Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar
RAMAYAN NEWS & PHOTO GALLERY – 19-28 MARCH 2026
DAY-1
*हर आत्मा की आंतरिक यात्रा है रामायण – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
*मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी के चरित्र दी जा रही जीवन प्रबंधन की सीख…*
*’शिव-अनुराग भवन’ में 7 दिवसीय रामायण श्रृंखला का भव्य शुभारंभ*
**बिलासपुर, 19 मार्च:** हिन्दू नववर्ष, गुड़ी पड़वा एवं चेटी चाँद के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा *’रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन’** विषय पर 7 दिवसीय विशेष आयोजन का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर *ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी* ने रामायण के गूढ़ रहस्यों को व्यावहारिक जीवन से जोड़ते हुए संबंधों के प्रभावी प्रबंधन पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
*आत्मा की यात्रा और जीवन प्रबंधन का रहस्य*
मंजू दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘रामायण’ का वास्तविक अर्थ ‘आयन’ अर्थात यात्रा है—यह प्रत्येक आत्मा (आत्माराम) की आंतरिक यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने संबंधों को निभाने की कला को **दीपक** और **बीज** के उदाहरण से स्पष्ट करते हुए कहा कि जैसे दीपक को निरंतर तेल और संरक्षण की आवश्यकता होती है, वैसे ही संबंधों को प्रेम, धैर्य और निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है।
*दशरथ और अयोध्या का आध्यात्मिक विश्लेषण*
रामायण के पात्रों का आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करते हुए उन्होंने बताया *दशरथ* अर्थात् वह अवस्था जहाँ व्यक्ति अपनी 10 इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। *अयोध्या* मन की वह स्थिति है जहाँ किसी प्रकार का आंतरिक संघर्ष या ‘युद्ध’ नहीं होता। *तीन रानियाँ* कौशल्या-कुशलता, कैकेयी-प्राप्ति और सुमित्रा-सर्व के प्रति स्नेह का प्रतीक हैं। *चार भाई* राम-ज्ञान, भरत-योग व समर्पण, लक्ष्मण-धारणा और शत्रुघ्न-सेवा के प्रतीक हैं।
*संबंधों को मधुर बनाने के 10 प्रबंधन सूत्र*
दीदी ने जीवन प्रबंधन के महत्वपूर्ण मंत्र साझा करते हुए कहा:*राइट से फाइट* अर्थात् अधिकार की भावना संघर्ष को जन्म देती है। *मिसअंडरस्टैंडिंग से एंडिंग*- गलतफहमी संबंधों को समाप्त कर देती है। *फ़्लैशबैक से ड्रॉबैक*- पुरानी बातों को दोहराना संबंधों की कमजोरी है। *एडजस्टमेंट से अचीवमेंट* – समायोजन ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। *सैक्रीफ़ाइस से प्राइस* – संबंधों को बनाए रखने के लिए त्याग आवश्यक है। ऐसे अन्य 5 और सूत्र बताये
कुमारी शिवानी द्वारा मेरे घर राम आए हैं गीत पर प्रस्तुत नृत्य ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। अंत में सभी ने एकाग्र होकर निराकार परमात्मा की याद में गहन शांति का अनुभव किया।
**मीडिया प्रभाग**
**ब्रह्माकुमारीज़, बिलासपुर**
DAY-2
सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
*पर-चिंतन, पर-दर्शन और पर-मत से बचने की प्रेरणा मिलती है रामायण से – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
– केवल धार्मिक कथा नहीं, प्रेरणादायी मार्गदर्शिका है रामायण…
– दीदी ने बताये श्री राम के जीवन से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सूत्र
**बिलासपुर।** राजकिशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में चल रही आध्यात्मिक ज्ञान श्रृंखला के अंतर्गत द्वितीय दिवस पर ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” विषय पर सारगर्भित उद्बोधन दिया।
उन्होंने कहा कि श्री राम का जीवन केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन में तनावमुक्त, संतुलित एवं सफल जीवन जीने की एक प्रेरणादायी मार्गदर्शिका है। उनके चरित्र में निहित गुण आज भी प्रत्येक व्यक्ति को आत्मबल, धैर्य और मर्यादा का पाठ सिखाते हैं।
मंजू दीदी ने श्री राम के जीवन से प्रेरित 10 महत्वपूर्ण जीवन सूत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि जल्दबाजी अशांति का कारण बनती है, भय असफलता की जड़ है तथा अनियंत्रित इच्छाएँ मनुष्य को अशांत करती हैं। उन्होंने संतुलित आत्मविश्वास, साहस, त्याग, अनुभव और सकारात्मक दृष्टिकोण को सफलता का आधार बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान के कर्म ही भविष्य का निर्माण करते हैं, अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहना चाहिए।
आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने मंथरा को पर-चिंतन एवं नकारात्मक विचारों का प्रतीक बताया और तीन “पर” — पर-दर्शन, पर-चिंतन एवं पर-मत — से बचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इनसे दूर रहकर ही मनुष्य आंतरिक शांति और स्थिरता प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी को निराकार परमात्मा से जुड़कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए मर्यादाओं का पालन करना ही सच्चे अर्थों में ‘राम राज्य’ की स्थापना है।
DAY-3
सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
रामायण का आध्यात्मिक महत्व और जीवन प्रबंधन श्रृंखला के तीसरे दिन मंजू दीदी ने कहा –
*निस्वार्थ प्रेम और त्याग की मिसाल: भरत*
**बिलासपुर,**
‘रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन’ श्रृंखला के तीसरे दिन का मुख्य केंद्र भरत के आदर्श चरित्र पर रहा, जिसे निस्वार्थ प्रेम, त्याग और उच्च संस्कारों की सर्वोत्तम मिसाल बताया गया।
वक्ता मंजू दीदी ने रामायण के अयोध्या कांड का उल्लेख करते हुए बताया कि जब भरत को राज्य मिलने का अवसर मिला, तब उन्होंने इसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। उनके लिए राज्य से अधिक महत्वपूर्ण थे उनके बड़े भाई राम, जिनमें वे धर्म, मर्यादा और सत्य का साक्षात स्वरूप देखते थे।
*राम – विवेक, सीता – पवित्रता व लक्ष्मण त्याग के प्रतीक*
दीदी ने बताया कि भरत का प्रेम केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक था। उन्होंने उस राज्य को अस्वीकार कर दिया जहाँ विवेक (राम), पवित्रता (सीता) और त्याग (लक्ष्मण) उपस्थित न हों। यह त्याग ही भरत को सामान्य व्यक्ति से महान बनाता है।
सत्र में राम-भरत मिलाप का प्रसंग विशेष रूप से भावुक वातावरण में प्रस्तुत किया गया। दीदी ने बताया कि श्रीराम ने स्वयं भरत को संसार का सबसे श्रेष्ठ भाई कहा। वहीं भरत ने भी अपने कर्तव्य को समझते हुए सिंहासन पर बैठने के बजाय राम की **चरण पादुकाओं** को राजगद्दी पर स्थापित किया और स्वयं को केवल एक सेवक और प्रतिनिधि के रूप में रखा।
इसके साथ ही आज के सत्र में स्वभाव प्रबंधन पर विशेष मंथन करते हुए दीदी ने कहा कि भरत का महान चरित्र उनके उत्कृष्ट स्वभाव का परिणाम था। उनका विनम्र, शांत, कृतज्ञ और निस्वार्थ स्वभाव ही उन्हें सबके हृदय के निकट लाता है। ‘नो कंप्लेन, नो पेन’, कृतज्ञता, धैर्य, प्रेम और वफादारी जैसे गुणों को अपनाकर ही व्यक्ति अपने जीवन में भरत जैसा आदर्श स्थापित कर सकता है।
इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चा नेतृत्व अधिकार में नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और समर्पण में होता है। भरत का चरित्र सिखाता है कि जीवन में अहंकार त्यागकर यदि हम संबंधों और मूल्यों को प्राथमिकता दें, तो हर परिस्थिति में संतुलन और शांति बनाए रख सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि वे भरत के आदर्शों—निस्वार्थ प्रेम, त्याग, वफादारी और समर्पण—को अपने जीवन में अपनाकर परिवार और समाज में सौहार्द का वातावरण स्थापित करें।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिदिन श्रद्धालुओं को दीदी के द्वारा भोग प्राप्त करने का सौभाग्य मिलता है।
DAY-4
**प्रेस विज्ञप्ति**
**ब्रह्माकुमारीज़, शिव- अनुराग भवन, बिलासपुर**
**दिनांक:*23/03/2026
*विश्व जल दिवस पर मंजू दीदी बोलीं— प्रकृति पर अधिकार नहीं, संतुलन और सम्मान जरूरी*
*‘ज्ञान-जल’ से शीतल करें जीवन का ताप; रामायण श्रृंखला में जल संरक्षण का संदेश*
*बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के चौथे दिन विश्व जल दिवस* के अवसर पर जल संरक्षण, स्वभाव की निर्मलता और आध्यात्मिक जीवन शैली पर विशेष संदेश दिया गया। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने श्री राम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से जल के प्रति सम्मान और संतुलित उपयोग की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, शांत और सार्थक बनाने का मार्गदर्शक है।
