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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

उसलापुर रेलवे लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में ब्रह्माकुमारीज़ का विशेष सत्र; राजयोग मेडिटेशन से तनावमुक्त रहकर निर्णय लेने की दी सीख*

*मन पर नियंत्रण ही सुरक्षित रेल संचालन की पहली शर्त: बीके ज्योति बहन*

 

*उसलापुर रेलवे लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में ब्रह्माकुमारीज़ का विशेष सत्र; राजयोग मेडिटेशन से तनावमुक्त रहकर निर्णय लेने की दी सीख*

*बिलासपुर।* रेल संचालन में छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में तकनीकी दक्षता के साथ मानसिक संतुलन, एकाग्रता और समयपालन भी उतने ही आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से उसलापुर स्थित लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में ब्रह्माकुमारीज़ के साइंटिस्ट, इंजीनियर व आर्किटेक्ट (SEA) विंग द्वारा *’इको केयर एवं डिजास्टर मैनेजमेंट अभियान’* के अंतर्गत विशेष आध्यात्मिक सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लोको पायलटों को तनावमुक्त रहकर सुरक्षित रेल संचालन के लिए राजयोग मेडिटेशन एवं सकारात्मक चिंतन का अभ्यास कराया गया।

 

पानीपत हुडा से आईं मुख्य वक्ता *बीके ज्योति बहन* ने कहा कि अधिकांश दुर्घटनाओं की शुरुआत मन के असंतुलन से होती है। यदि व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखना सीख ले तो अनेक मानव निर्मित आपदाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी की जाती है, उसी प्रकार मन को भी पहले से प्रशिक्षित करना आवश्यक है। *”जिसने मन को जीत लिया, उसने परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त कर ली,”* उन्होंने कहा।

 

उन्होंने समयपालन और नैतिक मूल्यों को सफल जीवन की पहचान बताते हुए ब्रह्माकुमारीज़ के वरिष्ठ लेखक स्वर्गीय *जगदीश चंद्र हसीजा* का उदाहरण दिया, जो प्रत्येक कार्यक्रम में निर्धारित समय से पहले पहुंचते थे और जीवन मूल्यों से कभी समझौता नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि समय का सम्मान करने वाला व्यक्ति हर क्षेत्र में विश्वास और सफलता अर्जित करता है।

 

सत्र के दौरान प्रतिभागियों को कई प्रेरक प्रसंग सुनाए गए। । वहीं कटु शब्दों और झूठे आरोपों के दुष्परिणाम बताते हुए कहा गया कि एक बार निकले शब्दों को वापस नहीं लिया जा सकता, इसलिए वाणी में संयम और सकारात्मकता आवश्यक है। ‘होल्डिंग नेचर’ के उदाहरण से समझाया गया कि पुरानी नकारात्मक घटनाओं को मन में संजोकर रखने से व्यक्ति की निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता प्रभावित होती है।

 

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, जल एवं बिजली की बचत, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग तथा हर परिस्थिति में शांत एवं सकारात्मक बने रहने का सामूहिक संकल्प भी दिलाया गया।

 

इस अवसर पर ट्रेनिंग प्रिंसिपल बी एन पटेल, बीके सविता दीदी, बीके श्यामा बहन एवं बीके राकेश भाई सहित प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे।