तम्बाकू या किसी भी बुराई को समाप्त करने का सशक्त माध्यम है योग व आध्यात्म – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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तम्बाकू या किसी भी बुराई को समाप्त करने का सशक्त माध्यम है योग व आध्यात्म – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
नशा छोड़ने के लिए राजयोग, दृढ़ इच्छाशक्ति व 72 घण्टे का संयम प्रभावकारी विधि…
अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस पर विषेष क्लास

बिलासपुर टिकरापाराः- कोई भी नशा हमारे शरीर को नुकसान तो पहुंचाता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति में गिरावट लाता है, समाज में हमारी छवि खराब करता है, हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है व नैतिक पहलुओं को कमजोर करता है। सिवाय नशे के तम्बाकू सेवन का कोई उद्देश्य नहीं होता। यदि इस नशे की दिशा को हम सकारात्मक कर दें अर्थात् स्वचिंतन, सकारात्मक चिंतन, आसन-प्राणायाम, मेडिटेशन, परोपकार, स्व-उपकार का नशा यदि हम अपनी आदत में ले आएं तो हमें फायदा ही फायदा होगा और उस नशे की ओर न ही ध्यान जाएगा और न ही नुकसान होगा। ब्रह्माकुमारीज़ के मेडिकल विंग द्वारा समय प्रति समय नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं और अनेक युवा, वृद्ध, बच्चे व महिलाओं को राजयोग के अभ्यास से आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हुए नशामुक्त बनाया जाता है।
उक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर ऑनलाइन संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
नशा छोड़ने के लिए केवल 72 घण्टे का धैर्य जरूरी…
आपने बतलाया कि किसी भी नशे को छोड़ने में 72 घण्टे तक उस नशे के प्रति खिंचाव महसूस होता है लेकिन ईश्वरीय शक्ति, धैर्य व दृढ़ इच्छाशक्ति से हम नशे पर जीत प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि जहां चाह होती है वहां राह निकल ही जाता है। नशा छोड़ने के लिए नशे से होने वाले नुकसान व साथ ही नशा छोड़ने से मिलने वाले लाभ की जानकारी भी मदद करती है।
धुम्रपान हमारे नजदीकियों को भी पहुंचाता है नुकसान…
तम्बाकू सेवन या धूम्रपान के सेवन से शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होते हैं। जिसमें गले की खांसी, आंखों का ग्लूकोमा, कानों का बहरापन, फेफड़ों का रोग या विभिन्न प्रकार के कैन्सर जैसे रोग शामिल हैं।
दीदी ने बतलाया कि स्वयं परमात्मा द्वारा सिखाया गया राजयोग भारत का प्राचीन योग है, जिसमें श्रेष्ठ विचारों के आधार पर ध्यान का अभ्यास किया जाता है। ये विचार ही मनोबल बढ़ाने के लिए हैल्दी डाइट की तरह है क्योंकि ज्ञान में शक्ति होती है, ज्ञान ही रोशनी है, ज्ञान संजीवनी बूटी है और ज्ञान ही शस्त्र है। अच्छे विचार, ज्ञान श्रवण से ही मिलते हैं। वहीं ध्यान-योग का अभ्यास मन व बुद्धि की एक्सरसाइज की तरह है।

लॉकडाउन के समय को मोबाईल, टीवी व सो जाने में व्यर्थ न करें बच्चें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

