योग कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है, मन का नाता ईश्वर से जोड़ना ही योग है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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योग कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है, मन का नाता ईश्वर से जोड़ना ही योग है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

मेडिटेशन करने से होती है अनेक शक्तियों की प्राप्ति

ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में मेडिटेशन शिविर

https://youtu.be/lAc230xO7jo

बलौदा :- हम कोई भी कार्य बिना फायदे के नहीं करते इसलिए मेडिटेशन करने से पहले इससे होने वाले लाभ के बारे में जानना जरूरी है। गीता में भगवान द्वारा सिखाए गए मेडिटेशन को राजयोग कहते हैं। राजयोग के अभ्यास अर्थात् मन का नाता ईश्वर से जोड़ने से अविनाशी सुख-शान्ति की प्राप्ति तो होती ही है, साथ कई प्रकार की आध्यात्मिक शक्तियां भी आ जाती हैं। इनमें से आठ बहुत ही मुख्य और महत्वपूर्ण हैं। देवियों को भी आठ भुजाएं बतायी जाती हैं जो अष्ट शक्तियों के ही प्रतीक हैं। कई मनुष्य योग को बहुत कठिन समझते हैं। लेकिन वास्तव में राजयोग बहुत सहज विषय है जो चलते-फिरते भी किया जा सकता है। जैसे एक बच्चे को अपने पिता की याद स्वतः और सहज रहती है ऐसे ही हम सभी आत्माओं को अपने पिता परमात्मा की याद स्वतः और सहज रहनी चाहिए। लेकिन ईश्वर का सत्य परिचय न जानने के कारण हम ईश्वर को याद ही नहीं करते इसलिए हमें शक्तियों की प्राप्ति नहीं होती। उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में चल रहे राजयोग शिविर के बेसिक कोर्स के अंतिम दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। दीदी ने बताया कि इन शक्तियों में सबसे पहली शक्ति सहनशक्ति है। रिश्तों में जितना सहन करेंगे उतने ही मजबूत बनेंगे। लोगों के संस्कारों को सहन करना है। सहन करते यह भी ध्यान रखना है कि हमारी शीतलता कहीं खो न जाए, नहीं तो कई बार ऐसा होता है कि हम सहन करते-करते बॉयल फ्रॉॅग की तरह हो जाते हैं और एक समय आता है कि हम ज्वालामुखी की तरह फट पड़ते हैं। हमें ध्यान रहे व्यक्तियों का सहन करना है और परिस्थितियों का सामना करना है। 2. दूसरी शक्ति है सामना करने की। यदि मन शक्तिशाली और सकारात्मक है तो बाह्य चुनौतियों व परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति आ जाती है। 3. परखने की शक्ति- कोई भी कार्य करने से पहले उसके फायदे व नुकसान को परखना जरूरी है और बुद्धि की एकाग्रता न होने व कमजोर विवेक के कारण परखने व निर्णय लेने में समय बहुत जाता है। 4. निर्णय करने की शक्ति- अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय आप स्वयं लें क्योंकि आपसे बेहतर आपको कोई और नहीं जान सकता है। 5. सहयोग शक्ति- घर में एक-दूसरे को सकारात्मक व शुभ भावनाओं के साथ सपोर्ट करें, आगे बढ़ने में मदद करें। जैसे एक-एक उंगली के सहयोग से गोवर्धन पहाड़ उठ गया था तो समस्या क्या बड़ी चीज है। 6. समाने की शक्ति- परिवार में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को अपने अंदर समाने की आदत डालें फिर देखिए आपका घर स्वर्ग बन जाएगा। 7. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति- व्यस्त होते हुए भी मन को सदा हल्के रखना, बिज़ी लाइफ होते भी स्वयं की इज़ी रखना। 8. समेटने की शक्ति- व्यर्थ विचारों से स्वयं को समेटकर अपने मन को पॉज़िटिव थॉट दें। इन सभी अष्ट शक्तियों को प्राप्त करने के लिए मां से वरदान लें और प्रतिदिन राजयोग मेडिटेशन और सत्संग जरूर करें।

सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने निरंतरता जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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*सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने निरंतरता जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

 