*“रामायण हमें सिखाती है कि जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि देवतुल्य तत्व है—जिसका उपयोग श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।”*
मंजू दीदी ने गंगा पार करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि श्री राम द्वारा गंगा माता को प्रणाम करना जल के प्रति आदर का प्रतीक है। वहीं लंका जाने से पूर्व समुद्र से मार्ग प्राप्त करने के लिए तीन दिन तक की गई तपस्या यह दर्शाती है कि प्रकृति के साथ *संवाद और संतुलन* ही सही मार्ग है।
*“प्रकृति पर अधिकार जमाने के बजाय उससे संवाद करना और संतुलन बनाए रखना ही सच्चा विकास है।”*
राम सेतु निर्माण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास कार्य करते समय भी जल स्रोतों को नष्ट किए बिना आगे बढ़ना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरयू, गंगा और गोदावरी जैसी नदियों की पवित्रता का उल्लेख करते हुए जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने वर्तमान जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल है, फिर भी हम अनजाने में जल का दुरुपयोग करते हैं। छोटी-छोटी लापरवाहियाँ, जैसे नल खुला छोड़ देना, जल के प्रति हमारी असंवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
*“जल की एक-एक बूंद अमूल्य है; इसका अपव्यय नहीं, संरक्षण ही हमारा धर्म होना चाहिए।”**
सीता माता और लव-कुश के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने पेड़-पौधों के महत्व को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल जीवन देते हैं, बल्कि जल संरक्षण, वर्षा संतुलन और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण का संकल्प लेना चाहिए।
स्वभाव प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए दीदी ने कहा कि जिस प्रकार जल शीतल और निर्मल होता है, उसी प्रकार मनुष्य का स्वभाव भी मधुर होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पानी में शक्कर मिलाने से वह सबको प्रिय लगता है, वैसे ही मधुर स्वभाव व्यक्ति को सबका प्रिय बना देता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी को संकल्प दिलाया गया कि वे जल को देवतुल्य मानते हुए उसका संरक्षण करेंगे, जल स्रोतों को स्वच्छ रखेंगे तथा प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राजयोग ध्यान एवं विश्व शांति की प्रार्थना के साथ हुआ।
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**जारी कर्ता:**
मीडिया प्रभाग
ब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा, बिलासपुर
DAY-5
सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
रामायण में युवाओं को विशेष संदेश –
*मर्यादा ही आत्मा का सुरक्षा कवच*
*सीमा लांघना बनता है पतन का कारण, बड़ों की बात काटना बड़े नुकसान का संकेत — मंजू दीदी*
**बिलासपुर, 23 मार्च।** राजकिशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में चल रही नौ दिवसीय रामायण श्रृंखला के पांचवें दिन आध्यात्मिक वातावरण उस समय भावविभोर हो उठा, जब ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने *मर्यादा और नैतिकता* पर गहन उद्बोधन दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि **मर्यादा ही आत्मा का सुरक्षा कवच है**, और जो व्यक्ति अपनी सीमाएं लांघता है, वह अनजाने में अपने पतन का मार्ग स्वयं प्रशस्त कर देता है।
उन्होंने सरल उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार खेत की रक्षा के लिए बाड़ आवश्यक होती है, उसी प्रकार जीवन में मर्यादाएं हमें बुराइयों और विपरीत परिस्थितियों से बचाती हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि **बड़ों की बात काटना, मर्यादा का उल्लंघन करना और खराब संगत में रहना** जीवन के बड़े नुकसान का कारण बनता है।
मंजू दीदी ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सूत्रों को साझा करते हुए कहा कि संयम, अनुशासन, जागरूकता और श्रेष्ठ संस्कार ही जीवन को सफल बनाते हैं। “रिस्ट्रिक्शन ही प्रोटेक्शन है” का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओं में रहना ही सच्ची स्वतंत्रता और सुरक्षा का आधार है।
