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योग की जागरूकता के साथ नियमितता भी जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

प्रेस विज्ञप्ति 
योग की जागरूकता के साथ नियमितता भी जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए तन व मन दोनों का स्वस्थ होना जरूरी
टिकरापारा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व तैयारियां शुरू
प्रतिदिन प्रातः 6 से 7 ऑनलाइन योगाभ्यास आज आठवां दिन…

बिलासपुर टिकरापाराः- 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए सभी जागरूक हों- यह बहुत जरूरी है। लेकिन पूरा जीवन स्वस्थ रखने के लिए योग की जागरूकता के साथ नियमितता भी जरूरी है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए टिकरापारा सेवाकेन्द्र में 01 जून से ही प्रतिदिन प्रातः 6 से 7 बजे नए साधकों के अनुसार योगाभ्यास आरंभ कर दिया गया है। जिसमें सभी अभ्यासों को धीरे-धीरे विधिपूर्वक सिखाया जा रहा है। साथ ही अलग-अलग आसनों के लाभ व सावधानियां भी बताई जा रही है। इसके लिए छ.ग. योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी एवं मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा योगाभ्यास कराया जा रहा है।
शरीर व मन दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी…
दीदी ने कहा कि जीवन का आनंद लेने के लिए तन के साथ मन का सशक्तिकरण भी जरूरी है। योग व सकारात्मक चिंतन से मन मजबूत होता है और आसन-प्राणायाम से तन की स्थिति श्रेष्ठ होती है और चारों का मिला-जुला रूप हमें श्रेष्ठता और सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करता है और स्वस्थ मन व शरीर से ही हम बेहतर समाज की स्थापना में योगदान दे सकते हैं।
दिल की भावना और सेवा समझ करें हर कार्यः-
नाम-मान और शान की इच्छा रख कोई कार्य करने से उसका पुण्य जमा नहीं होता। हमें जो भी कार्य मिले, उसे दिल से करें और सेवा समझ कर करें। कोई सोचे कि मुझे सरलता से हर चीज हासिल हो जाए और कई बार हासिल हो भी जाता है लेकिन जीवन में उसका प्रयोग नहीं होता तो ऐसी प्राप्ति व्यर्थ है। कोई बड़ा ऐसे ही नहीं बनता, बड़ा बनना अर्थात् झुकना, नरमदिल होना, सरल बनना। कोई अगर अहं में जीता है तो उसका स्थान कभी नहीं बन पाता।
सही विधि से योगाभ्यास में मिलती है सफलता…
सही विधि से किए गए कार्य से ही सफलता मिलती है। प्राणायाम का अभ्यास भी सही तरीके से सीखकर जब हम करेंगे तब ही हमें लाभ प्राप्त होगा। प्रातःकाल हवादार कमरे में खाली पेट योग अभ्यास करना चाहिए। केवल भस्रिका, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी व उद्गीथ प्राणायाम व वज्रासन का अभ्यास भोजन के बाद किया जा सकता है बाकी आसन-प्राणायामों के लिए भोजन के बाद 4 से 5 घण्टे का समयांतराल होना चाहिए। ध्यानमुद्रा में बैठकर प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है और रीढ़ सीधी रखने से हमारे फेफड़े फैलते हैं जिससे सांस लेने में आसानी होती है और हम ज्यादा ऑक्सीजन ले पाते हैं। यह शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव डालता है। यदि आप सीटिंग जॉब में हैं या पढ़ाई करते हैं तो सीधे बैठकर कार्य करने या पढ़ने से नींद भी कम आती है और हमारा व्यक्तित्व भी अच्छा दिखता है। इसके विपरीत गलत तरीके से बैठने पर पीठ दर्द की समस्या भी आ सकती है।
धीरे-2 बढ़ाएं अभ्यास, सावधानियों का रखें ध्यान, भ्रमित न हों…
किसी भी आसन या प्राणायाम का अभ्यास करते समय ध्यान रहे कि शुरूआत में जल्दी-जल्दी, ज्यादा आवृति में या सहन क्षमता से अधिक स्ट्रेच न करें अन्यथा मांसपेशियों में खींचाव आने से दर्द आरंभ हो जाएगा। जब आप नियमित अभ्यास करते जाएंगे तो धीरे-धीरे आपकी मांसपेशियों में लचीलापन आ जाएगा और आप सही स्थिति तक पहुंच जायेंगे। इस बात में भ्रमित न हों कि कहीं पर वही योग एक तरीके से सिखाया जाता तो कहीं दूसरी विधि से। ऐसा इसलिए है कि हमारे योग गुरूओं ने ही एक आसन या प्राणायाम की दो-तीन अलग-अलग विधियां सिखाई हैं जो कि उनके अनुसार सही ही हैं। साथ ही कुछ अभ्यासों में विशेष सावधानियां होती हैं जैसे हृदयरोग, हर्निया, कमर दर्द आदि के लिए कुछ सावधानियां होती हैं। जिनका उन्हें पूर्णतः पालन करना ही चाहिए।

