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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

*”परमात्मा ने भाग्य लिखने की कलम हमारे हाथों में दी है; समय के महत्व को पहचानकर करें श्रेष्ठ कर्म”: बीके गायत्री दीदी*

*”परमात्मा ने भाग्य लिखने की कलम हमारे हाथों में दी है; समय के महत्व को पहचानकर करें श्रेष्ठ कर्म”: बीके गायत्री दीदी*

*शिव-अनुराग भवन में सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर जारी; वर्तमान पुरुषोत्तम संगम युग पर विशेष प्रवचन;*

*बिलासपुर, 27 अक्टूबर 2026:* राज किशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में आयोजित सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर में बीके गायत्री दीदी ने आज समय के महत्व, पुरुषोत्तम संगम युग और श्रेष्ठ कर्मों द्वारा अपना भाग्य बनाने की बात कही।उन्होंने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को अपने भाग्य की रेखा बनाने की कलम स्वयं उसके हाथों में दी है। इसलिए समय की कीमत पहचानकर हर पल को श्रेष्ठ कर्मों में लगाना चाहिए।

 *समय बीतने पर पछतावे से बेहतर है उसका सदुपयोग* 

बीके गायत्री दीदी ने कहा कि समय तेजी से बीत रहा है। जैसे परीक्षा में पांच मिनट की देरी भी विद्यार्थी की एकाग्रता और प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है, वैसे ही जीवन में अवसर निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता। समय का प्रबंधन करने के साथ अपने विचारों और स्वभाव को सही दिशा देना भी आवश्यक है। यही जीवन में सफलता का आधार है।

 *संगम युग आत्मा और परमात्मा के मिलन का श्रेष्ठ समय* 

उन्होंने पांच हजार वर्ष के सृष्टि चक्र और सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग के बाद आने वाले वर्तमान पुरुषोत्तम संगम युग का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि यह आत्मा और परमात्मा के मिलन तथा स्वयं को श्रेष्ठ बनाने का विशेष समय है। इस अवसर को पहचानकर आध्यात्मिक उन्नति और श्रेष्ठ कर्मों के लिए प्रयास करना चाहिए।

 *भाग्य मांगने से नहीं, श्रेष्ठ कर्मों से बनता है* 

गायत्री दीदी ने कहा कि परमात्मा से केवल मांगने के बजाय उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहिए। हम जहां रहते हैं और जिन लोगों के बीच रहते हैं, वहीं अपने व्यवहार, संकल्प और कर्मों से सुंदर भाग्य का निर्माण कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि स्वयं को असहाय मानने के बजाय अपनी जिम्मेदारी पहचानें और सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करें।

प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि कई बार किसी घटना का वास्तविक परिणाम तत्काल समझ में नहीं आता। कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

*दूसरों का भला करने में ही सच्चा लाभ* 

गायत्री दीदी ने ‘शुभ-लाभ’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि शुभ संकल्प और श्रेष्ठ कर्म जीवन में वास्तविक लाभ का आधार बनते हैं। जब हम दूसरों का भला करते हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए समय के हर पल को व्यर्थ चिंताओं में गंवाने के बजाय अच्छे विचारों, श्रेष्ठ कर्मों और सेवा में लगाना चाहिए।