कलेक्टर ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र का अवलोकन, ध्यान की भी अनुभूति की।

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
दिनचर्या में आधे से एक घण्टे का सकारात्मक कार्य बढ़ाता है हमारी ऊर्जा – डॉ. संजय अलंग
कलेक्टर ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में साधकों को संबोधित…
सेवाकेन्द्र का किया अवलोकन, ध्यान की भी अनुभूति की।

बिलासपुर टिकरापारा, – कोई भी कार्य हो, यदि निरंतर हम दिनभर वही कार्य करते रहे तो जरूर मोनोटोनस हमें परेषान कर देगा, उस कार्य में अरूचि पैदा हो जायेगी, चिड़चिड़ाहट, थकावट या उदासी आने लगेगी इसलिए 24 घण्टे में न्यूनतम आधे से एक घण्टे के लिए उस कार्य के बीच में ब्रेक चाहिए। ब्रेक अर्थात् कोई दूसरा कार्य करना, सोना या आराम करना दूसरे कार्य की गिनती में नहीं आता। चाहे आप गार्डनिंग करें, चाहे योग करें, पूजा करने बैठ जाएं, उस दौरान मोबाइल भी छोड़ दें। इससे आपका ध्यान उस मूल कार्य से डाइवर्ट होगा  और जब दोबारा आप उस कार्य में जुटेंगे तो ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करेंगे। यह एक बहुत बड़ा मूलमंत्र है। कार्य के बीच में ब्रेक किसी से लड़ाई-झगड़ा, किसी से बातचीत भी हो सकती है लेकिन बेहतर यह है कि वह कार्य रचनात्मक हो और उस रचनात्मकता से समाज को हम कुछ दे सकें तो यह सोने पे सुहागा है। समाज को न भी दे सकें तो भी ब्रेक जरूरी ही है और कोषिष करें कि वह सकारात्मक हो। सकारात्मक नहीं भी हो तो भी ब्रेक चाहिए। आप दो ऐसे व्यक्तियों में तुलना करेंगे जो एक तो निरंतर उसी कार्य में है और एक थोड़ा ब्रेक लेकर फिर वही कार्य करता है तो आप पायेंगे कि ब्रेक लेकर कार्य करने वाला अपने कार्य में थोड़ा आगे बढ़ जाता है, खुष रहता है, सकारात्मकता बढ़ती है। मेडिटेशन या पॉज़िटिव थिंकिंग या सत्संग बेहतर रचनात्मक कार्यों में से एक है।
उक्त बातें जिले के कलेक्टर भ्राता डॉ. संजय अलंग जी ने टिकरापारा सेवाकेन्द्र में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए कही।
धैर्य सबसे बड़ा मानवीय गुण…
डॉ. अलंग ने कहा कि जीवन में धैर्य का होना बहुत जरूरी है, यह सबसे बड़ा मानवीय गुण है। संस्था की बहनों और सदस्यों में धैर्यता का गुण अपेक्षाकृत अधिक अनुभव हुआ। धैर्य का गुण लगता आसान है लेकिन है सबसे कठिन। हम रोड में ही जाकर रेड लाइट तोड़ने लगते हैं जो अधैर्यता का परिचायक है और फ्रायड के अनुसार भी लाइन को तोड़ना ही भ्रष्टाचार का मूल है। किसी चीज के लिए अपने नंबर आने तक प्रतीक्षा करना ये सबसे बड़ी मानवीय उपलब्धि है जो कि आज के समय में बहुत कम होती जा रही है। लोग बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाते, और हर चीज में पहले मैं करने का भाव आ जाता। सभी की खुषी की कामना करते हुए उन्होंने अपने वक्तव्य को विराम दिया।
सेवाकेन्द्र का अवलोकन व ध्यान अनुभूति के पश्चात् बहनों ने बांधी राखी…
डॉ. अलंग ने सेवाकेन्द्र का बारीकी से अवलोकन किया। सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने बाबा की कुटिया में उन्हेंं ध्यान की अनुभूति कराई व तत्पष्चात् रक्षासूत्र बांधकर उन्हें ब्रह्माभोजन भी कराया गया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