*मेडिटेशन के बेसिक कोर्स का आज अंतिम दिन, कल से एडवांस कोर्स आरंभ*

बलौदा, 22 सितम्बर :- नकारात्मक जीवनशैली एक जंगल के समान व सकारात्मक जीवनशैली एक बगीचे के समान है जिस प्रकार एक जंगल बनाने के लिए मेहनत नहीं लगती लेकिन फूलों का बगीचा बनाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। उसी प्रकार जीवन में सकारात्मकता लाना कोई ओवरनाइट प्रोसेस नहीं है जो एक ही बार के सत्संग से हम सकारात्मक दृष्टिकोण वाले बन जाएं। इसके लिए निरंतर अच्छे चिंतन की आवश्यकता होती है। अच्छे चिंतन के लिए अच्छी किताबों का अध्ययन, प्रतिदिन सत्संग या अच्छे लोगों से मिलना माध्यम हो सकते हैं।

 

उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ शिव-दर्शन भवन बलौदा में चल रहे मेडिटेशन के बेसिक कोर्स के छठवें दिन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बताया कि कलयुग के समय में आत्मा रूपी बैटरी डिस्चार्ज हो चुकी है। रोज के सत्संग से मिली शिक्षाओं से हमें स्वयं की जांच करने की प्रेरणा मिलती है। यदि हम आज कोई गलती करते हैं, क्रोध, ईर्ष्या, नफरत आदि अवगुणों के वशीभूत हुए होते हैं तो सत्संग से हमें वह गलती रियलाइज होती है और मेडिटेशन से हमें परिवर्तन करने की शक्ति मिलती है।

 

दीदी ने तीसरे, चौथे व पांचवे दिन हमारा लक्ष्य, परमात्मा का सत्य परिचय व तीनमुखी, चारमुखी व पंचमुखी ब्रह्मा का रहस्य बताया। आपने कहा कि ईश्वर से अपना संबंध जोड़कर अपनी विशेषताओं को समाज सेवा व विश्व परिवर्तन के कार्य में लगाना ही मानव जीवन का उद्देश्य है। वर्तमान संगमयुग में स्वयं भगवान शिव इस धरा पर अवतरित होकर भारत देश में आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना कर अटल, अखण्ड राज्य की स्थापना कर रहे हैं।

 

भगवान एक हैं व तैंतीस करोड़ देवी-देवताएं हैं यह बताते हुए आपने भगवान को परखने की कसौटियां दी और कहा कि जो सर्वधर्म मान्य, सर्वोच्च, सर्वोपरि, सर्वज्ञ और सर्व गुणों में अनंत हो उन्हें भगवान कहेंगे। हम देखेंगे कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग अर्थात् ज्योति स्वरूप परमात्मा शिव को सभी धर्मां में स्वीकार किया गया है। क्रिश्चयन धर्म में गॉड इज़ लाइट, सिक्ख धर्म में एक ओंकार निराकार, मुस्लिम धर्म में नूर के रूप में ईश्वर की मान्यता है और हिन्दू धर्म में तो है ही ज्योतिर्लिंग और उन्हें ही ब्रह्माकुमारीज़ में प्यार से शिव बाबा कहते हैं। बाबा शब्द पिता के लिए प्रयोग किया जाता है। भगवान शिव सर्वाच्च हैं क्योंकि उनसे ऊंची शक्ति दुनिया में कोई नहीं है। वे सर्वोपरि हैं क्योकि सुख-दुख के चक्र में नहीं आते, सर्व बंधनों से मुक्त हैं वे ही सदाशिव हैं। वे सर्वज्ञ भी हैं क्योंकि तीन लकीर त्रिकालदर्शी व त्रिलोकीनाथ होने का प्रतीक हैं। उन पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाया जाता है क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु व महेश के भी रचयिता हैं।

 

दीदी ने सभी को गाइडेड मेडिटेशन कमेंट्री के माध्यम से प्रतिदिन मेडिटेशन की अनुभूति भी कराई।गुरुवार से सभी के लिए एडवांस कोर्स का आयोजन किया जा रहा है दीदी ने जानकारी दी कि यहां के सभी कोर्सेज, मेडिटेशन व पॉजिटिव थिंकिंग की रेगुलर क्लासेस निशुल्क हैं इसमें सभी आयु वर्ग के साधक भाग ले सकते हैं..