अपने प्रवचन में उन्होंने पंचवटी का आध्यात्मिक रहस्य भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि पंचवटी हमारी पांच ज्ञानेंद्रियों—आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा—का प्रतीक है, जिन पर नियंत्रण रखना ही वास्तविक साधना है। शूर्पणखा की घटना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब मनुष्य मर्यादा भूल जाता है, तो उसे अपमान और पीड़ा का सामना करना पड़ता है, जबकि खर-दूषण का वध क्रोध और दुष्प्रवृत्तियों पर विजय का संदेश देता है।
कार्यक्रम के दौरान 23 मार्च के अवसर पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को देशभक्ति, त्याग और मूल्यों के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।
अंत में मंजू दीदी ने आगामी राम नवमी के भव्य आयोजन की जानकारी देते हुए सभी को निराकार परमात्मा की स्मृति में रहने, अपने भीतर दिव्य आभामंडल विकसित करने तथा अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ अर्थात मर्यादाओं के भीतर रहकर जीवन जीने का संकल्प दिलाया।
DAY-6
**प्रेस विज्ञप्ति**
**ब्रह्माकुमारीज़, बिलासपुर**
*दिनांक: 24 मार्च 2026*
*बिलासपुर: गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले मन पर विजय ही सच्ची जीत—‘शिव-अनुराग भवन’ में रामायण श्रृंखला के छठवें दिन मंजू दीदी का संदेश*
*बिलासपुर।* ब्रह्माकुमारीज़ के राजकिशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में चल रही “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के छठवें दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने मन की चंचलता और उसके प्रभावी प्रबंधन पर सारगर्भित उद्बोधन दिया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गिरगिट बार-बार रंग बदलता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी पल-पल में अपने संकल्प बदलता रहता है। इस चंचल मन को स्थिर और नियंत्रित करना ही वास्तविक विजय है।
मंजू दीदी ने मन को सशक्त बनाने के लिए 10 ‘माइंड सूत्र’ साझा किए। उन्होंने बताया कि संकुचित सोच दुःख का कारण बनती है, जबकि सकारात्मकता सृजनात्मकता को जन्म देती है। नकारात्मक स्मृतियाँ मन को कमजोर करती हैं, वहीं शांत और स्वच्छ मन आत्मिक शक्ति का आधार बनता है। उदार और विशाल मन वाले व्यक्ति को जीवन में ईश्वरीय उपलब्धियाँ सहज प्राप्त होती हैं।
उन्होंने अहिल्या के प्रसंग को ‘जड़ बुद्धि’ का प्रतीक बताते हुए कहा कि माया के प्रभाव से आत्मा अपनी पवित्रता खो देती है, जिसका उद्धार केवल ज्ञान रूपी राम-स्पर्श से संभव है। साथ ही सीता के जीवन से सीख देते हुए उन्होंने आकर्षण, अधिक चाह, परख शक्ति की कमी, अयोग्य वचन और मर्यादा उल्लंघन को प्रमुख भूलें बताया।
हनुमान के चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘हनुमान’ वह है जिसने अपने अहंकार का हनन कर दिया हो। जब आत्मा हल्की और अहंकारमुक्त होती है, तभी वह जीवन की बाधाओं को पार कर अपने लक्ष्य तक पहुँचती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि माता अनुसूईया द्वारा दिए गए दिव्य आभूषण वास्तव में आत्मा के सात गुण—सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति—के प्रतीक हैं, जो जीवन को सुरक्षित और समृद्ध बनाते हैं।
नवरात्रि के पावन अवसर पर सभी को अपने भीतर के विकारों का त्याग कर ईश्वरीय सेवा में जुड़ने का संकल्प दिलाया गया।
*— मीडिया प्रभाग*
*ब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा बिलासपुर*
DAY-7
प्रेस विज्ञप्ति
*अहंकार का हनन करने वाला ही सच्चा ‘हनुमान’: मंजू दीदी*
बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के सातवें दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने *हनुमान चरित्र एवं धन प्रबंधन* पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि “हनुमान” शब्द का वास्तविक अर्थ है—जिसने अपने ‘मान’ अर्थात् अहंकार का हनन कर दिया हो। हनुमान जी का जीवन भक्ति, सरलता, निष्ठा और पूर्ण समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। आज मनुष्य धन के पीछे भागते हुए तनावग्रस्त हो रहा है, जबकि हनुमान जी के पास भक्ति का ऐसा अमूल्य धन था, जिसने उन्हें भगवान श्रीराम का प्रिय बना दिया।