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सुविचारों का खजाना है ज्ञान मुरली – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
सुविचारों का खजाना है ज्ञान मुरली – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
परमात्मा का मुख्य कर्तव्य विकारों के बंधनों से छुड़ाना व नई दुनिया की स्थापना करना
मनुष्य अल्पज्ञ हैं और परमात्मा सर्वज्ञ हैं
मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी के महावाक्य सुनाए गए

बिलासपुर, टिकरापारा 24 जून – जिस प्रकार पुराना मकान नहीं बनाया जा सकता। मकान तो नया ही बनता है परन्तु समय के साथ वह खुद ही पुराना हो जाता है। उसी प्रकार परमात्मा ने इस दुनिया को सुख-षान्ति-खुषी से भरपूर एकदम नया अर्थात् सतोप्रधान बनाया जहां मनुष्य देवताओं के समान थे और प्रकृति के पांच तत्व भी सतोप्रधान, सुखदायी थे जिसे हम स्वर्ग या सतयुग कहते हैं लेकिन समय के साथ-साथ मनुष्य में विकार प्रवेष करते गए और आत्मा सतोप्रधान से सतोसामान्य, रजो से गुजरते हुए तमोप्रधान बन गई। और मनुष्य के वृत्तियों का प्रभाव प्रकृति के पांच तत्वों पर भी पड़ा जिससे वह भी तमोप्रधान दुखदायी बन गई और कभी बाढ़, कभी सूखा, भूकम्प, सुनामी आदि के रूप में दुख देने लगी। लेकिन इस सृष्टि रूपी नाटक में परमात्मा का भी कर्तव्य शामिल है। वे अपने समय पर आते हैं अर्थात् जब पूरी सृष्टि में अधर्म फैल जाता है तब परमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर दो मुख्य कर्तव्य करते हैं जो कोई भी मनुष्य आत्मा नहीं कर सकती। वह है- एक तो सर्व मनुष्य आत्माओं को विकारों से छुड़ाना और दूसरा है धरती पर स्वर्ग की स्थापना करना इसलिए परमात्मा को अंग्रेजी में हैवेनली गॉड फादर भी कहते हैं। परमात्मा और मनुष्यात्मा में मुख्य अंतर यही है कि मनुष्य अल्पज्ञ हैं और परमात्मा सर्वज्ञ हैं।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में संस्था की प्रथम प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर मम्मा के महावाक्य सुनाते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बताया कि मम्मा परमात्मा षिवबाबा द्वारा सुनाए गए महावाक्यों को बहुत अच्छे से स्पष्ट करती थीं।
जो आप जानते हैं, दूसरों को सीखा दें….
दीदी ने बताया कि मम्मा कहती थीं कि जो आप जानते हैं वह दूसरों को जरूर सीखा दें, इससे आपकी छवि भी अमर हो जाएगी और दूसरों में भी वह विषेषता आ जाएगी। ज्ञान मुरली अच्छे विचारों का खजाना है जिसमें प्रतिदिन परमात्म श्रीमत के साथ-साथ बहुत से अच्छे विचार शामिल होते हैं और ये सुविचार मन के लिए शक्तिषाली भोजन है जो सामान्य व्यक्ति के लिए जरूरी तो है ही परन्तु तनाव, डिप्रेषन या मनोरोगियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें कहा तो जाता है कि अच्छा सोचो लेकिन अच्छा सोचने के लिए अच्छे विचार कहां से मिलेंगे, यह कोई नहीं बताता। क्योंकि मन का कार्य ही है विचार करना, यदि हम अच्छे विचार नहीं करेंगे तो निष्चित ही नकारात्मक, व्यर्थ व स्वयं को हतोत्साहित करने वाले विचार आने लगते हैं।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

शान्ति की अवतार व प्रेम की मूरत थीं मम्मा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
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शान्ति की अवतार व प्रेम की मूरत थीं मम्मा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
बड़ों की आज्ञा पर चलने वाला आगे बढ़ जाता है…
ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की पुण्यतिथि मनाई गई

