Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar
बिलासपुर के 12 घंटे के ऐतिहासिक ‘योग महोत्सव’ में उमड़ा जनसैलाब*
*मंजू दीदी ने दिया संदेश— “एक मिनट का मौन, क्षमा का भाव और परमात्म स्मृति बदल सकती है पूरा जीवन”*
*सिर्फ तीन मिनट का राजयोग मिटा देता है दिन भर की थकान – विधायक सुशांत शुक्ला*
*बिलासपुर के 12 घंटे के ऐतिहासिक ‘योग महोत्सव’ में उमड़ा जनसैलाब*
*’जस्ट ए मिनट’ मेडिटेशन बना आकर्षण का केंद्र*
*बिलासपुर।* अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 एवं ब्रह्माकुमारीज़ के 90 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बिलासपुर के राजकिशोर नगर स्थित *शिव अनुराग भवन* में आयोजित 12 घंटे का अखंड *’योग महोत्सव’* शहर के आध्यात्मिक इतिहास का एक यादगार अध्याय बन गया। सुबह 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक निरंतर चले इस अनूठे आयोजन में हजारों लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से तथा देश-विदेश के हजारों दर्शकों ने यूट्यूब लाइव के माध्यम से सहभागिता कर राजयोग मेडिटेशन का अनुभव प्राप्त किया।
*”जीवन खुशियों से भरे… आओ बिलासपुर योग करें”* की प्रेरक थीम पर आधारित इस महोत्सव का उद्देश्य लोगों को ऐसी सरल ध्यान विधि से जोड़ना था जिसे वे कहीं भी, कभी भी, केवल एक मिनट में अपनाकर अपने जीवन को तनावमुक्त, शांत और आनंदमय बना सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि विधायक *सुशांत शुक्ला* सहित एडिशनल कलेक्टर मंत्रालय रायपुर **हर्ष पाठक**, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी **अरविंद मेश्राम एवं **ओम प्रकाश सिंह*, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ सदस्य *शरद बल्हाल*, व्यापार संघ अध्यक्ष **नानक खटूजा**, अग्रवाल सभा अध्यक्ष **शिव अग्रवाल**, **सुनील सोथलिया**, लायंस क्लब अध्यक्ष **डॉ लव कुमार श्रीवास्तव**, पतंजलि जिला प्रभारी **डॉ कुश श्रीवास्तव**, छत्तीसगढ़ योग आयोग के जिला प्रभारी **अविनाश दुबे, राजेश त्रिवेदी**, आध्यात्मिक व्यक्तित्व **मनोहर भंडारी गुरूजी**, **डॉ. सुनीता वर्मा**, अतिरिक्त मुख्य अभियंता **भूषण वर्मा**, हास्य क्लब प्रमुख **प्रकाश जोशी**, प्रतिष्ठित व्यवसायी **निर्मल गोविंदानी**, समाजसेवी **नटवर भाई** सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
माउंट आबू से विशेष रूप से पधारे सिक्योरिटी विंग के प्रेरक वक्ता **डॉ. पुरुषोत्तम** एवं **डॉ. प्रिया** ने भी अपने प्रेरणादायी विचारों से सभी को लाभान्वित किया। वरिष्ठ वक्ता **प्रशांत बुधिया* ने भी विभिन्न सत्रों में प्रेरक उद्बोधन देकर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
12 घंटे… 12 विशेष सत्र… 36 जीवन परिवर्तनकारी विषय
इस योग महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पूरे कार्यक्रम को 12 अलग-अलग सत्रों में विभाजित किया गया, जिनमें जीवन के 36 महत्वपूर्ण विषयों पर केवल एक मिनट के राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया।
प्रथम सत्र में *क्षमाशीलता*, *आई कैन डू इट* तथा आत्मबल का संदेश दिया गया। दूसरे सत्र में *स्थायी खुशी** और बीती बातों को छोड़कर वर्तमान में जीने की कला सिखाई गई। तीसरे सत्र में **आभार**, **शक्तिशाली आत्मस्वरूप** एवं सकारात्मक सोच का अभ्यास कराया गया।
चौथे सत्र में **डर नहीं, विश्वास मेरा साथी है** विषय पर सभी को आत्मविश्वास का अनुभव कराया गया। पाँचवें सत्र में **क्रोध से शांति की ओर**, **सच्ची स्वतंत्रता** तथा परमात्मा को अपना साथी और रक्षक बनाने की प्रेरणा दी गई।
छठे सत्र में दूसरों की विशेषताओं को देखने अर्थात **गुण ग्राहकता** तथा असफलताओं से ऊपर उठकर आत्मबल बढ़ाने का संदेश दिया गया। सातवें सत्र में घर को **शांति कुंड** बनाने, परमात्म स्मृति में भोजन तैयार करने तथा पारिवारिक वातावरण को सकारात्मक बनाने के सरल उपाय बताए गए।
आठवें सत्र में विद्यार्थियों और युवाओं के लिए **स्वमान**, **एकाग्रता**, परीक्षा के तनाव से मुक्ति तथा लक्ष्य प्राप्ति के आध्यात्मिक सूत्र बताए गए। नौवें सत्र में कार्यस्थल के तनाव, दबाव और चुनौतियों को सहजता से संभालने की विधि सिखाई गई।
दसवें सत्र में **हीलिंग मेडिटेशन**, सत्य वचन तथा परमात्मा को व्यापारिक साथी बनाने की प्रेरणा दी गई। ग्यारहवें सत्र में **छोड़ दो… जाने दो**, बुजुर्गों का सम्मान तथा पारिवारिक संबंधों को मधुर बनाने का अभ्यास कराया गया। अंतिम सत्र में **अष्ट शक्तियों का जागरण**, **आत्म-विकास**, प्रेम, स्वीकार भाव तथा श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में उतारने का संकल्प कराया गया।