Program Youtube Link

https://youtu.be/ptFnrjXG9Mw

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लॉकडाउन के समय को मोबाईल, टीवी व सो जाने में व्यर्थ न करें बच्चें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
खेल-कूद के साथ घर के कार्यों में भी सहयोग करें…
सुबह का समय शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए निश्चित करें…
स्कूल के बच्चों के लिए ऑनलाइन समर क्लास में मंजू दीदी ने दिए प्रेरणादायी उद्बोधन
बिलासपुर टिकरापाराः- कहते हैं कि जो रात को जल्दी सोए और सुबह को जल्दी जागे, उस बच्चे से दुनिया का दुख दूर-दूर को भागे। अर्थात् रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी जाग जाना, यह प्रकृति का नियम है और जो भी व्यक्ति इस नियम का पालन करता है वह हमेंशा खुश रहता है। सुबह उठकर हमें अपना समय आसन, प्राणायाम में देना चाहिए क्योंकि यह शरीर के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है और मन के स्वास्थ्य के लिए रोज मेडिटेशन व पॉजिटिव थिंकिंग चाहिए।
उक्त बातें स्कूली बच्चों के लिए आयोजित ऑनलाइन समर एक्टिविटीज़ में संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आपने बच्चों से कहा कि जो उगते हुए सूर्य के समय भी सोए रहते हैं उनके जीवन का सूर्य कैसे उग सकता है इसका मतलब है कि हमें जल्दी उठ जाना चाहिए और अपने आध्यात्मिक गुणवत्ता को विकसित करना चाहिए क्योंकि बौद्धिक शक्ति के आधार पर हम धन, नाम, मान, शान आदि तो कमा सकते हैं लेकिन एक अच्छा इंसान बनने के लिए हमारे जीवन में बुद्धि की शक्ति के साथ नैतिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक शक्ति की सख्त जरूरत होती है जिससे प्रेम का गुण हमारे अंदर आता है और हम सशक्त व स्थिरबुद्धि बन जाते हैं।
सफलता के लिए चार ‘स’ याद रखें….
जीवन में सफलता पाने के लिए हमें चार बातें याद रखनी है- सुनना, समझना, समाना और सुनाना। शिक्षकों द्वारा पढ़ायी जाने वाली पढ़ाई हो या अपने बड़ों के द्वारा दी गई जीवन की सीख हो, जब तक हम ध्यान से नहीं सुनेंगे तब तक अपना नहीं सकेंगे…कहते हैं कि यदि एक अच्छा वक्ता बनना हो तो पहले एक अच्छा श्रोता बनना होगा लेकिन केवल वक्ता बनना ही जरूरी नहीं है हमारे जीवन में यदि अच्छी बातें नहीं होंगी तो लोग कहेंगे ये केवल सुनाने वाले हैं। दूसरी बात है समझना, जो भी बातें हम सुनते हैं उसे सोचेंं कि क्या मैंने ठीक से समझा? और तीसरा है समाना। जो सुना, समझा वह अपने जीवन में समाना अर्थात् अमल करना। और अमल करने के बाद उसे दूसरों को सुनाना। गांधी जी का उदाहरण देते हुए आपने बताया कि एक मां के द्वारा अपने बच्चे को ज्यादा मीठा न खाने के लिए गांधीजी को कहा गया। तो गांधीजी ने एक महीने बाद उस बच्चे को बुलाकर ज्यादा मीठा खाने के नुकसान बताए और कहा कि ज्यादा मीठा न खाया करो। क्योंकि इससे पहले गांधीजी को खुद बहुत मीठा पसंद था। उन्होंने पहले एक महीने में अपने संस्कार सुधारे फिर बच्चे को कहा।
दीदी ने बच्चों को सकारात्मक सोच से निर्भयता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि स्वयं को स्वच्छ करते समय संशय व मन में भय के विचार न लाकर मैं स्वस्थ हूं, शक्तिशाली हूं, निरोगी हूं… ऐसे विचार करते हुए हाथ धोएं, स्नान करें व शारीरिक दूरी रखें। डर को दूर कर दें व कोरोना के बजाय करूणा याद रखें। आपने बच्चों को बताया कि आध्यात्मिक, अनुशासनप्रिय व समय के पाबंद होने पर हम सफल व्यक्ति के रूप में याद किये जाते हैं।
कार्यक्रम की शुरूआत प्रेरणादायी गीत- हम परमपिता के बच्चे हैं, धरती पर स्वर्ग बसाएंगे और ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी है, मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है… से हुई जिसे सुनकर सभी उमंग से भर गए। अंत में कुछ बच्चों ने इस सत्र में सुनी हुई बातों से जो सीखा उसे दोहरा कर फीडबैक दिया। दीदी ने कार्यक्रम के शरू व अंत में सभी को मेडिटेशन का अभ्यास कराया। लगभग सौ बच्चों ने इस क्लास का लाभ लिया। गुगल मीट व यूट्यूब के माध्यम से यह कार्यक्रम प्रसारित किया गया।

देने की प्रवृत्ति का यादगार पर्व है अक्षय तृतीया – ब्रह्माकुमारी मंजू

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देने की प्रवृत्ति का यादगार पर्व है अक्षय तृतीया – ब्रह्माकुमारी मंजू
अक्षय तृतीया पर किसी श्रेष्ठ कार्य का संकल्प जरूर लें
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन क्लास में बताया गया पर्व का महत्व