बिलासपुर, टिकरापारा 23 जून – प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय महिलाओं द्वारा संचालित संस्थान है। इसकी प्रथम मुख्य प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी ने 24 जून 1965 को अपनी नष्वर देह का त्याग कर सम्पूर्णता को प्राप्त हुईं। पूरे विष्व भर के सेवाकेन्द्रों में उनकी पुण्यतिथि मनाई जा रही हैं। मातृत्व स्वरूप पालना करने के कारण मातेष्वरी जी को सभी ब्रह्मावत्स प्यार से ‘‘मम्मा’’ कहकर पुकारते थे। मम्मा सदा शीतल स्वभाव और मीठे बोल का उच्चारण करने वाली थी। उनका सदा यही लक्ष्य रहा कि मुझे सबके दुख दूर करने हैं। किसी भी हालत में, किसी भी बात में मम्मा को कभी क्रोध तो क्या, परन्तु आवेष भी नहीं आया। मम्मा की तेज आवाज किसी ने नहीं सुनी। मम्मा शान्ति की अवतार, प्रेम की मूर्त थीं। परमात्मा की श्रीमत पर सम्पूर्ण निष्चय था उन्हें। वे सदा ज्ञान मुरली द्वारा हर श्रीमत पर हां जी करती और उसे आचरण में लाती। इस हां जी के पाठ से ही वह सबसे आगे चली गईं। मम्मा हर एक बच्चे की बात को ऐसे समा लेती थीं जैसे कोई बात ही नहीं हुई। षिक्षाएं देते हुए भी अन्दर समा लेना, समाने की शक्ति और प्यार से उसको चेंज कर देना – यह बहुत बड़ी मम्मा की विषेषता रही। उन्होंने कभी दूसरों के अवगुण चित पर रखे ही नहीं। उनकी दिव्यता, सत्यता व प्यूरिटी की रॉयल्टी सदा चेहरे से झलकती थी। ज्ञान की धारणा व ज्ञान को सरलता से सबके सम्मुख रखने की वजह से ही उन्हें सरस्वती-गॉडेज ऑफ नॉलेज का टाइटल प्राप्त हुआ।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित कार्यक्रम में साधकों को मम्मा की विषेषताएं बताते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने मम्मा की दी हुई विभिन्न मधुर षिक्षाएं सुनाते हुए कहा कि जो षिक्षा हम दूसरों को देते हैं, वह क्वालिफिकेषन्स हमारे में भी होनी चाहिए बाकी कमजोरी कौन सी है उसके विस्तार में जाने की जरूरत नहीं है। अपने को छोटा अर्थात् नीचा समझना भी कमजोरी है। फिर ऐसा भी न हो कि अभिमान में रहें। सबसे सर्वोत्तम स्टेज है परतन्त्रता न हो, मन की भी नहीं। बोलने का, शब्दों का भी मैनर्स चाहिए, भाषा भी अच्छी चाहिए, कोई मान का, इज्जत का भूखा है, कोई नाम-षान का भूखा है, उसे परखकर उस तरीके से व्यवहार करना है। कोई कैसा भी हो, कभी यह नहीं कहना चाहिए कि यह तो ऐसा है, यह सुधरेगा नहीं- ऐसा समझने से तो उनका जीवन चला गया, उनको तो हमें सुधारना है, हमारी रिस्पॉन्सिबिलिटी बहुत बड़ी है।
सभी ने मम्मा को अपनी स्मृति के साथ स्नेह-सुमनों से भी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी षिक्षाओं को अपनाने के लिए संकल्पित हुए। मम्मा के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराकर सभी को दिया गया। मम्मा की स्मृति पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र की कुटिया में लगाए गए अंगूर के बेल का अंगूर भी सभी को दिया गया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

बिलासपुर, टिकरापारा, 21 जून- पांचवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संचालन के लिए बिलासपुर में टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी एवं छत्तीसगढ़ योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्रह्मा कुमारी मंजू दीदी जी को प्रभार दिया गया

