व्यक्ति का सबसे महान शत्रु आलस्य – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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व्यक्ति का सबसे महान शत्रु आलस्य – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
पवित्रता सबसे ऊंचा दैवीय श्रृंगार है…
रविवार स्पेशल क्लास में सुनाए गए परमात्म महावाक्य…

बिलासपुर टिकरापारा :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय टिकरापारा में प्रतिदिन सत्संग प्रारंभ हो चुका है। इस अवसर पर प्रातः काल म्यूज़िकल एक्सरसाइज़ के बाद रविवार विशेष सत्संग क्लास में परमात्म महावाक्य सुनाए गए। सत्संग सुनने के पश्चात् सभी ने बाबा की कुटिया में बैठकर शांति अनुभूति की।
इस अवसर पर परमात्म महावाक्य सुनाते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि पवित्रता सबसे ऊंचा दैवीय गुण है। सम्पूर्ण पवित्रता उसे कहा जायेगा जब मन, वचन, कर्म व स्वप्न में भी अपवित्रता का नाम-निशान नहीं होगा। गुस्सा, चिड़चिड़ापन, ईर्ष्या सभी अपवित्रता के ही अंश हैं। आलस्य तो मनुष्य का सबसे महान शत्रु है जो किसी भी गुण को धारण करने में व्यवधान उत्पन्न करता है।
दीदी ने आगे कहा कि सत्संग सुनने से मन को अच्छे विचार मिलते हैं और हमारा दृष्टिकोण बदलता है। अच्छे विचारों से खुशी मिलती है और खुश रहने से शरीर भी स्वस्थ रहता है। मन को शांति मिलती है और धन में ऐसी शक्ति आ जाती है जो दाल-रोटी में ही 36 प्रकार के भोजन का आनंद अनुभव करते हैं। प्रभु चिंतन व शुभ भावनाओं से बनाया गया भोजन प्रसाद बन जाता है जिससे तन-मन-धन सभी में शक्ति आ जाती है।
दीदी ने जानकारी दी कि प्रतिदिन प्रातः 6 बजे सेवाकेन्द्र पर निःशुल्क म्यूज़िकल होलिस्टिक एक्सरसाइज़ व तत्पश्चात् ध्यान व सकारात्मक चिंतन की क्लास चलती है।

आदरणीय भ्राता संपादक महोदय,
दैनिक…………….
बिलासपुर………………..

पिताश्री ब्रह्माबाबा की पुण्यतिथि विश्व शान्ति दिवस पर ज्ञान-योग-साधना का दूसरा दिन

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सबके प्रति प्यार की भावना हो, गुस्सा स्वयं व दूसरों को दुखी करता है…
इस ठण्ड के समय में स्वयं को आलस्य से बचाएं,
पिताश्री ब्रह्माबाबा की पुण्यतिथि विश्व शान्ति दिवस पर ज्ञान-योग-साधना का दूसरा दिन

बिलासपुर टिकरापारा :- ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा की 52वीं पुण्यतिथि पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित दो दिवसीय ज्ञान-योग-साधना कार्यक्रम के दूसरे दिन की दिनचर्या में मौन साधना, माउण्ट आबू से लाइव सत्संग व शाम के समय में प्रभु-मिलन कार्यक्रम में साधक जन शामिल हुए।
सत्संग से अनेक श्रेष्ठ विचार सुनने को मिले जिसमें वरिष्ठ दीदीयों ने बतलाया कि परमात्मा को प्यार का सागर कहते हैं यदि हम इस स्मृति में रहें कि हम उनके बच्चे हैं तो सभी के प्रति हमारा व्यवहार प्यार भरा हो जाएगा। भगवान को हम बच्चों का गुस्सा करना अच्छा नहीं लगता। गुस्सा करने से खुद भी दुखी होते और दूसरों को भी दुखी करते हैं। महान बनने के लिए पिताश्री ब्रह्माबाबा और मातेश्वरी जी के पदचिन्हों पर चलना होगा, कर्मेन्द्रियों पर नियंत्रण अर्थात् अधिक खाने-पीने की लालच न हो, कटु बोल न निकले, किसी के प्रति कुदृष्टि न हो, ज्यादा इच्छा नहीं रखनी है, चलन सुधारना, देह का अहंकार छोड़ना और सहनशीलता का गुण धारण करना होगा।
रात्रि में सोने से पूर्व अपनी दिनचर्या का चार्ट रखें, चेक करें कि आज किसी को दुख तो नहीं दिया, भगवान की याद में कितने समय रहा, समय व्यर्थ तो नहीं गंवाया। अभी चारों तरफ का वातावरण योगयुक्त व युक्तियुक्त बनाएं रखें क्योंकि अभी के समय में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। जैसे छोटी-छोटी प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान का टेंशन, कड़े नियमों को अपनाने का टेन्शन, व्यवहार में कमी का टेंशन और संबंधों में स्नेह की कमी से टेंशन का वातावरण और भी बढ़ेगा। जैसे शरीर की कोई नस खींच जाने पर कितनी परेशानी होती है, दिमाग की नस खींची हुई रहती है। ऐसे समय में मन में अनेक विचार आते हैं, असमंजस की स्थिति हो जाती है। कमाएं तो मुश्किल, न कमाएं तो मुश्किल, इकट्ठा करें तो मुश्किल न करें तो मुश्किल। ऐसी स्थितियों का सामना करने के लिए स्वयं को शक्तिशाली बनाना जरूरी है। प्रतिदिन मेडिटेशन व पॉज़िटिव थिंकिंग से आत्मा की बैट्री चार्ज करना, मजबूत बनाना अतिआवश्यक है।
स्वयं पर रखें कड़ी नजर, आलस्य से बचें…
आलस्य, थकान, कमजोरी को अपने अंदर आने न दें। ‘आज बहुत ठण्ड है, थकान है, सिर में दर्द है, आज सो जाता हूं, सत्संग नहीं करता’ ऐसे विचार अवनति की ओर ले जाते हैं। इसके लिए स्वयं पर कड़ी नजर रखना जरूरी है। कभी-भी पुरूषार्थ में ढ़ीलापन नहीं लाना है।
स्नेह में कमजोरियों को छोड़ना आसान होता है…
स्नेह की निशानी है कुर्बानी। जिससे प्यार होता है उसके लिए मुश्किल या असंभव लगने वाली बातें भी सहज संभव लगती हैं। त्याग त्याग नहीं लगता। इसी प्रकार यदि भगवान से प्यार है तो कमजोरियों को आसानी से छोड़ा जा सकता है। सच्चा तपस्वी एक पतिव्रता स्त्री की तरह होता है जो स्वप्न या सोच में भी उस ईश्वर के अतिरिक्त किसी और को याद नहीं करता।
सभी ने पिताश्री के यादगार शान्ति स्तम्भ और बाबा की कुटिया में जाकर अपनी मौन श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी, अन्य बहनें एवं अनेक भाई-बहनें शामिल रहे।

