Connect with us
 

Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

खुश रहना है और खुशी बांटनी है”अंतर्मन की शांति से तनावमुक्त और शक्तिशाली बनेगा जीवन — ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

*“खुश रहना है और खुशी बांटनी है”अंतर्मन की शांति से तनावमुक्त और शक्तिशाली बनेगा जीवन — ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में रविवार विशेष परमात्म महावाक्य

बिलासपुर टिकरापारा। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, असंतोष और मानसिक संघर्षों का समाधान बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि स्वयं के अंतर्मन में छिपा हुआ है। यदि व्यक्ति स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से संबंध जोड़े और “साक्षी भाव” में रहना सीखे, तो कठिन परिस्थितियों के बीच भी शांति और स्थिरता बनाए रख सकता है।

 

ये बातें प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा में रविवार विशेष परमात्म महावाक्य सुनाते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कही। दीदी ने कहा कि संघर्षपूर्ण वातावरण में प्रतिक्रिया देने के बजाय सकारात्मक वाइब्रेशन फैलाना ही सच्ची आध्यात्मिकता है।

 

“खुश रहना और खुशी बांटना” को श्रेष्ठ जीवन का आधार बताते हुए दीदी ने कहा कि जब व्यक्ति भीतर से संतुष्ट और प्रसन्न रहता है, तब उसका चेहरा, व्यवहार और वाणी स्वतः ही दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती है। यही आंतरिक खुशी तनाव, क्रोध और निराशा को समाप्त करने का सहज माध्यम बनती है।

 

दीदी ने यह भी स्पष्ट किया कि क्रोध, तनाव और दुख का मुख्य कारण देह-अभिमान तथा “मैं” की भावना है। यदि मनुष्य भूतकाल की बातों को छोड़कर वर्तमान को श्रेष्ठ बनाने पर ध्यान दे, तो उसका मन हल्का और शक्तिशाली बन सकता है। दूसरों को क्षमा करना भी आत्मिक शांति प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।

 

मानसिक स्वास्थ्य पर मार्गदर्शन देते हुए कहा गया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार उदासी, तनाव या डिप्रेशन महसूस कर रहा हो, तो उसे अपनी स्थिति को स्वीकार कर सकारात्मक आध्यात्मिक अभ्यासों के साथ आवश्यकता पड़ने पर उचित परामर्श भी लेना चाहिए।

 

सत्र में यह प्रेरणा भी दी गई कि सच्चा सेवाधारी वही है जिसके जीवन, व्यवहार और नयनों से रूहानियत झलकती हो। अपने आत्म-परिवर्तन द्वारा जो व्यक्ति स्वयं विजयी बनता है, वही समाज में वास्तविक शांति और खुशी का संदेश फैला सकता है।

 

अंत में सभी को संदेश दिया गया कि जीवन में “कभी-कभी” शब्द हटाकर “सदा” शब्द अपनाएं — सदा खुश रहें, सदा शांत रहें और परमात्म स्मृति के माध्यम से अपने साथ-साथ समाज के वातावरण को भी शक्तिशाली बनाते रहें।

Continue Reading
Advertisement