Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar
*परमात्मा को बनाएं अपना सच्चा मित्र, मन का बोझ साझा करने से मिलेगी शांति : बीके गायत्री दीदी*
*परमात्मा को बनाएं अपना सच्चा मित्र, मन का बोझ साझा करने से मिलेगी शांति : बीके गायत्री दीदी*
*शिव अनुराग भवन राजकिशोर नगर में राजयोग ध्यान शिविर जारी*
बिलासपुर। जीवन में जब मनुष्य परेशानियों से घिर जाता है, तब उसे ऐसे साथी की तलाश होती है, जिसके सामने वह बिना संकोच अपने मन की बात कह सके। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा को अपना सच्चा मित्र बनाकर उनसे मन की बातें साझा की जा सकती हैं। इससे मन को शांति और आंतरिक संबल मिलता है। यह बात बीके गायत्री दीदी ने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर के दौरान कही।
*परमात्मा से जुड़ाव मन को देता है संबल*
बीके गायत्री दीदी ने समझाया कि कई बार व्यक्ति अपनी परेशानियां दूसरों से साझा नहीं कर पाता और मन ही मन चिंतित रहता है। ऐसे में परमात्मा को अपना सच्चा मित्र मानकर उनसे आत्मिक संवाद करना मन को हल्का करने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का माध्यम बन सकता है। राजयोग ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति अपनी भावनाओं को समझने, मन को शांत रखने और परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त कर सकता है।
बालक और सातवीं मंजिल का दृष्टांत देते हुए उन्होंने बताया कि जैसे बच्चा खेलकर थकने पर मां के पास लौटना चाहता है, वैसे ही जीवन की भागदौड़ में थका मन भी शांति और सहारे की तलाश करता है।
*परमात्मा के नाम और स्वरूप की समझ*
परमात्मा के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि परमात्मा का नाम शिव है, जिसका अर्थ कल्याणकारी है, और उनका स्वरूप ज्योति बिंदु है। उन्होंने *परमात्मा को सर्वधर्म मान्य, सर्वोच्च, सर्वज्ञ, अजन्मा और सदा दाता* के रूप में समझाया। आत्मा को परमात्मा की संतान बताते हुए कहा कि राजयोग का उद्देश्य परमात्मा से आत्मिक संबंध जोड़कर उनके गुणों और शक्तियों का अनुभव करना है।