बिलासपुर टिकरापारा – ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 52वीं पुण्यतिथि मनाई गई

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सादगी व ऊंचे विचारों से परिपूर्ण था पिताश्री का जीवन – ब्र.कु. मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 52वीं पुण्यतिथि मनाई गई
विश्व षान्ति दिवस पर दो दिवसीय ज्ञान-योग-साधना कार्यक्रम का आयोजन

बिलासपुर टिकरापारा :- 18 जनवरी को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विश्व विद्यालय के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 52वीं पुण्यतिथि पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र में दो दिवसीय ज्ञान-योग-तपस्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिन संस्था द्वारा विष्व षान्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस अवसर पर सेवाकेन्द्र के हार्मनी हॉल में आज के प्रातःकालीन सत्र में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कहा कि पिताश्री ने त्याग-तपस्या व सेवा के अपने पुरूशार्थ से हम सभी के लिए सम्पूर्णता को प्राप्त करने की राह सहज कर दी है जो निरंतर हमें आध्यात्म की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती रहती है। उनका जीवन सादगी से भरा व उंचे विचारों वाला था। हर एक के प्रति उनका आत्मिक प्रेम था। वे विरोधियों व मार्ग रोकने वालों के लिए भी सदा रहम भाव रखते थे और सभी को क्षमादान दिया करते थे। इसी विषेशता से उन्हें परमात्मा शिव से प्रजापिता ब्रह्मा की उपाधि प्राप्त हुई। उनके मुखारविंद से जब महावाक्य उच्चारित होते थे तो ऐसा प्रतीत होता था जैसे लाखों लोग उनके समक्ष उपस्थित हैं जो कि आज सार्थक सिद्ध हो रहे हैं।
उन्होंने परमात्मा के बताए मार्ग पर चलकर लाखों लोगों के जीवन को एक नई दिषा दी, जिस राह पर चलकर आज लाखों लोगों ने अपने जीवन की बगिया में मूल्यों के पुष्प खिलाए हैं। ऐसी दिव्य विभूति की 52वीं पुण्य तिथि पर सभी ने अपने प्रेम पुष्प अर्पित किये व उनके मार्ग पर चलने के लिए संकल्पित हुए।
आज प्रथम सत्र में प्रातः 7 बजे षहरवासियों के लिए सत्संग का आयोजन हुआ तत्पष्चात् 9.30 बजे से आसपास के गांव से जुड़े हुए भाई बहनों के लिए सत्संग हुआ। पिताश्री जी के निमित्त परमात्मा को गाजर-दूध का भोग स्वीकार कराया गया व अंत में सभी को भोग वितरित किया गया। इस अवसर पर बहनों ने सेवाकेन्द्र को फूलों से सजाया। माउण्ट आबू में पिताश्रीजी की याद व उनकी मूल षिक्षाओं की स्मृति में बने षांतिस्तम्भ का मॉडल बनाकर भी रखा गया है। ध्यानकक्ष – बाबा की कुटिया में सभी ने शांति की अनुभूति की।
दीदी ने जानकारी दी कि आज महीने के तृतीय रविवार को संस्था द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप मनाया जाता है जिसमें भारतीय समय के अनुसार षाम 6.30से 7.30 बजे विश्व शांति के लिए योगदान दिया जायेगा। दूसरे दिन सोमवार के सत्र की दिनचर्या माउण्ट आबू से लाइव कार्यक्रम के अनुसार रहेगी जिसमें मौन-साधना, सत्संग, वरिष्ठ भाई-बहनों की क्लास व षाम को प्रभु मिलन के कार्यक्रम शामिल रहेंगे।

Video Link
https://youtu.be/ShRuvslHxq4

आपसी स्नेह व एकता से सफलता का संदेष देता है तिल का लड्डू – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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आपसी स्नेह व एकता से सफलता का संदेष देता है तिल का लड्डू – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
नए संस्कारों की क्रान्ति है मकर संक्रान्ति
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में मकर संक्रान्ति मनायी गयी…