सुंदरकांड के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लंका आज की विकारी दुनिया का प्रतीक है, और सीता माता की खोज यह सिखाती है कि केवल शुद्ध और निष्कपट हृदय वाला व्यक्ति ही दुखी आत्माओं को परमात्मा से जोड़ सकता है।
मंजू दीदी ने धन प्रबंधन के संदर्भ में स्पष्ट किया कि धन को जीवन में “सेवक” बनाकर रखना चाहिए, न कि “मालिक”। उन्होंने कहा कि अधिक धन की लालसा तनाव को जन्म देती है, कर्ज मानसिक बोझ बनता है, जबकि संतोष, ईमानदारी और दान जीवन को सुखी एवं संतुलित बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदारी से कर भुगतान करने और भ्रष्टाचार से दूर रहने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा स्वतः बढ़ती है।
*हनुमान जी की समुद्र पार करने की यात्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में प्रलोभन देकर आलस्य में लाने वाला मैनाक , ईर्ष्या-अहंकार रूपी सुरसा और नफरत-नकारात्मकता रूपी सिंहिका जैसी बाधाएँ आती हैं, जिन्हें दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से पार करना आवश्यक है।*
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी को अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी रावण को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब आत्मा पूर्ण समर्पण के साथ परमात्मा से जुड़ती है, तब वह शक्तिशाली और निर्भय बन जाती है।
सत्र का समापन भजनों के साथ प्रसाद वितरण से हुआ।
DAY-8
सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
*श्रेष्ठ गुणों की धारणा ही सच्चा धर्म- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
शिव अनुराग भवन में रामनवमी के अवसर पर श्री राम के नेतृत्व सूत्रों से जीवन प्रबंधन का संदेश
**बिलासपुर।** राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के *शिव-अनुराग भवन* में आयोजित नौ दिवसीय “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के आठवें दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने धर्म की वास्तविक परिभाषा और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन से नेतृत्व गुणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रामायण केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि “आत्माराम” की आध्यात्मिक यात्रा और श्रेष्ठ जीवन प्रबंधन की मार्गदर्शिका है।
दीदी ने स्पष्ट किया कि धर्म का अर्थ केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि जीवन में श्रेष्ठ गुणों की धारणा है। उन्होंने 10 व्यावहारिक सूत्रों के माध्यम से बताया कि संदेह, अनादर और दिखावा व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं, जबकि श्रद्धा, एकाग्रता, विनम्रता और स्वीकारोक्ति सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। “शुभ संकल्पों में विलंब नहीं करना चाहिए, अन्यथा अवसर हाथ से निकल जाता है।
कार्यक्रम में श्री राम के जीवन से 30 नेतृत्व गुणों को भी साझा किया गया। इनमें वचनबद्धता, अहंकार-शून्यता, सबको साथ लेकर चलने की क्षमता, दूरदर्शिता, कूटनीति और दूसरों को श्रेय देने जैसे गुण प्रमुख रहे। दीदी ने बताया कि “राम राज्य” आदर्श लोकतंत्र का प्रतीक है, जहाँ प्रेम और मर्यादा का संतुलन स्थापित होता है।
उन्होंने रावण के उदाहरण से समझाया कि अनेक गुण होने के बावजूद एक अहंकार ही उसके पतन का कारण बना। साथ ही, रावण द्वारा जीवन के अंतिम समय में दी गई तीन शिक्षाओं—हितैषियों की बात मानना, किसी को कमजोर न समझना और शुभ कार्य में विलंब न करना—को जीवन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्नेहल सगदेव द्वारा “ऐसे हैं मेरे राम” गीत तथा बालिकाओं त्रिशा और अनन्या के नृत्य ने सभी को भावविभोर कर दिया।
अंत में सभी ने निराकार परमात्मा की याद में बैठकर अपने भीतर के विकारों रूपी रावण को समाप्त कर शांति और सद्गुणों से भरपूर “अयोध्या” जैसी स्थिति बनाने का संकल्प लिया।
**— मीडिया प्रभाग, ब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा, बिलासपुर**
DAY-9
सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
*मर्यादा और स्वास्थ्य के संगम से बनेगा ‘राम राज्य’- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
*ब्रह्माकुमारीज़ शिव-अनुराग भवन में चल रहा रामायण, कल वाणी के दस सूत्रों पर होगा मंथन*
– रोगी, भोगी, योगी, त्यागी; सभी के लिए तंदुरुस्ती आवश्यक