बिलासपुर, टिकरापारा, 21 जून – पांचवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिला प्रषासन द्वारा आयोजित सामूहिक योग के लिए सामान्य योग अभ्यास क्रम (प्रोटोकॉल के अनुसार) के संचालन के लिए बिलासपुर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी एवं छत्तीसगढ़ योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्रह्मा कुमारी मंजू दीदी जी को प्रभार दिया गया। दीदी ने बहतराई खेल परिसर में आयोजित इस सामूहिक योग कार्यक्रम का दिषा-निर्देषन किया जिसमें योग प्रदर्षन के लिए ब्रह्माकुमारीज़ से गौरी बहन व विकास भाई के साथ, पतंजलि की ओर से घनश्याम निषाद व पद्मा बिसोई, आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से प्रितपाल सिंह व गायत्री परिवार की ओर से दीपक कश्यप शामिल रहे।

इस अवसर पर योग अभ्यास के लिए बिलासपुर जिले के विधायक भ्राता शैलेष पाण्डेय जीबेलतरा क्षेत्र के विधायक भ्राता रजनीष सिंह जीमहापौर भ्राता किषोर रॉय जीकलेक्टर भ्राता डॉ. संजय अलंग जीसंभागायुक्त (कमिष्नर) भ्राता भरतलाल बंजारे जीकांग्रेस महामंत्री भ्राता अटल श्रीवास्तव जीसमाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक भ्राता हेरमन खलखो जी, अन्य जिला अधिकारी गण एवं बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक गण उपस्थित रहे। स्कूल के बच्चों की छुट्टियों के बाद भी सभी संस्थाओं के सहयोग से पूरा इंडोर स्टेडियम योग साधकों से भरा रहा.
योग अभ्यास की पूर्णता के पश्चात् सफलता पूर्वक संचालन के लिए विधायक भ्राता शैलेष पाण्डेय जी ने ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी एवं अन्य योग प्रषिक्षकों का सम्मान किया। दीदी ने संस्था की ओर से सभी अतिथियों को ईष्वरीय सौगात भी दी।

प्रेस-विज्ञप्ति

विष्व योग दिवस पर कैरियर पॉइन्ट के बच्चों ने किया योग अभ्यास

दयालबंद, बिलासपुर, 21 जून – महाराजा रणजीत सिंह सभागार में चल रहे युवा षिविर के सभी षिविरार्थियों व ब्रह्माकुमारीज़ के लगभग 200 सदस्यों ने आज बहतराई स्टेडियम में पहुंचकर योग अभ्यास किया। वहीं कैरियर पॉइन्ट के लगभग 60 छात्र-छात्राओं ने सभागार में पहुंचकर प्रोटोकॉल के अनुसार योग का अभ्यास किया। जिन्हें कैरियर पॉइन्ट के डायरेक्टर भ्राता किरण चावला जी ने योग करने के लिए प्रेरित किया।

इन्हें योग, आसन व ध्यान का अभ्यास कराने के लिए टिकरापारा सेवाकेन्द्र की बहन ब्र.कु. शषी व मास्टर ट्रेनर्स राकेष गुप्ता व तुलसी साहू उपस्थित थे।

प्रेस-विज्ञप्ति – मन के वायरस का एन्टीवायरस है योग – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
मन के वायरस का एन्टीवायरस है योग – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
षिविर के दूसरे दिन दीदी ने इंटरनेट से इनरनेट विषय पर डाला प्रकाष