बिलासपुर टिकरापारा :- भारतीय संस्कृति का हर त्यौहार हमें कुछ सीख देता है, आज अक्षय तृतीया पर्व भी हमें बहुत सी शिक्षाएं देता है। अक्षय का अर्थ ही है कि जिसका कभी क्षय न हो अर्थात् जो नष्ट नहीं होता। जोड़ना और छोड़ना हमारी संस्कृति है। लक्ष्मी पूजा में धन कमाने का दिन होता है लेकिन यह दिन दान देने का दिन है। दान केवल चीज-वस्तुओं या धन का ही नहीं अपितु अपने ज्ञान, गुणों, शक्तियों, विशेषताओं, आशीर्वाद, शुभभावनाओं व शुभकामनाओं का दान देना भी श्रेष्ठ दान है। यदि आपके जीवन में कुछ चीजों की कमी है तो उन चीजों का ही दान देने का प्रयास करें इससे वह चीज आने लगती है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने ऑनलाइन सत्संग में अक्षय तृतीया पर्व का महत्व बताते हुए कही। आपने बतलाया कि परशुराम जी, ब्रह्मा के पुत्र अक्षय कुमार व मां गंगा के अवतरण दिवस के रूप में इस पर्व को मनाने की परंपरा है। हम यदि इस पर्व के महत्व को समझ कर मनाएंगे तो ही सार्थकता है अन्यथा केवल एक परंपरा मात्र रह जायेगी।
शुभ कार्य की शुरूआत का दिन…
दीदी ने आगे कहा कि यूं तो अच्छे कार्य की शुरूआत के लिए कोई मुहूर्त की आवश्यकता नहीं है लेकिन अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। हम किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत कर सकते हैं। अपनी योग्यता को विकसित कर सकते हैं, अपनी क्षमता या दक्षता को बढ़ा सकते हैं। विशेष इस कोरोना काल में किसी को मानसिक संबल देना, यदि आपकी क्षमता हो तो आर्थिक सहयोग देना, कुछ नहीं तो स्वयं व परिवार के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए सत्संग, योग, ध्यान, एक्सरसाइज, प्राणायाम आदि का समय निश्चित करें। अपने आस पड़ोस के लोगों के सहयोगी बनें। उन्हें सांत्वना व धैर्य जरूर बंधाएं।

मरीज को स्वस्थ करने में नर्स के त्याग व समर्पण की भूमिका अहम – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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मरीज को स्वस्थ करने में नर्स के त्याग व समर्पण की भूमिका अहम – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
वर्तमान कठिन समय में नर्सिंग स्टाफ की सेवाएं अमूल्य
अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा किया गया नर्स बहनों का आभार

बिलासपुर टिकरापाराः- मरीज के स्वस्थ होने में चिकित्सक की भूमिका तो रहती ही है किन्तु दिनभर की दिनचर्या में चिकित्सक के परामर्शानुसार नर्स के द्वारा मरीज की देखभाल, उपचार व नर्स का मधुर व्यवहार मरीज को जल्दी ठीक होने में काफी मदद करता है। आज के कठिन समय में तो नर्सिंग स्टाफ की सेवाएं और भी अमूल्य हैं क्योंकि इस फिज़ीकल डिस्टेन्सिंग के दौर में पीपीई किट पहनकर भी रोगी के निकट रहकर उनका उपचार करना और एक मां के समान देखरेख करना अद्वितीय सेवा है।
उक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने ऑनलाइन क्लास मे कही। दीदी ने चिकित्सीय सेवाएं दे रहे भाई-बहनों का उनके त्याग, समर्पणता और परोपकार की भावना के लिए ब्रह्माकुमारीज़ परिवार की ओर से बहुत-बहुत आभार किया और दुआएं देते हुए कहा कि शांत मन और श्रेष्ठ भावना से किए गए उपचार से मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है। स्वयं को तनाव व थकान से मुक्त रखने के लिए जीवन में सकारात्मक चिंतन, मेडिटेशन, एक्सरसाइज व प्राणायाम करना आवश्यक है। दूसरों की सेवा के लिए स्वयं के तन व मन का सशक्त होना जरूरी है। इसलिए सबकी सेवा करते भी अपने लिए समय देना जरूरी है।

सहन करने व समाने की शक्ति का दूसरा नाम है मां – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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प्यार के सागर परमात्मा है हम सभी आत्माओं के मात-पिता
सहन करने व समाने की शक्ति का दूसरा नाम है मां – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
मां का कड़ा स्वभाव भी बच्चों को शिक्षा देकर आगे बढ़ाता है
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में मातृ दिवस पर विशेष क्लास आयोजित

https://dharmadharm.in/mother-of-brahmakumari-manju-is-another-name-for-the-power-to-bear-and-assimilate/

