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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

*नशे की जगह ‘शान’ में जिएं, लक्ष्य इतना महान बनाएं कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे: गायत्री दीदी*

*नशे की जगह ‘शान’ में जिएं, लक्ष्य इतना महान बनाएं कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे: गायत्री दीदी*

*होली नर्सरी स्कूल में ’10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाभियान’; विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा, चरित्र निर्माण और मोबाइल के सदुपयोग का संदेश*

*बिलासपुर।* राजकिशोर नगर स्थित *होली नर्सरी हायर सेकंडरी स्कूल* में ‘नशामुक्त युवा-विकसित भारत अभियान’ के तहत *’10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाभियान’** के अंतर्गत प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी गायत्री दीदी ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के साथ-साथ लक्ष्य निर्धारण, एकाग्रता, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण की सीख दी।

*लक्ष्य बड़ा होगा तो व्यर्थ के लिए समय नहीं बचेगा*

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गायत्री दीदी ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए लक्ष्य का स्पष्ट और महान होना जरूरी है। *अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे।* उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने समय और बुद्धि का सही दिशा में उपयोग करें, क्योंकि आज का समय और मेहनत ही उनके भविष्य और परीक्षा परिणामों की नींव तैयार करते हैं।

*नशा व्यक्ति के साथ पूरे परिवार और समाज को करता है प्रभावित*

उन्होंने कहा कि नशे का प्रभाव केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और समाज इससे प्रभावित होता है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य को शिक्षा और विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो युवाओं को नशे से दूर रखना जरूरी है। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को संस्कारवान, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।

*मोबाइल को दोस्त बनाएं, जीवन पर हावी न होने दें*

गायत्री दीदी ने विद्यार्थियों को *मोबाइल के बढ़ते उपयोग* के प्रति भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल ज्ञान और उपयोगी जानकारी का माध्यम हो सकता है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग पढ़ाई, नींद और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। मोबाइल का उपयोग एक दोस्त की तरह करें, लेकिन उसे अपने जीवन का मालिक न बनने दें।

*’नशा’ नहीं, अपनी उपलब्धियों और संस्कारों की ‘शान’ में जिएं**

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि **’नशा’ शब्द को उलटकर ‘शान’ में जीने की आदत डालें।** अपने माता-पिता, शिक्षकों, संस्कारों और उपलब्धियों की शान बनें। विद्यार्थी यदि अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे तो वे स्वयं के साथ परिवार, विद्यालय और देश का नाम भी रोशन करेंगे।

*विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्त जीवन का संकल्प*

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सामूहिक रूप से नशामुक्ति की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे और अपने परिवार तथा समाज को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे। इस दौरान *”नशा नहीं, नई दिशा चुनो”** और *”जन-जन का है यही संदेश, नशामुक्त हो भारत देश”* जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि विद्यार्थी अपने समय, कर्म और ऊर्जा का उपयोग शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र के नवनिर्माण में करेंगे।