ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में संयुक्त रूप से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस एवं रक्षाबंधन का पर्व

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
नैतिक मूल्यों के बंधन से होती है सच्ची स्वतंत्रता की अनुभूति – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में संयुक्त रूप से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस एवं रक्षाबंधन का पर्व

बिलासपुर टिकरापारा – यूं तो बंधन किसी को भी अच्छा नहीं लगता लेकिन रक्षाबंधन का पावन पर्व ऐसा प्यारा बंधन जिसमें सभी बंधना चाहते हैं। रक्षासूत्र के साथ देषभक्ति व नैतिक मूल्यों का बंधन ऐसा बंधन है जो सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव कराता है। हम अंग्रेजों की गुलामी से तो स्वतंत्र हो चुके हैं किन्तु काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, आलस्य, अलबेलेपन के विकार जो रावण के दस शीष के समान हैं, आज भी हम उनके गुलाम हैं, रावण की जेल में हैं। इस जेल से छुड़ाने के लिए स्वयं निराकार राम ज्योतिस्वरूप परमात्मा इस धरा पर अवतरित होते हैं और इस दुनिया को सुख-षान्ति भरी दुनिया ‘स्वर्ग’ बनाकर भारत को विष्व गुरू का स्थान दिलाते हैं।
उक्त बातें रक्षाबंधन, स्वतंत्रता दिवस एवं सत्गुरूवार के दिन टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही।
दृढ़ संकल्प, परमात्मा की मदद और शान्ति की शक्ति से होगी कमजोरी समाप्त..
दीदी जी ने संस्था प्रमुख दादी जानकी जी का संदेष सुनाते हुए कहा कि वर्तमान संगमयुग का समय बहुत ही अमूल्य है। अपना हर क्षण, श्वांस, संकल्प सभी सफल करना है, गंवाना नहीं है। ईष्वर अपने साथ हैं तो डरने की बात ही नहीं है। अंदर में कोई कमी या कमजोरी है तो उसे दृढ़ता भरे शुभ संकल्प, परमात्मा की मदद व शान्ति की शक्ति से समाप्त करें।
ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, नारे व नृत्य के साथ मनाया गया स्वतंत्रता दिवस
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया, तत्पष्चात् राष्ट्रगान, भारत माता की जय के नारे व ये देश है वीर जवानों का….गीत पर सभी ने सामूहिक नृत्य कर देषभक्ति के भाव में डूब गए। इस अवसर पर दीदी ने सभी को कमजोरियों के त्याग व दिव्य गुणों की धारणा के लिए संकल्प कराया। अंत में रक्षाबंधन का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए परमात्मा की ओर से सभी को रक्षासूत्र बांधा गया एवं प्रसाद व वरदान कार्ड दिया गया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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बिलासपुर (छ.ग.)

ब्रह्माकुमारी बहनों ने शहर के अनेक स्थानों पर विभिन्न वर्गों के लोगों को बांधी राखी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
ब्रह्माकुमारी बहनों ने शहर के अनेक स्थानों पर विभिन्न वर्गों के लोगों को बांधी राखी

बिलासपुर टिकरापारा – रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय की बहनों ने शहर के अनेक स्थानों पर विभिन्न वर्गों के लोगों को रक्षासूत्र बांधकर खुषियां बांटी एवं परमात्मा षिव के अवतरण का दिव्य संदेष दिया।
विधायक भ्राता शैलेष पाण्डेय जी एवं विधायक कार्यालय में उपस्थित भाईयों को, डॉ. वैषाली गोवर्धन, डॉ. रष्मि बुधिया, डॉ. मनीष बुधिया, तारबाहर पुलिस थाना के पुलिस भाईयों, अपोलो हॉस्पीटल के गार्ड्स भाईयों, विभिन्न समाचार-पत्र के कार्यालयों में एवं कपड़ा व्यवसायियों को राखी बांधी। रक्षासूत्र बांधने के इस क्रम में ब्र.कु. रूपा बहन, ब्र.कु. ज्ञाना बहन, ब्र.कु. शषी बहन, ब्र.कु. गायत्री बहन एवं ब्र.कु. पूर्णिमा बहन शामिल थे।
गुरूवार शाम 7 बजे शहर के समस्त नागरिकों के लिए रक्षाबंधन स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन टिकरापारा में
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने जानकारी दी कि समस्त शहरवासियों के लिए रक्षाबंधन स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन टिकरापारा स्थित सेवाकेन्द्र में गुरूवार शाम 7 बजे से रखा गया है। जिसमें सभी उम्र व वर्ग के भाई-बहनें शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में रक्षाबंधन पर्व के विभिन्न रस्मों के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाष डाला जायेगा व भगवान की ओर से सभी भाई-बहनों को राखी बांधी जायेगी।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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सांसद ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में साधकों को संबोधित…

