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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा से जुड़े आरएसएस कार्यकर्ता सुशील भाई सगदेव की भावभीनी विदाई*

*प्रेस नोट**

*मानवता की सेवा के लिए देहदान का अनूठा उदाहरण;*

*ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा से जुड़े आरएसएस कार्यकर्ता सुशील भाई सगदेव की भावभीनी विदाई**

**बिलासपुर।** टिकरापारा स्थित प्रभु दर्शन भवन में एक अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी विदाई समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता एवं ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी के लौकिक जीजाजी व स्वयंसेवक शरद बलहाल के दामाद सुशील भाई के देहावसान के उपरांत उनके परिवार द्वारा उनकी देह को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान हेतु देहदान करने का महान निर्णय लिया गया।

 

**सेवाभावी जीवन और प्रेरणादायी निर्णय**

सुशील भाई आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे तथा कोरोना काल में भी उन्होंने सेवा कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पिछले लगभग ढाई वर्षों से वे बिलासपुर में उपचाररत थे। उनके सुपुत्र शुभम सगदेव व पुत्री समृद्धि सगदेव के मन में देहदान का संकल्प आया, जिसे परिवार के सभी सदस्यों ने सहर्ष स्वीकार किया।

मंजू दीदी ने बताया कि शास्त्रों में भी देहदान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस निर्णय से प्रेरित होकर उनके 91 वर्षीय पिता शरद बलहाल ने भी स्वयं के देहदान की इच्छा व्यक्त की।

 

*तीन पद्धतियों का अनूठा संगम*

सुशील भाई की अंतिम विदाई तीन विशेष आधारों पर संपन्न हुई—

 

* **आध्यात्मिक रीति:** ब्रह्माकुमारीज़ परिवार द्वारा शांति एवं शक्ति के संकल्पों के साथ

* *शास्त्रीय परंपरा:* हिंदू रीति अनुसार वाराणसी में 13 दिवसीय धार्मिक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी

* **वैज्ञानिक दृष्टिकोण:** चिकित्सा शिक्षा हेतु देहदान

 

*मुस्कुराता हुआ प्रेरक व्यक्तित्व*

मंजू दीदी ने उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि सुशील भाई सदैव मुस्कुराते रहने वाले, तनावमुक्त और सकारात्मक व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने बैंक सेवा के साथ परिवार एवं संगठन की जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन किया। अपने अंतिम समय में भी उन्होंने लंबे शारीरिक कष्ट को अत्यंत धैर्य और मुस्कान के साथ सहन किया।

 

**भावपूर्ण विदाई एवं संदेश*

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ परिवार, आरएसएस के सदस्य एवं परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। दीदी ने संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक आत्मा की विदाई सम्मानपूर्ण एवं प्रेरणादायी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जीवन एक यात्रा है—हर कोई आता है और चला जाता है, लेकिन सुशील भाई ने देहदान के माध्यम से मानवता के लिए अमिट उदाहरण प्रस्तुत किया है।”

 

 

**मीडिया प्रभाग**

**ब्रह्माकुमारीज़, बिलासपुर**