पतंजलि योग समिति के सदस्यों के लिए गीता ज्ञान पर हुई दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला

Program Links-

Day-1 https://youtu.be/BN4YO-FXqIw

Day-2 https://youtu.be/-m94gpZ1MTw

सादर प्रकाशनार्थ

प्रेस विज्ञप्ति

स्वयं के काउंसिलिंग करने का शास्त्र है गीता – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

ज्ञान युक्त भक्ति अर्थात् राजयोग है श्रेष्ठ भक्ति

पतंजलि योग समिति के सदस्यों के लिए गीता ज्ञान पर हुई दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला

ज्ञानयोग, कर्मयोग, स्थितप्रज्ञ, नवधा भक्ति, भक्त के प्रकार और भक्ति योग पर हुई आध्यात्मिक विवेचना

 

बिलासपुर टिकरापाराः- श्रीमद्भागवत् गीता केवल हिन्दूओं का शास्त्र नहीं अपितु समस्त मानव जाति का शास्त्र है। इसलिए दुनिया में एकमात्र यही शास्त्र है जिसका कि सबसे अधिक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। जीवन के संघर्षों में जीत प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन या आज की भाषा में कहें तो स्वयं की काउंसिलिंग करने का यह परमशास्त्र है। इसके लिए अर्जुन के स्थान पर स्वयं को रखें और देखें कि भगवान हमसे बात कर रहे हैं, हमें समझा रहे हैं।
उक्त बातें पतंजलि योग समिति के राज्य स्तरीय योग प्रशिक्षण में गीता के विभिन्न विषयों पर संबोधित करते हुए अतिथि वक्ता के रूप में टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
पांच प्रतिशत सकारात्मक विचार वालों से होगा विश्व का परिवर्तन…
भगवान से जिनकी सच्ची प्रीत है वे पाण्डव हैं और अधर्म पक्ष के वाचक हैं कौरव। राजा धृतराष्ट्र सत्ता के लोभ के प्रतीक हैं जबकि कौरवों के नाम की शुरूआत ही ‘दु’ अक्षर से है। धन का दुरूपयोग करने वाला दुर्योधन, अनुशासन नाम की चीज नहीं वो है दुस्साशन। पाण्डव पांच थे फिर भी उनकी विजय हुई। इसलिए श्रेष्ठ दुनिया की स्थापना करने के लिए भी दुनिया में कम से कम पांच प्रतिशत सकारात्मक विचार वाले व भगवान से प्रीत रखने वाले लोगों की जरूरत है। और जो परिवर्तन का कारण बनते हैं वे लोग ही नेतृत्व करते हैं। क्योंकि उन्हें सभी की दुआओं का व परमात्म बल साथ देता है।
अच्छे मार्ग में अवरोध का आना निश्चित…
कई लोग परिवार, समाज व देश के कल्याण के कार्य में लगे रहते हैं लेकिन जब उनके मार्ग में रूकावट आती है, विरोध होता है, तो वे मायूस हो जाते हैं और प्रश्न करते हैं कि मेरे साथ ऐसा क्यों, जबकि मैंने किसी का बुरा नहीं चाहा। इस पर दीदी ने कहा कि अच्छे मार्ग में अवरोध तो आते ही हैं और यदि किसी प्रकार की रूकावट नहीं है तो यह समझिए कि आपका लक्ष्य छोटा है, महान नहीं है।
अंधकार में प्रकाश की किरण है गीता…
जीवन में थकने हारने के बाद भी हम गीता की शरण में जाते हैं तो इस अंधकार में गीताज्ञान ही प्रकाश की किरण है। भगवानुवाच भी है कि ‘तुम मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सर्व पापों से मुक्त कर दूंगा’। शरण में जाना अर्थात् मन-बुद्धि से भगवान की श्रीमत पर समर्पित होना। गीता से आत्मज्ञान, परमात्म ज्ञान और कर्मों की गति का ज्ञान प्राप्त होता है। जिससे हमारा मोह नष्ट होकर आत्मिक प्रेम का भाव जागृत होता है।
मनोबल के उदाहरण हैं स्वामी विवेकानंद…
