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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

चेहरे पर सदा मुस्कुराहट के लिए सरलता और सहनशीलता जरूरी : ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

प्रेस विज्ञप्ति

*चेहरे पर सदा मुस्कुराहट के लिए सरलता और सहनशीलता जरूरी : ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

– प्रसन्न चेहरा स्वयं के साथ समाज को भी देता है सकारात्मक ऊर्जा

– प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा सद्गुरुवार विशेष सत्संग

– जून महीने में सुनाये जा रहे सरलता, सहनशीलता और हर्षितमुखता पर परमात्म इशारे

बिलासपुर। ब्रह्माकुमारीज़ प्रभु दर्शन भवन में आज गुरुवार को आयोजित आध्यात्मिक सत्र में जून माह के परमात्म महावाक्यों पर मंथन करते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि आज के तनावपूर्ण वातावरण में हर्षितमुख रहना एक आध्यात्मिक साधना है। सदा प्रसन्न और मुस्कुराता रहने के लिए जीवन में सरलता और सहनशीलता का होना अत्यंत आवश्यक है। यही दोनों गुण व्यक्ति को परिस्थितियों से ऊपर उठकर स्थायी खुशी का अनुभव कराते हैं।

 

दीदी ने कहा कि परमात्मा चाहते हैं कि उनके बच्चे हर परिस्थिति में हर्षितमुख रहें। चेहरा मन की स्थिति का दर्पण होता है। जब मन में संतुष्टि, सहजता और आत्मिक खुशी होती है, तो उसका प्रभाव स्वतः चेहरे पर दिखाई देता है। इसलिए केवल बाहरी मुस्कान नहीं, बल्कि भीतर की प्रसन्नता विकसित करना आवश्यक है।

 

उन्होंने बताया कि सरल स्वभाव वाला व्यक्ति अनावश्यक जटिलताओं, अपेक्षाओं और विवादों से दूर रहता है। वह दूसरों की कमियों के बजाय उनकी विशेषताओं को देखता है और परिस्थितियों को सहज रूप से स्वीकार कर लेता है। इसी कारण उसका मन हल्का रहता है और उसके चेहरे पर स्वाभाविक खुशी बनी रहती है। सरलता व्यक्ति को सभी के प्रिय बनने की शक्ति देती है।

 

सहनशीलता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दीदी ने कहा कि जीवन में अनेक प्रकार की परिस्थितियाँ, मतभेद और चुनौतियाँ आती हैं। जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में विचलित हो जाता है, उसकी खुशी शीघ्र समाप्त हो जाती है। लेकिन सहनशील व्यक्ति हर परिस्थिति को धैर्यपूर्वक स्वीकार करते हुए समाधान की ओर बढ़ता है। सहनशीलता मन को स्थिर बनाती है और हर्षितमुखता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 

उन्होंने कहा कि अव्यक्त महावाक्यों में भी स्पष्ट संकेत दिया गया है कि सरल और सहनशील स्वभाव वाले व्यक्ति अपने खुशनुमा चेहरे से भारी वातावरण को भी हल्का बना देते हैं। उनकी सकारात्मक ऊर्जा दूसरों के मन में आशा और उत्साह का संचार करती है। ऐसे लोग स्वयं भी खुश रहते हैं और दूसरों को भी खुशी देने का माध्यम बनते हैं।

 

दीदी ने आगे कहा कि ईश्वरीय ज्ञान का चिंतन और राजयोग का नियमित अभ्यास इन गुणों को विकसित करने का सर्वोत्तम साधन है। जब आत्मा परमात्म स्मृति में रहती है, तब वह परिस्थितियों को साक्षी भाव से देखकर सहजता से आगे बढ़ती है और उसके चेहरे पर स्वाभाविक प्रसन्नता बनी रहती है।

 

कार्यक्रम के अंत में आज सभी को प्रसाद के रूप में पौष्टिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक पना वितरित किया गया जो गर्मी के मौसम में लू से बचाने के लिए उपयोगी है।

 

प्रेषक :-

मीडिया प्रभाग

ब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा बिलासपुर