मंजू दीदी का प्रेरक संदेश— “हर घंटे एक मिनट स्वयं से और परमात्मा से जुड़िए”
पूरे महोत्सव का संचालन एवं मार्गदर्शन कर रहीं ब्रह्माकुमारी *मंजू दीदी*, जो छत्तीसगढ़ योग आयोग की प्रथम महिला सदस्य भी रही हैं, ने अपने प्रेरक उद्बोधनों में कहा कि आज का मनुष्य शरीर की फिटनेस पर तो ध्यान देता है, लेकिन मन की शांति को भूल जाता है। जब तक मन शांत नहीं होगा, तब तक योग की पूर्ण अनुभूति संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति हर घंटे केवल *एक मिनट* के लिए स्वयं को आत्मा मानकर परमात्मा से जुड़ जाए तो जीवन के अधिकांश तनाव स्वतः समाप्त हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजयोग मेडिटेशन के लिए किसी विशेष स्थान या लंबे समय की आवश्यकता नहीं है। इसे कार्यालय, यात्रा, घर या कार्यस्थल— कहीं भी सहज रूप से किया जा सकता है।
“क्षमा आत्मा का सबसे सुंदर आभूषण है”
क्षमाशीलता विषय पर बोलते हुए मंजू दीदी ने कहा कि वर्षों तक किसी के प्रति शिकायत या नाराजगी रखना वास्तव में स्वयं को ही दुख देना है। दूसरों को माफ करना उनके लिए नहीं बल्कि अपनी आंतरिक शांति के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा, *”जिस दिन हम बिना किसी शर्त के क्षमा करना सीख लेते हैं, उसी दिन हमारी आत्मा हल्की हो जाती है।”*
*खुशी बाहर नहीं, हमारे भीतर है*
खुशी पर आधारित सत्र में मंजू दीदी ने कहा कि जीवन के पूर्ण होने की प्रतीक्षा मत कीजिए। खुशी किसी उपलब्धि का परिणाम नहीं बल्कि एक निर्णय है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति बिना कारण मुस्कुराना सीख लेता है, वही वास्तव में सबसे धनी और भाग्यशाली होता है। उन्होंने अपने पारिवारिक संस्कारों का उल्लेख करते हुए बताया कि बचपन से ही हर परिस्थिति में मुस्कुराना उन्हें सिखाया गया।
## बुजुर्गों का सम्मान ही परिवार की सबसे बड़ी पूंजी
एक अत्यंत भावुक सत्र में उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताइए। उनके सिर पर हाथ रखना, उनका हाथ थामना और उन्हें सम्मान देना ही उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की दुआएँ जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा कवच होती हैं।
प्रतियोगिता नहीं, आत्म-विकास का मार्ग अपनाइए
समापन सत्र में मंजू दीदी ने कहा कि दूसरों से तुलना करना व्यक्ति को अशांत बनाता है, जबकि स्वयं से प्रतिस्पर्धा करना उसे महान बनाता है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प दिलाया।
उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि जब “मैं” समाप्त होकर “हम” और “अर्पण” का भाव आता है, तभी ईश्वरीय कार्य सफल होते हैं। उन्होंने पूरी टीम को आधुनिक युग के **”पांडवों की टीम”** की संज्ञा देते हुए उनके समर्पण की प्रशंसा की।
## मुख्य अतिथि ने साझा किया अपना अनुभव
मुख्य अतिथि विधायक **सुशांत शुक्ला** ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ ही मिनटों के राजयोग मेडिटेशन ने उनकी संपूर्ण थकान समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही समाज और राष्ट्र के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम
पूरे महोत्सव के दौरान आध्यात्मिक गीत, संगीतमय मेडिटेशन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ तथा राजयोग कमेंट्री ने वातावरण को अत्यंत दिव्य बना दिया। बाल कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं प्रेरणादायक गीतों ने सभी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
# हजारों लोगों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्रतिदिन कम से कम एक मिनट राजयोग मेडिटेशन करने, क्षमाशील बनने, तनावमुक्त जीवन जीने, परिवार में प्रेम बढ़ाने तथा समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करने का संकल्प लिया।
आयोजकों ने सभी नागरिकों को ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा निःशुल्क संचालित सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन पाठ्यक्रम से जुड़ने का आमंत्रण भी दिया।
*12 घंटे तक चले इस अभूतपूर्व योग महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि मनुष्य प्रतिदिन केवल एक मिनट के लिए भी स्वयं को परमात्मा से जोड़ ले, तो उसका पूरा जीवन शांति, शक्ति, प्रेम, खुशी और सकारात्मकता से भर सकता है।*