स्वयं को चार्ज करने मेडिटेशन व सकारात्मक चिंतन जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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स्वयं को चार्ज करने मेडिटेशन व सकारात्मक चिंतन जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
गृहस्थ संभालते हुए दिनचर्या का एक घण्टा अपने लिए जरूर निकालें
ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में मेडिटेशन का बेसिक कोर्स शुरू
मनुष्य जीवन का लक्ष्य जानने स्वयं की पहचान जरूरी

बलौदा :- सत्य हमेंशा सत्य ही होता है भले ही उसे कोई स्वीकार न करे और झूठ झूठ ही होता है भले ही उसे सब स्वीकार करें। शराब आदि का व्यसन हमारे धन, संबंध और शरीर सभी का नुकसान करता ही है। इससे बचने के लिए जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाना जरूरी है। हम कौन हैं, कहां से आए हैं, हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है? यही तो आत्मा का अध्ययन अर्थात् आध्यात्म है। सभी जानते हैं कि शरीर विनाशी और आत्मा शाश्वत है। जिस प्रकार जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश ये पांच तत्वों की आवश्यकता शरीर को होती है उसी प्रकार सुख, शान्ति, आनन्द, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति ये सात गुण आत्मा को खींचते है। हम आज मोबाइल के चार्जिंग का बहुत ख्याल रखते हैं, शरीर की ऊर्जा के लिए भी कम से कम दो बार भोजन व एक बार नाश्ता जरूर करते हैं। लेकिन आज आत्मा रूपी बैटरी भी डिस्चार्ज हो चुकी है। जिसकी निशानी है क्रोध, चिड़चिड़ापन, ईर्ष्या, द्वेष, आलस्य आदि। आत्मा को चार्ज करने के लिए सकारात्मक विचार और मेडिटेशन की जरूरत होती है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ शिव-दर्शन भवन बलौदा में आज से प्रारंभ हुए मेडिटेशन के बेसिक कोर्स में वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि गृहस्थ को संभालते हुए रोज की दिनचर्या में अपना एक घण्टा सिर्फ और सिर्फ अपने लिए रखें दूसरे कार्य करने के लिए आपके पास 23 घण्टे हैं। इस एक घण्टे में अपनी आत्मा और शरीर के लिए सकारात्मक चिंतन, मेडिटेशन और प्राणायाम जरूर करें। जब ये एक घण्टा शक्तिशाली होगा तो हमारा हर कार्य कुशलतापूर्वक पूरा होगा। जीवन में प्रेम और शांति स्वतः आ जायेंगे। सत्संग हमें प्यार व इमोशन के साथ हिम्मत भी देता है।
जीवन के 7 दिनों में केवल 7 घण्टों का एक्सपेरिमेंट जरूर करें…
ईश्वर, परमात्मा, भगवान जो कि प्यार व सर्व गुणों के सागर हैं उनसे अपना संबंध जोड़ना ही योग है। उन्हें प्यार से याद करने के लिए स्वयं को प्यार करना व जानना जरूरी है। हम दिन भर में मैं और मेरा शब्द का प्रयोग बार-बार करते हैं लेकिन कभी ये नहीं सोचते कि मैं अलग है और मेरा अलग है। वास्तव में ‘मैं’ कहने वाली आत्मा है और शरीर व शरीर के अंगों के लिए ‘मेरा’ शब्द का प्रयोग करती है। दीदी ने उक्त बातों को अनेक उदाहरण देकर स्पष्ट किया। आगे के सत्र में इसके बारे में व अन्य विषयों की गहराई बतायी जाएगी। इसलिए दीदी ने सभी को ज्ञान की बातों को रिजेक्ट या एक्सेप्ट न करते हुए केवल सात घण्टे का एक्सपेरिमेन्ट जरूर करें।

सकारात्मकता के सबसे बड़े उदाहरण गणपति देवा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सकारात्मकता के सबसे बड़े उदाहरण गणपति देवा – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में गणेश जी की झांकी सजाई गयी |

