Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar
बड़ों को समय दें, उनकी बातें सुनें और सम्मानपूर्वक व्यवहार करें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
*बड़ों को समय दें, उनकी बातें सुनें और सम्मानपूर्वक व्यवहार करें – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
*पूर्वजों की स्मृति में लिया संकल्प, बुजुर्गों का सम्मान कर उनके चेहरे पर लाएंगे मुस्कान*
*पितृ पक्ष पर शिव-अनुराग भवन में हुआ सामूहिक भोग एवं संकल्प*
*बिलासपुर, 09 अक्टूबर ।* पितृ पक्ष केवल पूर्वजों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा भी देता है। जीवित माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करना तथा उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। यह विचार ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने राज किशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में आयोजित पितृ पक्ष के विशेष आध्यात्मिक सत्र में व्यक्त किए।
कार्यक्रम में पूर्वजों के निमित्त सामूहिक भोग अर्पित करने के साथ क्षमादान योग कराया गया। मंजू दीदी ने कहा कि माता-पिता जीवनभर अपने बच्चों के लिए त्याग और समर्पण करते हैं। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि उनके जीवित रहते उन्हें समय दें, उनकी बात सुनें और सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। केवल मृत्यु के बाद बड़े आयोजन करने के बजाय जीवन रहते उनके प्रति प्रेम और अपनापन व्यक्त करना अधिक महत्वपूर्ण है।
*अपने व्यवहार में सुधार ही सच्चा प्रायश्चित*
मंजू दीदी ने पितृ दोष से जुड़ी भ्रांतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूर्वजों के नाम पर भयभीत होने के बजाय हमें अपने कर्मों और व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। यदि जाने-अनजाने माता-पिता या परिवार के बुजुर्गों का दिल दुखाया है, तो उनसे क्षमा मांगकर अपने व्यवहार में सुधार करना चाहिए। मन में किसी के प्रति शिकायत या कटुता रखने के बजाय क्षमा और शुभभावना अपनाने से जीवन में शांति आती है।
उन्होंने क्षमादान योग के अंतर्गत सभी को स्वयं की भूलों के लिए मन से क्षमा मांगने और दूसरों के प्रति भी क्षमाभाव रखने का अभ्यास कराया। इससे मन को हल्का करने और आपसी संबंधों में मधुरता लाने की प्रेरणा मिली।
*पूर्वजों के सम्मान का लिया संकल्प*
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भाई-बहनों ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे परिवार के बुजुर्गों सहित सभी के प्रति प्रेम, आदर और सम्मान का भाव रखेंगे। किसी का दिल नहीं दुखाएंगे तथा अपने व्यवहार से दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करेंगे। इस प्रकार पितृ पक्ष को केवल परंपरा तक सीमित न रखते हुए उसे आत्मचिंतन, क्षमा और श्रेष्ठ संस्कार अपनाने का अवसर बनाने का संदेश दिया गया।







