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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

*समय की कदर और पक्का संकल्प ही सफलता की कुंजी : बीके अर्जुन भाई*

*समय की कदर और पक्का संकल्प ही सफलता की कुंजी : बीके अर्जुन भाई*

*मुख्यालय आबू राज से आए अर्जुन भाई ने बताए जीवन को बेहतर बनाने के व्यावहारिक सूत्र; कहा- दूसरों को बदलने के बजाय पहले स्वयं में बदलाव लाएं*

*मंजू दीदी व ईश्वरीय परिवार ने अर्जुन भाई के साथ दीप जलाकर की दीपावली की शुरुआत*

*राज किशोर नगर, बिलासपुर।* जीवन में सफलता पाने के लिए बड़े साधनों से ज्यादा जरूरी है समय का सही उपयोग, मन की एकाग्रता और अपने संकल्प पर टिके रहना। एक समय, एक स्थान और एक संकल्प का नियम अपनाकर कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। यह बात ब्रह्मा कुमारीज़ मुख्यालय आबू राज के ज्ञानामृत प्रेस विभाग से पधारे बीके अर्जुन भाई ने ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र में आयोजित विशेष अनुभव सत्र में कही। उन्होंने दैनिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के कई व्यावहारिक सूत्र बताए। कार्यक्रम में उनके साथ दीप प्रज्ज्वलित कर दीपावली की शुरुआत भी की गई।

*समय का सही उपयोग और स्वयं में बदलाव जरूरी*

अर्जुन भाई ने कहा कि समय की कदर करना सीखें, क्योंकि जब हम समय की कदर करेंगे, तब समय विश्व दरबार में हमारी कदर करेगा। अमृतवेला में निश्चित समय और स्थान पर बैठकर एक श्रेष्ठ संकल्प का नियमित अभ्यास करने से मन की एकाग्रता और इच्छाशक्ति मजबूत होती है। उन्होंने दूसरों की कमियां देखने के बजाय प्रतिदिन स्वयं की जांच करने और अपनी कमजोरियों को दूर करने पर जोर दिया।

*कर्मणा सेवा से मिटता है अहंकार…*
उन्होंने नियमित मुरली श्रवण और योगाभ्यास को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। कहा कि घर से बाहर निकलते समय परमात्मा को अपना साथी बनाकर चलें। इससे विपरीत परिस्थितियों में भी मनोबल बना रहता है। सेवा में विनम्रता का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करने जैसे छोटे दिखने वाले कार्य भी अहंकार मिटाने का माध्यम बन सकते हैं। योगबल से व्यक्ति में कठिन परिस्थितियों और कर्मों के परिणामों को सहन करने की शक्ति आती है।

*बचपन से ही जुड़ गए थे आध्यात्मिक ज्ञान से*

मूलतः भुवनेश्वर (ओडिशा) के निवासी अर्जुन भाई ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1978 में जब वे छठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब महज 10-11 वर्ष की उम्र में एक कृषि अधिकारी के माध्यम से ईश्वरीय ज्ञान से जुड़े। इस मार्ग पर चलने के कारण उन्हें पारिवारिक विरोध और कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपने निश्चय पर कायम रहे। बाद में मधुबन पहुंचने पर संदेशी दादी के माध्यम से दादी प्रकाशमणि के सान्निध्य में रहने और सेवा करने का अवसर मिला।

**दादियों के संस्मरणों से साझा की प्रेरक बातें**

अर्जुन भाई ने यज्ञ की वरिष्ठ दादियों से जुड़े कई रोचक प्रसंग सुनाए। संदेशी दादी के अलग-अलग नामों के पीछे की घटनाएं बताईं। वहीं निर्मला शांता दादी का प्रसंग सुनाया कि कर्फ्यू के दौरान वे ब्रह्मा बाबा को गाड़ी में सुरक्षित लेकर जा रही थीं। पुलिस ने जब गाड़ी रोकी तो उन्होंने निर्भयता से कहा, “मेरी गाड़ी में खुदा का दोस्त बैठा है।” इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि दृढ़ विश्वास और साहस से कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है।

**दीप जलाकर की दीपावली की शुरुआत**

कार्यक्रम में चित्र प्रदर्शनी और यज्ञ इतिहास पर आधारित रोचक प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई। इसके बाद बीके अर्जुन भाई के साथ बीके मंजू दीदी व उपस्थित सभी बहनों और भाई-बहनों ने दीप प्रज्ज्वलित कर दीपावली की शुरुआत की। दीपों की रोशनी के बीच सभी ने सामूहिक योगाभ्यास किया और ईश्वरीय भोग स्वीकार किया। सेवाकेंद्र प्रभारी बीके मंजू दीदी एवं राजकिशोर नगर सेवाकेंद्र की बीके रूपा दीदी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अर्जुन भाई का स्वागत किया।

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