शिवदर्शन भवन बस स्टैंड कोरबा रोड बलौदा

बलौदा- आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा सेवाकेंद्र में सभी के दर्शन व पूजन अर्थ विघ्न विनाशक गणेश व परमपिता परमात्मा शिव की सुंदर झांकी सजाई गई है! प्रतिदिन प्रातः सत्संग के पश्चात 8 बजे व सायं काल गणपति देवा की आरती की जाएगी।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने ऑनलाइन क्लास में सम्बोधित करते हुए कहा कि गणेश जी के हर अंग को देखे व चिंतन करें तो वो हमारे सामने सबसे बड़े सकारात्मकता के उदाहरण है उनका भव्य मस्तक विषालबुद्धि को दर्षाता है जो कि हमें विपरीत हालातों के समय में निर्णय करने के लिए आवष्यक है क्योंकि हमारे लिए कोई दूसरा निर्णय नहीं लेता। बड़े कान सुनने की क्षमता का प्रतीक है। जीवन में अच्छाईयों को धारण करने के लिए उन्हें पहले ध्यानपूर्वक सुनने की आवष्यकता है। छोटी आंखें एकाग्रता व दूरदर्षिता का प्रतीक हैं। हमें यह ध्यान रखते हुए कार्य करना होगा कि इस कर्म से भविष्य में हमें खुषी होगी या पश्चाताप का सामना करना पड़ेगा। वक्रतुण्ड अर्थात् सुण्ड हमें बताता है कि हमारी कार्यक्षमता उत्कृष्ट हो, हम छोटे-बड़े हर कार्य करने को तैयार रहें तथा समय के साथ मोल्ड होकर रहें, बड़ों के साथ बड़ों जैसा, बच्चों के साथ बच्चों जैसा हमारा व्यवहार रहे। हाथों में अलंकार के रूप में रस्सी व कुल्हाड़ी दिखाते हैं क्योंकि रस्सी ऊंचाई पर पहुंचने का सहारा होती है, हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए तब ही हम उसे प्राप्त कर सकते हैं और कुल्हाड़ी बताती है कि हम अपने अंदर की मोह-ममता, काम, क्रोध, लोभ, अंहकार, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, आलस्य, अलबेलेपन रूपी राक्षसों को काट फेंके। एकदन्त अर्थात् एक परमात्मा की याद में रहना। गणेष जी को षिवपुत्र कहा जाता है जो देवों के देव महादेव हैं। लम्बोदर अर्थात् बड़ा पेट हमें समाने की शक्ति का महत्वपूर्ण संदेष देता है कि जिस प्रकार हम अपने घर की बुराईयों को, गलतियों को फैलने न देकर समा लेते हैं लेकिन वही घटना यदि दूसरों के घरों में घट जाए तो उसे अनेक लोगों तक फैला देते हैं जो कि सबसे बड़ा मानसिक प्रदूषण है। लम्बोदर से हमें यह सीख लेनी होगी कि हम गलत बातों का कचरा फैलाएं नहीं, उसे समा लें। वाहन मूषक का अर्थ यह है कि चूहे जैसे चंचल, बहुत नुकसान करने वाले प्राणी पर भी नियंत्रण व शासन करना बहुत ही महानता भरी बात है।

 

भगवान शिव ही दुनिया के सबसे अच्छे वर – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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भगवान शिव ही दुनिया के सबसे अच्छे वर – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
कड़वाहट को मिटाकर मधुरता को अपनाने का यादगार त्यौहार है हरियाली तीज
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में शिवजी के सत्संग के लिए एकत्रित हुए साधक

बिलासपुर टिकरापाराः- ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आध्यात्मिक रहस्यों के साथ तीज त्यौहार मनाया गया। इस अवसर पर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि आज के दिन कुमारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और माताएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। किन्तु सबसे अधिक भाग्यशाली तो वे हैं जिन्होंने वर्तमान संगमयुग में स्वयं भगवान शिव को ही अपना वर मानकर उनके कार्य में सहयोगी बन सेवाएं कर रही हैं। क्योंकि भगवान शिव से अच्छा वर दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा जो न कभी डांटते हैं, न मारते हैं बल्कि प्यार भरी शिक्षा देकर ही हमारी सारी कमियों को दूर कर देते हैं।
दीदी ने बतलाया कि भारत के लगभग हर त्यौहार में भगवान शिव की ही पूजा-अर्चना की जाती है क्योंकि वे सर्व आत्माओं के पिता सदाशिव भोलेनाथ हैं। हमें गर्व होना चाहिए कि सभी जिनकी पूजा करते हैं और जो सभी पतियों के पति और सभी पिताओं के पिता परमात्मा शिव हैं, हम मानव से देव बनाने के उनके श्रेष्ठ कार्य में सहयोगी बनते हैं। व्रत का मुख्य उद्देश्य होता है कि हम भगवान की याद में रहें। आज के समय में एक और व्रत करने की आवश्यकता है कि हम अपने मुख से अपशब्दों का प्रयोग न करें। इसलिए इस त्यौहार की शुरूआत तो करेला खाकर की जाती है लेकिन व्रत तोड़ा जाता है मीठा खाकर अर्थात् जीवन में मधुरता को अपनाकर।