– सत्य, प्रेम, न्याय और त्याग— रामराज्य के आधार
**बिलासपुर, 27 मार्च 2026।** राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित ‘रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन’ विषयक नौ दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के नौवें दिन मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने लंका विजय के बाद ‘अयोध्या वापसी’ के आध्यात्मिक रहस्यों को स्वास्थ्य प्रबंधन और ‘राम राज्य’ की अवधारणा से जोड़ते हुए जीवनोपयोगी संदेश दिए।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है, इसलिए योगी, भोगी या त्यागी—हर व्यक्ति के लिए तंदुरुस्ती आवश्यक है। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन के 10 सूत्र साझा करते हुए बताया कि गलत खान-पान, नशा, आलस्य और अनियमित दिनचर्या स्वास्थ्य के प्रमुख शत्रु हैं, जबकि अनुशासित जीवनशैली, मर्यादित भोजन, परिश्रम और प्रसन्नता स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “स्वास्थ्य ही जीवन की वास्तविक संपत्ति है” और आंतरिक ख़ुशी सबसे उत्तम टॉनिक है।
मंजू दीदी ने ‘राम राज्य’ को आदर्श लोकतंत्र बताते हुए उसके चार प्रमुख आधार—सत्य, प्रेम, न्याय और त्याग—को समाज का वास्तविक प्रहरी बताया। उन्होंने कहा कि ये चारों गुण व्यक्ति और समाज को पतन से बचाकर उन्नति की ओर ले जाते हैं।
सीता जी के जीवन प्रसंग को उन्होंने आंतरिक शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि सच्चा सम्मान भीतर की दृढ़ता से प्राप्त होता है, न कि बाहरी परिस्थितियों से।
अंत में उन्होंने मोबाइल के दुरुपयोग से बचने और उसके सकारात्मक उपयोग की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का समापन ‘ओम ध्वनि’ और परमात्म स्मृति के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी ने स्वयं को ‘पूर्वज आत्मा’ अनुभव करते हुए विश्व कल्याण का संकल्प लिया।
DAY-10
*प्रेस विज्ञप्ति*
**दिनांक:** 28 मार्च 2026
*रामराज्य की स्थापना का आधार – “वाणी का संयम, विचारों की शुद्धता और चरित्र की पवित्रता —ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
**बिलासपुर।** राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” विषय पर आधारित 10 दिवसीय ज्ञान श्रृंखला का भव्य समापन हुआ।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता *ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी** ने अपने उद्बोधन में कहा कि *“वाणी का संयम, विचारों की शुद्धता और चरित्र की पवित्रता ही ‘राम राज्य’ की स्थापना का आधार है। यदि मनुष्य अपनी वाणी को सुधार ले, तो उसके जीवन और संबंधों में स्वतः मधुरता आ जाती है।”*
उन्होंने वाणी प्रबंधन के 10 दिव्य सूत्रों को साझा करते हुए बताया कि कटु वचन संबंधों को तोड़ते हैं, जबकि मधुर और संयमित वाणी जीवन में सुख-शांति और सम्मान को बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि समयानुकूल मौन, सोच-समझकर शब्दों का चयन और नम्रता से बोलना व्यक्ति को प्रभावशाली बनाता है।
मंजू दीदी ने वर्तमान समय में घटते पारिवारिक मूल्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के कारण माता-पिता बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने ‘कुल्हड़ वाली कहानी’ के माध्यम से स्पष्ट किया कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने परिवार में देखते हैं। इसलिए बड़ों का सम्मान और सेवा ही श्रेष्ठ संस्कारों की नींव है।
उन्होंने श्रीराम के आदर्श जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व जीवन प्रबंधन का सर्वोत्तम उदाहरण है। उनके प्रबंधन कौशल, संबंधों की मर्यादा और इंद्रिय संयम हमें जीवन में संतुलन और सफलता की प्रेरणा देते हैं।
राजयोग मेडिटेशन कोर्स आज से आरम्भ
दीदी ने जानकारी दी कि सोमवार से टिकरापारा एवं राज किशोर नगर सेवाकेंद्र में राजयोग ध्यान का साप्ताहिक कोर्स शुरू होने जा रहा है। जिन्हें भी इस अवसर का लाभ लेना हो वे सेवाकेंद्र में बहनों से सम्पर्क कर सकते हैं। दीदी ने बतलाया कि राजयोग ध्यान संबंधों में मधुरता, युवा छात्र-छात्राओं के लिए एकाग्रता व तनाव प्रबंधन में सहायक सिद्ध होगा।
**मीडिया प्रभाग**
**ब्रह्माकुमारीज़, बिलासपुर**




































