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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

अपनी विशेषता (कला) को आकार देने वाला ही श्रेष्ठ कलाकार…

*”हर कर्म को श्रेष्ठ कला बनाकर ही हम 16 कला संपूर्ण बन सकते हैं” — ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*

 

अपनी विशेषता (कला) को आकार देने वाला ही श्रेष्ठ कलाकार…

प्रभु दर्शन भवन में गुरुवार विशेष क्लास

बिलासपुर। ब्रह्माकुमारीज़ प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा में गुरुवार को आयोजित साप्ताहिक सत्संग में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने उपस्थित भाई-बहनों को कहा कि “हर कर्म को श्रेष्ठ कला बनाकर ही हम 16 कला संपूर्ण बन सकते हैं।” उन्होंने बताया कि कला केवल चित्रकला, संगीत या नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक कार्य को पवित्रता, प्रेम, अनुशासन और ईश्वरीय स्मृति के साथ करना ही वास्तविक कला है और इन्हीं कलाओं को आकार देने वाला श्रेष्ठ कलाकार है।

 

उन्होंने कहा कि भोजन बनाना, घर एवं सेवा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना, मधुर वाणी बोलना, समय का सदुपयोग करना तथा सभी के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना रखना भी जीवन जीने की श्रेष्ठ कलाएँ हैं। जब प्रत्येक कर्म निस्वार्थ भावना और श्रेष्ठ संकल्पों के साथ किया जाता है, तब वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है।

 

मंजू दीदी ने कहा कि संगम युग आत्म-परिवर्तन का श्रेष्ठ समय है। यदि हम अपने हर कर्म में विशेषता और दिव्यता लाएँ, तो हमारा व्यक्तित्व स्वयं प्रेरणा का स्रोत बन जाएगा। उन्होंने सभी को जीवन में श्रेष्ठ संस्कार, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

 

सत्संग के अंत में उपस्थित सभी भाई-बहनों को पुनः मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी के निमित्त भोग दिया गया ।