मिलन का अवसर होता है यह पर्व – ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन

ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन ने कहा कि माताओं-बहनों के लिए यह बहुत खुशी का पर्व है क्योंकि इस पर्व में ही पियर घर जाने का अवसर मिलता है और एकसाथ सभी से मिलन होता है। विशेषकर हमारे छत्तीसगढ़ में यह उत्सव बहुत उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। कथा आती है कि सौ वर्ष की तपस्या के बाद पार्वती को शिवजी प्राप्त हुए। जब हम श्रद्धा भाव से भक्ति करते हैं तब ही भक्ति से शक्ति मिलती है। ज्ञान मुरली में हम सुनते हैं कि भगवान शिव पारस के समान हैं और हम सभी आत्माएं पार्वतियों के समान हैं जब हम भगवान शिव के सानिध्य में आते हैं तो पत्थर से पारस बन जाते हैं। कड़वाहट को मिठास में बदलने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है जो प्रतिदिन के सत्संग से हमें मिलती है।
इस अवसर पर सभी ने मिलकर भगवान शिव को याद किया और तीजा के निमित्त अपने प्यारे प्रियतम परमात्मा शिव को भोग भी लगाया गया। आज के सत्संग में त्याग, तपस्या और सेवा से ताज, तख्त और तिलक की प्राप्ति को लेकर अव्यक्त मुरली सुनाई गई।

जीवन में चमत्कार की तरह हैं सकारात्मक विचार – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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जीवन में चमत्कार की तरह हैं सकारात्मक विचार – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

हर क्यों का समाधान है गीता ज्ञान में

हमारे जीवन की घटनाओं का उत्तर जानने के लिए कर्म की गति का ज्ञान जरूरी

ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में तनावमुक्ति शिविर का अंतिम दिन

सभी को म्यूजिकल एक्सरसाइज और एक्यूप्रेशर का अभ्यास कराया गया।

बलौदा :- सकारात्मक विचार व दृष्टिकोण अपने आप में एक चमत्कारिक औषधि है। यदि हम कोई भी कार्य सकारात्मक सोच के साथ करते हैं तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। ध्यान, आसन, प्राणायाम का अभ्यास सकारात्मक सोच के साथ करने से छोटे-मोटे रोग तो स्वतः ही ठीक हो जाते हैं और योगाभ्यास नियमित करने से असाध्य रोगों से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त एक्यूप्रेशर व घरेलू चिकित्सा से भी रोगों का उपचार किया जा सकता है। उक्त सभी उपचार प्रभावशाली भी हैं और इनमें अलग से धन खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके बाद प्राकृतिक व पंचकर्म चिकित्सा, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी व एलोपैथी औषधियों का सहारा लें।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा सेवाकेन्द्र में तनावमुक्ति शिविर के दौरान ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। दीदी ने बतलाया कि हमारे जीवन में कई ऐसी घटनाएं हैं जिनके लिए हमारे मन में प्रश्नवाचक चिन्ह होता है कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों? जबकि सभी के साथ हम प्यार भरा व्यवहार करते हैं, किसी को कोई तकलीफ नहीं देते लेकिन बदले में हमें दर्द, धोखा, तकलीफ क्यों मिलता है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानने व मन को शान्त रखने के लिए गीता ज्ञान जरूरी है। गीता में दिए गए कर्मां की गुह्य गति को जानने से ही मन की सभी उलझनें सुलझाने की शक्ति आ जाती हैं। जिन परिस्थितियों को बदल नहीं सकते हैं उन्हें स्वीकार करने की क्षमता आ जाती है और जिन्हें स्वीकार नहीं सकते उन्हें बदलने की।
अंत में दीदी ने सभी को म्यूज़िकल एक्सरसाइज व एक्यूप्रेशर का अभ्यास कराया। इस अवसर पर नगर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मेडिटेशन का बेसिक कोर्स 16 से

दीदी ने शिविर के अंतिम दिन बतलाया कि निःशुल्क सात दिवसीय मेडिटेशन का बेसिक कोर्स 16 सितम्बर से शाम 7 से 8 बजे शुरू होने जा रहा है। जिसमें मेडिटेशन की विभिन्न विधियों के साथ-साथ, जीवन में सत्संग का महत्व, स्वयं को चार्ज रखने का तरीका, व्यवहार व संस्कार परिवर्तन के लिए आवश्यक बातें, मन की शक्ति को जागृत करने की भी विधि बताई जायेगी।