बिलासपुर टिकरापारा :- मकर संक्रान्ति का पर्व ऋतु परिवर्तन की वेला तो है ही परन्तु इससे भी महत्वपूर्ण है कि वर्तमान युग ही संस्कार परिवर्तन करने का अर्थात् नए संस्कारों की क्रान्ति लाने का अनुपम समय है जब भगवान स्वयं इस धरा पर अवतरित होकर गीता ज्ञान के द्वारा सर्व मनुश्यात्माओं के अंदर देवत्व के गुण धारण करा रहे हैं। आज के दिन तिल के लड्डू का विषेश महत्व है जो संबंध, परिवार व संगठन में स्नेह व एकता से सफलता प्राप्त करने का संदेष देता है क्योंकि अकेले तिल को खाने से कड़वा लगता है किन्तु यदि उसमें गुड़ मिला दिया जाता है तो वह आपस में बंध भी जाते हैं और स्वादिश्ट भी लगते हैं।
उक्त बातें मकर संक्रान्ति के अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आपने आगे बतलाया कि पतंग आत्मा की उड़ती कला की निषानी है। जब हम षारीरिक भान से अलग हो अपने आत्मा के सात गुणों को अपनाते हैं तो हल्के होकर उमंग-उत्साह में उड़ने लगते हैं। ज्ञान, गुण व षक्तियों का दान सबसे बड़ा दान है साथ ही स्वयं की कमजोरी को अर्पण करना भी दान है। कमजोरी छोड़ना पड़ेगा, देना पड़ेगा ऐसे नहीं सोचना बल्कि तिल के समान छोटी-सी बात समझकर खुषी-खुषी छोड़ देना यही दान का विषेश महत्व है। आज के दिन सूर्य उत्तरायण हो जाता है तो दिन बड़ा हो जाता है सर्दी समाप्त होती है एवं इस दिन खिचड़ी भी खाते हैं।
इस अवसर पर सेवाकेन्द्र में तिल के लड्डू व फलों का भोग लगाया गया व सभी भाई-बहनों को दिया गया।
85 वर्शीय सेवानिवृत्त सैनिक षरद बल्हाल जी का किया गया सम्मान…
विजय दिवस के अवसर पर कोसा रायपुर से आये हुए सैनिक, अधिकारी व जवानों ने षरद बल्हाल जी को नौ पदक देकर सम्मानित किया। इसी सम्मान की श्रृंखला में सेवाकेन्द्र में भी आज क्लास के समक्ष बल्हाल जी को पुश्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। ज्ञात हो कि षरद बल्हाल जी मंजू दीदी के पिताश्री हैं।

ब्रह्माकुमारीज़ राजकिषोर नगर में मनाया गया नववर्श स्नेह मिलन कार्यक्रम

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आगे बढ़ने अपने लक्ष्य को देखना जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ राजकिषोर नगर में मनाया गया नववर्श स्नेह मिलन कार्यक्रम
2021 के लिए सभी ने लिया 21  संकल्प
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा व राजकिषोरनगर में सेवाकेन्द्र पर सत्संग प्रारंभ

https://dharmadharm.in/it-is-necessary-to-see-your-goal-moving-forward-brahmakumari-manju-didi/

https://www.hinditimesnews.com/aage-badhne/

बिलासपुर राजकिशोरनगरः- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय के राजकिषोर नगर के नवनिर्मित भवन ‘षिव-अनुराग भवन’ में आज नववर्श स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित हुआ। परिवर्तन लाने के लिए 2021 में कुछ नया करने के लिए सभी को 21 सकारात्मक संकल्प दिए गए। जिसमें झूठ का सहारा न लेकर सत्यता के मार्ग पर चलना, तन व मन के लिए एक्सरसाइज करना, संतुश्टता का गुण धारण करना, रोज कुछ समय समाज सेवा में देना, किसी भी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया न करना, किसी भी परिस्थिति में सभी को दुआ देना, सदा मुस्कुराता चेहरा हो, ब्रह्ममुहूर्त में ध्यान, प्रतिदिन सत्संग करना आदि संकल्प शामिल थे।
इस अवसर पर उपस्थित सभा को संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदीजी ने कहा कि पहले तो हमें क्या करना है इसका लक्ष्य बनाएं व इसके पश्चात् अपने मन में उसका दृष्य बनाना चाहिए। यदि हम उस दृष्य को बार-बार देखते हैं तो वह हमें जरूर प्राप्त होता है। सब का उद्वार करने के लिए उदारदिल बनने की व संगठन की मजबूती के लिए एकता व एकाग्रता की आवष्यकता है, एकता से ही हर कार्य में सफलता मिलती है, और सहयोग षक्ति से विष्व में षांति की स्थापना होती है।
टिकरापारा व राजकिषोर नगर सेवाकेन्द्र में सत्संग प्रारंभ…
दीदी ने जानकारी दी कि अभी तक सुबह व षाम का सत्संग लाइव किया जा रहा था लेकिन एक जनवरी से लाइव सेवाकेन्द्र पर सत्संग के लिए राजकिषोरनगर व टिकरापारा सेवाकेन्द्र निष्चित व सीमित समय के लिए खोल दिया गया है। प्रातः व सायं 7 से 8.30 बजे का समय निर्धारित किया गया है। सभी भाई-बहनें जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति, तनाव से मुक्ति, राजयोग अनुभूति व आध्यात्मिक उन्नति के लिए सेवाकेन्द्र पधार सकते हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेवाकेन्द्र में बॉडी सेनिटाइजेषन की व्यवस्था तो है ही परन्तु दीदी जी ने सभी से अनुरोध किया है कि सभी घर से स्नान कर, सेनिटाइज़ कर व मास्क लगाकर ही सेवाकेन्द्र पधारें।
कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रम में कु. दिव्या, कु. गौरी व नीता बहन ने नए वर्श के गीतों पर अपनी प्रस्तुतियां दी। सभी को संकल्प-पत्र, नववर्श का कैलेण्डर व प्रसाद वितरित किया गया।

अनुशासन, दूरदर्शिता व नवीनतम सेवाओं के प्रणेता थे भाईजी – ब्र.कु. मंजू दीदी

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अनुशासन, दूरदर्शिता व नवीनतम सेवाओं के प्रणेता थे भाईजी – ब्र.कु. मंजू दीदी
बहुमुखी प्रतिभा के धनी भाईजी के जीवन में बौद्धिकता व आध्यात्मिकता का संगम रहा…
ब्रह्माकुमारीज़ के छ.ग. के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाई जी की 5वीं पुण्यतिथि मनाई गई…
भाईजी ने छ.ग. सहित चार राज्यों में 600 सेवाकेन्द्रों की स्थापना कर लाखों लोगों का नैतिक व चारित्रिक उत्थान किया….

बिलासपुर टिकरापारा :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के इंदौर जोन के संस्थापक व निदेशक राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाईजी की 5वीं पुण्यतिथि मनाई गई। सभी उन्हें प्यार से ‘भाईजी’ कहकर पुकारा करते थे। संस्था के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा ने 1969 में पत्र के माध्यम से भाईजी को इंदौर में सेवा शुरू करने की आज्ञा दी। पत्र प्राप्त होते ही भाई जी पंजाब से इंदौर आ गए और पूरे छ.ग. में व म.प्र., राजस्थान व उड़ीसा के अनेक स्थानों पर सेवाएं की। आपका पूरा जीवन आध्यात्म एवं समाजसेवा के लिए समर्पित था। अपने जीवनकाल में उन्होंने मानवता को देवत्व की ओर ले जाने की सेवा करते हुए 600 सेवाकेन्द्रों, उपसेवाकेन्द्रों व रिट्रीट सेन्टर्स की स्थापना की। जहां पर निरंतर आध्यात्म की ज्योत जल रही है। लोग यहां आकर शांति अनुभूति करते हैं और अपने को गुणवान बनाने की शिक्षा प्राप्त करते हैं।
व्यर्थमुक्त रखने हमें सदा व्यस्त रखते थे भाईजी…
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने बताया कि भाईजी ने न केवल सेवास्थानों की स्थापना की बल्कि अनेक बहनों व भाईयों को नेतृत्व करने की कला सिखाई, मानव कल्याण की सेवा के लिए प्रशिक्षित भी किया। वे समय प्रति समय सेवाकेन्द्र का संचालन करने वाली ब्रह्माकुमारी बहनों व भाई-बहनों के लिए स्वउन्नति व योग-साधना के कार्यक्रम आयोजित करते थे ताकि सभी सकारात्मकता में व्यस्त रहें, व्यर्थ के लिए मार्जिन ही न मिले।
मीडियाकर्मियों से विशेष स्नेह था भाईजी को…
दीदी ने बतलाया कि भाईजी संस्था के मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष होने के कारण मीडिया से जुड़े लोगों से विशेष स्नेह था। पत्रकार भाई-बहनों को तनाव से मुक्त रखने, मूल्यानुगत बनाने व उनके नैतिक उत्थान के सतत प्रयासरत रहते व उनके लिए राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कार्यक्रम व शिविर का कराया जिसमें देश-विदेश के विभिन्न मीडिया से जुड़े लोग शामिल होते।
अनुशासन उनके जीवन का अभिन्न अंग था…
संस्था के नियम व मर्यादाओं में स्वयं भी चलना व सबको उन्हीं अनुशासन में रखना भाईजी को पसंद था। नियमों के विपरीत जाना उन्हें स्वीकार नहीं था। ईश्वरीय ज्ञान को सामाजिक अर्थां में व्यक्त करना व उस ज्ञान के प्रति निष्ठा आपकी अलग पहचान थी। आप छोटी-छोटी बातें भी भाई-बहनों को सिखाते थे। उन्होंने पूरी एक पीढ़ी को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जो आज पूरे जोन के सेवाकेन्द्रों का कुशलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। वे त्याग, तपस्या के मूरत व सेवा में नवीनता के प्रणेता रहे।
विशेषताओं को पहचानने वाले सच्चे जौहरी थे…
भाईजी सभी की विशेषताओं को पहचान कर उन्हें ईश्वरीय कार्य में लगाने का अवसर प्रदान करते थे। जिससे वे उस विशेषता में पारंगत हो जाते थे। इस तरह वे एक सच्चे जौहरी थे। दीदी ने बतलाया कि भाईजी की प्रेरणात्मक शिक्षाओं व उनके साथ की अनुभवगाथा पर आधारित 13 दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम प्रेमांजलि का कल अंतिम भाग ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा के यूट्यूब चैनल पर शाम 7.30 बजे देखा जा सकता है।
इस अवसर पर परमपिता परमात्मा शिव व भाईजी के निमित्त भोग लगाया गया। सभी साधकों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनकी शिक्षाओं व प्रेरणाओं को धारण करने का संकल्प लेते हुए भोग स्वीकार किया।