बिलासपुर टिकरापाराः- जिस प्रकार सागर में सभी नदियों का जल समा जाता है उसी तरह मां भी अपने बच्चों के गुण-अवगुण, विशेषता-दोष सभी अपने अंदर समा लेती है। बच्चा सपूत हो या कपूत लेकिन मां का प्यार दोनों के लिए होता है। मां और मातृभूमि का कर्ज नहीं चुकाया जा सकता। मां व धरती मां के अतिरिक्त महात्मा भी महान होते हैं जो हमें परमात्मा से मिलाने का कार्य करते हैं और परमात्मा संपूर्ण प्राणीमात्र के मात-पिता हैं। जिन्हें प्यार का सागर भी कहते हैं वो सदा ही प्यार, ज्ञान, गुण और शक्तियां लुटाने को तैयार होते हैं उन्हें किसी भी चीज को पाने की हमसे आस नहीं होती वे सदा ही दाता हैं। वो हमें शिक्षाएं व सावधानियां दे हमारी सर्व कमियों को निकाल कर हमें विश्व का मालिक बनाने इस धरती पर आए हुए हैं।

उक्त बातें दीदी जी ने मातृ दिवस के अवसर पर आज प्रातः व सायं के सत्संग में ऑनलाइन संबोधित करते हुए कही। आपने बतलाया कि मां हमारे जीवन की प्रथम गुरू तो होती ही है किन्तु मां के अतिरिक्त अनेक अन्य हमारे बड़े भी होते हैं जो हमें बिना किसी स्वार्थ के हमारी कमियों पर ध्यान खिंचवाते हैं, हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देते हैं। उनका भी एहसान चुकाया नहीं जा सकता। मातृ दिवस, पितृ दिवस, शिक्षक दिवस आदि दिवस एक दिन के लिए नहीं होते बल्कि हमेशा के लिए अपनी स्मृति में उनके महत्व, त्याग, बलिदान व ऐहसानों ृको याद रखने के लिए एक प्रेरणा का दिवस होता है।

दीदी ने कहा हालांकि यह दिवस विदेशों में शुरू किया गया क्योंकि वहां अधिकतर परिवार में बच्चे जल्दी ही अपने मात-पिता से दूर रहने लग जाते हैं। भारत में संयुक्त परिवार की संस्कृति है लेकिन हम मातृ दिवस को मां के प्रति समर्पित करके एक अवसर के रूप में लेकर मनाते हैं।

हमारे देश में जितने भी महापुरूष हुए हैं उनकी माताएं मन से बहुत ही शक्तिशाली, निडर और महान थीं। महापुरूषों, वीर पुरूषों आदि की महानता में उनकी मां का ही महत्वपूर्ण योगदान रहा।
दीदी ने कहा कि इस कोरोना काल में अनेक लोगों ने अपनी मां को खोया होगा उन्हें हम ईश्वरीय परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और सारे विश्व की आत्माओं प्रति यही शुभभावना व शुभकामना रखते हैं कि सभी स्वस्थ रहें, निरोग रहें, किसी को कोई भी प्रकार का दुख न रहे और स्वयं भगवान सुख-शान्ति से भरपूर नई दुनिया की स्थापना का कार्य करा रहे हैं।

सकारात्मक विचारों का ओवरडोज़ वर्तमान समय की आवश्यकता :- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

कार्यक्रम की विडियो लिंक:
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सकारात्मक विचारों का ओवरडोज़ वर्तमान समय की आवश्यकता :- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
बिलासपुर लेडिज़ सर्कल एवं बिलासपुर राउण्ट टेबल का विशेष आयोजन
‘शान्ति की शक्ति से कोविड पर विजय’ विषय पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने दिए अनुभवयुक्त व्याख्यान व कराया मेडिटेशन का अभ्यास