Teacher’s Day News…

Bilaspur :- सर्वोच्च शिक्षक परमात्मा से जुड़कर श्रेष्ठ संस्कारों की शिक्षा दें शिक्षक – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

https://www.apanchhattisgarh.com/सर्वोच्च-शिक्षक-परमात्मा/

 

सर्वोच्च शिक्षक परमात्मा से जुड़कर श्रेष्ठ संस्कारों की शिक्षा दें शिक्षक – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

Teachers Day Prog. Youtube Link- https://youtu.be/MaRt4r8l-QQ (Cropped)
Full – https://youtu.be/kp-WtTYO7ys (on 01:29:27)
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सर्वोच्च शिक्षक परमात्मा से जुड़कर श्रेष्ठ संस्कारों की शिक्षा दें शिक्षक – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
श्रेष्ठ समाज, देश व विश्व की स्थापना में शिक्षकों का मुख्य योगदान
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में शिक्षक दिवस मनाया गया
बहनों ने उपस्थित शिक्षकों को फूल व ईश्वरीय सौगात देकर किया सम्मानित

बिलासपुर टिकरापारा :- किसी इंजीनियर की गलती सीमेन्ट की परतों में छिप जाती है, किसी वकील की असत्य दलीलें कागज में छिप जाती हैं, किसी डॉक्टर की गलती श्मशान घाट में छिप जाती है लेकिन यदि एक शिक्षक गलती करता है तो उसकी गलती पूरे विश्व भर में फैले कई विद्यार्थियों में अनेक रूपों में जीवन पर्यन्त प्रतिबिम्बित होती रहती हैं क्योंकि एक शिक्षक की बहुत बड़ी जिम्मेवारी होती है क्योंकि एक शिक्षक ही आईएएस भी तैयार करता है तो डॉक्टर, इंजीनियर, जज आदि भी तैयार करता है।
उक्त बातें शिक्षक दिवस के अवसर पर प्राचार्य रह चुकीं टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने अपने अनुभव व ईश्वरीय जीवन में आध्यात्म के आधार पर कहीं।
संस्कार निर्माण में नर्सरी से कक्षा पांच के शिक्षक की भूमिका अहम…
स्कूल में पढ़ाई की शुरूआत नर्सरी कक्षा से ही शुरू हो जाती है। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के पास कोमल टहनी की तरह विद्यार्थी आता है और उसे जिस दिशा में चाहें मोड़ सकते हैं। नन्हें बच्चों को संभालकर श्रेष्ठ दिशा प्रदान करना यह सबसे बड़ा योगदान होता है। क्योंकि इस उम्र के बच्चों को सबसे पहले प्यार चाहिए होता है। बच्चे के लिए मां की गोद व पिता के प्यार से दूर आकर शिक्षक के बीच 3-4 घण्टे व्यतीत करना चुनौतीपूर्ण होता है। जब शिक्षक उसे प्यार से संभालता है तो उस शिक्षक की छवि उसके अंतर्मन में प्रवेश कर जाती है और जीवन पर्यन्त शिक्षक से मिले प्यार को भूल नहीं पाता।
युवाओं को नैतिकता का पाठ पढ़ाकर आदर्श बन सकते हैं शिक्षक…
नैतिक मूल्य प्रदान करने में माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक व महाविद्यालयीन शिक्षकों का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। युवा बच्चों को मार्ग भटकने से बचाना और शिक्षा के साथ श्रेष्ठता से भरे सादगीपूर्ण जीवन से प्रेरित करना भी बहुत बड़ी सेवा है। इसके लिए शिक्षक को फैशन व व्यसन के नशीले पदार्थों के सेवन से मुक्त रहना होगा।
सभी शिक्षक सर्वोच्च शिक्षक परमात्मा से जुडें़ व जीवन को श्रेष्ठ शिक्षाओं से भरें…
एक अच्छे समाज, देश या कहें पूरे विश्व को बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है इसलिए शिक्षक अपनी जिम्मेवारी समझें और अपने जीवन में परमशिक्षक, सर्वोच्च शिक्षक परमात्मा से जुड़कर अपने अंदर श्रेष्ठ शिक्षा को भरें। तब बच्चों को निश्चित ही वे संस्कारवान बना सकेंगे।
इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों को फूल व ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया गया जिनमें सरला भूरंगी बहनजी, सरिता बल्हाल बहनजी, श्रीमति उषा साहू, स्नेहल बहन सगदेव, संजय विश्वकर्मा, सी.आर. भगत एवं टिकरापारा व राजकिशोरनगर सेवाकेन्द्र की टीचर बहनें भी उपस्थित रहे।