दीदी ने बतलाया कि जब शिकागो में गीता शास्त्र को नीचे रख कर अपमानित किया गया तो शांत मन व श्रेष्ठ मनोबल का उदाहरण देते हुए स्वामी विवेकानंद ने उस अपमान को सर्वश्रेष्ठ सम्मान में परिवर्तित कर दिया। जो गीता से प्राप्त आत्मज्ञान का ही कमाल था क्योंकि हारा हुआ जीत सकता है लेकिन मन से हारा हुआ कभी नहीं जीत सकता। स्वामी विवेकानंद के पास भी मनोबल था। जब हमारे अंदर का युद्ध चलता है तब गीता ज्ञान की सार्थकता महसूस होती है। आज जीवन में सबकुछ हो लेकिन शान्ति न हो तो जीवन; जीवन नहीं लगता क्योंकि शान्ति, सुख, प्रेम स्वधर्म है और अशांति, क्रोध, काम, लोभ आदि परधर्म हैं जो दुखों के कारण हैं।
सन्यासयोग से ज्ञानयोग व कर्मयोग श्रेष्ठ…
कर्म तो किसी भी हालत में सभी करते ही हैं क्योंकि खाना, सोना, उठना, बैठना भी कर्म है। कर्मों का सन्यास तो किया ही नहीं जा सकता। यदि कर्म में ज्ञान शामिल हो जाये अर्थात् ईश्वर की याद शामिल हो जाए तो विकर्म समाप्त होकर श्रेष्ठ कर्म होने लगते हैं और यही ज्ञानयोग है। वास्तव में सन्यास तो कर्मों से नहीं अपितु विकारों व बुराई से कही गई है।
कामना में विघ्न से क्रोध उत्पन्न होता है और बुद्धि नष्ट हो जाती है…
दीदी ने गीता के दूसरे अध्याय के 62वें व 63वें श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि विषयों में आसक्ति से कामना की उत्पत्ति और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध की उत्पत्ति, क्रोध से मूढ़भाव जिससे स्मृति भ्रमित और ज्ञान का नाश हो जाता है जिससे मनुष्य का पतन अर्थात् सर्वनाश हो जाता है ।
स्थिरबुद्धि बनने के लिए विषय-वासनाओं का त्याग जरूरी…
दीदी ने कहा कि अक्सर हम किसी कार्य के लिए निर्णय नहीं ले पाते, क्योंकि हमारा मन एकाग्र नहीं होता और पांच विकारों और विषयों के चिंतन से हमारी बुद्धि की निर्णय शक्ति नष्ट हो जाती है। जिस प्रकार तेज हवा पानी को बहाकर ले जाती है उसी प्रकार कर्मेन्द्रियों के वशीभूत व्यक्ति के मन का हरण हो जाता है। इसलिए स्थिरबुद्धि बनने के लिए राग-द्वेष, इन्द्रियों के आकर्षण से और किसी भी व्यक्ति, वस्तु व वैभव की आसक्ति से मुक्त बनना होगा। साधनों का उपयोग जरूर करें लेकिन उस पर निर्भर न बनें और कोशिश करें कि वो चेहरा सदा मुस्कुराता हुआ रहे जिसे आप रोज आइने में देखते हैं क्योंकि आपके आंसुओं से दुनिया को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता।
ज्ञानी भक्त भगवान को सबसे अधिक प्रिय हैं…
नवधा भक्ति के बारे में बताते हुए आपने कहा कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन ये नवधा भक्ति के नौ अंग हैं। चार प्रकार के भक्तों के बारे में आपने कहा कि आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी सभी भगवान का भजन करते हैं लेकिन इनमें सबसे निम्न श्रेणी के भक्त अर्थार्थी हैं जो मतलब से भगवान को याद करते हैं जबकि ज्ञानी भक्त सबसे श्रेष्ठ है और वह भगवान को और भगवान उसको सबसे प्रिय है क्योंकि वह शुद्ध भक्ति में लगा रहता है और ज्ञान के साथ भक्ति करता है और ज्ञान के आधार पर भक्ति करना ही राजयोग है।
इसके अतिरिक्त इन दो दिनों में दीदी ने अन्य गहरे तथ्यों पर प्रकाश डाला। जूम मीटिंग पर आयोजित इस कार्यक्रम में पतंजलि के केन्द्रीय प्रभारी भ्राता संजय अग्रवाल, राज्य प्रभारी डॉ. मनोज पाणीग्रही, सह-राज्य प्रभारी छबीराम साहू, भारत स्वाभिमान न्यास के प्रांतीय कार्यालय प्रभारी डी.एल. पटेल आदि पदाधिकारी सहित लगभग लगभग सौ योग प्रशिक्षक शामिल रहे। सभी ने इस आध्यात्मिक विवेचना को लाइव चैट के माध्यम से खूब सराहा। कल 5 जून को पर्यावरण दिवस पर पदाधिकारियों ने अपने विचार भी रखे। व सभी को अधिक ऑक्सीजन देने वाले व औषधीय पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया।