विष्व बंधुत्व की भावना केवल भारत की संस्कृति है – अरूण साव
सांसद ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में साधकों को संबोधित…
परिवार सहित सेवाकेन्द्र का किया अवलोकन व ध्यान की भी अनुभूति की।

बिलासपुर टिकरापारा, – पूरी दुनिया के अंदर हमारा भारत अद्भुत संस्कृतियों वाला देष है। कोई भी देष विष्व बंधुत्व का संदेष नहीं देता है। यह केवल भारत की संस्कृति और भारत की मिट्टी में ही ये असर है कि दुनिया के लोगों को हम अपना परिवार समझते हैं। लेकिन आज मैं और मेरेपन के विकार के कारण हम केवल आत्म केन्द्रित होते जा रहे हैं विष्व बंधुत्व का भाव कम होता जा रहा है। मैं और मेरे परिवार से बाहर निकलने की हमारी प्रवृत्ति कम होती जा रही है। इसे दूर करने के लिए आध्यात्म को अपनाना जरूरी है।
उक्त बातें बिलासपुर के सांसद भ्राता अरूण साव जी ने ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में आयोजित योग साधना कार्यक्रम में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए कही। आपने आगे कहा कि हम कौन हैं, हमारी जिम्मेदारी क्या है, हम किसलिए इस दुनिया में आए हैं इस बात का ऐहसास परमात्मा के इस पवित्र स्थल पर आकर ही होता है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे दूसरों की मदद करने, समस्या का समाधान करने, उदास चेहरे पर मुस्कुराहट लाने में प्रयासरत रहे। किसी को नहीं कहने में कठिनाई व दर्द की महसूसता होती है।
बिलासपुरवासियों की आवाज बनने का करेंगे पूरा प्रयास
उन्होंने सभी से अनुरोध करते हुए कहा कि हर क्षेत्र में बिलासपुर का विकास हो इसके लिए आप अपनी सलाह या सुझाव अवष्य दें आपकी आवाज को दिल्ली संसद भवन तक पहुंचाने का पूरा प्रयास करूंगा। आपके अमूल्य सलाह व सुझाव या किसी भी समस्या के निवारण के लिए भी मेरा द्वार सदा खुला रहेगा।
संस्था के द्वारा हो रहा विष्व बंधुत्व की भावना का प्रसार
ब्रह्माकुमारी संस्था की विषेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि संस्था के द्वारा विष्व बंधुता का प्रचार-प्रसार करना, ध्यान, ज्ञान मुरली, मेडिटेषन करना, मानव के बीच में प्यार फैलाना व चारित्रिक उत्थान के कार्य करना – समाज में स्पष्ट रूप से झलकता है व संस्था की अलग पहचान बनाता है।
सेवाकेन्द्र का अवलोकन व ध्यान अनुभूति के पश्चात् बहनों ने बांधी राखी…
भ्राता अरूण साव जी अपनी धर्मपत्नी श्रीमति मीना व पुत्र के साथ सेवाकेन्द्र का अवलोकन किया। सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने बाबा की कुटिया में उन्हेंं ध्यान की अनुभूति कराई व तत्पष्चात् रक्षासूत्र बांधकर उन्हें ब्रह्माभोजन भी कराया गया।
भारत को पुनः जगत्गुरू बनाने के लिए आध्यात्म को अपनाना जरूरी-ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
इस अवसर पर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कहा कि भारत को पुनः जगत्गुरू बनाने के लिए आध्यात्म की भूमिका सबसे अहम है। आध्यात्म के क्षेत्र में जब प्रषासन का सहयोग होगा तब राजयोग व आसन-प्राणायाम की षिक्षा से स्वस्थ तन, स्वस्थ मन व आध्यात्मिक रूप से सषक्त व्यक्ति के निर्माण करने की सेवा में निष्चित ही तीव्रता आयेगी।

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भ्राता सम्पादक महोदय,
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कलेक्टर ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र का अवलोकन, ध्यान की भी अनुभूति की।

सादर प्रकाषनार्थ
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दिनचर्या में आधे से एक घण्टे का सकारात्मक कार्य बढ़ाता है हमारी ऊर्जा – डॉ. संजय अलंग
कलेक्टर ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में साधकों को संबोधित…
सेवाकेन्द्र का किया अवलोकन, ध्यान की भी अनुभूति की।