किसान की मुस्कुराहट से ही देश की मुस्कुराहट – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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किसान की मुस्कुराहट से ही देश की मुस्कुराहट – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
राश्ट्रीय किसान दिवस पर ‘मुस्कुराए किसान – मुस्कुराए भारत’ थीम पर कार्यक्रम का आयोजन
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में किया गया किसानों का सम्मान

बिलासपुर टिकरापारा :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय व भगिनी संस्था राजयोग शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के कृशि एवं ग्राम विकास प्रभाग के संयुक्त तत्वाधान में टिकरापारा सेवाकेन्द्र में ‘मुस्कुराए किसान-मुस्कुराए भारत’ विशय पर किसानों के सम्मान में समारोह का आयोजन किया गया जिसमें सेवाकेन्द्र की बहनों की ओर से किसान भाईयों को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया गया। उनके सम्मान के लिए पतंजलि के केन्द्रीय प्रभारी व छ.ग. योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष भ्राता संजय अग्रवाल जी, बिलासपुर के कृशि सहायक संचालक भ्राता अनिल कौशिक जी व मंजू दीदी जी ने शुभकामना भरे उद्बोधन दिए।
कठिनाईयों का सामना करके भी हमारे लिए अन्न की व्यवस्था करते हैं किसान – संजय अग्रवाल
भ्राता संजय अग्रवाल जी ने इस ऑनलाइन वेबिनार में शुभकामनाएं देते हुए कहा कि  किसान हमारे अन्नदाता नमनयोग्य हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए मेहनत करके भी हमारे जीवित रहने के लिए अन्न के साथ अनेक औशधियों की पैदावार करते हैं। आज के विशय के अनुसार हमारे देष के किसान और मेहनत करने वाले मजदूर की मुस्कुराहट के लिए हमें प्रतिदिन की प्रभु वंदना में किसानों की उन्नति, प्रसन्नता व समृद्धि के लिए भी प्रार्थना जरूर करना चाहिए।
नई षासकीय योजनाओं का पूर्णतः लाभ लें किसान…अनिल कौषिक
बिलासपुर के कृशि विभाग के सहायक संचालक भ्राता अनिल कौषिक जी ने किसानों को षुभकामनाएं व बधाई देकर आग्रह करते हुए कहा कि वे षाष्वत यौगिक खेती व जैविक खेती से जुड़ें। शासन द्वारा किसानों के लिए बनाई गई नई-नई नीतियों व योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ अवष्य लें। उन्होंने कहा कि आज का दिन भारत के प्रथम कृशि मंत्री चौधरी चरण सिंह जी के जन्मदिवस पर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में किसानों के हित के लिए बहुत कार्य किए, बहुत सी योजनाएं बनाईं।
देष की रीढ़ की हड्डी व त्याग-तपस्या का दूसरा नाम है किसान…ब्र.कु. मंजू दीदी
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कहा कि यह वेबिनार व सम्मान समारोह किसानों की महत्ता को उजागर करने व षाष्वत यौगिक खेती की जानकारी देने व उसके लिए प्रेरित करने के लिए आयोजित किया गया। उन्होंने बतलाया कि एक-एक किसान देष की षान है, वह त्याग और तपस्या का दूसरा नाम है। कृशि और ऋशि दोनों ही मिलते-जुलते षब्द हैं। ऋशि पर्वतों पर तपस्या करते हैं और किसान जीवन भर मिट्टी से सोना उत्पन्न करने की तपस्या करते हैं। तपती धूप, कड़ाके की ठण्ड और मूसलाधार बारिष भी उनकी इस साधना को तोड़ नहीं सकती । वह इस देष की रीढ़ की हड्डी है।भारत की आधी से अधिक आबादी गांवों में बसती है जिसमें ज्यादातर किसान होते हैं और कृशि ही उनकी आय का मुख्य साधन है इसलिए हमें अन्न ग्रहण करते समय उस अन्नदाता को याद करते हुए उनका दिल से धन्यवाद कर उन्हें दुआ देना चाहिए और अन्न का सम्मान करते हुए, कभी भी अन्न व्यर्थ न जाए इसका ध्यान रखना चाहिए। यह किसान दिवस एक अवसर है किसानों के सम्मान का अतः पूरे देष में यह धूमधाम से मनाना चाहिए। दीदी ने जय जवान, जय किसान के साथ जय ईमान का नारा देते हुए किसानों को नमन किया।
परमषक्ति परमात्मा को प्रेम का सागर कहते हैं वे इस धरती पर आकर हमें प्रेम की षिक्षा देकर नई सृश्टि का पुनर्निर्माण कर रहे हैं वहां प्यार ही प्यार होगा, नफरत, दुख-अषान्ति का नाम-निषान नहीं होगा। हम सभी उनकी संतान हैं तो हमें भी प्रेम बांटना चाहिए, सबके प्रति सम्मान रखना चाहिए। हमारी सोच का प्रभाव प्रकृति पर पड़ता है इसलिए षाष्वत यौगिक खेती में जैविक खादों का प्रयोग करते हुए सुंदर विचारों के समावेष से फसल उगायी जाती है।
सकारात्मक ऊर्जा दूर करती है थकान…सुरेष साहू
कार्यक्रम में शामिल ग्रामीण कृशि विस्तारक अधिकारी सुरेष साहू ने इस सम्मान के लिए आयोजकों का धन्यवाद किया और कहा कि यहां की सकारात्मक ऊर्जा हम सभी किसानों की थकान को दूर कर देती है और खुषी का अनुभव कराती है। किसानों को अपना मनोबल बढ़ाने के लिए सकारात्मक सोच बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे आध्यात्मिक संस्थान से जुड़कर वह अंदर से भी शक्तिषाली बन सकता है।
अकलतरी ग्राम के किसान दिगम्बर यादव ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुझे भारत का किसान होने का गर्व महसूस होता है। परमात्मा हमारी रक्षा करते हैं, हम प्रकृति, जीव-जन्तु, माटी से जुड़कर सबका भरण पोशण कर पाते हैं।
तखतपुर के किसान राकेष गुप्ता ने कहा कि आज हम किसान भूमि से जुड़ने के बजाय धन से जुड़ गए हैं जो फसल न उगाकर धन उगाने के लिए अनेक रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं जो कि समस्त मनुश्यों के लिए हानिकारक है। आध्यात्म से जुड़ने से हमारे अंदर श्रेश्ठ कार्य करने की षक्ति आती है। इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने भी बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया।
राजयोग शिक्षिका ब्र.कु. गायत्री बहन ने राजयोग से धरती माता को सकाष अर्थात् सकारात्मक प्रकम्पन्न देने की विधि सिखाई और अनुभव भी कराया। गौरी बहन ने किसानों के सम्मान व देषभक्ति की भावना से भरे गीतों पर नृत्य की प्रस्तुति दी। ब्र.कु. षषी बहन ने सभी किसानों से अपनी खेती के कुछ हिस्सों में जैविक व षाष्वत यौगिक खेती को अपनाने के लिए प्रतिज्ञा कराई व एक-एक किसान देष की षान का नारा दिया। अंत में मंजू दीदी व समस्त बहनों ने किसानों को सेवाकेन्द्र की ओर से अंगवस्त्र पहनाकर व पुश्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इसके पश्चात सभी को ब्रह्माभोजन कराया गया। कार्यक्रम का कुषलतापूर्वक संचालन ब्र.कु. षषी बहन ने किया।