‘‘पर्यावरण की रक्षा-हम सबकी सुरक्षा’’ थीम पर दादियों की स्मृति में करेंगे पौधों की परवरिश

‘‘पर्यावरण की रक्षा-हम सबकी सुरक्षा’’ थीम पर दादियों की स्मृति में करेंगे पौधों की परवरिश
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस
घर में ऑक्सीजन पार्क बनाने व खेत की मेड़ों पर वृक्षारोपण का सभी से किया अनुरोध
आनंद वाटिका व बाबा की कुटिया में लगभग 300 पेंड़-पौधों का किया जा रहा पालन-पोषण…

 

 

बिलासपुर टिकरापारा :- ब्रह्माकुमारीज़ एवं कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग के संयुक्त तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘‘पर्यावरण की रक्षा-हम सबकी सुरक्षा’’ कार्यक्रम का आयोजन टिकरापारा सेवाकेन्द्र में किया गया। इस अवसर पर सभी के लिए जागरूकता संदेश देते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि प्रकृति का सानिध्य हमें आनंद की अनुभूति कराता है अतः सभी अपने घर में चाहे वह फ्लैट हो, चाहे छोटा घर हो लेकिन आप छत में, बालकनी में या घर में ही गमले में ही बोनसाई रूप में पौधा रोपित जरूर करें। विशेष रूप से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पौधों को चुनें। इससे हम वातावरण को स्वच्छ बनाने में मदद करते हैं। आकर्षण का नियम भी यही है कि जो हम प्रकृति को देंगे वह हमें भी मिलेगा।
दीदी ने बतलाया कि कोरोना काल में सभी बहनों ने मिलकर सत्रह सौ वर्ग फीट का एक बगीचा भी तैयार किया जिसमें बहुत से पौधे रोपित किए। सेवाकेन्द्र के आनंद वाटिका प्रांगण व बाबा की कुटिया में 300 से अधिक छोटे-बड़े पेंड़ पौधों की देखरेख बहनें ही कर रही हैं। जिसमें आम, बरगद, पीपल, अशोक, शहतूत, गिलोय, तुलसी, नीम, पारिजात, अमरूद, कमरख, नारियल, मनी प्लांट जैसे पेंड़-पौधों के अतिरिक्त अनेक खुशबूदार व सजावटी फूल वाले पौधे, औषधीय पौधे, शाक-सब्जियों वाले पौधे, इन्डोर प्लांट्स आदि शामिल हैं। जिससे यहां का वातावरण आध्यात्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य को लिए भी है।
सभी अपने घरों में ऑक्सीजन पार्क जरूर बनाएं…
दीदी ने जानकारी दी कि 01 जून को कृषि एवं ग्राम विकास की ऑनलाइन मीटिंग हुई जिसमें विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के अनेक सुझाव दिए गए। जिसका पालन करते हुए मंजू दीदी जी ने सेवाकेन्द्र में ऑक्सीजन पार्क बनाया। जिसमें पीपल, बरगद, नीम, अशोक, तुलसी, पारिजात व अमरूद के पौधे को नजदीक रखा गया है। जहां पैदल करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। दीदी ने सभी शहरवासियों से अनुरोध किया है कि छोटे रूप में ही सही, अपने घर में ऑक्सीजन पार्क जरूर बनाएं जिसमें आउटडोर पौधों में उक्त वर्णित पौधे व इंडोर पौधों में एरिका पाम, रबर प्लांट, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, सिगोनियम, पीस लिली आदि पौधों का प्रयोग कर सकते हैं। साथ ही सभी ग्रामीण भाई-बहनों से अनुरोध किया कि अपने खेत के मेड़ पर वृक्षारोपण जरूर करें जो परोपकार के रूप में सभी के लिए हितकर होगा।
वृक्षों को माना दादियों का यादगार स्वरूप…
सेवाकेन्द्र में आज दादियों अर्थात् संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिकाओं की पावन स्मृति में रहते हुए पौधों की परवरिश का संकल्प लिया गया। पीपल के वृक्ष को दादी हृदयमोहिनी जी की संज्ञा दी गई क्यांकि दादी जी बहुत शीतल, पावन व शांत प्रकृति की थीं उन्होंने हमें अनेक वर्ष परमात्म मिलन की अनुभूति कराकर हमारे जीवन की आश, खुशी की श्वांस अर्थात् ऑक्सीजन दी हैं। दादी जानकी जी ने वटवृक्ष के समान पूरे विश्व में सेवाओं का विस्तार कर परमात्म संदेश दिया। ईशु दादी जी ईश्वरीय मर्यादा व कायदे-कानून में कड़ी, नीम वृक्ष के समान थीं। नियमों का खुद भी कड़ाई से पालन करती रही और सभी को कराती रही। इस अवसर पर दीदी के साथ हेमवती बहन, गायत्री बहन, पूर्णिमा बहन, श्यामा बहन, ईश्वरी बहन व नीता बहन उपस्थित रहीं जिन्होंने प्रकृति वंदना के साथ आधे घण्टे प्रकृति को सकाश दिया।

