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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

गीता ज्ञान आत्मा का दिव्य भोजन, जीवन का मार्गदर्शक — ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा

प्रेस विज्ञप्ति

*गीता ज्ञान आत्मा का दिव्य भोजन, जीवन का मार्गदर्शक — ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा*

गीता सप्ताह के दूसरे दिन हुआ गहन आध्यात्मिक चिंतन

 

बिलासपुर, टिकरापारा। ब्रह्माकुमारीज़ के प्रभु दर्शन भवन में आयोजित आठ दिवसीय ‘गीता सप्ताह’ के दूसरे दिन आध्यात्मिक ज्ञान का गहन प्रवाह देखने को मिला। कार्यक्रम में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी जी ने श्रीमद् भगवद् गीता के गूढ़ रहस्यों को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

 

अपने उद्बोधन में दीदी जी ने कहा कि जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा को सशक्त बनाने के लिए ‘ज्ञान का भोजन’ अनिवार्य है। गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के हर चरण में मार्गदर्शन देने वाली ‘आध्यात्मिक माता’ है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गीता का ज्ञान केवल सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है।

 

दीदी जी ने महाभारत को वर्तमान समय के संदर्भ में समझाते हुए बताया कि यह केवल ऐतिहासिक युद्ध नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर चल रहा मानसिक और वैचारिक संघर्ष है। आज का प्रत्येक व्यक्ति अर्जुन के समान परिस्थितियों से जूझ रहा है और जीवन की चुनौतियाँ ही उसका कुरुक्षेत्र हैं। ऐसे समय में ईश्वर का ज्ञान ही उसे सही दिशा और शक्ति प्रदान करता है।

 

गीता की रचना के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह दिव्य ज्ञान मुनिवर वेदव्यास जी द्वारा प्राप्त आध्यात्मिक अनुभूतियों का परिणाम है, जिसे उन्होंने जनमानस के लिए कथा रूप में प्रस्तुत किया, ताकि हर व्यक्ति सत्य और असत्य का भेद समझ सके।

 

दीदी जी ने सभी श्रोताओं से आग्रह किया कि वे पूरे गीता सप्ताह में नियमित रूप से उपस्थित होकर संपूर्ण ज्ञान का लाभ लें, क्योंकि अधूरा ज्ञान जीवन में अपेक्षित परिवर्तन नहीं ला पाता।

 

कार्यक्रम के आगामी सत्र में ‘सांख्य योग’ विषय पर विशेष चर्चा की जाएगी, जिसमें गीता के प्रारंभिक श्लोक “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे” के गहन आध्यात्मिक अर्थों को विस्तार से समझाया जाएगा।

 

मीडिया प्रभाग

ब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा

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