बिलासपुर टिकरापारा :- हमारे निकट के संबंधों में विपत्ति आना, स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में भावनात्मक होने के कारण भय, घबराहट, आंसू, दर्द का आना आज के समय में स्वाभाविक हो गया है। ऐसे समय में सकारात्मक विचारों ओवरडोज़़ लेना जरूरी है क्योंकि भय, घबराहट आदि एक तरह से नकारात्मक भावनाएं हैं जिसका असर स्वयं पर व अपने परिजनों पर बहुत बुरा पड़ता है। मन को सकारात्मक व शक्तिशाली विचारों में इतना व्यस्त रखें कि किसी भी प्रकार के नुकसान पहुंचाने वाले विचारों के लिए स्थान न रहे। इसके लिए सुबह-सुबह न्यूज़ चैनल, अखबार, सोशल मीडिया से न जुड़कर अपना समय आसन-प्राणायाम, सत्संग, अच्छे चिंतन वाले पुस्तक व मेडिटेशन करने में दें। जैसे घर में सामग्रियों का स्टॉक भरपूर रखने का ख्याल रहता ऐसे ही मन में अच्छे विचारों का स्टॉक भी भरपूर रखना जरूरी है।
उक्त बातें बिलासपुर लेडिज़ सर्कल व बिलासपुर राउण्ड टेबल द्वारा ज़ूम मीटिंग पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
मन को शांत रखें व भगवान को अपना साथी बनाएं…
कार्यक्रम के विषय – ‘‘उम्मीद : शान्ति की शक्ति से कोविड पर विजय’’ पर सभी से बात करते हुए मंजू दीदी जी ने कहा कि मन की शान्ति; सकारात्मक सोच का ही परिणाम है और यही आध्यात्मिकता है। पवित्र ग्रंथ गीता में भी भगवान ने सबसे पहले अर्जुन का विषाद दूर किया। विषाद को आज की भाषा में हम तनाव या अवसाद कह रहे हैं। उसके पश्चात् ही अर्जुन के अंदर युद्ध करने की शक्ति आई। आज के समय में भी हमारा युद्ध व चुनौती यही है कि हम हर हालत में मन को शांत, एकाग्र, शक्तिशाली व सकारात्मक रखें और भगवान को अपना साथी बनाएं क्योंकि जिसका साथी है भगवान, उसे क्या रोकेगा आंधी और तूफान।
भय है 11वां विकार…
काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, आलस्य और अलबेलापन – ये दस विकार हैं। ग्यारहवें विकार के रूप में भय आज हमारे सामने इतनी बड़ी समस्या बनकर खड़ा है। यदि हम कोविड के सकारात्मक पहलू पर नजर डालें तो इसने हमें स्वच्छता का पाठ पढ़ा दिया। हम हाथ धोते समय कोरोना के बारे में न सोचकर यह सोचें कि – ‘मैं स्वस्थ आत्मा हूं’। कोरोना-कोरोना कहकर अपने को व वातावरण को पैनिक न करें बल्कि कोरोना की जगह करूणा का भाव मन में जागृत करें अर्थात् सबके प्रति प्यार, मधुरता, रहम व तकलीफमंद के प्रति कुछ करने का भाव हो। सोशल डिस्टेन्सिंग जरूरी है किन्तु घर के सदस्यों की देखभाल के लिए स्पर्श जरूरी है क्योंकि यह बहुत बड़ी चिकित्सा का कार्य करता है क्योंकि हमारी हथेलियों में ऊर्जा के द्वार होते हैं।
लेडिज़ सर्कल की सभी गृहस्थ में रहने वाली महिलाओं का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि कन्या वह जो 21 कुलों का उद्धार करे लेकिन माताएं-बहनें तो अपने दोनों पक्षों- ससुराल व मायके के 21 कुलों का उद्धार करती हैं। वर्तमान स्थिति में यदि घर से बाहर नहीं जा सकते तो कम से कम अपने संपर्क वालों से फोन करके यह कहकर उनका मनोबल व उत्साह तो बढ़ा ही सकते हैं कि हम आपके साथ हैं, ईश्वर आपके साथ है। हमारे हर विचार व वाणी में आशीर्वाद होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय सिंधु सभा की सचिव ब्रह्माकुमारीज़ की नियमित सदस्य बहन श्रीमति विनीता भावनानी जी ने सभी को आध्यात्म की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि मुझे ब्रह्माकुमारीज़ से बहुत सी चीजें सीखने को मिली, मन का सशक्तिकरण हुआ और राजयोग मेडिटेशन से जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन व सफलता मिली। यहां मुझे ईश्वर की समीपता का गहराई से अनुभव हुआ कि स्वयं भगवान आकर दैवीय गुणों को अपनाने की पढ़ाई पढ़ाते हैं। उन्होंने इस आयोजन की बहुत सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन बिलासपुर लेडिज़ क्लब की चेयरपर्सन बहन साइना उभरानी जी ने बहुत कुशलता पूर्वक किया। शहर के सौ से अधिक गणमान्य नागरिकों ने इस सत्र का लाभ लिया। सभी पार्टिसिपेन्ट्स ने चैट के माध्यम से कार्यक्रम की प्रशंसा की व आभार प्रकट किया।