नकारात्मक प्रभाव से सुरक्षा के लिए स्व-सशक्तिकरण आवश्यक – ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में तनावमुक्ति शिविर का दूसरा दिन

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आभा बढ़ाने के लिए सकारात्मक चिंतन व ध्यान जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
नकारात्मक प्रभाव से सुरक्षा के लिए स्व-सशक्तिकरण आवश्यक
ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में तनावमुक्ति शिविर का दूसरा दिन

बलौदा, 01 सितम्बर : हम सभी जानते हैं कि क्रोध करना अच्छी बात नहीं है और हम क्रोध करना चाहते भी नहीं हैं लेकिन क्रोध कर लेते हैं और क्रोध करने के बाद अच्छा भी नहीं लगता फिर भी क्रोध कर देते हैं। इससे मुक्त होने के लिए हमें स्वयं की बैट्री चार्ज करनी होगी। क्योंकि क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, आलस्य, अलबेलापन, द्वेष की भावनाएं ये सब आत्मा की बैट्री डिस्चार्ज होने के लक्षण हैं। आज सारे संसार की ऐसी स्थिति है कि सात अरब जनसंख्या में हर पल कोई न कोई देह का त्याग कर रहा है। और इसमें से कई मौतें एक्सीडेन्टल और कई अकाले मृत्यु हो रही हैं जिसमें लोगों की इच्छाएं अतृप्त रह जाती हैं। यदि हमारी आभा शक्तिशाली होंगी तो नकारात्मक एनर्जी का प्रभाव हम पर नहीं पड़ेगा और इसके लिए शुद्ध भावनाएं, ध्यान व सकारात्मक चिंतन की सतत आवश्यकता है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में आयोजित त्रि-दिवसीय तनावमुक्ति शिविर के दूसरे दिन शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी से कहा कि अपने घर का वातावरण पवित्र व शांत बनाएं। इसके लिए रात्रि का समय अच्छे विचारों में बिताएं न कि पारिवारिक समस्याओं, क्रोध, तनाव, लड़ाई-झगड़े आदि वाले सीरियल देखकर या मोबाइल में व्यर्थ की चीजें देख, सुन या पढ़ कर। क्योंकि रात्रि सोने से पूर्व हमारा अवचेतन मन सक्रिय हो जाता है और जो भी चीजें हम देखते, सुनते या पढ़ते हैं वह हमारे भीतर चला जाता है यदि वह नकारात्मक चीजें हैं तो डर, तनाव, चिंता आदि रोग उत्पन्न करेगा, चिंता आदि रोग उत्पन्न करेगा, चिंता आदि रोग उत्पन्न करेगा, चिंता आदि रोग उत्पन्न करेगा। इसलिए रात्रि में अच्छे संकल्पों के साथ सोएं। स्वयं को अच्छे संकल्प देना, इसे ही स्वमान कहा जाता है।
दीदी ने आज सभी को रात में परमात्मा का हाथ मेरे सिर पर है यह अनुभव करते हुए 21-21 बार यह स्वमान लेने कि बात कही कि ‘मैं सर्वशक्तिमान परमात्मा की संतान मास्टर सर्वशक्तिमान हूं’ और ‘ईश्वर अपने साथ है तो दुनिया की कोई भी ताकत मुझसे मेरी शक्ति और शान्ति छीन नहीं सकती।’
दीदी ने जानकारी दी कि तीसरे दिन के शिविर के पश्चात् जल्द ही मेडिटेशन का बेसिक कोर्स शुरू किया जायेगा। यह भी बतलाया कि यहां के सभी कोर्सेस व क्लासेस निःशुल्क है। शुल्क है तो पांच खोटे सिक्के और एक आने का अर्थात् पांच खोटे सिक्के पांच विकारों रूपी बुराईयां हैं जो इतनी जल्दी नहीं दे सकते लेकिन एक आना अर्थात् केवल एक बार सेवाकेन्द्र आकर समय देना – ये तो सभी कर सकते हैं।