‘‘यह शरीर व शरीर के समस्त अंग हार्डवेयर की तरह हैं जिसमें रोग व चोट रूपी खराबियां आ जाती हैं और जिस तरह सॉॅफ्टवेयर में वायरस आने से सॉफ्टवेयर सही ढंग से कार्य नहीं करता उसी प्रकार आत्मा व आत्मा की तीन शक्तियां मन, बुद्धि व संस्कार में भी वायरस लग जाता है। ये वायरस हैं- क्रोध, चिड़चिड़ापन, आलस्य, अलबेलापन, लोभ, मोह, अहंकार आदि। जिसके कारण यह शरीर रूपी हार्डवेयर भी ठीक से काम नहीं करता। इन विकारों रूपी वायरस का एन्टी वायरस है योग, आसन, प्राणायाम व ध्यान। इसके नियमित अभ्यास से ये सभी वायरस धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। योग के नियमित अभ्यास से हम इनरनेट की ओर अर्थात् अंतर्मुखता की ओर जाते हैं जिससे व्यर्थ की बातों, परचिंतन-परदर्षन की बातों से मुक्त होने लगते हैं।’’
उक्त बातें दयालबंद, गुरूनानक स्कूल स्थित महाराजा रणजीत सिंह सभागार में ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र द्वारा आयोजित पांच दिवसीय युवा संस्कार षिविर के दूसरे दिन सभा को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
दीदी के मार्गदर्षन में आज भी सभी षिविरार्थियों ने शासन द्वारा निर्देषित योग अभ्यास क्रम (प्रोटोकॉल) के अनुसार योग का अभ्यास किया। दीदी ने जानकारी दी कि सभी षिविरार्थी व ब्रह्माकुमारीज़ के सदस्य 21 जून- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने बहतराई खेल परिसर में ठीक 7 बजे उपस्थित होंगे और सामूहिक रूप से योगाभ्यास करेंगे।
बहतराई स्टेडियम में भी आज मुख्य संचालन के लिए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी सहित योग प्रदर्षन के लिए पतंजलि, आर्ट ऑफ लिविंग, गायत्री परिवार सहित अन्य संस्थाओं के सदस्यों ने मिलकर योग का पूर्वाभ्यास किया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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युवाओं ने दीप जलाकर किया पांच दिवसीय युवा संस्कार षिविर का शुभारम्भ

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परिवर्तन के लिए नियमितता की आवष्यकता है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
युवाओं ने दीप जलाकर किया पांच दिवसीय युवा संस्कार षिविर का शुभारम्भ
प्रथम दिन दीदी ने हमारी चार क्षमताओं से कराया अवगत

