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Brahma Kumaris Raj Kishore Nagar

आत्मा का स्वधर्म है इसे बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं – ब्र. कु. गायत्री* 

आत्मा का स्वधर्म है इसे बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं – ब्र. कु. गायत्री*

 

ब्रह्माकुमारीज़ शिव अनुराग भवन में राजयोग अनुभूति शिविर: पहले दिन ‘मैं आत्मा हूँ’ पाठ पर गहन चिंतन

बिलासपुर, 05/10/2025:-

ब्रह्माकुमारीज़ शिव अनुराग भवन, बिलासपुर में निशुल्क राजयोग अनुभूति शिविर के पहले दिन ‘आत्मा का परिचय और आत्मिक शक्ति’ विषय पर गहन ज्ञान दिया गया।

 

ब्रह्माकुमारी गायत्री दीदी ने स्पष्ट किया कि राजयोग मेडिटेशन का पहला पाठ आत्मा का ज्ञान है, जिससे साधक को अपनी वास्तविक पहचान मिलती है कि वह शरीर नहीं, बल्कि एक आत्मा है। आत्मा को दो नैनों के बीच भृकुटी के मध्य चमकती दिव्य चैतन्य शक्ति के रूप में अनुभव किया जाता है। आत्मा का स्वरूप एक ज्योति बिंदु जैसा है।

 

आत्मा के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए गायत्री दीदी ने बताया कि आत्मा अजर, अमर, अविनाशी सत्ता है। इसे न शस्त्र काट सकता है, न पानी बहा सकती और न आग जला सकती। आत्मा को शरीर का सारथी (ड्राइवर) बताया गया है। जब आत्मा शरीर में होती है तभी उसे जीवात्मा कहा जाता है, क्योंकि आत्मा के बिना शरीर या शरीर के बिना आत्मा कोई कार्य नहीं कर सकती।

 

आत्मा के मूल सात गुण हैं: सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति। आत्मा का स्वधर्म ही शांति है। इन गुणों को आत्मा के भीतर ही महसूस किया जा सकता है, न कि बाहर।

 

राजयोग शिविर में मन, बुद्धि और संस्कार की शक्तियों को समझाते हुए गायत्री दीदी ने कहा कि मन सोचता है, जबकि बुद्धि निर्णय करती है। आत्मा का लक्ष्य मन और बुद्धि को एकाग्र करके परमपिता परमात्मा से जोड़ना है।