Prog. Video Link – https://youtu.be/gW3QHFxqUr0

सकारात्मक विचार, ध्यान और योग दूर करते हैं तनाव – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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सकारात्मक विचार, ध्यान और योग दूर करते हैं तनाव – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
महिला पतंजलि व भारत स्वाभिमान से जुड़े साधकों को मंजू दीदी ने कराया ध्यान व योगाभ्यास
म्यूज़िकल एक्सरसाइज, आठ प्राणायाम, आसन व योगनिद्रा का अभ्यास कराया गया
पूरे छ.ग. से सौ से अधिक प्रषिक्षार्थी हुए शामिल

बिलासपुर टिकरापारा – सकारात्मक दृष्टिकोण अपने आप में एक औषधि है। यदि कोई भी कार्य सकारात्मक सोच के साथ करते हैं तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। हम ध्यान, आसन, प्राणायाम का अभ्यास सकारात्मक सोच के साथ करने से छोटे-मोटे रोग तो स्वतः ही ठीक हो जाते हैं और योगाभ्यास नियमित करने से असाध्य रोगों से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त एक्यूप्रेशर, घरेलू चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा व पंचकर्म चिकित्सा से भी रोगों का उपचार किया जा सकता है। इसके बाद आयुर्वेदिक, होम्योपैथी व एलोपैथी औषधियों का सहारा लें।
उक्त विचार महिला पतंजलि व भारत स्वाभिमान के प्रशिक्षार्थियों को प्रातःकालीन योग सत्र में संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने दिए। आपने 40 मिनट के वर्कआउट – म्यूज़िकल एक्सरसाइज से योगाभ्यास की शुरूआत की जिसमें योग प्रदर्शन के लिए मास्टर ट्रेनर संदीप भाई, पूर्णिमा बहन, ईश्वरी बहन एवं नीता बहन सहयोगी रहीं। इसके पश्चात् दीदी जी ने सभी को आठों प्राणायामों व सूक्ष्म आसनों व अंत में रिलैक्सेशन मेडिटेशन – योगनिद्रा का अभ्यास कराया। सभी साधक योगनिद्रा के लिए बहुत उत्सुक थे।
गूगल मीट के जरिये सभी आपस में जुड़े हुए थे। इस अवसर पर पिछले 33 दिनों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 73 साधकों के अतिरिक्त फेसबुक, यूट्यूब व फ्रीकॉन्फ्रेन्स कॉल के माध्यम से अन्य साधकों ने लाभ लिया। इसमें महिला पतंजलि की सरिता साहू, गीतांजलि पटनायक, पदमा बिसोई, ममता साहू, अखिलेश्वरी देवी व अन्य पदाधिकारीगण शामिल रहीं।
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय
दैनिक…..

