि समटाइम व समथिंग का शब्द छोड़कर ‘‘सदा’’ शब्द याद रखें।

जो मिला है उसका गुणगान करें, जो नहीं है उसका रोना न रोएं…
दीदी ने आगे कहा कि हम कहते हैं कि जब हमें गुस्सा, तनाव, आलस्य या अलबेलापन आता है तो मुख से निकल जाता है कि ‘‘ये तो मेरा संस्कार ही ऐसा है… मेरे पुराने संस्कार ही ऐसे हैं…’’ जबकि हमें स्वप्न में भी ऐसा नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि वास्तविकता ये है कि आत्मा के मूल संस्कार सतोगुणी हैं। भगवान सुख, शान्ति, आनन्द, प्रेम, पवित्रता के सागर हैं और उनकी संतान होने की वजह से हम भी उन गुणों के स्वरूप हैं। परमपिता परमात्मा भी हम सभी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में देखना चाहते हैं। हम अपने जीवन में उन चीजों का रोना न रोएं जो हमारे पास नहीं है बल्कि उन चीजों का शुक्रियां मानें जो भगवान ने आपको दी हैं, हर पल परमात्मा का गुणगान करें।

होली शब्द हमें यह स्मृति दिलाता है कि जो भी पुरानी बातें हैं उन्हें हो-ली अर्थात् बीती कर दें, भूला दें क्योंकि दुख, दर्द या समस्याओं से अधिक परेशानी तो उन्हें मन में रखने से होती है। इसलिए बीती को भूला कर सबको मन ही मन क्षमा कर दें। दूसरा अर्थ है मैं परमात्मा की बन गई अर्थात् हो ली और अंग्रेजी में होली अर्थात् पवित्रता का संदेश देता है।

दादी जी ने ज्ञान की बातों को मंत्र की तरह जीवन में उतारा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

प्रेस विज्ञप्ति
दादी जी ने ज्ञान की बातों को मंत्र की तरह जीवन में उतारा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
संसार की सबसे स्थितप्रज्ञ योगी ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी जानकी जी की प्रथम पुण्यतिथि मनाई गई
संस्था द्वारा वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाया जा रहा यह दिन

बिलासपुर टिकरापारा :- ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी जानकी जी का देहावसान गत वर्ष कोरोना काल के आरम्भ में 27 मार्च को हुआ था। संस्था द्वारा इस प्रथम पुण्यतिथि को वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आज गुरूवार के दिन टिकरापारा सेवाकेन्द्र में दादी जानकी जी के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया व सभी ब्रह्मावत्सों ने उनके चित्र के सम्मुख दृष्टि लेते हुए मौन श्रद्धांजलि अर्पित की व प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि शतायु दादी जी केवल हमारी ही नहीं अपितु विश्व की दादी थीं। उन्होंने ईश्वरीय सेवाओं का देश-विदेश में बहुत विस्तार किया, भगवान का संदेश देने के लिए इतने उम्र में भी बहुत यात्राएं की। दादीजी की बहुत बड़ी विशेषता थी कि उन्होंने ज्ञान की बातों का ज्यादा विस्तार नहीं किया बल्कि सार रूप में अपने जीवन में आत्मसात किया। जैसे वह ज्ञान की बातें मंत्र की तरह हों जिसमें थोड़े में पूरा ज्ञान समाहित रहता है।
दीदी ने जानकारी दी कि दादी जी की स्मृति में मुख्यालय माउण्ट आबू में ‘शक्ति स्तम्भ’ बनाया गया है जिसका लोकार्पण 27 मार्च को किया जायेगा। पुण्यतिथि पर होने वाले कार्यक्रम को 27 मार्च प्रातः 8 बजे से अवेकनिंग टीवी व पीस ऑफ माइण्ड चैनल के माध्यम से लाइव देख सकते हैं।

प्रति,
माननीय भ्राता संपादक महोदय,
दैनिक…………………………………
बिलासपुर, छ.ग.

ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी के निमित्त लगाया गया भोग, दी गई श्रद्धांजलि

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शांति, गम्भीरता, निर्माणचित्त, सरलता व स्थिरता की प्रतिमूर्ति थीं दादी जी….ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
दादी अपने कर्मों से सभी कुछ सीखा देती थीं
ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी के निमित्त लगाया गया भोग, दी गई श्रद्धांजलि

बिलासपुर टिकरापारा :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी जी के 11 मार्च को देहावसान के पश्चात् आज गुरूवार को टिकरापारा सेवाकेन्द्र में भोग लगाया गया व सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदीजी ने बतलाया कि पिताश्री ब्रह्मा बाबा के पश्चात् दादी हृदयमोहिनी जी जिन्हें दादी गुलजार जी भी कहते हैं, उनके तन में लगभग 50 वर्षों तक परमात्म शक्ति के अवतरण से लाखों भाई-बहनों ने आत्मिक परवरिश प्राप्त की। दादी जी किसी भी कार्य को बोलकर सिखाने की अपेक्षा अपने कर्मों से शिक्षा देती थीं।
गुणमूर्त दादी जी गुणों की भण्डार थीं, पवित्रता व सादगी के साथ -साथ शांति, गम्भीरता, निर्माणता, सरलता व स्थिरता जैसे गुणों से दादी जी संपन्न थीं।
क्लास के पश्चात् सभी बहनों ने दादी जी के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया। सभी ने मौन श्रद्धांजलि देकर प्रसाद ग्रहण किया। सेवाकेन्द्र पर आयोजित इस कार्यक्रम में साधकों के अतिरिक्त अन्य भाई-बहनें ऑनलाइन भी शामिल हुए।