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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

*भगवान को देने के लिए सबसे उत्तम समय रूपी उपहार है युवाकाल : बीके शेखर भाई, गोल्ड मेडलिस्ट*

*भगवान को देने के लिए सबसे उत्तम समय रूपी उपहार है युवाकाल : बीके शेखर भाई, गोल्ड मेडलिस्ट*

*माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ आर्किटेक्ट बीके शेखर भाई ने टिकरापारा स्थित ‘शिव अनुराग भवन’ में अपने हृदयस्पर्शी संस्मरणों और क्लास से सभी को भावविभोर कर दिया…*

*बिलासपुर, 02/10/2026।* राज किशोर नगर स्थित *शिव-अनुराग भवन* में आयोजित विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम में माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ आर्किटेक्ट इंजीनियर *बीके शेखर भाई* ने परमात्मा के प्रेम, मुरली की मिठास और सेवा के अनुभव साझा किए। उनके हृदयस्पर्शी संस्मरणों से वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं और आनंद से भर गया।

*युवाकाल की ऊर्जा परमात्मा को समर्पित करें*

शेखर भाई ने कहा कि सामान्यत: लोग जीवन का श्रेष्ठ समय सांसारिक आकर्षणों में लगा देते हैं और उम्र के अंतिम पड़ाव में परमात्मा को याद करते हैं। इसके विपरीत, यदि युवाकाल की ऊर्जा, समय और प्रतिभा को परमात्मा की सेवा में लगाया जाए तो यही सच्चे अर्थों में जीवन का श्रेष्ठ उपयोग है।

उन्होंने कहा कि हम परमात्मा को आखिर देते ही क्या हैं—एक थका हुआ तन, उलझा हुआ मन और पुराने हिसाब-किताब। इसके बदले परमात्मा हमें शांति, सुख, शक्ति और श्रेष्ठ जीवन का अधिकार देते हैं। इसलिए जीवन के श्रेष्ठ समय को व्यर्थ गंवाने के बजाय ईश्वरीय सेवा में लगाना चाहिए।

*ज्ञान मुरली में अनुभव होता है परमात्मा का प्यार*

शेखर भाई ने ज्ञान मुरली के प्रति अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब परमात्मा कहते हैं, *“बच्चे खुश तो हो ना?”*, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं परमपिता व्यक्तिगत रूप से हमारा हाल पूछ रहे हों। उन्होंने कहा कि मुरली का बार-बार अध्ययन करने से हर बार नई प्रेरणा, शांति और आत्मिक शक्ति का अनुभव होता है।

*भोग में हो निश्छल प्रेम का भाव*

उन्होंने परमात्मा को भोग अर्पित करने के भाव को समझाते हुए कहा कि जैसे छोटा बच्चा प्रेम से अपनी मां को पहला निवाला खिलाता है, उसी प्रकार परमात्मा द्वारा दिए अन्न में से पहला भाग प्रेमपूर्वक उन्हें अर्पित करना चाहिए। इसमें दिखावा नहीं, बल्कि सच्चा और निश्छल भाव होना चाहिए।

*खुश रहने के बताए पांच सूत्र*

शेखर भाई ने जीवन में प्रसन्नता और संतुष्टता बनाए रखने के लिए पांच सूत्र बताए *एकव्रता, बैलेंस, निमित्त-निर्माण और निर्मल वाणी, स्वमान व सम्मान तथा गुणग्राही दृष्टि।* उन्होंने दादी जानकी जी के बताए 108 के सूत्र को भी याद कराया— *1 यानी एक ईश्वर की याद, 0 यानी बीती बातों पर फुलस्टॉप और 8 यानी अष्ट शक्तियों की धारणा।*

कार्यक्रम का शुभारंभ सेवाकेंद्र प्रभारी *बीके मंजू दीदी* एवं रूपा बहन द्वारा अतिथियों के तिलक और पुष्पगुच्छ से स्वागत के साथ हुआ।

*बीके मंजू दीदी* ने कहा कि हमें किसी से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय ब्रह्मा बाबा के जीवन को अपना आदर्श बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। मीठे बोल, शुभभावना और उमंग-उत्साह से निराश आत्माओं में नई शक्ति भरना ही सच्ची रूहानी सेवा है।

ज्ञान सरोवर से पधारे *बीके श्याम भाई* ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में सभी को ईश्वरीय भोग स्वीकार कराया गया तथा योग-साधना के माध्यम से शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव कराया गया।