वर्चुअल योगाभ्यास एवं योग परामर्श कार्यक्रम के तहत ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन योग शिविर शुरू

वर्चुअल योगाभ्यास एवं योग परामर्श कार्यक्रम के तहत ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन योग शिविर शुरू

समाज कल्याण विभाग एवं योग आयोग, छ.ग. शासन द्वारा योजित कार्ययोजना के अनुसार कोविड-19 संक्रमण के प्रभाव को कम करने एवं आमजनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए योग शक्तिशाली माध्यम है क्योंकि यह देखा गया कि कोविड-19 से उपचारित व्यक्तियों की होम आइसोलेशन तथा अस्पतालों व कोविड सेन्टर्स से डिस्चार्ज होने के पश्चात् प्रायः यह देखा गया है कि मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं होते, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देता है। जिसके फलस्वरूप विभिन्न शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इसी के निवारण और कोविड-19 की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए सभी आमजनों के स्वास्थ्य के लिए ‘‘वर्चुअल योगाभ्यास एवं योग परामर्श कार्यक्रम’’ प्रस्तावित है। इसी के तहत ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र में भी प्रतिदिन प्रातः 6 से 7 बजे तक ऑनलाइन योग शिविर आरंभ किया जा रहा है। जिसके संचालन में छ.ग. योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी एवं छ.ग. योग आयोग से प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक बहनें ब्र.कु. गायत्री, ब्र.कु. पूर्णिमा, ब्र.कु. ईश्वरी व ब्र.कु. श्यामा बहन तथा मास्टर योग प्रशिक्षक भाई- संदीप बल्हाल, राकेश गुप्ता, अमर कुंभकार व विक्रम भाई शामिल रहेंगे।
दीदी ने जानकारी दी कि यूट्यूब में प्रतिदिन प्रातः योग व म्यूज़िकल एक्सरसाइज का सत्र चल रहा था किन्तु आज से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सामान्य योग अभ्यास क्रम के अनुसार योगाभ्यास एवं योग परामर्श कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। सभी बहनों ने आज दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
दीदी ने बतलाया कि पूर्व तैयारी से आमजनों को विधिपूर्वक सीख देना सहज होगा। ताकि वे योग की बारीकियों को सही तरीके से जान सकेंगे और तब सभी 21 जून के दिन आसानी से अभ्यास कर सकेंगे और योग हमारे संस्कारों में आ जायेगा, जीवन का एक अंग बन जाएगा। यही योग आयोग और वर्चुअल योग अभ्यास कार्यक्रम का उद्देश्य है।
कार्यक्रम के अन्य उद्देश्य…
हितग्राहियों व आमजनों को नियमित योगाभ्यास के लिए प्रेरित करना, ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने हेतु विशेष आसनों व प्राणायाम की जानकारी देना, ध्यान (मेडिटेशन) से मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने की जानकारी प्रदान करना, प्रकृति आधारित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, भयमुक्त वातावरण का निर्माण करना व योग से संबंधित भ्रांतियों को मिटाना इस कार्यक्रम के अन्य उद्देश्य हैं। मंजू दीदी ने बतलाया कि यह कार्यक्रम छ.ग. समाज कल्याण विभाग के वेबसाइट पर पूरे साल भर चलेगा।

