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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

क्षमादान’ से होता है आत्मा का उद्धार — ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

*’क्षमादान’ से होता है आत्मा का उद्धार — ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

*प्रभु दर्शन भवन, टिकरापारा में पितृ पक्ष पर पूर्वजों के निमित्त लगाया ईश्वरीय भोग, कहा- अपने व्यवहार और संस्कार देखने का भी अवसर है यह दिन*

*बिलासपुर, टिकरापारा 08 अक्टूबर 2026।* पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने के साथ अपने व्यवहार और संस्कारों को देखने का अवसर भी है। माता-पिता और घर के बुजुर्गों के साथ किया गया गलत व्यवहार ही वास्तविक अर्थों में पितृ दोष का कारण बनता है। पूर्वज कभी अपने बच्चों को श्राप नहीं देते। हमारे कर्मों का फल ही हमारे सम्मुख आता है।

 

यह बात ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने प्रभु दर्शन भवन, टिकरापारा में पितृ पक्ष एवं श्राद्ध के आध्यात्मिक रहस्य पर आयोजित विशेष क्लास में कही।

 

उन्होंने कहा कि **जीते-जी माता-पिता और बड़ों का सम्मान, उनसे प्रेम से बात करना, उनके पास समय बिताना और उनकी सेवा करना ही सच्चा श्राद्ध है।** मृत्यु के बाद बड़े अनुष्ठान करने से अधिक जरूरी है कि जीवन रहते ही उन्हें सम्मान और स्नेह दिया जाए।

 

*गलती हुई हो तो क्षमा मांगें, दूसरों को भी क्षमा करें*

 

मंजू दीदी ने कहा कि पितृ पक्ष आत्ममंथन और पुरानी कड़वाहट को समाप्त करने का अवसर है। यदि जाने-अनजाने में किसी बड़े के प्रति गलत व्यवहार हुआ हो तो मन से क्षमा मांगें और यदि किसी ने हमारे साथ गलती की हो तो उसे भी क्षमा कर दें। उन्होंने सभी को *‘मास्टर क्षमा का सागर’* बनने का अभ्यास कराया।

 

उन्होंने समझाया कि क्षमा करने से मन पुराने हिसाब-किताब और कड़वाहट से मुक्त होता है तथा आत्मा हल्केपन का अनुभव करती है।

 

*विरोध को भी समझें आगे बढ़ने का अवसर*

 

मंजू दीदी ने कहा कि स्वयं को श्रेष्ठ और पूर्वज आत्मा समझकर हर परिस्थिति में दुआएं देने का भाव रखें। कोई विरोध करे, आलोचना करे या ईर्ष्या रखे, फिर भी उसके प्रति शुभभावना बनाए रखें। उन्होंने पिताश्री ब्रह्मा बाबा के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि *विरोध ही कई बार आत्मा को ऊंची स्थिति तक पहुंचाने का माध्यम बन जाता है।*

 

उन्होंने परोपकारी बनने के लिए तीन बातों से बचने की प्रेरणा दी— *परचिंतन, परदर्शन और परमत पर चलना।* दूसरों की कमियों का चिंतन और उनके अवगुणों को देखने के बजाय अपनी स्थिति को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

 

*20 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत कराया ईश्वरीय भोग**

 

प्रभु दर्शन भवन, टिकरापारा में सुबह तथा शिव-अनुराग भवन, राज किशोर नगर में शाम को पिछले करीब **20 वर्षों से चली आ रही परंपरा** के अनुसार पूर्वजों के निमित्त ईश्वरीय भोग लगाया गया। योगाभ्यास एवं मधुर गीतों के माध्यम से पूर्वज आत्माओं को स्मृति में लाकर परमात्म स्मृति में भोग स्वीकार कराने की आध्यात्मिक विधि बताई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने शांति और पवित्रता का अनुभव किया।