Prog. Link…
https://youtu.be/9U_qeLDkUpc

बड़े-बुजुर्गां की जरूरतें पूरी कर उन्हें उनका अधिकार दें – ब्रह्माकुमारी गायत्री

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति

बड़े-बुजुर्गां की जरूरतें पूरी कर उन्हें उनका अधिकार दें – ब्रह्माकुमारी गायत्री
आत्मा के मूल अधिकारों को देने परमात्मा स्वयं इस धरा पर आते हैं…
https://www.youtube.com/watch?v=fJqT1hJmCTk
मानव अधिकार दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में विषेष व्याख्यान

बिलासपुर टिकरापारा – अपने अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में हम बचपन से पढ़ते आए हैं लेकिन उन्हें जीवन में अमल में लाने के लिए हमें आध्यात्म को अपनाने की आवश्यकता है। आध्यात्म हमें संतुलित जीवन जीना सिखाता है। कहां हमें त्याग करना है और कहां पर अधिकार लेना है। आज हमारे बड़े-बुजुर्ग बहुत त्याग व मेहनत करके हमें सब कुछ प्रदान करते हैं, हमारी सुख-सुविधाओं को पूरा करते हैं। लेकिन जब उन्हें उनके अधिकार मिलने का वक्त आता है तब उनके पास इतनी शक्ति नहीं होती कि वे अपना अधिकार ले सकें। उस स्थिति में उनकी जरूरतें पूरी करना हमारा कर्तव्य है और यही उनका अधिकार भी है।
उक्त विचार विश्व मानव अधिकार दिवस के अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र की बहन ब्रह्माकुमारी गायत्री ने दिए। आपने कहा कि मनुष्य दोषारोपण में पीछे नहीं हटता। जब केदारनाथ में प्रलयंकारी बाढ़ तूफान आया था तब कहा गया कि गंगा बनी विध्वंसिनी लेकिन वास्तव में गंगा विध्वंसिनी नहीं है बाद में पता चला कि उसका सही कारण तो मनुष्यों द्वारा  प्रकृति का दोहन करना है।
आज हमें अपना अधिकार लेने के लिए मेहनत लगती है। लेकिन आज अशांत, दुखी, पीड़ित आत्माओं को सुख, शान्ति, आनन्द, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति का अधिकार देने के लिए स्वयं भगवान इस भारत भू पर अवतरित हुए हैं और इन सातों गुणों और शक्तियों को लुटा रहे हैं। राजयोग सीखकर हम भी उन अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं।
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………….
बिलासपुर

विश्व मृदा दिवस पर ‘स्वस्थ धरा-खेत हरा’ विषय पर वेबिनार का आयोजन, सांसद भ्राता अरुण साव हुए शामिल

कार्यक्रम की लिंक-
सादर प्रकाशनार्थ

प्रेस-विज्ञप्ति
मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने जैविक खाद को दें बढ़ावा –  सांसद अरूण साव
रासायनिक खाद का नियंत्रित व कम मात्रा में प्रयोग करें…

धरती मां का ऋण नहीं चुकाया जा सकता…ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
हम सभी का कर्तव्य प्रकृति को सतोप्रधान बनाना…

शाश्वत यौगिक खेती प्रकल्प को समझना जरूरी – गगन अवस्थी
मृदा संरक्षण के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दें व प्लास्टिक का प्रयोग कम करें…ब्रह्माकुमारी शशी 
सभी किसान भाई समय-समय पर मिट्टी परीक्षण जरूर कराएं – सुरेश साहू
धरती मां को सकाश देने के लिए गायत्री बहन ने कराया गाइडेड मेडिटेशन
मां धरती को स्वस्थ करने सभी संकल्पित हुए…
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में विश्व मृदा दिवस पर ‘स्वस्थ धरा-खेत हरा’ विषय पर वेबिनार का आयोजन