तम्बाकू या किसी भी बुराई को समाप्त करने का सशक्त माध्यम है योग व आध्यात्म – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
तम्बाकू या किसी भी बुराई को समाप्त करने का सशक्त माध्यम है योग व आध्यात्म – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
नशा छोड़ने के लिए राजयोग, दृढ़ इच्छाशक्ति व 72 घण्टे का संयम प्रभावकारी विधि…
अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस पर विषेष क्लास

बिलासपुर टिकरापाराः- कोई भी नशा हमारे शरीर को नुकसान तो पहुंचाता ही है साथ ही आर्थिक स्थिति में गिरावट लाता है, समाज में हमारी छवि खराब करता है, हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है व नैतिक पहलुओं को कमजोर करता है। सिवाय नशे के तम्बाकू सेवन का कोई उद्देश्य नहीं होता। यदि इस नशे की दिशा को हम सकारात्मक कर दें अर्थात् स्वचिंतन, सकारात्मक चिंतन, आसन-प्राणायाम, मेडिटेशन, परोपकार, स्व-उपकार का नशा यदि हम अपनी आदत में ले आएं तो हमें फायदा ही फायदा होगा और उस नशे की ओर न ही ध्यान जाएगा और न ही नुकसान होगा। ब्रह्माकुमारीज़ के मेडिकल विंग द्वारा समय प्रति समय नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं और अनेक युवा, वृद्ध, बच्चे व महिलाओं को राजयोग के अभ्यास से आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हुए नशामुक्त बनाया जाता है।
उक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर ऑनलाइन संबोधित करते हुए टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
नशा छोड़ने के लिए केवल 72 घण्टे का धैर्य जरूरी…
आपने बतलाया कि किसी भी नशे को छोड़ने में 72 घण्टे तक उस नशे के प्रति खिंचाव महसूस होता है लेकिन ईश्वरीय शक्ति, धैर्य व दृढ़ इच्छाशक्ति से हम नशे पर जीत प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि जहां चाह होती है वहां राह निकल ही जाता है। नशा छोड़ने के लिए नशे से होने वाले नुकसान व साथ ही नशा छोड़ने से मिलने वाले लाभ की जानकारी भी मदद करती है।
धुम्रपान हमारे नजदीकियों को भी पहुंचाता है नुकसान…
तम्बाकू सेवन या धूम्रपान के सेवन से शरीर के लगभग सभी अंग प्रभावित होते हैं। जिसमें गले की खांसी, आंखों का ग्लूकोमा, कानों का बहरापन, फेफड़ों का रोग या विभिन्न प्रकार के कैन्सर जैसे रोग शामिल हैं।
दीदी ने बतलाया कि स्वयं परमात्मा द्वारा सिखाया गया राजयोग भारत का प्राचीन योग है, जिसमें श्रेष्ठ विचारों के आधार पर ध्यान का अभ्यास किया जाता है। ये विचार ही मनोबल बढ़ाने के लिए हैल्दी डाइट की तरह है क्योंकि ज्ञान में शक्ति होती है, ज्ञान ही रोशनी है, ज्ञान संजीवनी बूटी है और ज्ञान ही शस्त्र है। अच्छे विचार, ज्ञान श्रवण से ही मिलते हैं। वहीं ध्यान-योग का अभ्यास मन व बुद्धि की एक्सरसाइज की तरह है।