बिलासपुर टिकरापारा, – कोई भी कार्य हो, यदि निरंतर हम दिनभर वही कार्य करते रहे तो जरूर मोनोटोनस हमें परेषान कर देगा, उस कार्य में अरूचि पैदा हो जायेगी, चिड़चिड़ाहट, थकावट या उदासी आने लगेगी इसलिए 24 घण्टे में न्यूनतम आधे से एक घण्टे के लिए उस कार्य के बीच में ब्रेक चाहिए। ब्रेक अर्थात् कोई दूसरा कार्य करना, सोना या आराम करना दूसरे कार्य की गिनती में नहीं आता। चाहे आप गार्डनिंग करें, चाहे योग करें, पूजा करने बैठ जाएं, उस दौरान मोबाइल भी छोड़ दें। इससे आपका ध्यान उस मूल कार्य से डाइवर्ट होगा  और जब दोबारा आप उस कार्य में जुटेंगे तो ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करेंगे। यह एक बहुत बड़ा मूलमंत्र है। कार्य के बीच में ब्रेक किसी से लड़ाई-झगड़ा, किसी से बातचीत भी हो सकती है लेकिन बेहतर यह है कि वह कार्य रचनात्मक हो और उस रचनात्मकता से समाज को हम कुछ दे सकें तो यह सोने पे सुहागा है। समाज को न भी दे सकें तो भी ब्रेक जरूरी ही है और कोषिष करें कि वह सकारात्मक हो। सकारात्मक नहीं भी हो तो भी ब्रेक चाहिए। आप दो ऐसे व्यक्तियों में तुलना करेंगे जो एक तो निरंतर उसी कार्य में है और एक थोड़ा ब्रेक लेकर फिर वही कार्य करता है तो आप पायेंगे कि ब्रेक लेकर कार्य करने वाला अपने कार्य में थोड़ा आगे बढ़ जाता है, खुष रहता है, सकारात्मकता बढ़ती है। मेडिटेशन या पॉज़िटिव थिंकिंग या सत्संग बेहतर रचनात्मक कार्यों में से एक है।
उक्त बातें जिले के कलेक्टर भ्राता डॉ. संजय अलंग जी ने टिकरापारा सेवाकेन्द्र में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए कही।
धैर्य सबसे बड़ा मानवीय गुण…
डॉ. अलंग ने कहा कि जीवन में धैर्य का होना बहुत जरूरी है, यह सबसे बड़ा मानवीय गुण है। संस्था की बहनों और सदस्यों में धैर्यता का गुण अपेक्षाकृत अधिक अनुभव हुआ। धैर्य का गुण लगता आसान है लेकिन है सबसे कठिन। हम रोड में ही जाकर रेड लाइट तोड़ने लगते हैं जो अधैर्यता का परिचायक है और फ्रायड के अनुसार भी लाइन को तोड़ना ही भ्रष्टाचार का मूल है। किसी चीज के लिए अपने नंबर आने तक प्रतीक्षा करना ये सबसे बड़ी मानवीय उपलब्धि है जो कि आज के समय में बहुत कम होती जा रही है। लोग बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाते, और हर चीज में पहले मैं करने का भाव आ जाता। सभी की खुषी की कामना करते हुए उन्होंने अपने वक्तव्य को विराम दिया।
सेवाकेन्द्र का अवलोकन व ध्यान अनुभूति के पश्चात् बहनों ने बांधी राखी…
डॉ. अलंग ने सेवाकेन्द्र का बारीकी से अवलोकन किया। सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने बाबा की कुटिया में उन्हेंं ध्यान की अनुभूति कराई व तत्पष्चात् रक्षासूत्र बांधकर उन्हें ब्रह्माभोजन भी कराया गया।

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बिलासपुर, टिकरापारा – पांचवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिला प्रशासन ने मंजू दीदी को योग संचालन के लिए किया आमंत्रित