‘‘विश्व मृदा दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आज ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर ‘स्वस्थ धरा, खेत हरा’ प्रोजेक्ट लाया गया। आज इसी विषय पर वेबिनार आयोजित था जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर क्षेत्र के सांसद भ्राता अरूण साव जी ने दिल्ली से ही ऑनलाइन अपनी शुभकामनाएं व प्रेरणाएं दी। विशिष्ट अतिथि के रूप में इंदौर से पधारे गो ऑर्गेनिक अभियान प्रमुख भ्राता गगन अवस्थी व बलौदा क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भ्राता सुरेश साहू ने भी अपने विचार दिए। गौरी बहन ने तेरी मिट्टी में मिल जांवा, गुल बनके मैं खिल जावां….गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर धरती माता के प्रति सबके मन में भावनाएं उत्पन्न कर दीं।
बिलासपुर क्षेत्र के सांसद भ्राता अरूण साव ने कहा कि हमारी मिट्टी में विभिन्न रासायनिक तत्व व अनेक जीव-जंतुओं का वास होता है जो हमारी मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं। परन्तु पिछले कुछ समय से रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से इन जीवों की संख्या में कमी आने लगी और मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती गई। पुनः धरती की उर्वरता बढ़ाने के लिए हमें रासायनिक खादों का प्रयोग नियंत्रित व कम मात्रा में करके हमें जैविक अर्थात् गोबर व वर्मी कम्पोस्ट के प्रयोग को बढ़ावा देना होगा। इसी के लिए यूएनओ व फूड एण्ड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने 5 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस घोषित किया।
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी  ने कहा कि हम सभी के जीवन में चार मां आती है एक हमें जन्म देने वाली मां जो हमारी प्रथम गुरू हैं। दूसरी हैं धरती मां…जो हमे हमेशा देती ही रहती हैं इन दोनों का ऋण नहीं चुकाया जा सकता। तीसरे हैं महात्मा और चौथे हैं परमात्मा। परमात्मा ने जब इस संसार को रचा तब प्रकृति के पांचों तत्व सतोप्रधान थे। तब कहते थे कि जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा…। लेकिन आज कहते हैं देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई है भगवान। अब कलयुग अंत में परमात्मा अवतरित होकर पुनः हमें यही शिक्षा दे रहे हैं कि प्रकृति के पांचों तत्वों को सतोप्रधान बनाना तुम्हारा ही कर्तव्य है। इसलिए परमात्मा को भ ग व् आ न भी कहते हैं। जो यह दर्शाता है कि जो भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर ये सभी पांच तत्वों के रचयिता हैं। इन्हें पावन बनाने के लिए हमारे मन की स्वच्छता जरूरी है।
‘‘नए युग के लिए नई खेती – शाश्वत यौगिक खेती’’ ब्रह्माकुमारीज़ का बहुत सुंदर प्रोजेक्ट है जिसमें जैविक खेती के हर पद में अर्थात् बीज संस्कार से लेकर फसल होने तक के सभी पदों में योग का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए कोई अलग खर्च की जरूरत नहीं है अपितु मन का पवित्र, श्रेष्ठ भावनाओं व सुंदर विचारों से भरा होना आवश्यक है। जो कि प्रतिदिन के सत्संग व मेडिटेशन से प्राप्त होता है।
जीवन कौशल प्रबंधक भ्राता गगन अवस्थी ने कहा कि मिट्टी के सुधार के लिए नए वैज्ञानिक तकनीक अपनाना जरूरी है। ब्रह्माकुमारीज़ के शाश्वत यौगिक खेती प्रोजेक्ट को समझना जरूरी है जिसकी निःशुल्क जानकारी किसी भी शाखा से प्राप्त की जा सकती है। हालांकि जैविक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने में शुरूआत में कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ये सभी वैज्ञानिक खोजें धरती व मनुष्य दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। हमें अपने मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। इसके लिए भोजन का संतुलित व प्राकृतिक होना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर शक्कर का केमिकल स्ट्रक्चर शरीर को नुकसान पहुंचाता है इसके स्थान पर हम खांड, मिश्री व गुड़ का प्रयोग कर सकते हैं, आयोडाइज़्ड नमक के स्थान पर सेंधा नमक प्रयोग स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी शशी बहन ने कहा कि आज का दिन केवल वाचन का नहीं अपितु मृदा के प्रति हमारे कर्तव्यों को निभाने का दिन है। प्रकृति परमात्मा की सुंदर रचना है। हम धरती को माता कहते तो उनका सम्मान भी करना जरूरी है। धरती मां बिना कुछ कहे ही हमें कितना कुछ प्रदान करती है। सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी की कहानी की याद दिलाते हुए आपने कहा कि इंसान के लालच ने उसे हैवान बना दिया है। वह प्रकृति का केवल दोहन करने में लगा हुआ है। प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को भूल चुका है।
कुछ बातों को अमल में लाकर हम अपना कर्तव्य निभा सकते हैं। प्रकृति में हर चीज एक-दूसरे से संबंधित है और चक्र के रूप में चलती है। अतः किसी एक स्तर में गड़बड़ी होती है तो पूरा चक्र प्रभावित हो जाता है। इसलिए प्लास्टिक का कम से कम प्रयोग करें व रिसाइकल करने की कोशिश करें। अधिक से अधिक वृक्ष लगाएं व एक साल में कम से कम एक वृक्ष के पालन पोषण के लिए संकल्पित हों। यह बाढ़ व सूखा से बचाने व मिट्टी के संरक्षण के लिए भी जरूरी है। बिजली की बचत करें व कम से कम अपने घर के आसपास स्वच्छता बनाएं रखें।
ग्रामीण कृषि अधिकारी सुरेश साहू ने इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी किसान भाईयों से अनुरोध करते हुए कहा कि स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए मिट्टी को भी स्वस्थ बनाना होगा। जिस प्रकार हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य के लिए टेस्ट कराते हैं कि हमारे अंदर किस पोषक तत्व की कमी है उसी प्रकार मिट्टी के पोषक तत्वों की जानकारी के लिए प्रधानमंत्री ‘स्वस्थ धरा – खेत हरा’ प्रोजेक्ट के तहत हर विकासखण्ड में शासन की ओर से मिट्टी परीक्षण की सुविधा दी गई है। इस परीक्षण के पश्चात् स्वास्थ्य कार्ड दिया जाता है जिसके आधार पर हम मिट्टी के पोषण का ख्याल रख सकते हैं।
ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन ने धरती माता को सकाश देने, प्रकृति को पवित्र, सतोप्रधान व परमात्म शक्तियों से संपन्न बनाने के लिए मेडिटेशन की विधि सिखाई और गाइडेड मेडिटेशन कॉमेन्ट्री के माध्यम से प्रैक्टिकल अभ्यास भी कराया। जो कि ब्रह्माकुमारीज़ के वेबसाइट से या नेट पर सर्च करके भी सीख सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में संदीप भाई ने ‘‘हम सब मिलकर प्रण करेंगे, मां धरती को स्वस्थ करेंगे..‘’ ‘‘रासायनिक खेती पर नियंत्रण कर यौगिक खेती व जैविक खेती अपनाएंगे…’’ जैसी प्रतिज्ञाएं कराई और नारे लगवाये। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत प्रकृति वंदना, ईश्वरीय स्मृति व दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इस कार्यक्रम का अनेक लोगों ने ऑनलाइन लाभ लिया। मंच संचालन ब्रह्माकुमारी समीक्षा बहन ने किया।

भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)