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*संस्कारों को दिव्य और सात्विक बनाता है ब्रह्मा भोजन – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

*संस्कारों को दिव्य और सात्विक बनाता है ब्रह्मा भोजन – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

*शिव-अनुराग भवन में ‘ब्रह्मा भोजन’ का भव्य आयोजन; 1000 से अधिक लोगों ने लिया लाभ*

*कार्यक्रम में 100 आदर्श युगलों का हुआ सम्मान*

https://www.youtube.com/live/l-_qwsbjIwo?si=5JQExoKbGO-mUhS_

*बिलासपुर:* राजकिशोर नगर स्थित *शिव-अनुराग भवन* में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा एक गरिमामयी *’ब्रह्मा भोजन एवं सम्मान समारोह’* का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्था से जुड़े व्यवसायी कैलाश अग्रवाल, आरएसएस के शरद बल्हाल, सुनील जायसवाल, शिंगू भाई, हैंड्स ग्रुप के प्रमुख अभिषेक विधानी, मंत्रालय के एडिशनल कलेक्टर हर्ष पाठक, नटवर सोनछात्रा, वंदे मातरम मित्र मंडल के राजेश जायसवाल, डॉक्टर लव-कुश श्रीवास्तव, वरिष्ठ विद्युत विभाग अभियंता भूषण वर्मा, एडप्रयास के विनोद पांडेय – ममता पाण्डेय, सीए संदीप अग्रवाल के द्वारा परमात्मा शिव का ध्वज फहराया गया। इसके बाद सभी अतिथियों, बिलासपुर शहर के अन्य गणमान्य नागरिकों सहित आसपास के कई गांवों (बलौदा, नरियारा, कोतमी सुनार, अकलतरी, मधुआ, सोनसरी, पोंड़ी, बरगवां, अकलतरा, मस्तूरी, परसदा आदि) के सैकड़ों भाई-बहनों ने ब्रह्मा भोजन स्वीकार किया।

*ब्रह्मा भोजन: देवताओं के लिए भी दुर्लभ खजाना*
कार्यक्रम के दौरान *ब्रह्मा भोजन की महिमा* पर विशेष प्रकाश डाला गया। ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने ब्रह्मा भोजन को *”अनमोल खजाना”* बताया इसे ग्रहण करने के लिए देवता भी तरसते हैं। यह भोजन पूरी तरह से *शुद्धता और ईश्वरीय स्मृति* में ब्रह्मचारी भाई-बहनों द्वारा तैयार किया जाता है, जो न केवल शरीर को पोषण देता है बल्कि आत्मा को भी तृप्त करता है। *मंजू दीदी* ने सभी को निर्देश दिया कि ब्रह्मा भोजन का एक भी कण व्यर्थ नहीं जाना चाहिए और इसे पूर्ण सम्मान व शांति के साथ स्वीकार करना चाहिए।

**100 आदर्श युगलों का विशेष अभिनंदन**
समारोह का मुख्य आकर्षण उन *100 युगलों (कपल) का सम्मान* रहा, जो गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ज्ञान और योग की चार कठिन धारणाओं का पालन कर रहे हैं। इनमें नियमित मुरली सुनना, ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक खान-पान और दिव्य गुणों की धारणा शामिल है। इनमें जनकराम-मिथलेश क्षत्री, कैलाश-शकुंतला अग्रवाल, मनोज-रेखा आहूजा, रामनाथ-सुशीला सोनी, रामभजन-शरद देवांगन, जोशी-गिरिजा सोनी, संतोष-मनोरमा साहू, रामायण-फूल बाई राठौर जैसे कुछ युगलों को इन ईश्वरीय नियमों का पालन करते 20 से अधिक वर्ष का समय हो चुका है। सभी युगलों को *तिलक, मुकुट, चुनरी, अंगवस्त्र, पुष्प-गुच्छ और ईश्वरीय सौगात* देकर सम्मानित किया गया।

*सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन…*
कार्यक्रम की शुरुआत योगाभ्यास और मुरली श्रवण से हुई, जिसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। कुमारी *त्रिशा* ने नृत्य के माध्यम से “ब्रह्मा भोजन की महिमा” का सुंदर वर्णन किया। साथ ही, कुमारी *अनन्या* ने “खातिर हमारे दूर से चल के जो आप आए” गीत पर स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया और अंत में कु. गौरी, तनु, सोनिया व अविका के “सतयुगी देवी-देवताओं के महारास” ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

**आध्यात्मिक संदेश**
मंजू दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि *सुचिता स्वच्छता ही ब्राह्मण जीवन का आधार है* और इसके बिना अतींद्रिय सुख की प्राप्ति असंभव है। उन्होंने सभी से नए वर्ष में अपनी पुरानी कमियों को *’माय गिफ्ट टू गॉड’* प्रोजेक्ट के तहत परमात्मा पर अर्पण करने का आह्वान किया।

ब्रह्मा भोजन की तुलना एक *’पारस पत्थर’* से की जा सकती है; जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, वैसे ही ईश्वरीय याद में बना यह भोजन साधारण मनुष्य के संस्कारों को दिव्य और सात्विक बनाने की शक्ति रखता है।