बिलासपुर, टिकरापारा, 21 जून – पांचवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिला प्रषासन द्वारा आयोजित सामूहिक योग के लिए सामान्य योग अभ्यास क्रम (प्रोटोकॉल के अनुसार) के संचालन के लिए बिलासपुर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी एवं छत्तीसगढ़ योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्रह्मा कुमारी मंजू दीदी जी को आमंत्रित किया गया। दीदी ने बहतराई खेल परिसर में आयोजित इस सामूहिक योग कार्यक्रम का दिषा-निर्देषन किया जिसमें योग प्रदर्षन के लिए ब्रह्माकुमारीज़ से गौरी बहन के साथ, पतंजलि, आर्ट ऑफ लिविंग व गायत्री परिवार के सदस्य शामिल रहे।
इस अवसर पर योग अभ्यास के लिए बिलासपुर जिले के विधायक भ्राता शैलेष पाण्डेय जी, बेलतरा क्षेत्र के विधायक भ्राता रजनीष सिंह जी, महापौर भ्राता किषोर रॉय जी, कलेक्टर भ्राता डॉ. संजय अलंग जी, संभागायुक्त (कमिष्नर) भ्राता भरतलाल बंजारे जी, कांग्रेस महामंत्री भ्राता अटल श्रीवास्तव जी, समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक भ्राता हेरमन खलखो जी, अन्य जिला अधिकारी गण एवं बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक गण उपस्थित रहे।
योग अभ्यास की पूर्णता के पश्चात् सफलता पूर्वक संचालन के लिए विधायक भ्राता शैलेष पाण्डेय जी ने ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी एवं अन्य योग प्रषिक्षकों का सम्मान किया।

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सुविचारों का खजाना है ज्ञान मुरली – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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सुविचारों का खजाना है ज्ञान मुरली – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
परमात्मा का मुख्य कर्तव्य विकारों के बंधनों से छुड़ाना व नई दुनिया की स्थापना करना
मनुष्य अल्पज्ञ हैं और परमात्मा सर्वज्ञ हैं
मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी के महावाक्य सुनाए गए

बिलासपुर, टिकरापारा 24 जून – जिस प्रकार पुराना मकान नहीं बनाया जा सकता। मकान तो नया ही बनता है परन्तु समय के साथ वह खुद ही पुराना हो जाता है। उसी प्रकार परमात्मा ने इस दुनिया को सुख-षान्ति-खुषी से भरपूर एकदम नया अर्थात् सतोप्रधान बनाया जहां मनुष्य देवताओं के समान थे और प्रकृति के पांच तत्व भी सतोप्रधान, सुखदायी थे जिसे हम स्वर्ग या सतयुग कहते हैं लेकिन समय के साथ-साथ मनुष्य में विकार प्रवेष करते गए और आत्मा सतोप्रधान से सतोसामान्य, रजो से गुजरते हुए तमोप्रधान बन गई। और मनुष्य के वृत्तियों का प्रभाव प्रकृति के पांच तत्वों पर भी पड़ा जिससे वह भी तमोप्रधान दुखदायी बन गई और कभी बाढ़, कभी सूखा, भूकम्प, सुनामी आदि के रूप में दुख देने लगी। लेकिन इस सृष्टि रूपी नाटक में परमात्मा का भी कर्तव्य शामिल है। वे अपने समय पर आते हैं अर्थात् जब पूरी सृष्टि में अधर्म फैल जाता है तब परमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर दो मुख्य कर्तव्य करते हैं जो कोई भी मनुष्य आत्मा नहीं कर सकती। वह है- एक तो सर्व मनुष्य आत्माओं को विकारों से छुड़ाना और दूसरा है धरती पर स्वर्ग की स्थापना करना इसलिए परमात्मा को अंग्रेजी में हैवेनली गॉड फादर भी कहते हैं। परमात्मा और मनुष्यात्मा में मुख्य अंतर यही है कि मनुष्य अल्पज्ञ हैं और परमात्मा सर्वज्ञ हैं।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में संस्था की प्रथम प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर मम्मा के महावाक्य सुनाते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बताया कि मम्मा परमात्मा षिवबाबा द्वारा सुनाए गए महावाक्यों को बहुत अच्छे से स्पष्ट करती थीं।
जो आप जानते हैं, दूसरों को सीखा दें….
दीदी ने बताया कि मम्मा कहती थीं कि जो आप जानते हैं वह दूसरों को जरूर सीखा दें, इससे आपकी छवि भी अमर हो जाएगी और दूसरों में भी वह विषेषता आ जाएगी। ज्ञान मुरली अच्छे विचारों का खजाना है जिसमें प्रतिदिन परमात्म श्रीमत के साथ-साथ बहुत से अच्छे विचार शामिल होते हैं और ये सुविचार मन के लिए शक्तिषाली भोजन है जो सामान्य व्यक्ति के लिए जरूरी तो है ही परन्तु तनाव, डिप्रेषन या मनोरोगियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें कहा तो जाता है कि अच्छा सोचो लेकिन अच्छा सोचने के लिए अच्छे विचार कहां से मिलेंगे, यह कोई नहीं बताता। क्योंकि मन का कार्य ही है विचार करना, यदि हम अच्छे विचार नहीं करेंगे तो निष्चित ही नकारात्मक, व्यर्थ व स्वयं को हतोत्साहित करने वाले विचार आने लगते हैं।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
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