‘‘21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हम मना रहे हैं या पांच दिन यह युवा संस्कार षिविर करेंगे लेकिन इस समय में केवल जागरण का संकल्प जागृत हो सकता है लेकिन परिवर्तन के लिए नियमितता की आवष्यकता है। जितनी नियमितता उतना संस्कारों में परिवर्तन आता है। आज युवा आई. क्यू.-इंटेलेक्चुअल कोषेन्ट की तरफ बहुत ध्यान देते हैं और निष्चित रूप से अच्छी बौद्धिक क्षमता से अच्छी जॉब लग जाती है, अच्छे पद पर चले जाते हैं, बहुत धन कमाते हैं, मान-सम्मान मिलता है लेकिन जब अपने से प्रष्न पूछेंगे कि क्या जीवन में केवल बौद्धिक क्षमता ही सब कुछ है? तो उत्तर मिलेगा नहीं। क्योंकि इसके साथ भावनात्मक क्षमता अर्थात् ई.क्यू.-इमोषनल कोषेन्ट भी जरूरी है, आज जब युवा भावनाषून्य हो रहे हैं जिसका परिणाम है कि वे अपने पैरेन्ट्स की ओर ध्यान नहीं दे रहे, षिक्षकों का सम्मान नहीं करना या ऐसी आदतों को अपनाना जो उनके पतन का कारण बन रहे हैं। इसलिए भावनाओं का होना भी जरूरी है जिससे हम स्वार्थ को न देखते हुए दूसरों की मदद भी करते हैं जो हमें दुआएं प्राप्त कराता है और यही दुआएं प्रतिकूल समय में दवा का काम करती हैं या शक्ति का अनुभव कराती हैं जो हमें खुषी देती है। लेकिन ज्यादा भावनात्मक भी नहीं होना क्योंकि ज्यादा इमोषनल व्यक्तियों को लोग धोखा दे देते हैं इसलिए लव और लॉ का संतुलन जीवन में आवष्यक है इसलिए रमणीक भी रहें और गंभीर भी रहें। तीसरा है नैतिक मूल्यों की क्षमता अर्थात् एम.क्यू.-मोरल कोषेन्ट। पहले कहा जाता था धन गया कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया लेकिन चरित्र गया तो सब कुछ गया लेकिन आज ठीक उल्टा हो गया कि चरित्र गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया लेकिन धन गया तो सब कुछ गया। धन सुख-सुविधाओं, साधनों आदि बहुत सी चीजों के लिए आवष्यकत तो है लेकिन धन ही सब कुछ नहीं है। जिस प्रकार मोती की परत उतरने पर मोती की कीमत समाप्त हो जाती है उसी प्रकार चरित्र गिर जाने पर व्यक्ति की कीमत समाप्त हो जाती है।’’
उक्त बातें दयालबंद, गुरूनानक स्कूल स्थित महाराजा रणजीत सिंह सभागार में ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र द्वारा आयोजित पांच दिवसीय युवा संस्कार षिविर के पहले दिन सभा को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
दिव्य गुणों का गुलदस्ता है – आध्यात्मिकता
दीदी ने बतलाया कि हमारी बौद्धिक, भावनात्मक व नैतिक क्षमताओं में स्थिरता लाने के लिए आध्यात्मिक क्षमता अर्थात् एस.क्यू.-स्प्रिच्युअल कोषेन्ट का होना जरूरी है और आध्यात्मिकता कोई धर्म नहीं है यह तो दिव्य गुणों का गुलदस्ता है जिसमें सरलता, दया, प्रेम, आत्मिक भाव – ये सब शामिल हैं। और एकाग्रता की शक्ति के लिए इन सभी गुणों का जीवन में होना जरूरी है।
प्रोटोकॉल के अनुसार सीखाया गया योग अभ्यास का सही तरीका
दीदी ने बतलाया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को प्रोटोकॉल के अनुसार सहज रीति योग अभ्यास करने के लिए आज से ही योग अभ्यासक्रम के अनुसार ही प्रैक्टिस दी जा रही है। जिसके अनुसार ओम् उच्चारण व प्रार्थना से शुरू किया गया व षिथिलिकरण के तीन अभ्यास- ग्रीवा चालन, कटि चालन व घुटना संचालन, खड़े होकर किये जाने वाले पांच आसन- ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन व त्रिकोणासन, बैठकर किये जाने वाले चार आसन- भद्रासन अर्थात् तितली आसन, अर्ध उष्ट्रासन, शषकासन व वक्रासन, पेट के बल लेटकर किये जाने वाले तीन आसन- भुजंगासन, शलभासन व मकरासन, पीठ के बल लेटकर किये जाने वाले तीन आसन- सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन व शवासन के पश्चात् बैठकर किये जाने वाले प्राणायाम- कपालभाति, अनुलोम-विलोम व भ्रामरी, पांच मिनट ध्यान, संकल्प पाठ व अंत में शांति पाठ कराया गया।
दीदी ने जानकारी दी कि यह षिविर 23 जून तक प्रातः 7 से 8.30 बजे महाराजा रणजीत सिंह सभागार, दयालबंद में व सायं 7 से 8.30 बजे टिकरापारा सेवाकेन्द्र में चलेगी। योग के प्रति रूचि रखने वाले या योग सीखने की इच्छा रखने वाले भाई-बहनें सादर आमंत्रित हैं।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

 

 

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति क्र. 2
योगरथ के द्वारा किया जा रहा लोगों को योग के प्रति जागरूक

‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग के प्रचार प्रसार के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा सजाए गए योग रथ का कलेक्टोरेट में आज षिक्षा अधिकारी व अन्य संस्थाओं के सदस्यों द्वारा शुभारम्भ के पश्चात् ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी के निर्देषन में संस्था के भाईयों के द्वारा शहर मेंं योग प्रदर्षन कर घुमाया जा रहा है। जिसमें राकेष गुप्ता, अमर कुंभकार व तुलसी साहू शामिल हैं जो कि छ.ग. योग आयोग द्वारा मास्टर ट्रेनर्स भी हैं। वे योग के गीत, एनाउंसमेन्ट, पर्चे व योग-आसनों के प्रदर्षन के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं।’’
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)