Connect with us
 

Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

संस्कार परिवर्तन दिवस है मकर संक्रांति – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

*संस्कार परिवर्तन दिवस है मकर संक्रांति – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

प्रभु दर्शन भवन में चल रही सकारात्मक चिंतन की क्लास

बिलासपुर टिकरापारा :- मकर संक्रांति का पर्व केवल परंपरागत रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह *आत्मिक जागृति और संस्कार परिवर्तन का विशेष दिन* है। तिल का महत्व यह सिखाता है कि आत्मा जब *अति सूक्ष्म बिन्दी रूप* में स्थित होती है, तब वह मन को हल्का बनाकर *पतंग की तरह ऊँची उड़ान* भर सकती है।

 

उक्त बातें मकर संक्रांति के अवसर पर प्रभु दर्शन भवन में विशेष परमात्म महावाक्य सुनाते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कही। दीदी ने कहा तिल को मिठास के साथ खाने की परंपरा यह संदेश देती है कि जीवन और संबंधों में *मधुरता, स्नेह और प्रेम* अनिवार्य हैं। बिना मधुरता के जीवन कड़वा हो जाता है, जबकि प्रेम और सौहार्द से जुड़ने पर जीवन श्रेष्ठ बनता है।

 

दीदी ने आगे कहा कि इस दिन दान का वास्तविक अर्थ केवल वस्तुएँ देना नहीं, बल्कि *अपने अंदर की कमजोरियों, बुरी आदतों और नकारात्मक सोच को छोटा समझकर त्याग देना* है। इन्हें तिल के समान छोटी बात मानकर खुशी-खुशी छोड़ देना ही सच्चा दान है।

 

मकर संक्रांति को *संस्कार परिवर्तन दिवस* कहा गया है, क्योंकि इस दिन दृढ़ संकल्प की अग्नि में पुराने नकारात्मक संस्कारों को जला कर *नए, सकारात्मक और दिव्य संस्कार अपनाने* की प्रेरणा मिलती है। यह पर्व हमें सदा स्नेही, संगठित और सकारात्मक बनकर जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का संदेश देता है।

 

दीदी ने जानकारी दी कि गुरुवार सुबह प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा व शाम शिव अनुराग भवन में परमात्मा को तिल के मिठाई का भोग अर्पित कर कमजोर संस्कारों का संस्कार करने संकल्पित होंगे।

Continue Reading
Advertisement