Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar
अतींद्रिय सुख की प्राप्ति के लिए ईश्वर से सच्चा संबंध जरूरी: ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
*अतींद्रिय सुख की प्राप्ति के लिए ईश्वर से सच्चा संबंध जरूरी: ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी*
*टिकरापारा, बिलासपुर :*
प्रभु दर्शन भवन में आयोजित गुरुवार विशेष सत्संग को संबोधित करते हुए *ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी* ने आध्यात्मिक साधना और जीवन में स्थायी खुशी प्राप्त करने के गूढ़ रहस्यों को साझा किया। उन्होंने ‘अतींद्रिय सुख और ईश्वरीय बचपन’ की स्मृतियों पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान मार्ग का जो बचपन हमारे जीवन में प्रारंभ हुआ, उसे कभी भी भूलना नहीं चाहिए।
*सच्ची खुशी का आधार केवल एक ‘बाबा’*
दीदी ने सभा को बताया कि अतींद्रिय सुख का अनुभव करने के लिए हमेशा यह स्मृति रहनी चाहिए कि हम किसके बच्चे हैं। उन्होंने परमात्मा की चेतावनी रूपी शिक्षा देते हुए कहा कि यदि कोई साधक किसी *देहधारी* को अपनी सेवा या साधना का आधार बनाता है, तो उसे भविष्य में कष्ट झेलना पड़ सकता है। स्थायी खुशी केवल उन्हीं बच्चों को प्राप्त होती है जिन्होंने एक ईश्वर परमपिता शिवबाबा से अपने सर्व संबंध जोड़े हैं।
*कर्म योगी बनने का आह्वान*
सत्संग के दौरान दीदी ने *’कर्म योगी’* की सुंदर व्याख्या करते हुए कहा कि हमें कर्म के कल्पवृक्ष की डाली पर बैठकर भी *उपराम (detached) स्थिति* में रहना चाहिए। उन्होंने पंछी का उदाहरण दिया कि जैसे पंछी पतली डाली पर बैठकर उसके झूलने का आनंद लेता है, वैसे ही हमें कर्म करते हुए भी विचलित नहीं होना चाहिए और अपनी आंतरिक शांति बनाए रखनी चाहिए।
*जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों में साधना*
मंजू दीदी ने अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे विपरीत समय में भी मुरली की शक्ति से स्वयं को स्थिर रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब जीवन में कोई बड़ी हानि या वियोग हो, तब भी ज्ञान का ‘हलवा’ (मुरली का ज्ञान) ग्रहण करना चाहिए क्योंकि वही आत्मा को सच्ची शक्ति प्रदान करता है।
**आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी**
दीदी ने आगामी **21 जून (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस)** के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। इस वर्ष आयुष मंत्रालय के सहयोग से **’स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’** की थीम पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।
दीदी ने सभी साधकों को 21 जून पर आयोजित विविध कार्यक्रमों की जानकारी दी और कहा इन सभी कार्यक्रमों में समाज को व्यसन मुक्त बनाने के लिए ‘नशा मुक्ति की प्रतिज्ञा’ भी दिलाई जाएगी। अंत में सभी को गुरुवार का भोग दिया गया।







