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विद्यालय भविष्य निर्माण का पावन केन्द्र – बीके गायत्री
*विद्यालय भविष्य निर्माण का पावन केन्द्र – बीके गायत्री*
*10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाभियान : डीएवी स्कूल में छात्रों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प*
*प्राचार्य के. पार्थिपन बोले- हीरो नहीं, रोल मॉडल बनें विद्यार्थी; आपकी सफलता से समाज प्रेरणा लेगा*
*बिलासपुर।* प्रधानमंत्री के ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से डीएवी पब्लिक स्कूल में बीके मंजू दीदी के मार्गदर्शन में ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा *’10 करोड़ नशामुक्ति संकल्प महाभियान’* के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 1500 विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ ने नशामुक्त जीवन का सामूहिक संकल्प लिया।
*बीके गायत्री बहन* ने विद्यार्थियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराते हुए कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ व्यक्तित्व और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का केंद्र है। उन्होंने विद्यार्थियों को मन को शांत, तन को स्थिर और विचारों को सकारात्मक रखने का अभ्यास कराया और नशामुक्ति की प्रतिज्ञा कराई। साथ ही प्रेरित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को परमात्मा की प्रिय संतान समझे तथा मिले हुए शिक्षा के अवसर को ईश्वरीय उपहार मानते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ संस्कारों से सजाए।
*’सिर्फ एक बार’ से शुरू होती है नशे की लत, आज मोबाइल भी सबसे बड़ा व्यसन*
ईश्वरी बहन ने कहा कि वर्तमान समय में नशे का स्वरूप बदल चुका है। केवल सिगरेट और शराब ही नहीं, बल्कि *मोबाइल फोन की लत भी युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।* उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह करते हुए कहा कि हर नशे की शुरुआत *”सिर्फ एक बार”* से होती है, लेकिन यही एक गलती जीवन, करियर और परिवार को प्रभावित कर सकती है।
विद्यालय के प्राचार्य *के. पार्थिपन* ने बीके बहनों की बातों का समर्थन करते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करें कि उनके जूनियर, पड़ोसी और समाज उन्हें अपना *रोल मॉडल* मानें। किसी भी प्रकार के नशे से बचने का सबसे प्रभावी माध्यम आत्मबल और सकारात्मक चिंतन है। जब विद्यार्थी प्रतिदिन कुछ समय राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करते हैं तो उनके भीतर निर्णय लेने की शक्ति, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन विकसित होता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने तथा स्वस्थ, सुरक्षित और संस्कारित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने ब्रह्माकुमारीज़ के इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।









